Sunday, 11 October 2026

हैपी नवरात्र

आज नवदुर्गा पधार रही है 
आज इंटरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे भी है 
अपने घर आई बेटी का स्वागत करें 
उसे सुरक्षा और सम्मान से जीने का हक दे 
उसको मजबूत बनाए ताकि वह हर परिस्थिति का मुकाबला कर सके 
हर लड़ाई लड़ सके 
हर बाधा को पार कर आगे बढ़े 
महिषासुर मर्दिनी बनने का माद्दा हो 
दुर्गा आपके घर में ही है 
आसपास ही है 
उसको जीने दीजिए 
माता जी खुश होकर आशीर्वाद देकर जाएंगी 
मां के नौ रुप है 
हर रूप अपने आप में  एक विशेष है 
हैपी नवरात्र 

Happy Beti Day

आज इन्टरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे
बेटियां हमारी सबसे प्यारी
सबसे उपेक्षित
आज भी भेदभाव
बेटा और बेटी में
समय बदल रहा है
सोच भी बदल रही है
पर वह कितनी ???
सरकार योजनाओं की घोषणा कर रही है
ताकि बेटी बोझ न लगे
उनको गर्भ में न मारा जाय
वहाँ से बची तो उपेक्षा न हो
वहाँ से बढी तो आगे दहेज की बलि वेदी पर न चढे
वहाँ से बची तो
सारी उम्र घुटते सहते न बीते
बेटी को आने दे
पढाई लिखाई करने दे
उसको बोझ न समझे
वह भी घर का चिराग है
बेटा और बेटी में भेदभाव न करै
वह तो घर की रौनक है
बेटी ,बहन ,पत्नी ,माँ ,बहू के रूप में
वह अहम हिस्सा है समाज का
उसको पंख फैलाने दे
उसकी योग्यता की कदर करें
आप उसे प्यार और सम्मान दे
वह आपकी जिंदगी को बदल देगी
उसके बिना तो समाज की कल्पना भी नहीं
वह बोझ नहीं अति महत्वपूर्ण है
जरा सोचिये
अगर बेटी ही न रही
तब तो कोई नहीं रहेगा
जननी है वह 
उसका सम्मान करेंगे
तभी समाज जिन्दा भी रहेगा
मजबूत और शक्तिशाली भी

Saturday, 10 October 2026

Evil dead

आज किसी महान अभिनेता की मृत्यु हुई 
सोशल मीडिया , टेलीविजन पर यह खबर दिन भर चलती रही 
और भी कुछ दिन चलेगी 
अखबार का पेज भरा रहा उनकी उपलब्धि पर 
प्रधानमंत्री से लेकर हर छोटे - बड़े नेताओं ने शोक संवेदना प्रकट की 
मुख्यमंत्री ने कांधा भी दिया 
ज्यादा संख्या में लोग उपस्थित रहें 
क्या नेता क्या अभिनेता क्या जनता सबने संवेदना दिखाई 
वे उम्दा कलाकार तो थे ही बहुत बेहतरीन इंसान भी थे 
समाज सेवा भी करते थे 
किसानों और गरीब के लिए बहुत कुछ किया 
उनकी आमदनी का बहुत सा हिस्सा चैरिटी में जाता था 
सादा जीवन जीते थे 
गांव से जुड़े थे 
घमंड और तामझाम से दूर 
अपनी मेहनत और संघर्ष से इस मुकाम पर पहुंचे थे 
स्पष्ट और निडर वक्ता थे 
यह सब गुण तो थे पर यह नहीं भूलना चाहिए 
वह एक व्यक्ति भी थे 
गुस्सैल थे 
पत्नी से निभी नहीं 
अलग रहते थे वर्षों से 
यह भी कोई अनोखी बात नहीं है 
पर विवाद के घेरे में रहें 
उन पर दोषारोपण हुआ था अपने ही साथ कई एक कलाकार से दुर्व्यवहार करने का 
उसने उस वक्त शुटिंग पर भी विरोध किया था यह सबको पता है 
कुछ समय बाद उसने केस भी किया हालांकि वह इल्जाम सिद्ध नहीं हुआ 
ME  TOO  का अभियान उसने छेड़ा था 
उस समय बहुत से उसके समर्थन में आए थे 
ऐसी महिलाएं जिनके साथ वर्षों पहले इससे गुजरना पड़ा था
और यह सही है 
समाज में यह घर से ही शुरुआत होती है 
परिवार में भी महिला सुरक्षित नहीं होती कभी-कभार 
सबके सामने घूंघट निकलवाने वाले बहू का ही उसके जेठ और ससुर द्वारा शारीरिक शोषण 
कार्य स्थल पर शोषण 
वह कमजोर पड़ जाती है आवाज नहीं उठाती 
उसको ही गलत मान लिया जाएगा इस भय से 
आज उसने कहा है 
Evil dead 
सबको बुरा लग रहा है 
मरे हुए के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए 
मृत्यु चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं है 
उसके ऊपर छींटाकसी की जा रही है 
कोई सच बात नहीं जानता 
जिसके साथ हुआ है वह ही जानता है 
यहाँ तो भगवान कहें जाने वाले महात्मा और संन्यासी का हाल लोगों ने देखा है 
अभी कुछ दिन पहले विश्व के बड़े - बड़े नेताओं का एक फाइल मे नाम आ चुका है 
तो निष्कर्ष निकालना बंद करें 
जो सबके लिए अच्छा हो वह
हर किसी के लिए अच्छा हो 
यह जरुरी नहीं है 
व्यक्तिगत कमजोरियां होती है 
धुआं भी वहीं उठता है जहाँ आग जली हो 

Friday, 9 October 2026

रोटी

मैं रोटी हूँ 
आप सब मुझसे अंजान नहीं 
हर जगह मेरी मांग है 
मुझे बनाना इतना आसान नहीं 
बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं 
पहले गूंथना 
फिर कटना लोई में 
फिर तवे पर चढ़ना 
दोनों तरफ सेंकना 
फिर फूलना 
तब जाकर थाली में आना 
उदर तृप्ति करना 
मेरा अलग अलग आकार 
कुछ भी मुझमें मिलाकर स्वादिष्ट बना लो 
ऐसा लगा रोटी 
मुझसे यह सब कह रही है 
जीवन भी तो ऐसा ही है 
खूब निचोड़ता है यह 
तब जाकर कहीं कुछ हासिल होता है 
सफलता केवल अपने लिए नहीं 
सबके लिए होती है 
परिवार खुशहाल हो जाता है 
हर किसी की आशा जुड़ी रहती है 
रोटी की तरह सींकना तो पड़ेगा 
तभी जीवन खुशियों से फूलेगा 

Thursday, 8 October 2026

अलविदा नाना

परिंदा उड़ गया 
काल के प्रहार से वे भी नहीं बच पाए
क्रांतिवीर अब तिरंगा में लिपट कर हमेशा के लिए बिदा हो जाएगे 
किसानों की समस्या 
सामान्य जन का दर्द समझने वाला वह  नट सम्राट    हमारे बीच नहीं रहें 
नाना आपके अभिनय का लोहा सबने माना 
दिल के दौरा पड़ने से 
इतना कोमल दिल था क्या??
ऊपर से कठोर , स्पष्ट बोलने वाला यह शख्स 
बेबाक आवाज  , बेमिसाल अभिनय 
अमर किरदार  , अभिनय के सम्राट 
अलविदा 
आपका योगदान 
फिल्मों में , समाज में 
जमीन और गांव से जुड़ा 
न कोई तामझाम न दिखावा 
हर किसी को याद रहेगा 

नट सम्राट  आपने तो सबको रूला दिया जाते - जाते 

अब नहीं चलेगा

पत्नी घर वापस लौटी 
तब वह चरित्र हीन 
पुरुष वापस लौटा 
भटक गया सही रास्ते पर आ गया 

बलात्कार हुआ 
दोषी सर उठाकर घुम रहे 
वीडियो शूटिंग कर दिखा रहें 
जिसका हुआ 
वह मुंह छिपा रहा 
उसके परिजन शर्मसार हो रहे 
उसमें ही दोष निकाला जा रहा 
छोटे कपड़े पहने होगी 
रात में देर तक बाहर क्यों रही 
अकेले नहीं जाना था 
दोस्त के साथ क्यों घूम रही थी 

लड़का है पुरुष है 
उसका सब कुछ माफ है 
यही सोच संस्कार में पड़े हैं 

माता जानकी पर भी लांछन लगा दिया गया था 
एक प्रजा के द्वारा 
उनको भी राजमहल से निष्कासित होना पड़ा 
कभी यह भी कहा गया 
उन्होंने लक्ष्मण रेखा क्यों पार की 
द्रोपदी को भरी सभा में चीरहरण की कोशिश 
यह भी दलील किसी - किसी की 
व्यंग्य क्यों किया 
अंधे का पुत्र अंधा 
गलत था
पर इतनी बड़ी सजा 

उन मां - बहनों की क्या गलती 
जो हर बात में हर जबान पर गाली सुनती है 
गलती पुरुष करता है 
गाली उसकी मां - बहन और बेटी पर
शहर में तो गनीमत है 
गांव में तो बिना गाली बात ही नहीं 

आज समय बदल रहा है 
अब औरतों का नजरिया और सोच बदल रही है 
अब पति वह परमेश्वर नहीं रहा 
जिसकी मार खाकर भी वह संबंध निभाती थी 
बच्चों का मुख देखती थी 
मां - बाप की इज्जत की परवाह करती थी 

अब वह सोच रही है 
जब मेरी ही इज्जत नहीं तो क्यों किसी की परवाह 
कोई भी कदम उठा रही है 
समाज लाचार बना देख रहा है 
कह रहा है 
जमाना बदल गया 

जमाना बदल गया 
तुम उसी सोच में अटके हो 
खुद को बदलो 
जितनी जिम्मेदारी उसकी उतनी तुम्हारी 
घर वह चलाए मालिक तुम 
अब नहीं ऐसा चलेगा 
परिवर्तन जारी है 

आप जन्मदाता

हम तुम्हें याद करते हैं 
यह कैसे जताए 
आप तो हैं नहीं इस लोक में 
परलोक वासी हो गए हैं 
श्रद्धापूर्वक,  श्राद्ध  करना 
यही पृथ्वी वासी कर  सकते हैं 
वे करते भी हैं 
अपनों को याद करना 
उनके लिए जल अर्पित करना 
भोजन बनाना 
दान करना 
गाय को चारा खिलाना 
वह सब शायद आप तक पहुंचे या न पहुंचे 
पर अगर देख रहे हो ऊपर से 
आशीर्वाद तो अवश्य दे रहे होंगे 
उनकी गलतियों को माफ कर रहे होंगे 
आप जन्मदाता है 
आपसे यही उम्मीद रहती है 
संतान का क्या 
वह गलती करती रहती है 
कहा गया है ना 

क्षमा बड़न को चाहिए 
        छोटन को उत्पात 

Wednesday, 7 October 2026

मर्द जात का क्या भरोसा ???

मर्द जात का क्या भरोसा ??
यह आज का नारा नव युवतियों का 
गूंज रहा है सड़क - मोहल्लों पर
अब हर मर्द शक की नजर से देखा जा रहा है 
देखने का नजरिया भी बदला है 
उसमें आपके घर के पुरुष भी हैं 
आपका पति , आपका पिता , आपका पुत्र  , आपका ब्रदर 
सबको एक ही कैटिगरी में लाकर खड़ा कर देना 
हर युग में राम और रावण दोनो हुए हैं 
जटायु भी हुए हैं 
दुर्योधन और कृष्ण भी हुए हैं 
इस युग में भी हैं 
हर नारी सही है 
हर पुरुष गलत है 
यह सोच हावी होना सही नहीं है 
वह पिता जिसके घर में आप सुरक्षित हैं 
आपकी हर जिम्मेदारी वह उठाता है 
वह पति जो आपको बराबर का दर्जा देता है 
आपके हर नाज - नखरे को उठाता है 
आपके लिए सब कुछ करने को तैयार रहता है 
वह भाई जो सुख - दुख में आपके साथ खड़े रहते हैं 
आपके एक आवाज पर हाजिर 
वह आपका पुत्र 
जो आपका गुरुर है 
आपको उस पर सबसे ज्यादा भरोसा 
वह आपका दोस्त  , सहकर्मीं,  पड़ोसी 
वक्त- बेवक्त तैयार 
हां मानसिक रूप से कुछ बीमार भी हैं संसार में 
आसपास  - पहचान में 
तब क्या करें 
विश्वास किसी का न करें 
प्रेम और सम्मान के भागीदार सब नहीं हो सकते 
आखिर में 
रहना तो इसी दुनिया में हैं 
सजग रहें 
सर्तक रहें 
धोखा देने वाला ही नहीं धोखा खाने वाला भी जिम्मेदार हैं 
पुरुष प्रधान समाज है हमारा 
हैं कुछ ऐसे नराधम 
जो औरत को केवल भोग्या समझते हैं 
पर पूरी पुरुष जाति नहीं 
यह संस्कार पर निर्भर है 
दोनों ही इस दुनिया के अंग है 
एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं 

हमें , तुमसे प्यार

सुख मिला 
जब तक हम अनुभव करते 
जब तक किसी से कहते 
वह खिसकता गया 
दुख मिला 
हम सहते रहे 
किसी से कहने की हिम्मत न जुटा पाए 
किसी से कहा 
वह दूर तक फैला 
मन मसोस कर रह गए 
मलाल रह गया 
इस सुख - दुख के चक्कर में उलझे रह गए 
कब पता नहीं क्या हाथ से फिसल जाए 
यही सोच डरते रहे 
डर ऐसा बैठा 
अब तो हर बात से डर
हर शख्स पर शंका 
किसी पर विश्वास नहीं 
जिंदगी की असलियत जान गए हैं 
कब किस मोड़ पर ला खड़ा करें 
कह नहीं सकते 
कब आकाश की ऊंचाई तक पहुंचा दें 
कब जमीन पर लाकर पटक दें 
आज सब कुछ अच्छा दिखता है 
कब उसमें भूचाल आ जाए 
बड़ी कठिन है यह जिंदगी 
यह हमारे हिसाब से नहीं चलती 
हमें इसके हिसाब से चलना पड़ता है 

ना जाने फिर भी कुछ बात है तुममें ये जिंदगी 
तुमसे बहुत प्यार है 
तुम अपना खेल खेलती रहो 
हम भी पीछे नहीं हटने वाले 

Tuesday, 6 October 2026

यह गर्व है

मैंने तुम पर कोई एहसान नहीं किया 
तुम्हारा उपकार है हम पर 
तुमने मुझे मां बनाया 
संसार का सबसे ऊंचा स्थान दिया 
मुझे उस बुलंदी पर ला खड़ा कर दिया 
जहाँ से दूसरा सब बेमानी है 
जीना क्या होता है 
वह तुमने सिखाया 
ईश्वर की यह अभूतपूर्व संपत्ति बस मेरी है 
मेरा अधिकार है 
यह गर्व है 

Sunday, 4 October 2026

बेटी , बेटी ही होती है

बेटी , बेटी होती है
वह दलित या उच्च जाति की हो
क्या फर्क पडता है
फर्क पडता है
सोच से
संस्कार से
नजरिया से
बेटी किसी की भी हो
उसके मान और सम्मान की जिम्मेदारी सबकी बनती है
हमारी बेटी हो
तुम्हारी बेटी हो
पडोसी की बेटी हो
अपनी सोच का दायरा बढाया जाय
उसे इंसान समझा जाए
बराबरी का दर्जा दिया जाए
अपराधी कोई भी हो
हेय नजर से नारी ही देखी जाती है
वह किसी की माँ
किसी की बहन 
किसी की पत्नी तो है ही
एक नागरिक भी है
सभ्य सोसायटी में अपनी तरह रह सकें
जी सकें
उन्नति कर सकें
अपनों के और अपने सपने साकार कर सकें
वह तब होगा
जब बेटी सुरक्षित रहेंगी
उसे खिलौना न समझा जाए
उस पर राजनीति न की जाए
न्याय मिलें
सब प्रयत्नशील होंगे तभी यह संभव है
नारी पर अत्याचार
उसका परिणाम रामायण और महाभारत
राजघरानों की जब यह हालत
तब सामान्य नारी की क्या बिसात
यह परंपरा चली आ रही है
उसे ध्वस्त करना होगा
बेटी , बेटी होती है
वह दलित हो
वह ब्राह्मण हो
वह हिन्दू हो 
वह मुस्लिम हो
वह गरीब हो
वह अमीर हो
है तो वह व्यक्ति ही
सम्मान से जीने का हक उसको भी है

Friday, 2 October 2026

हम

हम ठहरने वालों में से नहीं 
जरा किनारे कुछ पल सुस्ता लें 
उसके बाद फिर जोश से खड़े होंगे 
दरिया का सीना चीर किनारे तक पहुंच ही जाएंगे
तूफानों से घबराना हमने सीखा नहीं 
भंवर में से भी बाहर निकलना आता है 
मंजिल कितनी भी दूर हो 
पाकर ही दम लेंगे

गांधी बनना आसान नहीं

गांधी को दोष देना आसान है 
गांधी होना मुश्किल 
मोहनदास करमचंद  से महात्मा बनना इतना सरल नहीं 
कोट - सूट - पैंट को छोड़कर धोती आधे टांग की धारण करना 
कोठी छोड़कर झोपड़ी में वास करना 
विदेश छोड़कर स्वदेश में वास करना 
अपनी गलतिया पर   पर्दा नहीं उसे स्वीकार करना 
अपने परिवार को तवज्जों न देकर देश के लिए जीवन समर्पित 
विरोध का एक अलग ही हथियार 
सत्य और अहिंसा 
नमक और कपड़ा 
सामान्य से महान की दूरी ऐसे ही नहीं तय की थी 
विरोध का वह स्वर उसी दिन चिंगारी का रूप धारण कर चुका था 
जब उनको रेल के डिब्बे से उतारा गया था या कह लीजिए फेंका गया था 
कर्म का सिद्धांत गांधी से 
यह वही कर्म है 
जो एक  ग्वाले को गोकुल छोड़ मथुरा प्रस्थान कराता है 
यह वही कर्म है 
जो एक राजकुमार को राजमहल छोड़ वनवासी बनाता है 
यह वही कर्म है 
जो एक बैरिस्टर मोहनदास करमचंद को महात्मा बनाता है 
छोड़ना पड़ता है सब कुछ 
गांधी ने बहुत कुछ छोड़ा 
अपने लिए नहीं देश के लिए 
करो या मरो , अंग्रेज भारत छोड़ो 
यह मूलमंत्र एक दुबला - पतला सा व्यक्ति देने वाला 
जिसने हर भारतीय को फांसी पर चढ़ने और जान देने को प्रेरित कर दिया 
हर घर में आजादी का संदेश नमक के माध्यम से 
अफ्रीका से शुरुआत की 
हर गुलामी से जकड़े देश को संदेश दिया 
भेद-भाव से परे 
हर जन को स्वीकार किया 

वैष्णव जन तो तेने कहिए 
पीर पराई जाने रे 

रघुपति राघव राजा राम 
पतित पावन सीता राम 

मृत्यु के समय पर भी मुख से 
राम - राम - राम 

तभी तो किसी एक राष्ट्राध्यक्ष ने उनकी मृत्यु पर कहा था 
आज एक अच्छा हिन्दू इस दुनिया से रुखसत कर गया 


भारत माता के दो लाल

भारत माता के दो लाल
एक मोहनदास तो दूसरा लालबहादुर
नाज हुआ माता को
जब ये सपूत जन्म लिए उसकी कोख में
उस दिन माँ भी इतराई होगी
उसकी मिट्टी धन्य हो गई होगी
एक अहिंसा का पुजारी
दूसरा ईमानदारी की मिसाल
एक राष्ट्रपिता दूसरा प्रधानमंत्री
दोनों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई
एक की आधी धोती ने बांध लिया जग को
एक के छोटे कद ने सबको बौना कर दिया
अहिंसा ने हिंसा को चित्त किया
अंग्रेजों को भागने पर मजबूर किया
रगो में जोश है 
रंग लाल है लाल बहादुर से
दो अक्टूबर को जन्मे थे ये
यह कभी न भूलें हम 
इनके योगदान को याद करें
आज के दिन को तो यादगार बनाए
मन से श्रंद्धांजलि अर्पित करें माता के इन सपूतो को

Thursday, 1 October 2026

ऐसी है हमारी प्रकृति

आज तो प्रकृति भी झूम रही है
नाच रही है
गा रही है
झूला झूल रही है
मदमस्त हो रही है
इधर-उधर डोल रही है
सूरज की खिली खिली धूप में मुस्करा रही है
प्रकाश के साथ सबको जगा रही है
सबमें चैतन्य और उर्जा भर रही है
फूलों में खुशबू बन महक रही है
रून झून रून झून गा रही है
कोयल की कूक में बोल रही है
मोर के पंख में समा नाच रही है
हवा के साथ झकझोरे ले रही है
ओस की बूंदों को मोती बन पी रही है
पक्षी के घोसलो से ची ची कर रही है
मौसम को सुहावना बना रही है
सबको प्रसन्न कर रही है
दिल खोलकर दे रही है
जिसको लेना हो ले
जिसको खुशी समेटना हो समेटे
जिसको आनंदित होना है वह हो ले
सब उसके लिए समान
कोई भेदभाव नहीं
हर जीव में वह
यह कोई एक दिन का कार्य नहीं
सदियों से कार्यरत है
नियमित रूप से
बिना किसी स्वार्थ के
सबको करती दिल से दान
ऐसी है हमारी प्रकृति जान

Wednesday, 30 September 2026

समझना इतना मुश्किल नहीं

किसी ने मुझसे कहा 
तुम्हें समझना बहुत मुश्किल है 
आज तक समझ न पाया 
मैं मुस्करा दी 
ऐसा क्या है मुझमें ??
बहुत सरल व्यक्ति हूँ मैं 
प्रपंच करना मुझे भाता नहीं 
जो बाहर वह अंदर 
डरपोक भी हूँ कहीं न कहीं 
किसी को खुलकर जवाब नहीं दे सकती 
गलत पता है तब भी गलत नहीं कह सकती 
हाॅ यह अवश्य है कि कभी उसको सही भी नहीं मानती 
चापलूसी करनी मुझे आती नहीं 
जो भी रिश्ता हो दिल से निभाती हूँ 
छोड़ती हूँ तो दिल से 
उसको फिर से दिल से नहीं अपना नहीं सकती 
तामझाम और आडंबर से कोसो दूर 
किसी का रूतबा , संपत्ति मुझे आकर्षित करती नहीं 
संतुष्टि का जीवन 
उस पर भी ऐसा लगता है कुछ को 
मैं बहुत जटिल हूँ 
समझने के लिए मुझे पढ़ना पड़ेगा 
मैं आसानी से सबको समझ नहीं आने वाली 

Sunday, 27 September 2026

तुम्हारा - हमारा रिश्ता

आज तुम उम्र के जिस पड़ाव पर हो 
एक समय हम भी थे 
फर्क यह था कि तुम बच्चे थे हम तुम्हारी  आज की उम्र के थे 
25 वर्ष पहले जो बच्चें 15 के थे वे आज 40 के हैं 
समय गुजर गया 
तुम बड़े हो गये हम बूढ़े  हो गये 
एक चीज जो नहीं बदली वह हमारा - तुम्हारा रिश्ता
 तुम बहुत उन्नति कर लिए होगे 
बड़े - बड़े पदों पर कार्यरत होंगे 
मां बन गए होगे अपने बच्चों की 
सच में बड़े हो गए हो पर
हमारे सामने तो अभी भी वही छोटी सी बच्ची हो 
जो शरारत करती थी 
गृहकार्य नहीं करती थी
पानी और सु सु के बहाने इधर-उधर चक्कर लगा आती थी
थोड़ा झूठ थोड़ा परीक्षा में नजर फेरते ही हेर - फेर
कोई बहाना कोई फंसाना कोई मजाक 
क्या हम नहीं जानते थे 
हम अंजान बिल्कुल नहीं क्योंकि हम भी तो उन राहों से होकर गुजरे थे 
तुमको ऐसा लगता था कि हम परेशान कर रहे हैं मिस को
ऐसी बात नहीं थी 
हमारे पास शिवजी की तरह तीसरा नेत्र भी है
यह अलग बात हम उसे इस्तेमाल नहीं करते 
तुम्हारा और हमारा नाता ही ऐसा है 
अगर तुम न होते तो हम पढ़ाते किसको 
हम न होते तो पढ़ते किससे 
हम एक - दूसरे के पूरक है प्रतिद्वंदी नहीं 
संसार मे माता - पिता के बाद एक गुरु ही होता है जो उसकी सफलता पर जलन नहीं खुश होता है 
सब कक्षा में पास हो गए मतलब वह असल में पास हो गया 
गुरु का गुरुर होते हैं छात्र 
तुम हमको एहसास दिलाते हो कि हम क्या है 
यह एहसान तुम्हारा कि तुमने हमें सबसे ऊंचा बनाया 
तुममें से जब कभी किसी को किसी भी माध्यम से देखती हूं 
मन में अभिमान होता है 
कहती हूँ  यह मेरी स्टुडेंट है
आज मिलने का तुम लोगों से मन तो था न हो पाया 
खैर कोई बात नहीं 
बस इतनी अपेक्षा है 
कभी भी किसी भी मोड़ पर मिलना पहचान लेना
बस थोड़ा सा सम्मान दे देना क्योंकि आज जिस मुकाम पर तुम हो उसमें हमारी भी कुछ भागीदारी है 

न तुम भूलो न हम भूले 
कभी-कभार बीते दिनों को याद कर लेना 
अपने बचपन को याद कर लेना हम मिल जाएगे 
Good morning misssss........... इस गूंज के साथ 
जीवन मे सफल बनो 
यही आशीर्वाद हमारा 


बेटी

मेरी बेटी मेरी शक्ति
मेरा मान मेरा अभिमान
मेरी छाया मेरा प्रतिरूप
मेरा सहारा मेरा आधार
वह है बेमिसाल
नाज है उस पर
इससे नहीं कि वह मेरी बेटी है
बल्कि इससे कि मैं उसकी माँ हूँ
मेरी उससे पहचान है

माँ - बेटी का रिश्ता
सबसे है अनोखा
सबसे है अनमोल
सबसे समझदार
माँ की ममता
बेटी का प्यार
इसमें नहीं किसी और का काम
नहीं किसी का मोहताज
यह संग है बेमिसाल

बिन कहे बिन सुने
मन की भाषा पढ ले
एक दूसरे को जान समझ ले
कितना भी हो गिला शिकवा
एक पल में हो जाय काफूर
माँ बेटी पर जान छिड़कती
उसको पाकर धन्य समझती
वह सपने जो उसने देखें
बेटी के माध्यम से पूरा करती
दोनों एक-दूसरे की बात दिल पर नहीं लेती
मन मिलता है
दिल खुलता है
वह तो बस उसके समक्ष
उसका भरोसा उस पर
जितना नहीं और किस पर
माॅ को तो जितना समझती है बेटी
उतना दूसरा कोई नहीं

बेटा अपना होकर भी पराया
बेटी पराया होकर भी अपनी
यही सच है जीवन का
संबंधों को जोड़ने वाली बेटी ही होती है
वह कैसी भी हो 
पर अपनी ही होती है
माता-पिता के जिगर का टुकड़ा होती है
वह पराई नहीं ताउम्र हमारी होती है
बेटी तो बेटी ही होती है
हमेशा दिल के करीब होती है
हर रिश्ते की जान होती है
सही है 
बेटी तो बहुत प्यारी होती है

Saturday, 26 September 2026

फेसबुक

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अपना फेसबुक बहुत बढिया है
अजनबियों का घेरा है
तब भी फेसबुक लगता प्यारा है
अंजाने लोग जब दाद देते हैं 
किसी पंक्ति पर लाइक और कंमेट करते हैं 
दुख में सहानुभूति और सुख में खुशी जताते हैं 
पास - पास नहीं हैं 
फिर भी सबको पास ले आते हैं 
मन की भावनाओं को व्यक्त करते हैं 
कुछ कविता - कहानियां गढते हैं 
कुछ तो लोग देखेंगे 
कुछ तो पढेंगे 
यह जान मन को सुकून मिलता है
अपने जो छूट गए
अपने जो भूल गए 
फिर उनकी याद दिलाता है
कही - अनकही न जाने कितनी बातें कह जाता है
सबको एक मंच पर ला खड़ा कर देता है
सुबह-सुबह गुलाब के फूलों और भगवान की फोटों के साथ
रात को चंद्रमा की चांदनी के साथ
गुड मार्निग और गुड नाइट बहुत भाता है
किसी अपने की उपलब्धि का बयान करता है
किसी का जन्मदिन तो किसी की मैरिज एनवर्सरी मनाता है
पहाड़ की वादियों के दर्शन के साथ-साथ सारी दुनिया की सैर कराता है
सुस्वादु व्यंजन और नए-नए फैशन - कपडे की झांकी दिखाता है
यह अमीर - गरीब का अंतर मिटाता है
सबको मौका देता है 
जो चाहे प्रस्तुत करों 
जैसा करों 
कोई प्रतिबंध नहीं 
ज्ञान की बातें बताता है
समाचार भी सुनाता है
क्या  - क्या गिनाए 
न जाने कितनी खुबिया है इसमें 
बस बटोरना है
फेसबुक से जुड़े रहना है
कह सकते हैं 
अरे फेसबुक अपना है तभी तो बहुत बढिया है ।

Asha Singh at 08:48
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Wednesday, 23 September 2026

बांट न लैहें कोय

कहना तो बहुत कुछ था
मन की बाते थी
मन में ही मुसमुसाकर रह गई
हमेशा फुसफुसाती रहती थी
बाहर आने को बेताब
पर कोई मिल न सका
इन्हें कोई सुन न सका
समय की कमी थी कुछ के पास
कुछ पर विश्वास न था
भय था अंदर
अगर बाहर आई
तो सार्वजनिक न बन जाए
गुप्त रहना चाहती थी
वह कहाँ संभव था
बहुत लोग बेताब थे
सुनने को उत्सुक थे
एक टाॅपिक मिल जाता गाॅसिप का
जो उनके लिए सबसे बडा टॉनिक
उसके बिना भोजन पचता नहीं इनका
इनकी मानसिक खुराक है यह
कुरेदते रहते हैं
कुछ तो मिले जो मन को भाए
ऐसे में कहना सुनना सब बेमानी
मन की बात मन में रखना ही सबसे बडी समझदारी
सुन इठलैहे बाँट न लैहे कोय
मन की मन में रखे
सावधान रहें
यहाँ शिकारी ताक में है
खुराक की फिराक में है
मनोरंजन का जरिया ढूंढने में लगे
तब सतर्कता भी जरूरी