Monday, 12 January 2026

जड़ों से जुड़े

फूल कोमल है
पानी कोमल है
पानी में ही फूल का जन्म
जब तक पानी में है
खिला है
जब तक जडो से जुड़ा है
मजबूत है
जिस दिन पानी से अलग 
वह मुरझा जाएगा
जिंदा भी रहा
ज्यादा दिन नहीं
पानी भले कीचड़ भरा हो
वह पोषण तो करता है
तब जन्मदाता है
वह कैसा भी हो
आपके लिए तो वरदान है
उसकी वजह से आप खडे हैं
भले ही लहलहाए
पर उसे मत भूलिए
कीचड़ में भी इतना सुन्दर रूप
इतना मौल्यवान
इतना आकर्षक
उस दाता की वजह से
कीचड़ का दाग लगने नहीं देता
अपने में डुबोता नहीं
मारता नहीं जिलाता है
ऊपर उठा कर रखता है
खिलने का मौका देता है
स्वयं बदबू करता है
आपको सुगंधित करता है
तब उस कीच भरे पानी की महत्ता है
तभी तो आपकी है 
इतनी सुन्दर उपमा है

Saturday, 10 January 2026

यह है मानव

अपना रास्ता स्वयं बनाना पडता है
यहाँ भटकाने और धक्का देने को लोग तैयार हैं
न रास्ता बनाओगे तो बाहर का रास्ता दिखा देंगे
हर जगह ऐसे शख्स विद्यमानहैं
उनसे रहना है सावधान
मुख पर चिकनी चुपड़ी
पीठ पीछे निंदा
चुगली करने में ये माहिर
इनका काम ही यही होता है
स्वयं के गिरेबान में झांक कर देखें
हजार बुराइयाँ
आपके सामने टिक नहीं सकते
इसलिए नीचा दिखाने की कोशिश
पता नहीं क्या मजा आता है
ईश्वर से भी डर नहीं
ये स्वयं को भली-भांति जानते हैं
पर फिर भी बाज नहीं आते
चटखारे लेकर  हमेशा दूसरों की चर्चा
अगर ऐसा शख्स है आपके आसपास
तब उससे सावधान
उसकी किसी भी बात पर विश्वास नहीं
यह तो आपकी नजर में अच्छा बने रहेंगे
पीठ पीछे आपके बारे मे अफवाह फैलाएगे
और आप भांप भी नहीं पाएंगे
सांप और बिच्छू से भी खतरनाक
इनका डंक सालोसाल चलता है
ऐसे आते तो है 
मानव की श्रेणी में
पर है नहीं
जो दूसरों के दुख का मखौल उडाए
किसी की व्यर्थ में प्रतिष्ठा खराब करें
वह तो नराधम है

Friday, 9 January 2026

बर्तन से भी होता रिश्ता

घर के पुराने बर्तनों से
कुछ खास रिश्ता है
यह टेढे मेढे सही
है दिल के करीब
इसमें हमारा बचपन समाया है
दीपावली के समय घिस घिस कर चमकाए जाते थे
हम वही खडे रहते थे
एक-एक बरतन को करीने से सूखने के लिए
बाद में उसको रेक पर सजा दिया जाता था
धनतेरस को एक और उसमें जुड़ जाता था
हम माॅ के साथ खरीदारी करने जाते थे
नए बरतन पर इस बार किसका नाम
उत्सुकता रहती थी
कभी-कभी ये बडे बक्से में बंद कर दिए जाते थे
घर की बिटिया को ब्याह में देने के लिए
आज नए-नए चमकीले बरतन आ गए हैं
झटपट वाले भी है
पर उनकी बात ही निराली थी
वे केवल बरतन ही नहीं होते थे
संपत्ति भी होते थे
वह पुराने होने पर बेकार नहीं
कीमती होते थे
कुछ देकर ही जाते थे
न तब कबाड़ थे न आज
सोने के बाद दूसरा स्थान 
इन्हीं का होता था
ये तांबा ,पीतल और कांस्य के बरतनों का भंडार
बहुत महत्वपूर्ण थे 
भोजन के अनिवार्य अंग थे
आज जमाना बदल गया है
अब यह कभी कभार दिखते हैं
इन्हें निकाल दिया गया है
या फिर कहीं अंदर रख दिया गया है
एकाध ड्राइंग रूम की शोभा
शायद भविष्य में ये शोभा ही बन कर रह जाएं
जमाने का प्रभाव तो इन पर भी पडा है

Wednesday, 7 January 2026

मेरी मुंबई

मुंबई अमीर है
मुंबई गरीब है
मुंबई तेज है
मुंबई धीमी है

थोड़ा मीठा
तनिक कडवा

कभी-कभी बहुत गर्म
बस थोड़ी सी ठंड

सुबह-सुबह ताजगी- स्फूर्ति से लबालब
संझा बिजली की तरह संचालित

नहीं कोई आलसी
रात है फिर भी उत्साही

जब भी कोई पूछे किसी से कुछ
उत्तर है व्यस्त 
सही भी है जनाब
मुंबई का जीवन 
नहीं है आसान
यहाँ भरपूर मस्ती
साथ में है थोड़ा सा मस्का
स्वागत है यहाँ सबका
यहाँ है बॉलीवुड का चस्का

सेव पुरी ,बडा पाव ,भेल पुरी
सब है मुंबई की चाट
ऊपर से तीखी ,चटकदार चटनी
घुल जाय मुख में
घंटों रहे स्वाद
पापकार्न से लेकर आइस्क्रीम
सब बिकते हैं ठेले पर
तभी तो काबिज है मुंबई
दिल के मेले पर

यहाँ रेल भी दौड़ लगाती
समय पर
कूद कर और धक्का दे चढना
जबरन सीट पर काबिज
नहीं है कोई क्राइम

तीन बजे दोपहर का खाना
बारह बजे रात 
यहाँ है सामान्य सी बात
कठिन है जिंदगी
तब भी नहीं है नाराजगी

दादर में सिद्धि विनायक से कैथेड्रल 
जुहू में इस्कान से हाजीअली
यह सब है मुंबई के ताज
इनको देख चेहरे पर आती मुस्कान

मराठी ,मलयाली,बिहारी ,गुजराती
से क्रिश्चियन तक
सब मनाते हैं
क्रिसमस और दीवाली
रंग भरी होली और दमकती दीपावली
गरबा की थाप
रमजान की अजान
इनसे नहीं कोई अंजान

गरीब को करोड़पति 
सपनों को साकार करें
फर्श से उठाकर अर्श तक
न जाने कितनों को पहुंचाया
पहचान दिलाई
तभी तो इस शहर में आया
यही का होकर रह गया

माँ के ऑचल जैसा विशाल
जिसने सबको समाया
आखिर सबकी माँ
तभी तो 
MUM in English 
BA in Gujarati 
Ai in Mrathi
हिंदी वालों की माई
यह है बेमिसाल ,लाजवाब
नहीं इसका दुनिया में किसी के पास जवाब
यह है मुंबई मेरी जान

Saturday, 3 January 2026

नारी तू

नारी तू अबला नहीं सबला है
सबको संभालने वाली है
घर - परिवार की धुरी है
तुझे तो मजबूत बनना है
शिक्षा से नाता जोड़ना है
अपने लिए भी और सबके लिए भी 
संसार की भलाई इसी में है
तुझे अपनी सामर्थ्य पहचाननी है 
मैं कुछ नहीं कर सकती यह धारणा बदलनी है 
मातृ शक्ति है इससे तो तू अनभिज्ञ नहीं 
संसार को गढने वाली 
स्वयं को भी गढ 
कदम से कदम मिलाकर चल 
रोना - धोना और ऑखों में ऑसू लाना छोड़ 
कलम पकड़ 
कम्पयूटर और लैपटॉप पकड़ 
उंगलियां अब सुई धागों पर नहीं इन पर भी चला
हाथ में अब बर्तन ही नहीं स्टीयरिंग भी पकड़ 
अब धीमी और शर्मीली आवाज में नहीं बुलंद आवाज में बोलना सीख
तू सबको सिखाती है तू स्वयं भी तो सीख
स्वयं आत्मनिर्भर बन
आत्मविश्वास से डोल 
नारी तू देवी नहीं मानवी बन 
पूजा स्थान नहीं कर्म स्थल को चुन
अपना परचम फहरा 
दिखला दे स्वयं को साबित कर 
हमसे जमाना है हम जमाने से नहीं  ।

Friday, 2 January 2026

हर साल नया

नया साल का जश्न
जोरदार स्वागत
ऐसे ही हर साल आता है
कुछ नई उम्मीद और आशा के साथ
पुराना बिदा होता है
कुछ लेते और कुछ देते जाता है
क्या पाया क्या खोया
इसका लेखा जोखा करता जाता है
यह हर साल होता है
कुछ यादें छोड़ जाता है
कुछ भूल जाती है
कुछ याद रह जाती है
उम्र गुजरती जाती है
साल दर साल गुजरते जाते हैं
हर साल हम भविष्य देखते हैं
इस साल क्या हासिल होगा
कैसा गुजरेंगा
इस आशा में कि जो गया सो गया
बीती ताहि बिसार दें
    आगे की सुधि लें
फिर खडे हो जाते हैं
सब झटक कर झटके से
एक ही रात में 
नया चमत्कार
कुछ कर गुजरना
जबकि हम भी वहीं है
सूरज भी वहीं है
जैसे तब वैसे अब
सारा क्रियान्वयन वैसे ही
तब नया क्या ??
नई आशा
नई उम्मीद
नए सपने
जो जीवन जीने का सहारा है
प्रेरणा है
तभी तो हर साल नया है