Thursday, 22 January 2026

बेटी

दो अक्षर से बना है शब्द 
मात्र यह शब्द नहीं पढ़ने वाला 
यह तो है दिल में बसने वाला
जिस कोख से जाई 
उसी की बन जाती एक दिन माई 
मन से रिश्ता निभाती 
जी - जान छिड़कती 
कभी डांटती कभी समझाती 
कभी हंसती कभी गले लगाती 
मुख पर उदासी को तुरंत भाप लेती 
क्या न करें वह कम 
हर बात का ध्यान रखती 
एक संरक्षिका जैसी 
वह ईश्वर की नियामत होती है 
लक्ष्मी, दुर्गा , सरस्वती का रुप होती है 
घर की रौनक होती है 
रोशन होता है उनसे घर - परिवार 
बड़ी अनमोल हौती है 
बेटियाँ सिर्फ बेटियां नहीं होती 
दो अक्षर में सिमटी सारा जहां होती है 

Monday, 12 January 2026

जड़ों से जुड़े

फूल कोमल है
पानी कोमल है
पानी में ही फूल का जन्म
जब तक पानी में है
खिला है
जब तक जडो से जुड़ा है
मजबूत है
जिस दिन पानी से अलग 
वह मुरझा जाएगा
जिंदा भी रहा
ज्यादा दिन नहीं
पानी भले कीचड़ भरा हो
वह पोषण तो करता है
तब जन्मदाता है
वह कैसा भी हो
आपके लिए तो वरदान है
उसकी वजह से आप खडे हैं
भले ही लहलहाए
पर उसे मत भूलिए
कीचड़ में भी इतना सुन्दर रूप
इतना मौल्यवान
इतना आकर्षक
उस दाता की वजह से
कीचड़ का दाग लगने नहीं देता
अपने में डुबोता नहीं
मारता नहीं जिलाता है
ऊपर उठा कर रखता है
खिलने का मौका देता है
स्वयं बदबू करता है
आपको सुगंधित करता है
तब उस कीच भरे पानी की महत्ता है
तभी तो आपकी है 
इतनी सुन्दर उपमा है

Saturday, 10 January 2026

यह है मानव

अपना रास्ता स्वयं बनाना पडता है
यहाँ भटकाने और धक्का देने को लोग तैयार हैं
न रास्ता बनाओगे तो बाहर का रास्ता दिखा देंगे
हर जगह ऐसे शख्स विद्यमानहैं
उनसे रहना है सावधान
मुख पर चिकनी चुपड़ी
पीठ पीछे निंदा
चुगली करने में ये माहिर
इनका काम ही यही होता है
स्वयं के गिरेबान में झांक कर देखें
हजार बुराइयाँ
आपके सामने टिक नहीं सकते
इसलिए नीचा दिखाने की कोशिश
पता नहीं क्या मजा आता है
ईश्वर से भी डर नहीं
ये स्वयं को भली-भांति जानते हैं
पर फिर भी बाज नहीं आते
चटखारे लेकर  हमेशा दूसरों की चर्चा
अगर ऐसा शख्स है आपके आसपास
तब उससे सावधान
उसकी किसी भी बात पर विश्वास नहीं
यह तो आपकी नजर में अच्छा बने रहेंगे
पीठ पीछे आपके बारे मे अफवाह फैलाएगे
और आप भांप भी नहीं पाएंगे
सांप और बिच्छू से भी खतरनाक
इनका डंक सालोसाल चलता है
ऐसे आते तो है 
मानव की श्रेणी में
पर है नहीं
जो दूसरों के दुख का मखौल उडाए
किसी की व्यर्थ में प्रतिष्ठा खराब करें
वह तो नराधम है

Friday, 9 January 2026

बर्तन से भी होता रिश्ता

घर के पुराने बर्तनों से
कुछ खास रिश्ता है
यह टेढे मेढे सही
है दिल के करीब
इसमें हमारा बचपन समाया है
दीपावली के समय घिस घिस कर चमकाए जाते थे
हम वही खडे रहते थे
एक-एक बरतन को करीने से सूखने के लिए
बाद में उसको रेक पर सजा दिया जाता था
धनतेरस को एक और उसमें जुड़ जाता था
हम माॅ के साथ खरीदारी करने जाते थे
नए बरतन पर इस बार किसका नाम
उत्सुकता रहती थी
कभी-कभी ये बडे बक्से में बंद कर दिए जाते थे
घर की बिटिया को ब्याह में देने के लिए
आज नए-नए चमकीले बरतन आ गए हैं
झटपट वाले भी है
पर उनकी बात ही निराली थी
वे केवल बरतन ही नहीं होते थे
संपत्ति भी होते थे
वह पुराने होने पर बेकार नहीं
कीमती होते थे
कुछ देकर ही जाते थे
न तब कबाड़ थे न आज
सोने के बाद दूसरा स्थान 
इन्हीं का होता था
ये तांबा ,पीतल और कांस्य के बरतनों का भंडार
बहुत महत्वपूर्ण थे 
भोजन के अनिवार्य अंग थे
आज जमाना बदल गया है
अब यह कभी कभार दिखते हैं
इन्हें निकाल दिया गया है
या फिर कहीं अंदर रख दिया गया है
एकाध ड्राइंग रूम की शोभा
शायद भविष्य में ये शोभा ही बन कर रह जाएं
जमाने का प्रभाव तो इन पर भी पडा है