बचपन से देखा
ऑख में ऑसू ही गाहे - बगाहे
कारण कभी-कभार पता भी नहीं चलता था
दुख और पीड़ा में तो रोती ही
खुशी के पल में भी ऑसू छलक जाते थे
कभी अतीत को याद कर रोती
कभी अपनों को याद कर रोती
कहती कुछ नहीं बस ऑसू छलकाती
कभी हमारी गलती पर रोती
न डाटती न मारती बस रोती
और हम गलती करने पर पछताते
बड़ी ताकत है इन ऑसूओं में
आज भी बात करती मोबाइल पर तब रोती
यह एक इमोशनल ब्लेकमेल जैसा हुआ
अब तो ऐसा लगता है
कभी हंसते हुए देखा नहीं
रोता देख कभी अच्छा नहीं लगता
फिर एक दिन समझ आया
रोना मतलब नार्मल है
न रोये तो खतरा है
क्या मां ऐसी ही होती है
आशीर्वाद देते भी ऑख में पानी भर आना
कभी बच्चों को याद कर रोती है
कभी उनकी चिंता में ईश्वर से प्रार्थना कर रोती है
ईश्वर भी उसके ऑसूओं पर पसीज जाता होगा
कहते हैं जहाॅ
शब्द असमर्थ हो जाते हैं वहाँ ऑंसू काम आते हैं
बड़ी ताकत है इन आंसुओं में
मैं भी मां हूँ पर अम्मा जैसी नहीं
यहाँ ऑंसू कम गुस्सा ज्यादा
शब्द ज्यादा
जो कभी-कभार बात को बिगाड़ भी देते हैं
अम्मा के ऑंसू का पावर
अब भी है बरकरार
सब हो जाते उसके आगे निरूत्तर
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