Saturday, 6 August 2016

आम आदमी की टोपी

टोपी के रंग निराले ,काली ,पीली ,नीली
सुनहरी रेशमी  ,ऊनी ,देशी ,विदेशी
धूप ,मिट्टी से बचाती ,सुदंरता में चार चॉद लगाती
इस टोपी ने न जाने कितने गुल खिलाए
क्रांति की जोत जलाई ,बन गई गॉधी टोपी.
नेताओं की  पहचान बनी
अलग- अलग रंगों में पार्टियों की पहचान बनी
और तो और सबसे बडा किया कमाल
आम आदमी की टोपी पहन आ गए केजरीवाल
जनता को पहनाई टोपी ,बन बैठे दिल्ली के शंहशाह
दिल्ली की जनता हो गई गुमराह
आम आदमी की टोपी बन गई जी का जंजाल
कब मौका मिले कब निकालकर फेंके
पर करना है पॉच साल इंतजार
हर जगह मचा हाहाकार
दिल्ली कर रही गुहार
कहॉ है केजरीवाल
बचपन में टोपीवाला और बंदर की कहानी थी पढी
किस तरह बंदरों ने टोपियॉ पहनी और निकाली
केजरीवाल ने जनता को पहना तो दी है टोपियॉ
अब तो बारी अगले चुनाव की
कौन किसको पहनाता है टोपियॉ
दिल्ली से पहले है पंजाब की बारी
फैसला तो करना है जनता को

आज बुलंदशहर कल कोई और शहर ?????

पुलिस सो रही,सरकार सो रही ,व्यवस्था चरमरा रही
जमीर मर रहा ,बलात्कार हो रहा
यहॉ- वहॉ घूम रहे नराधम ,इंसानी भेष में पशु
घर- बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं महिलाएं
समाज ,व्यक्ति और देश बदल रहा
विकास के साथ पशुता भी बढ रही
हैवानियत को शर्मशार कर रही
घर ,सडक ,हाइवे कहीं भी कभी भी
औरत की आबरू से खिलवाड
उसके जीवन को जहन्नुम बना देना
वासना का खिलौना मान लेना
पशुता और दरिंदगी को भी मात करना
पिशाच कर्म करना ,वासना का तांडव

अब सब होने के बाद व्यक्ति ,समाज ,पुलिस- प्रशासन
समाज सुधारक ,एन जी ओ  ,नेता जागेगे
रैलियॉ निकलेगी ,सहानुभूति दिखाई जाएगी
धरने - प्रर्दशन होगे ,लाठी चार्ज होगा
टेलीविजन पर वाद - विवाद होगे
फिर शॉति ,सब भूला दिया जाएगा
तब तक के लिए
जब तक फिर कोई निर्भया शहीद न हो
किसी मॉ - बेटी की आबरू तार- तार न हो

इन नराधमों के हौसले फिर बढेगे
कोर्ट - कचहरी के चक्कर लगेगे
मानवधिकार आयोग दखल देगा
इंसानियत की दुहाई दी जाएगी
जमानत पर छूटेगे ,हौसले और बढेगे
शिकार की टोह में रहेगे
आज बुलंदशहर कल कोई और शहर

कब तक पीडित होती रहेगी महिलाएं
व्यक्ति ,परिवार ,पुलिस- प्रशासन ,समाज ,सरकार
जाति - पंचायत ,धर्म गुरू ,समाज सुधारक
जब तक न लेंगे संज्ञान
तब तक न रूकेगा महिलाओं पर अत्याचार

भीगी- भीगी बरसात

भीगी- भीगी साडी
पर लगती कितनी प्यारी
देह पर लिपटी साडी
उस पर बरसात भारी
उठाती ,संभालती ,समेटती
स्वयं में उलझती - उलझाती
ऊपर से छाती परेशानी
साडी में सिमटा अंग
निखर - निखर उठ रहा सौंदर्य
भीग कर कुछ कह रहा मन
मन की उमंगे ,बरसात की तरंगे
भीनी - भीनी खुशबू
धीमी- धीमी आस
करती है किसका इंतजार
वह हो पास तो फिर क्या बात

जिंदगी की गाडी चलती ही जाएगी

जिंदगी की गाडी चलती ही जाएगी
बारीश हो या तूफान आगे बढती ही जाएगी
मिली है जिंदगानी तो घबराना क्यों
घबरा कर पीछे हटना क्यों?
हौसला है तो तूफानों को भी पार करेंगे
हर लहरों का डट कर सामना करेंगे
तूफान तो आनी- जानी है
जिंदगानी एक कहानी है
कौन अपना कौन पराया
क्या तेरा क्या मेरा
सब कुछ यही रह जाना है
हम हो या न हो
दूनिया तो चलने वाली है
बस रह जानी यादे है
आज कोई तो कल कोई और
रूकनी नहीं चलती ही जानी है
हर मोड पर ठहरेंगी ,हर पडाव पार करेंगी
कुछ सबक सिखेगी ,कुछ सिखाकर जाएगी
एक युग से दूसरे युग ,एक पीढी से दूसरी पीढी तक
कुछ देकर कुछ बॉटकर जाएगी
जिंदगी की गाडी चलती ही जाएगी
जिंदगी के साथ भी ,जिंदगी के बाद भी