Saturday, 6 August 2016

जिंदगी को जी लेने दे जिंदगी के बाद भीे ,अंगदान करिए

अपने प्रिय और दिल के करीब के अंगदान करना
सुन कर ही रूह कॉप जाती है
पर यह तो सोचिए यह न जाने कितनों को जिंदगी देगा
किसी का दिल बन कर धडकेगा
किसी की ऑखों की रोशनी बन चमकेगा
किसी का लिवर बन जीवन बन जाएगा
माटी में मिल कर क्या करेगा
जिंदगी अनमोल है उसकी खुशी अनमोल है
किसी का जीवन बन जाना
किसी की रोशनी बन जाना
यह तो ईश्वर के समकक्ष पहुँचा देगा
जिंदगी तो वही देते हैं
उनकी जिंदगी को बॉट दे
मरने के बाद भी लोगों में जिंदा रहे
किसी एक में नहीं दो- चार लोगों में
उसका और उसके पूरे परिवार को संवार दे
जिंदगी को जी लेने दे ,जिंदगी के बाद भी

आया अगस्त ,स्वागत अगस्त

खुशियों की सौगात लेकर
त्योहारों की बरसात लेकर
बरखा बहार लेकर
दोस्ती का पैगाम लेकर
आजादी की याद लेकर
भाई- बहन का प्यार लेकर
गोविंदाओं की टोली लेकर
स्वागत अगस्त स्वागत

गणपति आगमन की तैयारी कराता
स्वर्ग में बैठे पितरों को भी निमंत्रण देता अगले महीने में आने के लिए
इस जीवन के साथ ही जीवन के उस पार के लोगों को खुशियों का एहसास कराता.
दोस्ती ,रिश्ता ,आजादी और ईश्वर
इनके बिना हर मानव अधूरा
मन को खुशियों से भरता
जीवन को सार्थक बनाता..
स्वागत अगस्त स्वागत अगस्त

सबका एक ही मालिक

सबका जन्म इंसान के रूप में
सब की शिक्षा एक ही समान
सब रहते है साथ- साथ
खेलते ,खाते लडते झगडते साथ- साथ
फिर क्यों होता है दुराव

एक का विवाह तो दूसरे का निकाह
एक जगह पुरोहित तो दूसरी जगह मौलवी
एक जगह प्रार्थना तो दूसरी जगह नमाज
कहीं घंटी बजी तो कहीं अजान
किसी का राम तो किसी का रहीम.
म से मंदिर भी   म से मस्जिद भी
अंत समय दोनों को रूखसत होना है दूनियॉ से
किसी को जलाकर किसी को दफनाकर
माटी को माटी में मिल जाना है

दोनों को खुदा के घर जाना है
जहन्नुम में    या    स्वर्ग में
कर्मों का लेखा  - जोखा तो ऊपर होना है
फिर यह टकराव क्यों
खून की नदियॉ क्यों.
न्याय तो वहीं करेगा
आखिर सबका मालिक एक

मेरी बिटियॉ मेरी दुनियॉ

मेरी बिटियॉ मेरी दुनियॉ ,मेरी दिल की धडकन
सुबह - शाम बाट जोहती
सुंदर - सुंदर वस्र खरिदती
तेरी बोली सुनने को व्याकुल रहती
तुझमें ढूढती अपनी खुशियॉ
मेरी आशा ,मेरे सपने ,सब कुछ तो तुझसे ही
जो कुछ तुझको भाता ,वह मुझको भी लगता प्यारा.
तुझे पढाती - लिखाती ,बतियाती ,निहारती
तुझे देख फूला न समाती
आगे बढते ,तरक्की करते ,शिखर पर पहुंचते.
हर पल सहायता को तत्पर रहती
तुझमें ही मेरी दुनियॉ बसती
हर पल ख्यालों में रहती
खाना& पीना ,सोना -उठना - बैठना
तुझमें बसते राम- कृष्ण
स्मरण करती ,अराधना करती
तुम पर न्योछावर जाती
बिटियॉ नहीं यह तो है मेरी दुनियॉ