वह खट्टी मीठी गोली थी
लाल पीली नारंगी
मुंह में जब डालते
तब चेहरा रंग बदलता
वह पांच पैसे की पेप्सी थी
जब तक बर्फ खतम न हो जाय
चूस चूस कर खाते थे
प्लास्टिक को भी चबा डालते थे
वह क्रीम वाला चीनी लगा बिस्कुट
चाट चाट कर खाते थे
चाशनी भर घूमते थे
पानी भी नहीं पीते थे
वह रंगबिरंगा रबर
काॅपी में रगड रगड कर मिटाते थे
सभी को ललचाते थे
वह चार आने का बडा
सी सी कर खाते थे
घरवालों को नहीं बताते थे
बहुत खा लिया
बटर टोस्ट , पिज्जा और बर्गर
पर पहले वाला स्वाद
कहाँ भूला है
अभी भी जिह्वा पर कायम है
वह बचपन था
भले बडे हो जाय
बचपना तो कायम रहता है
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Sunday, 13 June 2021
वह खट्टी मीठी यादें
Thursday, 10 June 2021
हाथी भाई हाथी भाई
हाथी भाई हाथी भाई
तुम इतने भारी - भरकम
इतनी भारी खुराक
नहीं चाहता दिल तुम्हारा
तुम भी डायटिंग करो
फुर्तीले बनो
पर तुम क्यों सोचो
तुम तो अपनी मदमस्त चाल में मगन
तुम्हें नहीं कोई फिकर
कौन क्या कहेंगा
सुंदर दिखने की इच्छा नहीं होती
हाथी हंसा और बोला
यह भारी - भरकम शरीर ही तो बल है मेरा
यह लंबी सूंड ही शान है मेरी
यह कीमती दांत ही तो अनमोल है
मैं जैसा हूँ ठीक हूँ
मदमस्त चलता हूँ
मुझे देख सब रास्ता दे देते हैं
दुबला-पतला और फुर्तीला नहीं बनना है मुझको
मैं सबसे अलग
सबसे यूनिक
बस लोगों के दिलों में रहता हूँ
जहाँ जाता हूँ
सम्मान पाता हूँ
बस यही बहुत है भाई
वह और मैं
वह बहुत तेज थी
बहुत होशियार थी
सब जगह वाहवाही थी
हर जगह अव्वल
हर जगह प्रथम
परिवार में भी मान
उसके विपरीत
मैं बहुत स्लो , धीमी
कछुए और खरगोश की कहानी की तरह
उसे अभिमान था
गर्व था
अपनी काबिलियत पर
लगता था
कुछ भी असंभव नहीं
यही वह मार खा गई
सोचा सब फतह कर लूंगी
धैर्य नहीं था
मैं चलती गई
अपनी मंजिल पाती गई
धीरे-धीरे ही सही मुकाम हासिल कर ही लिया
आज वह जहाँ थी वही है
हम सीढी पार करते - करते उससे बडे ओहदे पर पहुंचे
आज मैं उसकी बाॅस वह मेरी मातहत
वह जल्द पहुँच वही रह गई
मैं देर से पहुँच उससे ऊपर हो गई ।
Friday, 4 June 2021
जीवन तो एक बहती नदी है
जीवन तो एक बहती नदी है
हम उसके किनारे खडे सोच रहे हैं
क्या करें क्या न करें
अंदर उतरे या न उतरे
बीच में जाएं या न जाएं
अपना पात्र आधा भरे
पूरा भरे
बडा पात्र हो
छोटा पात्र
यह तो आप पर निर्भर है
आप कितना जल भरे
अपनी सामर्थ्य को जानना है
जी भर जल उलीचना है
जीवन है
केवल सोचने से कुछ नहीं होगा
उतरना तो पडेगा गहरे जल में
जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ
मैं बपुरा बूडन डरा , रहा किनारे बैठ