कल रात जोरों का तूफान आया
ऑधी चली
हवा के थपेडों से सब अस्त व्यस्त
किसी के घर का छप्पर उडा
तो किसी के घर की दीवार गिरी
बडे बडे पेड भी इस झंझा के आघात को सह न सके
वे भी धराशायी हो गए
रात भर पवन देवता ने तांडव मचाया
सुबह हुई
तूफान थम चुका था
चारों ओर शांतता पसरी हुई थी
सब जगह खामोशी
यह क्या ??
यह छोटे छोटे पौधे वैसे के वैसे
फिर सीधे खडे
उन पर कोई असर नहीं
लताएँ भी जमीन पर पसरी है
वह प्रसन्नचित्त हैं
तब प्रभावित कौन ??
बडे बडे और तने तने
जो झुका नहीं वह अवश्य गिरा
बडा अभिमान था अपने पर
अपनी विशालता पर
अपने बल पर
सब चकनाचूर
बहुत कुछ कह जाता है यह सब
प्रकृति सिखा जाती है जीने की राह
समझ सके तो समझो
न समझा वह अनाड़ी ।
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Sunday, 26 December 2021
न समझा वह अनाड़ी
भीष्म उपदेश
🌺 भीष्म उपदेश 🌺
*शरशय्या पर लेटे भीष्म का युधिष्ठिर को संबोधित करके सभी दिया गया उपदेश।*
भीष्म ने युद्ध के पहले और बाद में बहुत ही महत्वपूर्ण बातें कही थी। ऐसी कई बातें थी जिसे उन्होंने धृतराष्ट्र, दुर्योधन, कृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिर से कहा था। शरशय्या पर लेटे भीष्म ने युधिष्ठिर को संबोधित करके सभी को उपदेश दिया। उनके उपदेशों में राजनीति, नीति, जीवन और धर्म की गूढ़ बाते होती थी। आओ जानते ही कि भीष्म ने क्या कहा था।
1. ऐसे वचन बोलो जो, दूसरों को प्यारे लगें ।दूसरों को बुरा भला कहना, दूसरों की निन्दा करना, बुरे वचन बोलना, यह सब त्यागने के योग्य हैं। दूसरों का अपमान करना, अहंकार और दम्भ, यह अवगुण है।
2. त्याग के बिना कुछ प्राप्त नहीं होता । त्याग के बिना परम आदर्श की सिद्धि नहीं होती। त्याग के बिना मनुष्य भय से मुक्त नहीं हो सकता। त्याग की सहायता से मनुष्य को हर प्रकार का सुख प्राप्त हो जाता है।
3. सुख दो प्रकार के मनुष्यों को मिलता है । उनको जो सबसे अधिक मूर्ख हैं, दूसरे उनको जिन्होंने बुद्धि के प्रकाश में तत्व को देख लिया है। जो लोग बीच में लटक रहे हैं, वे दुखी रहते हैं।
4. जो पुरुष अपने भविष्य पर अधिकार रखता है* (अपना पथ आप निश्चित करता है, दूसरों की कठपुतली नहीं बनता) जो समयानुकूल तुरन्त विचार कर सकता है और उस पर आचरण करता है, वह पुरुष सुख को प्राप्त करता है। आलस्य मनुष्य का नाश कर देता है।
5. सनातन काल से जब-जब किसी ने स्त्री का अपमान किया है, उसका निश्चित ही विनाश हुआ है। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया कि, स्त्री का पहला सुख उसका सम्मान ही है। उसी घर में लक्ष्मी का वास रहता है, जहां स्त्री प्रसन्न रहती है। जिस घर में स्त्री का सम्मान न हो और उसे कई प्रकार के दुःख दिए जाते हो, उस घर से लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवता भी चले जाते हैं।
6.भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया कि जब नदी पूरे वेग के साथ समुद्र तक पहुंचती है तो बड़े से बड़े वृक्ष को बहाकर अपने साथ ले जाती है। एक बार समुद्र ने नदी से पूछा कि तुम्हारा जल प्रवाह इतना तेज और शक्तिशाली है कि उसमें बड़ा से बड़ा पेड़ बह जाता है लेकिन ऐसा क्या है कि छोटी घास, कोमल बेल और नरम पौधों को बहाकर नहीं ला पाती? नदी ने कहा कि जब मेरे जल का बहाव आता है तो *बेलें अपने आप झुक जाती है ।* किंतु पेड़ अपनी कठोरता के कारण यह नहीं कर पाते हैं, इसीलिए मेरा प्रवाह उन्हें उखाड़कर बहा ले आता है।
7. महाभारत के युद्ध के पहले जब श्रीकृष्ण संधि के लिए हस्तिनापुर आए थे तब भीष्म ने दुर्बुद्धि दुर्योधन को यह कहकर समझाया था कि जहां श्रीकृष्ण है, जहां धर्म है, उसी पक्ष की जीत होनी निश्चित है। इसलिए बेटा दुर्योधन! भगवान कृष्ण की सहायता से तुम पांडवों के साथ संधि कर लो, यह संधि के लिए बड़ा अच्छा अवसार हाथ आया है। व्यक्ति को सदा धर्म की ओर ही रहना चाहिए।
8.भगवाद श्रीकृष्ण की तरह भीष्म पितामह ने भी कहा था कि *परिवर्तन इस संसार का अटल नियम है और सबको इसे स्वीकारना ही पड़ता है* क्योंकि कोई इसे बदल नहीं सकता।
9.भीष्म पितामह ने कहा था कि एक शासक को अपने पुत्र और अपनी प्रजा में किसी भी प्रकार का कोई भी भेदभाव नहीं रखना चाहिए। ये शासन में अडिगता और प्रजा को समृद्धि प्रदान करता है।
10. भीष्म पितामह ने कहा था कि सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं, अपितु कठिन परिश्रम करके समाज का कल्याण करने के लिए होता है..!!
संदर्भ- महाभारत
🙏🏽🙏🏻🙏🏾जय जय श्री राधे*🙏🏿🙏🙏🏼
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प्रेम करना ही पर्याप्त नहीं
प्रेम करना ही पर्याप्त नहीं है
उस लायक भी बनना होता है
जिम्मेदारी होती है उस व्यक्ति के प्रति
जो सब छोड़ कर आपसे प्रेम करती है
बिना किसी की परवाह किए
माता - पिता और समाज की भी
तब उसके सम्मान को कायम रखना
यह भी तो जरूरी है
राम ऐसे ही नहीं बना जाता
सीता के लिए धनुष तोडने की भी योग्यता होनी चाहिये
रावण से युद्ध ठानने की भी क्षमता होनी चाहिए
रुक्मिणी के लिए कृष्ण बनना पडेगा
एक खत से आकर केवल भगा कर ही नहीं ले गए
पटरानी बना कर रखा
रूक्मी उनके भाई से युद्ध ठान लिया
आज के जमाने की बात करें
तो अब वह जमाना नहीं रहा
अब कोई बंधन आडे नहीं आता
फिर भी योग्य तो होना पडेगा
बातें करने से
हवा में उडने से
बडे बडे सपने देखने से गुजारा नहीं होता
यथार्थ के धरातल पर उतरना पडेगा
स्वयं को कर्मठ और लायक बनाना पडेगा
मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ
कहने से काम नहीं चलता
उसके लिए जी - जान से तैयार रहना चाहिए
मर भी सकता हूँ
इससे अच्छा जीने का जुगाड़ करें
उसके लिए कुछ भी करना पडे
छोड़ना पडे तब छोड़ कर दिखाओ
घर - परिवार, समाज सब
ऐसा लोगों ने किया भी है
प्रेम करने वाला डरता नहीं है
डंके की चोट पर करता है
इतना विश्वास तो होना ही चाहिए
डरपोक और कमजोर प्रेम कर ही नहीं सकता
वह विश्वास घात कर सकता है
प्रेम में स्वार्थ नहीं त्याग होता है
जो यह कर सका उसी को प्रेम करने का अधिकार है
कायर , लालची ,स्वार्थी और नपुंसक को नहीं
Saturday, 25 December 2021
असली मर्द ??
औरत पर जो हाथ उठाएं
वहीं असली मर्द कहलाए
औरत की जो बात माने
वह तो जोरू का गुलाम कहलाए
पिता , पति और पुत्र से संबंधित है
अच्छा पिता अच्छा पति
जो होगा
वह क्या मर्द नहीं होगा
जो बीवी की इज्जत करें
उसकी इच्छाओं का सम्मान करें
उसे भी अपने समान समझे
वह क्या मर्द नहीं
मार - पीट करें
तुच्छ लेखे
दासी समझे
अपने परमेश्वर की पदवी धारण करें
तब वह मर्द हैं ??
परमेश्वर न बने
सामान्य इंसान बना रहें
एक अच्छा इंसान बने
एक अच्छा पिता , पति बना रहें
वहीं बहुत है