Wednesday, 5 June 2024

सबने जिसे पप्पू बोला

सबने जिसे पप्पू बोला 
मजाक उड़ता रहा 
उसकी मुस्कराहट कायम रही
जोश कायम रहा
तीखे - तीखे व्यंग बाण छोड़े गए
वह डटा रहा अपने मिशन पर 
लोग उस पर हंसते रहे 
वह न हारा न झुका 
चलता रहा चलता रहा
लोगों को अपनी बात मनवाने की कोशिश करता रहा
उसके पास लच्छेधार भाषा नहीं 
बोलने में महारथ हासिल नहीं 
जमीन से जुड़ा नहीं 
परवरिश ही सुरक्षा घेरे में 
क्या करता 
सब कोशिश करता रहा 
समझता रहा 
छल - कपट से दूर राजनीति 
धीरे-धीरे वह अच्छा लगने लगा
लोग उसको समझने लगे 
आखिर मेहनत रंग लाई 
भारतीय राजनीति का मजबूत सितारा बन कर उभरा है
सत्ता की बाजी पलट दिया है 
वह एक मजबूत राजनेता बना है
दिखा दिया 
हार नहीं मानना है 
अपना काम ईमानदारी और निष्ठा से करना है
लोग उदाहरण दे रहे हैं 
प्रशासनिक कोचिंग संस्था में 
राजनीति तो विरासत में मिली ही है
परिवार ने त्याग और बलिदान किया है
आज हंसने वालों के मुंह बंद है

Tuesday, 4 June 2024

इंसान बने रहो

मैं परेशां रहा
क्या हुआ
कुछ खास नहीं 
सब यथावत 
तब ??
उसने क्या किया 
वैसा क्यों किया
करना नहीं था 
यह अच्छी बात नहीं है
यह सब सोच सोच
आपका अच्छा पन परेशान 
खुश नहीं हो पाते 
गुण देखों अपने
अवगुण मत देखों औरों के 
और से क्या लेना- देना
हमारा कर्म हमारे साथ
उसका कर्म उसके साथ
फल हमको हमारे कर्म का 
उसको उसके कर्म का 
आप जज मत बनों 
भगवान भी मत बनो 
इंसान बने रहो 

चुनाव गणना

चुनाव गणना शुरू होने वाली है 
आज फैसला होने वाला है
वैसे तो सब पहले ही इ वी एम मशीन में कैद हो चुका है
आज पता चलेगा
जनता किसे राजा बनाती है
वादे बहुत किए गए 
अनुमान भी सबके हैं 
आशा भी सबको है
पूर्वानुमान लगाया जा चुका है
देश में ही नहीं विदेश में भी 
अब सही क्या? 
यह तो कुछ घंटों में पता चल जाएंगा
कोई जीते कोई हारे 
बस प्रजातंत्र जीवित रहें 
उसके साथ खिलवाड़ नहीं 
छेड़छाड़ नहीं 
नतीजा सर ऑखों पर 
जनता का फैसला है
जनता ही जनार्दन है 
उसके साथ धोखा नहीं 
लोकतंत्र की रक्षा सर्वोपरि 

Monday, 3 June 2024

ईश्वर नहीं है कोई

गलती किया है गुनाह नहीं 
लोग तो ऐसे खंजर लिए खड़े 
जैसे उन्होंने कभी कुछ गलती की ही नहीं 
गलती ही तो हमें सिखाती है
अब वापस दोबारा नहीं होगी 
तब तक एक नई गलती हो जाती है
यह तो मानव स्वभाव है
गलती करो उसको सुधारों
जान - बूझ कर गलत नहीं करना है 
किसी को धोखा नहीं देना है 
गलती का परिणाम भी तो हमको ही भुगतना पड़ता है 
अपने को भी माफ कर देना है
आगे बढ़ते रहना है
इतनी लंबी जिंदगी 
हम कमजोर मन के वशीभूत जीव 
स्वाभाविक है 
कोई यहाँ परिपूर्ण नहीं 
ईश्वर थोड़ा ही है कोई