Tuesday, 30 June 2026

क्या यही जीवन है

जो चला गया वह तो चला गया 
पीछे अपनी यादें छोड़ गया 
दुख हमेशा का दे गया 
रोते- बिलखते अपने रह गए 
आज यादों में बसाए वक्त- वक्त पर याद कर लेते हैं 
मन में कसक है बिछड़ने का 
कभी न उससे मुलाकात होने का 
वह हंसने - खिलखिलाने , लड़ने - झगड़ने का 
साथ में सब मिल - बांटने का 
कोई कुछ न कर पाया 
न उसे रोक पाया 
वह भी तो कहाँ जाना चाहता होगा अपनों से दूर
मन में न जाने कितने सपने संजोये होगे 
जीने की आस होगी 
कुछ कर गुजरने का सपना होगा 
कितना विवश होगा 
जब देखा होगा 
जिंदगी हाथ से फिसली जा रही है 
अपनों से दूर हो रहा है 
ईश्वर की तरफ दृष्टि है 
कुछ चमत्कार हो जाए 
कितनी तड़प होगी 
जीना चाहता है जो उसी से जीवन छिना जा रहा है 
अंतिम समय तक आस होगी 
नियति के आगे सब मजबूर 
काल की गति न्यारी 
सब प्रार्थना- दुआ नाकाम 
वश किसी का नहीं 
मृत्यु जीवन का सच 
पर वह इतना भयावह
भावनाओं पर तो कोई नियंत्रण नहीं 
सत्य स्वीकार करना बहुत मुश्किल 
आसान नहीं होता जीना भी मरना भी 
सारी सहानुभूतियां- सांत्वना सब बेकार 
ईश्वर पर भी आस्था डगमगाने लगती है 
मन में विचार उमड़ता रहता है 
भारी मन से कहता है 
क्या यही जीवन है 

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