Friday, 2 October 2026

गांधी बनना आसान नहीं

गांधी को दोष देना आसान है 
गांधी होना मुश्किल 
मोहनदास करमचंद  से महात्मा बनना इतना सरल नहीं 
कोट - सूट - पैंट को छोड़कर धोती आधे टांग की धारण करना 
कोठी छोड़कर झोपड़ी में वास करना 
विदेश छोड़कर स्वदेश में वास करना 
अपनी गलतिया पर   पर्दा नहीं उसे स्वीकार करना 
अपने परिवार को तवज्जों न देकर देश के लिए जीवन समर्पित 
विरोध का एक अलग ही हथियार 
सत्य और अहिंसा 
नमक और कपड़ा 
सामान्य से महान की दूरी ऐसे ही नहीं तय की थी 
विरोध का वह स्वर उसी दिन चिंगारी का रूप धारण कर चुका था 
जब उनको रेल के डिब्बे से उतारा गया था या कह लीजिए फेंका गया था 
कर्म का सिद्धांत गांधी से 
यह वही कर्म है 
जो एक  ग्वाले को गोकुल छोड़ मथुरा प्रस्थान कराता है 
यह वही कर्म है 
जो एक राजकुमार को राजमहल छोड़ वनवासी बनाता है 
यह वही कर्म है 
जो एक बैरिस्टर मोहनदास करमचंद को महात्मा बनाता है 
छोड़ना पड़ता है सब कुछ 
गांधी ने बहुत कुछ छोड़ा 
अपने लिए नहीं देश के लिए 
करो या मरो , अंग्रेज भारत छोड़ो 
यह मूलमंत्र एक दुबला - पतला सा व्यक्ति देने वाला 
जिसने हर भारतीय को फांसी पर चढ़ने और जान देने को प्रेरित कर दिया 
हर घर में आजादी का संदेश नमक के माध्यम से 
अफ्रीका से शुरुआत की 
हर गुलामी से जकड़े देश को संदेश दिया 
भेद-भाव से परे 
हर जन को स्वीकार किया 

वैष्णव जन तो तेने कहिए 
पीर पराई जाने रे 

रघुपति राघव राजा राम 
पतित पावन सीता राम 

मृत्यु के समय पर भी मुख से 
राम - राम - राम 

तभी तो किसी एक राष्ट्राध्यक्ष ने उनकी मृत्यु पर कहा था 
आज एक अच्छा हिन्दू इस दुनिया से रुखसत कर गया 


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