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Friday, 3 September 2021

उसके खेल निराले भैया

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जो जीवन भर अपनी प्रतिज्ञा में बंधा रहा अधर्म पर अधर्म होते देखता रहा प्रतिज्ञा प्राणों से ज्यादा प्रिय पिता को दिया वचन निभाना था आजीवन ...

बिग बाॅस तो बन गए शुक्ला जी

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बिग बाॅस तो बन गए शुक्ला जी फिर भी यह घर छोड़ दिया बहुत कुछ था यहाँ कुछ अपने कुछ पराए प्यारा सा यह संसार था परिवार था माॅ थी बहन थी रि...

अब तुम कहाँ लौट कर आओगे

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तुम तो चले गए आभास तक न हुआ सोते - सोते रूखसत हो गए कुछ तो कहा होता कुछ तो बताया होता दिल की बात सांझा की होती ऐसा क्या बोझ दिल पर ले ...

ऐसा अक्सर होता है

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बडा मुश्किल है अपने जीवन की परते खोलना दूसरों के जीवन की बखिया उधेड़ना एक - एक धागे को निकालना बडा आसान होता है स्वयं को आईना दिखाना ह...
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Asha Singh
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