Thursday, 25 December 2025

बंधन

मैंने जो पाया तुमसे ही पाया 
हर आस में तुम 
हर सांस में तुम
जीवन तुम बिन सून
हर कहानी में तुम
हर हिस्से में तुम 
तुमसे मिलना तुमसे बिछड़ना 
हर बार यही दोहराना 
संग साथ चलने के राही 
हाथ पकड़कर रखने वाले साथी 
कब बंधा जीवन 
यह तो अब याद नहीं 
अब तो याद भी बिसरी 
सब कुछ भूला जा रहा 
जीवन अपनी डगर चल रहा 
कभी तेज कभी धीमे कभी डगमग डगमग 
कैसे चले कब तक चले 
यह तो नहीं पता 
बस चलते जा रहे 
चलना जारी रहे 
जब तक शरीर में जान रहे 
पग - पग पर साथ रहे 
हाथों में हाथ रहे 
सुख- दुख के भागीदार रहे 
हंसी - खुशी के साथ गुजरता जीवन हो 
वादें- कसमें की क्या जरूरत 
मन  में विश्वास हो 
हर हाल में यह साथ होगा 
हर मोड़ पर यह खड़ा होगा 
आए कितने ही आंधी-तूफान 
रहेगा कायम यह बंधन 

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