हर आस में तुम
हर सांस में तुम
जीवन तुम बिन सून
हर कहानी में तुम
हर हिस्से में तुम
तुमसे मिलना तुमसे बिछड़ना
हर बार यही दोहराना
संग साथ चलने के राही
हाथ पकड़कर रखने वाले साथी
कब बंधा जीवन
यह तो अब याद नहीं
अब तो याद भी बिसरी
सब कुछ भूला जा रहा
जीवन अपनी डगर चल रहा
कभी तेज कभी धीमे कभी डगमग डगमग
कैसे चले कब तक चले
यह तो नहीं पता
बस चलते जा रहे
चलना जारी रहे
जब तक शरीर में जान रहे
पग - पग पर साथ रहे
हाथों में हाथ रहे
सुख- दुख के भागीदार रहे
हंसी - खुशी के साथ गुजरता जीवन हो
वादें- कसमें की क्या जरूरत
मन में विश्वास हो
हर हाल में यह साथ होगा
हर मोड़ पर यह खड़ा होगा
आए कितने ही आंधी-तूफान
रहेगा कायम यह बंधन
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