Thursday, 22 January 2026

बेटी

दो अक्षर से बना है शब्द 
मात्र यह शब्द नहीं पढ़ने वाला 
यह तो है दिल में बसने वाला
जिस कोख से जाई 
उसी की बन जाती एक दिन माई 
मन से रिश्ता निभाती 
जी - जान छिड़कती 
कभी डांटती कभी समझाती 
कभी हंसती कभी गले लगाती 
मुख पर उदासी को तुरंत भाप लेती 
क्या न करें वह कम 
हर बात का ध्यान रखती 
एक संरक्षिका जैसी 
वह ईश्वर की नियामत होती है 
लक्ष्मी, दुर्गा , सरस्वती का रुप होती है 
घर की रौनक होती है 
रोशन होता है उनसे घर - परिवार 
बड़ी अनमोल हौती है 
बेटियाँ सिर्फ बेटियां नहीं होती 
दो अक्षर में सिमटी सारा जहां होती है 

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