Thursday, 22 September 2016

पाकिस्तान पर करो प्रहार - अब तो जागो मोदी सरकार

यह क्या हो रहा है
पाकिस्तान प्रहार पर प्रहार कर रहा
हम शॉति की बात किए जा रहे
मॉ ,साडी ,बेटी की शादी पर बहुत हो चुकी डिप्लोमेसी
अब तो ५६ इंच के सीने को प्रताप दिखाना है
सेना के जवान मारे जा रहे
आंतकवादियों का कहर बढता जा रहा
कब तक सहा जाएगा
पाकिस्तान को शायद पहले वाली लडाईयॉ याद नहीं
उसको फिर याद दिलाना होगा
कारगिल को फिर दोहराना होगा
बांगला देश ही पहले अलग किया
अब तो उसके तुकडे- तुकडे करने होगे
कश्मीर की तो बात करना तो दूर
सॉस लेना भी भूल जाएगा.
हमारे जवान तो है तैयार
बस सरकार को देना होगा आदेश
अब्दुल हमीद जैसी वीरता हर जवान में.
पर उनको आंतकवादियों के हाथ मरने के लिए नहीं
सामने आक्रमण करने के लिए करे तैयार
बुद्ध की अहिंसा और शॉति है
पर कोई कमजोर नहीं
दुर्गा की भूमी है यह
अब तो मॉ का आशिर्वाद ले
पाकिस्तान जैसे महिषासुर का वध करने का समय आ गया
बहुत हो चुकी शॉति की बातें
अब तो बस प्रहार करना है
सैनिकों के बलिदान का बदला लेना है
उनके परिवार के हर व्यक्ति के ऑसुओं का हिसाब देना है
फिर से इंदिरा की तरह मुँह तोड जवाब देना होगा
आंतकवादियों को घुसकर मारना होगा
अगर पाकिस्तान शॉति नहीं चाहता
तो भारत को चाहिए उसको अच्छी तरह शॉत कर दे
फिर से सिर उठाने की हिमाकत न करे
कश्मीर का राग अलापना छोड दे
नवाब शरीफ अगर शराफत छोड रहे हैं
तो उनको आईना दिखाना ही होगा
अब बहुत हो चुका
बस अब तो करो प्रहार

Wednesday, 21 September 2016

विश्व शांति दिवस -International peace day

आज विश्व शांति दिवस
और कुछ दिन पहले ही भारतीय सैन्य पर हमला
अभी तो सैनिकों की चिता भी नहीं बुझी है
भारत शांति की बिसात पर क्या कुछ नहीं सह रहा है
नवाज शरीफ को जवाब नहीं देना है
आंतकवाद पाकिस्तान की धरती पर फलफूल रहा है
सब लोग कडे शब्दों में निंदा कर रहे हैं
ओबामा से लेकर जर्मनी तक
पर भारत कब तक यह सहेगा
विश्व को केवल बताने से कि पाकिस्तान आंतकवाद को पालने - पोषने वाला देश है
हमारी समस्या तो कम नहीं होती
बल्कि कसाब जैसों को आंतकवादी का प्रमाण दुनियॉ को देने के लिए करोडो खर्च कर देते हैं
पाकिस्तान तो वैसे ही तन कर खडा है
विश्व समुदाय क्या कर रहा है???
भारत को अपनी लडाई स्वयं लडनी है
हमारे लोगों की जान इतनी सस्ती है क्या??
आज हर धर्म के लोग खुल कर बोले
पाकिस्तान की निंदा करें.
कितना सहेगे और मरेगे
हर व्यक्ति को विरोध करना है
कश्मीर की समस्या तो मुँह बाए खडी है
हम बुद्ध और गॉधी के देशवासी भले हैं
शॉति भी चाहते हैं
पर कायर तो नहीं.
अर्जुन की तरह गांडीव उठाने की जरूरत है
अमेरिका से सीखे
ओसामा बिन लादेन के साथ क्या किया
हम डर रहे हैं
पडोसी वार पर वार किए जा रहा है
परमाणु युद्ध की धमकी भी दे रहा है
युद्ध कभी अच्छा नहीं होता
विनाशक ही होता है
सारा विश्व आंतकवाद की समस्या से ग्रस्त है
तो फिर सब क्यों नहीं आंतकवाद देश का बहिष्कार करते
केवल बोलने से कुछ नहीं
कारवाई भी करें
मानवता की हत्या हो रही है
और विश्व बेबस ,लाचार बना देख रहा है.
धर्म और समुदाय के नाम पर हत्या
निरीह लोगों का रक्त बहाना
अब केवल बोले नहीं बल्कि ठोस कदम उठाया जाय
   मंदिर ,मस्जिद ,गिरजाघर ने बॉट लिया भगवान को
धरती बॉटी ,सागर बॉटा ,मत बॉटों इंसान को
यह कैसी विडंबना है कि शॉति दिवस पर युद्ध की बातें हो ,अशॉति की चर्चा हो.
पाकिस्तान खेलने ,गाने और अभिनय में भाग लेता है
पर यही जब बम फोडता है तो यह लोग चुप रहते हैं
भारत का हर मुसलमान पाकिस्तान का विरोध क्यों नहीं करता??
बाकी दूसरी सब बातो का विरोध होता है
एक सामान्य फिल्म के नाम पर भी विरोध
आंतकवादी को फॉसी पर विरोध
पर देश की सुरक्षा में मारे गए सैनिकों के लिए किसका विरोध. ?????

Sunday, 18 September 2016

जीते जी भी तो कर लो मॉ - बाप का सम्मान

पितृ पक्ष शुरू हो गया है
पितरों के लिए खाना निकाल कर रखा जाता है
भोजन साफ - सुथरा और उनकी मनपसन्द का
मांसाहार ,नए कपडे  इत्यादि को छोडा जाता
बहुत सी व्यक्तिगत जैसे ढाढी न बनाना ,केश न कटवाना , शुभ कार्य न करना इत्यादि
कौए को भोजन रखा जाना
तिथी के अनुसार श्राद्ध करना
पंडितों को दान- दक्षिणा देना
गरिबों को खाना खिलाना और कपडे बॉटना
पितरों की याद में यह सब ठीक है
उनके सम्मान में दूसरे लोगों का भी पेट भर जाता है
पर जीवित रहते यह सम्मान दिया क्या??
पितृ दोष न लगे ,उनका आशिर्वाद बना रहे
हमारी संतान फले- फूले
इस कारण यह सब.
मरने के बाद भी उनसे अपेक्षा
हर मॉ- बाप अपनी संतान का भला ही चाहेगे
तो क्यों न जीते- जी भी यह सम्मान दिया जाय
उनसे प्रेम और मीठे बोल बोला जाय
स्वर्ग कोई टिफिन सर्विस नहीं है
जो यहॉ से उनको खाना भेजा जाय
पन्द्रह दिनों के लिए
यही उनको संतुष्ट कर ऊपर भेजा जाय
तो उनकी आशिर्वाद हमेशा रहेगा
यह कैसी विडंबना कि जीते जी पेट न भरे
मरने के बाद पकवान
जीते- जी कपडा न मिले
मरने पर नया कफन.
यही पर सोचे
पृथ्वी पर ही तो और भी अच्छा 

Saturday, 17 September 2016

जीओ और जीने दो

जीते तो सब पर जीवन जीने की कला सबको नहीं आती
कोई रोकर ,कोई दूसरों को दुख पहुँचाकर
कोई बोली और ताना देकर
कोई दूसरों को दुखी देखकर
कोई जलन और ईष्या में ,किसी का अपमान कर
कोई स्वयं में कूढते और जिंदगी को कोसते हुए
कोई निरपराध जीवों की हत्या कर
कोई ईश्वर पर या अपनों पर आरोप ,प्रत्या रोप कर
कोई असंतुष्ट रह तो कोई हाय- हाय कर
कोई बेईमान ,झूठा ,भ्रष्टाचारी ,लालची बन
      हॉ  पर यह जीना है क्या?
क्यों नहीं दूसरों के खुश में खुशी होते
जलन ,ईष्या से दूर रहते
क्षमा ,ईमानदारी का पालन करते
संतुष्ट और मितव्यी बनकर
जीवदया और करूणा की मिसाल बन
जो मिला है उसे ईश्वर का वरदान मानकर
दो मीठे बोल ,बोलकर
भी तो जीया जा सकता है
जिसने यह जीवन ,जीने की कला सीख ली
वह अपना जीवन सार्थक बना गया
जीओ और जीने दो