Wednesday, 7 December 2016

अम्मा (जयललिता जी ) नहीं रही

गरिबों की अम्मा नहीं रही ,किसी दूसरी दुनियॉ में चली गई
तामिलनाडु रो रहा है ,बेहाल है ,हाहाकार मचा है
अम्मा से इतना प्रेम क्यों??
अम्मा भी सबसे इतना ही प्रेम करती थी
उनकी अपनी संतान नहीं ,परिवार नहीं
पर वह सबकी मॉ बन गई
अपने बच्चों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराना
शिक्षा ,शादी से लेकर घरेलू जरूरते
सब अम्मा ने दिया
वे बेसहारों का सहारा बनी
लाचार की हिम्मत बनी
महिलाओं की रक्षक बनी
जनता की हिम्मत बनी
उन्होंने जनता का विश्वास कायम रखा
उनका भाग्य बदल कर रख दिया
तमिलनाडु की राजनीति में ही नहीं ,भारत की राजनीति में भी वर्चस्व कायम रखा
स्त्री शक्ति की प्रतीक बनी
सौभ्य चेहरा पर कठोर निर्णय
विरोधियों को मात देना
अभिनेत्री का रोल तो बखूबी निभाया
राजनीति में उतर कर उसकी चतुर खिलाडी भी बनी
उनके जाने से भारतीय राजनीति का एक सितारा टूट गया      पर
उसकी चमक बरसों कायम रहेगी

Tuesday, 6 December 2016

शांति और अशांति के बीच झूलता मनुष्य

शांति भी बोलती है बस उसका अहसास हो
रात्रि की नीरव शांति हो या प्रभात की बेला
चिडियॉ की चहचहाहट हो या रात्रि कीटक की ध्वनि
समुद्र की लहरों की आवाज या पत्तों की सरसराहट
मंदिर की घंटियॉ और शंखनाद
क्या वास्तव में शांति चाहता है मानव !?
ये जयघोष ,उल्लास ,भजन                                बम- फटाका .बैंड- बाजा,कानफोडू संगीत
हर उत्सव में घूम- घडाका
यही तो उसकी ख्वाहिश रही
यहॉ तक कि रात में भी उमडते- घूमडते विचार उसे शांत नहीं कर पाते
वह सबका आनन्द लेना चाहता है
शांति- शांति करता जरूर है पर शांति उसे भाती नहीं
मस्तिष्क चलबचल है ,हलचल होना स्वाभाविक है
हलचल के साथ जीना चाहता है
निर्माण स्वयं उसका है तो परिणाम भी उसे ही भुगतना है
चुप रहकर भी बोलता है
जब वाकई बोलता है तो सबको डवाडोल कर जाता है
शांति की खोज में पर्वतीय स्थल की सैर पर जाता है
पर वहॉ भी आवाज के बिना नहीं रह सकता
शांति और अशांति के बीच झूलता मानव
स्वयं समझ नहीं पाता कि
वह शांति चाहता है या नहीं

मिठास बिना जीवन बदरंग

जीवन में मिठास भरिए
मीठा बोलना सीखिए
कडवी नीम ही हमेशा मत बनिए
कडवाहट जीना दूभर कर देगी
मिठास ,जीवन में रस घोलती है
जीवन को खूबसूरत बनाती है
प्राणवायु का काम करती है
जीवन में स्वाद भरती है
कभी- कभी कडवाहट ठीक है पर हमेशा??
फिर तो आप अलग- थलग पड जाएगे
बात करने से भी लोग कतराएगे
मन से नहीं बस औपचारिकता निभाएगे
दोस्त कम दुश्मन ज्यादा बन जाएगे
बीमारी में ही कडवी गोली का प्रयोग
मधुमेह में ही नीम और करेला
पर जीवन में हर पल कडवाहट
अपना जीवन तो मुश्किल करेंगे ही
साथ में दूसरों का भी
मिठास बिना तो जीवन नीरस और बदरंग पड जाएगा
मिठास की तो आवश्यकता है

कहॉ है शांति!!!

शांति की खोज में भटकता फिरा मैं
पर कहीं शांति के दर्शन नहीं
घर हो या बाहर
बगीचा हो या मंदिर
पर्वतीय स्थल हो या नदी किनारा
प्रकृति तो शांत है
उसकी गूंजती स्वर लहरियॉ,शांति का आभास देती है
पर वह शांति कानफोडू नहीं मनभावन होती है
कानफोडू का निर्माण मनुष्य ने किया है प्रकृति ने नहीं
निर्झर ,सागर ,वर्षा की बूंदे
मन को आहादित कर जाती है
पशु- पक्षियों ,कीट- पंतगों की आवाज
पेड का सरसराना , हवा का डोलना
सृष्टि के दूसरे जीवों की उपस्थिती का अहसास दिलाती मनुष्य और प्रकृति में यही विरोधाभास है