Saturday, 4 January 2020

पतंग का भी धर्म

बचपन में पतंगे उडती थी
एक तरफ हिंदू बस्ती
दूसरी तरफ मुसलमानों का मुहल्ला
छत पर से जाती हुई पतंग को
मांजे में पत्थर बांध कर नीचे कर तोड़ लेते थे
मजा आता था
शैतानिया थी यह परेशान करने का
उडाने वाले समझ न पाते
बिना पेंच लडे
कट कैसे गई
पतंग पर यह नहीं लिखा होता था
यह किसकी है
कौन से धर्म वालों की है
पर जब दंगा हुआ
तब समझ आया
कि सब अलग अलग है
हम जहाँ सुरक्षित महसूस कर रहे थे
सुरक्षित नहीं थे
सब एक दूसरे के पडोसी
आज धर्म ने दीवार खडी की थी
अब डर लगता था
अब दूर से देखते थे
पर हिम्मत न होती थी
कब जाने बवाल हो जाय
खेल खेल में
खून खराबा हो जाय
अब केवल पतंग को निहारते
अब वह भी धर्म की हो गई थी

नागरिकता पर असमंजस क्यों ???

हम डरे हुए हैं
ऑखे खोली तो इसी देश में
हमारे पूर्वज भी यही के
फिर ऐसा क्यों ??
प्रमाण मांगा जाएंगा
पता नहीं कौन से
कहाँ से लाएंगे
हमारी पैदाइश तो उस समय की है
जब घर पर ही बच्चा जन्मता था
पाठशाला में दाखिला हुआ
अंदाज से लिखा दिया गया
हम तो उस देश के वासी हैं
जहाँ हमारे महापुरूषो के भी जन्म तिथि स्पष्ट नहीं है
कबीर कब जन्मे
तुलसी कब जन्मे
कौन जाने
राम जी का जन्म हुआ था या नहीं
जायसी के काव्य की कोई पद्मावती थी या नहीं
हमारे यहाँ सब पीढी दर पीढी स्थानांतरित होती रही
किस्से कहानियों के माध्यम से
आज जब हम आधुनिक युग के निवासी हैं
जब विश्व गुरु बनने के सपने देख रहा है देश
तब साक्ष्य भी चाहिए
हमारा इतना गौरवशाली इतिहास
हमारी वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान आधारित धर्म
साहित्य और योग
सब इसी अभाव में प्रकाश में नहीं आए
अब तो सचेते
जन्म का नहीं दूसरा और तो कुछ होगा
प्रमाण दे
और एक अपनी विशेष पहचान बनाए
आपके नाम का कार्ड
आपके नागरिक होने की पहचान
जो हमेशा आपके पास और साथ
तब जेब में रखकर अपने देशवासी होने का गर्व
फिर हिचक क्यों ?
सरकार को साथ दे
अपनी नागरिकता को कन्फर्म करें
एक जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाए

Friday, 3 January 2020

OLD IS GOLD

सब नया नया
अच्छा लगता है
मन को भाता है
नयी गाडी
नया घर
नया फर्नीचर
नये कपड़े नये जूते चप्पल
हर नया सामान
नये संबंध
नये लोग
फितरत है मानव की
वह हमेशा नयापन चाहता है
पुराने से ऊब जाता है
फिर चाहे वह सामान हो या इंसान
नया पन ठीक है
ताजगी कायम रहती है जीवन में
पर रिश्तों को भूल जाना
उन्हें नजरअंदाज करना
यह तो अपने आपको धोखा देना है
यह जितने पुराने होंगे
उतने ही निखरेगे
खिलेगे
मुस्कराएगे
वह दोस्त हो
सगे-संबंधी हो
पडोसी हो
रिश्तेदार हो
यह जितना आपको जानते हैं
समझते हैं
उतना नया नहीं
नयापन ठीक है
पर पुराने को भूलकर नहीं
OLD  IS GOLD

हम दौड़ लगा रहे थे

हम दौड़ लगा रहे थे
रफ्तार में भाग रहे थे
जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता चल रही थी
कभी तो आहट देती है
कभी अंजान बन जाती है
कभी-कभी कदमों की चाप की आवाज आती है
तब लगता है
सब ठीक है
जिंदगी मेहरबान है
हम खुश हो लेते हैं
अचानक जोरदार झटका देती है
सारे होशोहवास उडा डालती है
धम्म से जमीन पर ला पटकती है
हम अवाक से देखने लग जाते हैं
फिर हम उठने की कोशिश करते हैं
पर समय भी तो लगता है
वह जोर का झटका 
संभालने के लिए
पता नहीं क्या क्या करना पडता है
हम भागते तो हैं
गिरते ,उठते ,संभलते ,चोट को सहलाते