Friday, 21 May 2021

Happy international Tea day

चाय केवल चाय नहीं
जीवन का अभिन्न  अंग
सुबह की  शुरुआत  चाय की प्याली से
पूरे दिन ताजगी बरकरार

दोपहर  में  काम करते - करते  थकान
उसको  भगाते है चाय से
नींद की खुमारी 
मुख से ऊबासी
दो घूंट  ली सब गायब

रात को बेड पर  जाने से पहले
जरा चाय  हो जाएं
पच जाएं  खाया - पीया
परिवार  संग बतलाते  - बतियाते 
बिस्किट  हो या पकौड़ा
मीठा हो या नमकीन
सबके साथ यह लगता स्वादिष्ट
ठंडी हो या गर्मी  या फिर बरसात
सब मौसम में  रंग भरता
सर चढकर  बोलता

घर पर मेहमान
तब भी चाय रहती हाजिर
दोस्तों  और कलिग  संग
तब हो जाती बातें  लंबी  - लंबी
कटिंग  चाय  जेब  पर भी नहीं  भारी
टपरी  पर ही चुनाव  चर्चा
देश का कर्णधार  चुनना हो
तब इससे अच्छी  जगह नहीं

महंगी से मंहगी
सस्ती से सस्ती
पांच रूपये से लेकर पांच सौ रूपये
अमीर हो या गरीब
हिन्दू  हो या मुस्लिम
भारत हो या अमेरिका
सभी जगह इसका है बोलबाला
चाय की चहास 
सबसे  हैं  खास

आई रे आई हंसी

कितनी भी हो गमी
फिर भी कायम रखना अपनी हंसी
यह बडी नायाब है
दिल से दिल को जोड़ती है
अंजाने को भी अपना बनाती है
गम तो कुछ  पल का रहता है
इसका साथ तो हमेशा
एक - दूसरे  को पास - पास लाती है
हमेशा  होठों  पर रहती है
आ जाएं  तो रूकती  नहीं  है
मुस्कराती  है खिलखिलाती  है
जीवन रसमय - सुमधुर  बनाती है
यह जब खनकती  है
अपने साथ  वातावरण  को भी खनकाती  है
शरीर  का हर अंग डोलता है
जब खुलकर आती हंसी है
हंसना - मुस्कराना 
जीवन में  नए-नए  तराने छेडना
बस फिर सब मुश्किल  आसान
आई रे आई हंसी
           मस्ती  में  खिलखिलाई  हंसी
तब जिंदगी  भी मुस्कराई

Thursday, 20 May 2021

दुनिया जाएं भाड़ में ,हमें क्या पडी

कैसा  विचित्र  है  यह मन
एक जगह टिक कर रहता ही नहीं
न जाने  कहाँ  - कहाँ  विचरण  करता  है
मन विचलित  कर जाता है

कभी चला जाता है मुंबई
कभी महाराष्ट्र  के  सुदूर  इलाकों  में
कभी गुजरात  तो कभी दिल्ली
दिल दहला देने वाली खबरों  को  देखने

कितने लोग  मर रहे हैं
दवा के अभाव  में
ऑक्सीजन  के  अभाव  में
लाशे गंगा में  बहाई जा रही है
श्मसान  - शवगाह  मे जगह नहीं  है

करोना का कहर खत्म  ही नहीं
टावते  आ गया
चक्रवाती  तूफान  और ऑधी के साथ
न जाने  कितने  बेघर  हो गए
कितना कुछ  तहस-नहस  हो गया

कल गोवा आज महाराष्ट्र 
कल गुजरात परसों  हरियाणा
उसके बाद कहीं  और
विनाश की तांडव लीला जारी है
पता नहीं  किसको - किसको  अपने चपेट में  लेंगा

फिर लगता है
हम केवल सोच सकते हैं
कर तो कुछ  नहीं  सकते
फिर भी मनुष्य  तो हैं  न
भावनाएं  हैं  विचार  हैं
मन द्रवित  होता है
अंजाने  के  दुख से भी मन परेशान  होता है
यह तो नहीं  कह सकते
      दुनिया  जाएं  भाड़  में
              हमें  क्या पडी
हम  भी  इसी का हिस्सा  है
     सर्वे भवन्तु सुखिनः
     सर्वे  संतु निरामया 
     सर्वे भद्राणि पश्यंतु
     माँ  कश्चित् दुख भाग भवेत

अलविदा डाॅक्टर के के अग्रवाल सर

यह कहने वाले के के अग्रवाल चले गए
SO WHAT ??
क्या गजब का अपनापन  था
बात करते ही डर  छू मंतर
करोना ही नहीं  भय को भी भगाया
न जाने  कितने  करोड़  लोगों  को उनकी सलाह से फायदा हुआ
उनकी  शुरूआत  सेनेटाइजर  से हाथ धोने से लेकर बात करने तक
घर का भी अपनत्व से हालचाल पूछना
किसी बच्चे  का दादा या नाना बन बात करना
घर में  किस तरह रहना
ऑक्सीजन  लेवल किस तरह चेक करना
न जाने  कितनों  ने अस्पताल  जाने की बजाय घर में  ही रह उनकी सलाह मानी
ठीक भी हुएं
उनका हंसते - मुस्कराते  बात करना
पानी- चाय  की  चुस्कियां  लेते या कुछ चबाते
बातचीत  करना
ढाढ़स  बंधाना
दो साल के करीब  हो रहा है पर हर दिन तीन - चार बार लोगों  के  सामने आना
अगर ज्यादा  गंभीर  हो तो व्यक्तिगत रूप से बात करना
बीमारी  में  भी विश्राम  नहीं
मानवता के ऐसे  सेवक  बिरले ही  होते हैं
जब लोग अंधाधुंध  कमाने की और पेन्डामिक  का फायदा उठाने की कोशिश  कर  रहे हो
ऐसे  समय में  भी एक देवदूत  बन लोगों  को  दिन रात सलाह दे रहा हो
अच्छा  कर रहा हो
बहुत  बडी क्षति है  यह देश की
डाक्टर  साहब  आप  को जाना नहीं  था
ऐसे समय में  तो आपकी जरूरत  है
पर नियति के आगे किसकी चलती है
सबको जीवन दान  देने  वाला आज स्वयं  का ही जीवन खो बैठा
करोना  ने इतना कुठाराघात  किया है
हमारे  डाॅक्टर  को भी छीन ले जा रहा है
अलविदा  डाॅक्टर  साहब
पर आपका यह कहना
SO WHAT??
हम नहीं  भूलेंगे
बीमारी  ही नहीं  किसी भी बात में
हो गया तो क्या हुआ  ।घबराने की कौन-सी बात।
सब ठीक  हो जाएंगा ।
पर आपका जाना ठीक नहीं  हुआ ।