विश्वास था इसको थामे रखोगे
बात का क्या
वह तो आती - जाती है
आज कहा कल भूला
उसको क्या पकड़कर रखना
लेकिन वास्तविकता तो यह
लोग बात पकड़कर रखते हैं
हाथ छोड़ देते हैं
वही तो तुमने किया
तुम भी तो इसी दुनिया के
कुछ अलग तो नहीं
गलतफहमी में तो हम थे
गलत तो हम भी थे
हम ने क्यों विश्वास किया
भरोसा उस पर क्या करना
जो हर बात- बात पर बुरा मानता हो
वहाँ विश्वास नहीं भय का वास होगा
जहाँ भय वहाँ प्रेम कहाँ
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