Wednesday, 8 April 2026

हिम्मत

घना अंधेरा हो तब भी क्या 
दूर से आ रही एक रोशनी की किरण काफी है
लाख घने बादल छाए हो 
उसमें से एक इंद्रधनुष की पतली रेखा काफी है 
मरूस्थल में भी पौधे पनपते हैं 
जीवन की हर एक सांस बहुमूल्य है 
स्थायी यहाँ कुछ भी नहीं 
अंधेरा कब तक रहेगा 
बादल कब तक छाए रहेंगे 
उनको तो जाना ही है 
बस आशा रखना है 
वक्त- वक्त की बात है 
अच्छा भी आएंगा 
हिम्मत नहीं हारना है 

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