बचपन में सुना था कि कानून की देवी के ऑखो पर पट्टी बंधी रहती है क्योंकि पक्षपात न हो
सब एक समान है कानून की नजर में
अमीर हो या गरीब ,छोटा हो या बडा
बात सलमान खान की है वह बरी हो गए
अच्छी बात है ,उनके घरवाले और परिवार वाले भी प्रसन्न है
उनके प्रशंसकों के लिए भी जश्न का समय है
लगभग तेरह सालों के बाद राहत मिली है सलमान को
पर साथ में सच्चाई यह भी है कि उस रात एक्सीडेंट हुआ था
फुटपाथ पर सोनेवाले घायल हुए थे और एक शख्श की मृत्यु भी हुई थी
कोई तो गुनाहगार होगा ,वह कौन है?
यह सही है कोर्ट सबूत मॉगता है सबूतों के अभाव में वह कुछ नहीं कर सकता
लोग सलमान को बहुत चाहते हैं और चाहते भी थे कि वे बरी हो जाय
पर सच क्या है वह तो सलमान ही जानते होगे
फुटपाथ सोने के लिए निश्चित नहीं है पर क्यों लोग फुटपाथ पर सोते है इसक़ा जवाब कौन देगा
सलमान की रिहाई पर मरनेवाले के बेटे ने प्रतिक्रिया दी कि हम तो गरीब लोग है ,हम क्या कर सकते हैं
सरकार हमारी तरफ से लड रही थी वह नहीं चाहती सजा देना तो हम क्या कर सकते हैं
यह एक मजबूर व्यक्ति ही बोल सकता है
सलमान बहुत अच्छे इंसान है
बिंग ह्युमन संस्था चलाते हैं
बहुत मदद करते हैं लोगों की
पर फिर भी यह प्रश्नचिन्ह तो है
और उसी दिन कॉग्रेस और विपक्ष के नेता खडगे जी ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि इस देश में दो कानून है सत्ता पक्ष के लिए अलग और विपक्ष के लिए अलग
जान बूझ कर विपक्ष के लोगों पर कार्रवाई की जा रही है नेशनल हेराल्ड मामले के कारण विपक्ष संसद चलने नहीं दे रहा है
यह सत्ता पक्ष का भी आरोप है
अगर यह सब सही है तो लोकतंत्र के लिए योग्य नहीं है
न्याय और कानून सबके लिए समान होना चाहिए
चाहे वह कोई नेता हो या अभिनेता
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Saturday, 12 December 2015
क्या हमारे देश में दो कानून है? नेता और अभिनेता तथा सामान्य जनता के लिए
Saturday, 5 December 2015
हर किसी का वेतन सम्मान जनक जीने लायक रहना ही चाहिए फिर वह चाहे नेता हो या आम आदमी
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नेताओ और विधायकों की संख्या चार गुना बढा दी है
तर्क यह कि इससे भ्रष्टाचार कम होगा
उनका एक स्टेटमेंट कि प्रधानमंत्री का भी वेतन बढना चाहिए
अगर ओबामा प्रधानमंत्री से उनकी तनख्वाह के बारे में पूछेगे तो वे क्या कहेंगे
एक लाख से भी कम
कहीं न कहीं उनकी बात सही भी है
मोदी जी भी एक बार यह कह चुके हैं कि हम क्यों गरिबी में रहे
अपने आप को बडा क्यों नहीं दिखाए
यह मानसिकता बदलनी चाहिए
अच्छा कपडा ,खाना-पीना ,रहन-सहन हर किसी का अधिकार है
सादा जीवन उच्च विचार की बात तो ठीक है पर दिखावे के लिए
नेता सफेद कुरता और पैजामा पहनता है तो वह ज्यादा ईमानदार
क्यों वह सूट बूट में नहीं रह सकता
हॉ नेताओं की बात तो ठीक है पर सामान्य नौकरीपेशा
एक पुलिस वाले का वेतन कितना कम होता है उस पर चौबीस घंटे की ड्यूटी
क्यों नहीं उनका वेतन और सुविधाएं बढाने पर विचार किया जाता
वह रिश्वत क्यों लेता है सबसे बदनाम है यह विभाग
उन पर भी विचार किया जाय
शायद वे खुश रहेंगे तो भ्रष्टाचार खत्म होने में सहायता मिलेगी
ऐसे न जाने कितने विभाग है उन पर भी विचार करना चाहिए
हम कोई कार्य स्वेच्छा से क्यों नहीं कर सकते
पिछले दिनों एक परिवार को सिनेमा हॉल छोडने पर मजबूर किया गया क्योंकि वे राष्ट्रगान के समय खडे नहीं हुए और वह अपमान समझा गया
यह बात दिगर है कि वह परिवार दूसरे समुदाय से था
इसलिए और तूल दिया गया
बात आज की नहीं है पैतीस -चालीस साल पहले भी जब फिल्म समाप्त होने के बाद राष्ट्रगान शुरू होता था तो लोग बाहर निकलना शुरू कर देते थे
और इसमें हर जाति -वर्ग तथा उम्र के लोग रहते थे
फिर धीरे-धीरे यह बंद हो गया
अब कुछ समय से यह फिर दिखाना शुरू हुआ है
पर फिल्म के आरम्भ में
ऐसा क्यों हो रहा है हम अपनी इच्छा सेे यह क्यों नहीं कर सकते
सबके लिए बाध्य किया जाता है तभी करेंगे
हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है विदेशी भाषा बोलने में गर्व का अनुभव करते है
विदेशी चीजों और विदेश में रहना गर्व की बात
अपने देश की बुराई करने में आनंद
१५अगस्त और २६ जनवरी को छुट्टी मिलती है इसलिए खुशी
वहीं अगर इतवार या छुट्टी के दिन आ जाये तो सारी खुशी काफूर
क्यों देशभक्ति को लादा जाता है
यह भावना तो मन से निकलनी चाहिए
राष्ट्रगान के समय मजबूरी से नहीं अपने आप खडे हो जाना
यह भावना तो होनी चाहिए
माना कि समय बदल चुका है नई पीढी को इसका भान नहीं है पर अगर बचपन से ही यह भावना मजबूत की जाय तो जबरदस्ती लादने का कोई कारण नहीं
Thursday, 3 December 2015
दस वर्ष बाद चेन्नई का हाल भी मुंबई जैसा -वह पानी का सैलाब अब तक जेहन में
चेन्नई में आफत की बारीश हो रही है
पूरा शहर जलमग्न हो गया है
सारा काम ठप पड गया है
लोग पानी से घिरे हुए है जो शहर गर्म रहता था आज वहॉ बारीश का प्रकोप है
हवाई अड्डा ,सडक से लेकर घरों तक
सब रूक गया है आज प्रधानमंत्री ने दौरा भी किया
और सहायता की घोषण् भी की
यही हाल दो हजार पॉच में मुंबई का हुआ था
लोगो ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी
सारी मुंबई पानी में जैसे डूब सी गई थी
लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर यह हो क्या रहा है
लोग फँसे हुए थे हर जगह
न जाने कितने लोगों की मौत हो गई
कुछ तो कार में बैठे बैठे ही दम घुटने के कारण मर गए
तबेलो की भैसे वैसी ही जंजीरों में बंधी रह गई
खोलने का मौका ही नहीं मिला
कुत्ते ,बिल्ली ,यहॉ तक की चुहे भी
लोग सतर्क नहीं थे पुल पर पूरी पूरी रात गुजारी
पर एक बात थी मुंबई वालों का जज्बा देखने लायक था
हर कोई मदद के लिए आगे आया था
अंजान लोग ने न जाने कितनी जाने बचाई थी
आज टी वी पर वही दृश्य देख रोंगटे खडे हो जा रहे हैं
जल्द से जल्द इस आपदा से छुटकारा मिले और जीवन फिर पटरी पर दौरे