बुन्देलखंड में लोग घास की रोटी खाने पर मजबूर है
टेलीविजन पर यह खबर दिखाई जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने अपने अधिकारियों को वास्तविकता का पता लगाने के लिए भेजा
ईतिहास में पढा था कि राणाप्रताप जंगल में घास की रोटी खाइ पर अकबर के सामने घुटने नहीं टेके
यह तो एक राजा के स्वाभिमान का सवाल था
लेकिन बुन्देलखंड के ग्रामीणों की तो मजबूरी है
साग या चटनी के साथ घास की रोटी खा रहे है
इसी उत्तरप्रदेश में सैफई महोत्सव भी मनाया जाता है
जिस पर करोडो रूपये खर्च किए जाते हैं
समाजवादी कहे जानेवाले मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर
प्रधानमंत्री के स्वागत में लाखों -करोडो का खर्च मंच की साज सज्जा करने में चला जाता है
बसपा केआलाकमान को रूपयों से तोला जाता है
मतलब देश गरीब तो नहीं है
गोदाम में अनाज सड जाते हैं रखने की जगह न होने के कारण
फिर लोग इतने मजबूर क्यों कि दो समय की रोटी भी मयस्सर नहीं
संसद में बहस चलती रहती है पर इस बात पर नहीं
केन्द्र में बैठी सरकार या अखिलेश की सरकार क्या कर रही है
तमिलनाडू से सीखे जहॉ अम्मा जयललिता गरीबों को बिल्कुल कम में अनाज उपलब्ध कराती है
यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ लोगों के पास गाडियों की संख्या बढ रही है जिससे प्रदूषण फैल रहा है तो दूसरी तरफ कोई घास की रोटी खा रहा है
रोटी ,कपडा और रहने के लिए छत तो मिलनी ही चाहिए
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Tuesday, 22 December 2015
२१ वीं सदी में घास की रोटी खाने को मजबूर
Monday, 21 December 2015
निर्भया के अपराधियों को सजा हो
मेरी बेटी का नाम ज्योति सिंह है और यह बताने में मुझे कोई शर्म नहीं है बल्कि दुख है
यह कहना है एक मॉ का जिसकी बेटी इन हैवानों का शिकार बन गई
क्यों ज्योति का नाम छिपाया गया और निर्भया नाम दिया गया
क्यों छिपाया जाता है इसलिए कि लडकी और घरवालों की बदनामी होगी
लोग मन मसोसकर रह जाते हैं और अपराधियों को शह मिलती है
हर रोज ऐसे कांड हो रहे है पर कितने पुलिस के पास और प्रकाश में आते हैं
डर लगता है कि बदनामी तो होगी ही भविष्य भी चौपट होगा
कौन शादी करेंगा
यह प्रश्नचिन्ह है माता पिता के सामने
लडकी को ही दोषी ठहराया जाता है
इतनी रात को घर से क्यों निकली
ऐसे कपडे क्यों पहने इत्यादि
अगर ससुराल से पीडित हो लडकी घर आती है तो लोग पूछ पूछकर परेशान कर डालते हैं
कब हमारे लोगों की मानसिकता बदलेगी
पीडित को ही दोषी कब तक माना जाएगा
न जाने कितने घरों में ऐसी निर्भयाएँ होगी
जिनका लोकलाज के डर से मुँह बंद कर दिया जाता है
और अपराधी सीना तान कर घूमते रहते हैं
दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए
नाबालिग अपराध करते हुए नहीं था क्या.
अगर नाबालिग समझ कर अपराधी को छोड दिया जाता है तो मुमकिन है भविष्य में वह ऐसे और घिनौने अपराध करेगा
कानून में भी ऐसे जघन्य अपराधियों के लिए नया कानून बनाना चाहिए
लेकिन इनको किसी भी हालात में छोडना नहीं चाहिए
Saturday, 12 December 2015
जन्मदिन मुबारक हो -धन्यवाद दिसम्बर
महाराष्ट्र के कद्दावर नेता शरद पवार का जन्मदिन बारह दिसम्बर जो उनका ७५ वा जन्मदिवस है
लोकसभा के सदस्य सीनियर मराठा लीडर ,विचारक,और राष्ट्रवादी कॉग्रेस के संस्थापक
महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे अनुभवी और चमकदार सितारा
दूसरा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ८० साल पूरे कर रहे है मुखर्जी जैसा नेता देश को सौभाग्य से मिलता है ऐसा बुद्धिमान तथा हर पद को बखूबी संभालने वाले चाहे वह रक्षा मंत्री का पद हो या वित्त मंत्री का
सौम्य और मृदु स्वभाव वाले हमारे राष्ट्रपति की देश को बहुत जरूरत है ंअभिनेता दिलीप कुमार जो जो९०से भी ज्यादा वंसत देख चुके हैं ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर दिलीप साहब अभी भी जवान हैं
हमारे कवि और एक मंजे हुए तथा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का ८० वा जन्मदिन है वाजपेयी जी का व्यक्तित्व फिर दिखाई दे मुमकिन नहीं
इसके अलावा कॉग्रेस अध्यक्षा सोनिया गॉधी का जन्मदिन ९दिसम्बर एक ऐसी शख्सियत जो ईटली से आई और भारत की होकर रह गई
भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया
आज भी कुछ प्रदेश वाले हिन्दी नहीं बोल पाते वही सोनिया जी की हिन्दी लाजवाब कही जा सकती है
यह सभी लोग सही सलामत रहें
सभी को जन्मदिन मुबारक और ये दिन हर साल आते रहें
शिक्षा सबका मौलिक अधिकार है तो अगर चुनाव के लिए मापदंड हो नेताओ के लिए -इस बात पर हो -हल्ला क्यों?
हरियाणा सरकार ने ग्राम पंचायत चुनाव के लिए उम्मीदवारों के लिए शिक्षा का मापदंड तय किया कि नौंवी पास होना ही चाहिए
इस पर लोग हाय तौबा मचा रहे है
शिक्षा हर व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है
सरकार ने इसलिए हर जगह शिक्षा की व्यवस्था की है
हर तबके के लोगों के लिए
फिर क्या मजबूरी है
यह सही है कि अनुभव मायने रखता है पर शिक्षा
उसका तो कोई सानी नहीं
आज भी बडे बडे शहरों में भी ऐसे लोग मिलेगे जो साक्षर नहीं है गॉवों की तो बात ही अलग है.
ऐसा नहीं कि पाठशाला नहीं थी
आज हम विकास की दिशा में बढ रहे है
हमारे नेता भी शिक्षित होना चाहिए
आज तो यह विडंबना है कि नेता का बेटा है इसलिए मंत्री बना दिया गया भले अनुभव और शिक्षा दोनों ही न हो
कितनों की डिग्री फर्जी निकली
और ये ही लोग हमारे योग्य अधिकारियों को उंगली पर नचाते हैं
उनका अपमान करते हैं
हमारे अधिकारियों की योग्यता उनकी सुरक्षा करने में चली जाती है
हमारे पुराने नेताओ को याद करिए ज्यादातर सब पढे लिखे थे और है भी
और जो नहीं थे उनहोंने अनुभव की घुट्टी घोल कर पिया था
पर आज क्या हो रहा है
अगर शिक्षा मौलिक अधिकार है तो फिर क्यों नहीं डिग्री का भी मापदंड होना चाहिए
और नौकरियों की तरह
एक पढा -लिखा नेता अच्छी तरह से काम करेंगा
जो स्वंय नहीं समझ पाएगा वह काम क्या करेगा
जमाना तरक्की कर रहा है
नेट और कम्पूयटर का युग है तो नेता क्यों पीछे रहे
सब जगह यह कानून लागू करना चाहिए
और हर पद के लिए क्वालिफिकेशन भी