Wednesday, 30 January 2019

शब्द अनमोल है

शब्द मर्म है
शब्द माया है
शब्द ममता है
शब्द त्याग है
शब्द आँसू है
शब्द स्नेह है
शब्द अपनत्व है
शब्द गति है
शब्द धडकन है
शब्द प्रेरणा है
शब्द घृणा और तिरस्कार भी है
शब्द विरह है
शब्द संपत्ति है

जीवन को चलायमान
जीवन को गतिशील
जीवन को सार्थक
जीवन को दूसरों के साथ जोड़ना
यही उसका कर्म
उसका धर्म
उसका सत्य

शब्द का भंडार विशाल
उसमे गोते नहीं लगाना है
संपत्ति को संभाल कर रखना है
सोच समझ कर खर्च करना है
यह विशाल संपदा
बेबात पर व्यर्थ नहीं करना है
अनमोल है
इसके मोती को चुनकर इस्तेमाल करना है

शब्द भी बोलते हैं

शब्दों का अपना संसार
शब्द अच्छे हो सकते हैं
बुरे हो सकते हैं
मीठे हो सकते हैं
कड़वे हो सकते हैं
कठोर हो सकते हैं
नम्र हो सकते हैं
व्यंग्य हो सकते हैं
मजाकिया हो सकते हैं
पीडादायक हो सकते हैं
भावनात्मक हो सकते हैं
हास्यास्पद हो सकते हैं

सारी सृष्टि शब्दों के मायाजाल मे जकडी है
कुछ हंसाते हैं
कुछ दुखी करते हैं
कुछ अंदर तक भेद जाते हैं

शब्द ही जो थे महारानी द्रौपदी के
अपमानित दुर्योधन और महाभारत का एक कारण
शरीर का घाव भर जाता है
शब्दों के घाव नहीं
व्यक्ति उसी मे अपना जीवन केन्द्रित कर लेता है
वह बदले की भावना हो
या फिर प्रेम की
कभी कभार मौन का चोला भी पहन लेता है

शब्द दूर ले जा सकते हैं
पास ला सकते हैं
प्रेम और भाईचारा निर्माण कर सकते हैं
वैमनस्यता बढ़ा सकते हैं
यहाँ तक कि जान भी ले सकते हैं

जीवन मे शब्दों का चयन सोच समझ कर करना है
शब्दावली गरिमामय हो
एक बार निकल गए
तब वापसी भी नामुमकिन
शब्दों से ही तो संसार संचालित
शब्द ही संस्कृति
शब्द ही संसार
शब्द ही संस्कार
शब्द ही हमारी पहचान

Tuesday, 29 January 2019

लुकाछिपी जिंदगी का

बचपन मे लुका छिपी खेला जाता
बचपन भोला और मासूमियत से भरा था
कोई दिखावा नहीं
जो है जैसा है वैसा ही दिखता
बड़़े हुए
बड़प्पन ने दस्तक दी
कुछ बताते
कुछ छिपाते
यह एक अलग तरह का लुकाछिपी का खेल था
कुछ सच
कुछ झूठ
कुछ बनावट
कुछ दिखावट
मुखौटा ओढ़े रहे
एक ही नहीं
एक के बाद एक मुखौटा ओढ़ते रहे
बचपन की सच्चाइ - मासूमियत कही गायब
अब तो लगता है
जिंदगी ही लुकाछिपी का खेल रही है
कब खुशियों से भर जाएगी
कब दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा
जब तक हम संभले
हंसती हुई
मुंह चिढ़ाती गायब ।

रंगों का संसार

रंग का भी अपना संसार
हर रंग कुछ कहता है
रंगों का अपना इतिहास
रंगों की अपनी संस्कृति
हरा है समृद्धि का
लाल है मंगल का
नीला का नीलम से
पीले का पुखराज से
रत्नों से भी रत्नाकर से भी
ज्योतिष भी इनसे संबंधित
ईश्वर भी रंगों मे परिचित
काला शनिदेव का
सफेद भगवान शिव का
चंद्रमा का भी
शांति का भी
मृत्यु के बाद की अचर शांति
कफन का रंग भी सफेद
सफेद मे ही सब रंग समाए
जीवन इंद्रधनुषी रंग से बना
सफेद से ही निर्माण
सफेद मे ही अंत
शांति मे लीन हो प्रस्थान
यही है रंगों का संसार ।