Friday, 20 September 2019

सब कुछ यही रह जाना है

जीवन का सार
नहीं रहती हमेशा जवानी की बहार
सब कुछ यही रह जाना है
बस अकेले और खाली हाथ ही जाना है
न यह शरीर
न संपत्ति
न परिवार
यहाँ तक कि अपना शरीर भी छोड़ जाना है
आज नहीं तो कल जाना है
सब कुछ यही रह जाना है

बहुत इतराया
बहुत कमाया
बहुत जतन किया
बहुत अभिमान किया
बहुत नाम और शोहरत हासिल की
लेकिन संग तो कुछ भी नहीं
यह कडवा सच जीवन का
आज नहीं तो कल जाना है
सब कुछ यही रह जाना है

इत्र और पसीना

इनके पसीने की गंध आती है
हमेशा धूल और मिट्टी से भरा
मटमैले और गंदे से
बाल भी बेतरतीब
बच्चों को यह रूप नहीं भाता
पूछते हैं कि
पापा इतने गंदे क्यों रहते हैं
बेचारे छोटे है न
ना समझ है
इन्हें क्या पता
पापा के इन्हीं पसीने की बदौलत
घर में खुशियाँ महकती है
वे गंदे रहते हैं
तभी वे साफ कपडे पहनते हैं
उनका पेट भरता है
वे मजदूरी करते हैं
पैसा लाते हैं
तभी चेहरे पर मुस्कान आती है
अपना खून पसीना बहाते हैं
तब सब चैन से जीते हैं
यह जीवन की जद्दोजहद है
इस पसीने की गंध का मुकाबला
इत्र की खुशबू से नहीं हो सकता
इत्र शरीर महकाता है
यह तो जीवन महकाता है
अपनो और अपने परिवार का

श्राद्ध का असली कारण

#श्राद्ध_का_असली_कारण

क्या हमारे ऋषि मुनि पागल थे?
जो कौवौ के लिए खीर बनाने को कहते थे?
और कहते थे कि कव्वौ को खिलाएंगे तो हमारे पूर्वजों को मिल जाएगा?
नहीं, हमारे ऋषि मुनि क्रांतिकारी विचारों के थे।
*यह है सही कारण।*

तुमने किसी भी दिन पीपल और बड़ के पौधे लगाए हैं?
या किसी को लगाते हुए देखा है?
क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं?
इसका जवाब है ना.. नहीं....
बड़ या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु नहीं लगेगी।
कारण प्रकृति/कुदरत ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।
यह दोनों वृक्षों के टेटे कव्वे खाते हैं और उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसीग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं। उसके पश्चात
कौवे जहां-जहां बीट करते हैं वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं
पिपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन O2  छोड़ता है और बड़ के औषधि गुण अपरम्पार है।
देखो अगर यह दोनों वृक्षों को उगाना है तो बिना कौवे की मदद से संभव नहीं है इसलिए कव्वे को बचाना पड़ेगा।
और यह होगा कैसे?
मादा कौआ भादर महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।
तो इस नयी पीडी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है इसलिए ऋषि मुनियों ने
कव्वौ के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार
की व्यवस्था कर दी।
जिससे कि कौवौ की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जायें.......

इसलिए दिमाग को दौड़ाए बिना श्राघ्द करना प्रकृति के रक्षण के लिए और
घ्यान रखना जब भी बड़ और पीपल के पेड़ को देखो तो अपने पूर्वज तो याद आयेगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।
🙏सनातन धर्म पे उंगली उठाने वालों, पहले सनातन धर्म को जानो फिर उन पर उंगली उठाओ, जब आपके विज्ञान का वि भी नही था हमारे सनातन धर्म को पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है, कौन सा चीज खाने लायक है कौन सा नही.. अथाह ज्ञान का भंडार है हमारा सनातन धर्म और उनके नियम, मैकाले के शिक्षा पद्धति में पढ़ के केवल अपने पूर्वजो ऋषि मुनियों के नियमो पे उंगली उठाने के बजाय , उसके गहराई को जानिये🙏

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Wednesday, 18 September 2019

तितलियों को उडाते मोदीजी

तितलियों को आजाद किया
वह उडी खुशी खुशी
कितना अच्छा लगा
रंग-बिरंगी तितलियों को देख
अपनी सामर्थ्य भर उडेगी
फूल फूल पर मंडरांएगी
बगिया में विचरण करेंगी

अचानक ख्याल आया
आज सही अर्थो में कश्मीर भी तो आजाद हुआ
अब वे चैन से जिएंगे
आंतकवादियों से मुक्ति मिलेगी
जो जाना चाहते हैं लौटे अपनी जन्नत में
बहुत सहा है
घरबार छोड़ा है
अपने ही देश में विस्थापितो की जिंदगी गुजारी है

हमारा देश एक शानदार बगिया है
सबको अपनी अपनी आजादी है
जिसको जहाँ जाना है जाए
जहाँ रहना है रहे
यह तो अधिकार है हर नागरिक का
अब तितलियाँ उडान भर रही होगी
वैसे ही कश्मीर और निखर उठेगा
हमारे प्यारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में
सरदार सरोवर का दृश्य देखकर
मन सोच उठा
जिस तरह मोदीजी तितलियों को उडा रहे हैं
वैसे ही कश्मीरियो को भी उडान भरने का मौका दे रहे हैं