सुबह सुबह चिडियाँ बोली
ची ची ची ची
सोना था हमको
पर यह कहाँ मानने वाली
अपनी आदत से बाज आने वाली
है छोटी सी
चिचियाती है तेज सी
सुबह- सुबह ही उठती है
इधर उधर डोलती हैं
खूब आवाज करती है
जिद्दी है
आखिर सबको जगा कर ही मानती है
कोई सोता
यह इनको नहीं भाता
सुबह सुबह ही आती हैं
यहाँ वहाँ और पेडो पर बैठ चहचहाती है
खुशी में डोलती है
सुरीली संगीत छेडती हैं
अन्न का दाना मिलता
उसको चोंच में उठा फुर्र से उड जाती है।
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Thursday, 3 June 2021
चिडियाँ
तांगा वाला
आया आया तांगेवाला आया
उसमें थे उसके दो - दो घोड़े
लाल - काले और फुर्तीले
तांगा देख मन ललचाया
मन किया आज इस पर सैर किया जाय
बैठ गए हम सब
सरपट दौड़े घोड़े
जरा रूके पीठ पर सट से चाबुक पडती
तबकब तबकब घोड़े दौडते
हम जी भर मजे उठाएं
तांगा इतना भाया
कार भी बेकार लगा
उतर तांगे से घोड़े पर हाथ फिराया
खुश हो लगा सर हिलाने
गर्दन की घंटी बजी
टन टन टन
हम भी हंस पडे
हा हा हा
Tuesday, 1 June 2021
आम
सुबह - सुबह लिया राम का नाम
तब मिला हरा - हरा कच्चा आम
इस आम से बना अचार
तेल - मसाला डाला
बरनी में सजाया
साल भर रहेंगा
दाल - चावल पर सजेगा
चटकारे ले - लेकर सब खाएंगे
मुंह और जीभ सिकोड़ते
चाट - चाट कर खाएंगे
आम तो आम है
तभी तो खास है
कच्चा या पक्का
हर स्वाद है लाजवाब
रस पिओ या अचार खाओ
दाल - आमटी में डालो
गुठली भी में भी दम
वह भी भाती
आम का रहता हमेशा इंतजार
हर व्यक्ति करता है
किसी न किसी तरह इंतजाम
गाँव अब पहले जैसा नहीं रहा
गाँव अब वह गाॅव नहीं रहे
पंचायते अब वह पहले जैसी नहीं रही
समाज अब पहले जैसा नहीं रहा
परिवार अब पहले जैसा नहीं रहा
विकास की ऑधी भी पहुँची है वहाँ
अब मेहमान आने पर रस और चना - कुरमुरा नहीं
नमकीन और चाय परोसी जाती है
अब लुंगी- धोती ,पाजामा- कुर्ता नहीं
हाफ पैंट और जींस पहना जाता है
अब हाथ में फावडा कुदाल नहीं मोबाईल रहता है
साईकिल नहीं बाइक पर सवारी की जाती है
चलना तो दूर की बात
हर दूसरे दिन मांस - मदिरा पर ताव
काम हो या न हो
ठाठ खूब चाहिए
अब महफिल नहीं सजती
न बैठकें ही जमती है
हर कोई अपने मे व्यस्त हैं
अब आ रहा कोटा से सस्ता अनाज
सरकार से भी निधि
तरह - तरह की पेंशन की भरमार है
मेहनत की कोई नहीं दरकार है
पेट तो भर ही जाएंगा
गुजारा चल ही जाएंगा
तभी निठल्लो की भी भरमार है
सबका साथ सबका विकास
सबको मकान
सबको शौचालय
सबको भोजन
यह तो सरकार की पेशकश है
जो ज्यादा देगा वह ही जीतेगा
भ्रष्टाचार की बात तो हवा हवाई
सब ऊपर से नीचे तक लिप्त है
खातें में पैसा आया तो क्या हुआ
उस पर अधिकार सभी का है
प्रधान से लेकर आला अफसर तक
गाँव अब वह गाॅव नहीं रहें
न वह पहले जैसी बात रहीं।