Friday, 18 June 2021

मौसम का मिजाज

मौसम  का  मिजाज
कब बदले
यह कोई  नहीं  जानता
कभी-कभी  मौसम वैज्ञानिकों  की भविष्यवाणी गलत भी कभी सही भी
आज का कहा तो आज नहीं  एक - दो दिन बाद बरखा होगी या और कुछ
इंसान  का मिजाज कब और  क्यों ??
कहाँ  और कैसे ??
कब कहाँ पलटेगा
यह कोई  नहीं जानता
मुखौटा  पर मुखौटा  ओढे हुए
न जाने किस - किसकी खाल पहने हुए
जानवर  के भेष में  इंसान
देवता के भेष में  शैतान
सांप जहरीला  है यह सर्वविदित  है
इंसान  का पता नहीं  चलता
विश्वास  करना मुश्किल
सबसे ज्यादा  धोखा अपने कहे जाने वालों  से
अपने परम मित्र  से
अपने ही परिवार जनों  से भी
तब क्या  करें??
इतिहास भी गवाह  है
न भाई,भाई का
न बाप , बेटे का
न बेटा ,बाप का
न पति ,पत्नी  की
यहाँ तक कि जन्म देनेवाली जननी भी ।

धूप - छाँव का खेला है

धूप - छाँव  का खेला है
यह जीवन का रेला है
अपने - अपने रंग बदलते
यह दुनिया का मेला है
कभी घनी धूप
कभी कडाके की ठंडी
कभी  घना कुहासा
कभी मुसलाधार  बरसात
कभी बादलों  की गडगडाहट
कभी बिजली का चमकना
फिर भी उसमें दिखता इंद्रधनुष  है

कुछ- कुछ  अच्छी  भी लगती है
हल्की-हल्की  धूप
कुछ  अच्छी  लगती है
गुलाबी - गुलाबी ठंडी
कुछ अच्छी  लगती है
रिमझिम  रिमझिम  फुहारे

पतझड़  है तो वसंत  भी तो है
हर मौसम  के अपने  - अपने रंग
अपने- अपने  ढंग
जीवन  भी तो यही है
कभी धूप
कभी छांव
कही पतझड़
कही वसंत
तब भी जब आता है इंद्रधनुष
तब वह भी लगता प्यारा
जीवन को बनाता न्यारा

दशा दस साल , चलन चालीस साल

दशा दस साल
चलन चालीस साल
यह कहावत सुनी
लगा एकदम  सही कहा है पुरखों  ने
बहुतों  को देखा
बडा बनते
धन और नाम कमाते
जमीन पर गिरते भी देखा
रावण हो या कंस
विजय माल्या हो या मेहुल चौकसी
बडे से बडा डाॅन
बडे से बडा बाहुबली
बडे से बडा माफिया
बडे से बडा नेता
जिनकी एक समय जय - जयकार
वही दूसरे समय गलियों  के  पात्र
डरा सकते है पर कितने समय
दिलों पर राज करना है तो अपने  आचरण  से
डर और खौफ से नहीं
नहीं  तो अंत विकास दुबे की तरह
अपने कर्मों  का परिणाम  तो भुगतना ही पडता है
आज कलाम और भगतसिंह  को लोग पीढी  दर पीढी याद रखेंगे
वह भी सम्मान  से
वही एक बदमाश को घृणा  की दृष्टि  से
यहाँ  तक कि  उसके परिवार जनों  को  भी
तब ऐसा कुछ  करिए
चालीस साल क्या
लोग बरसों  तक याद रखें

Wednesday, 16 June 2021

अच्छाई

आप में  क्या भरा है
स्नेह, करूणा ,ममता
क्षमाशीलता, दयाशीलता
यह तो आपका  व्यवहार दर्शाता है
नींबू से रस निचोड़ो तब वह खट्टा
करेला से रस निचोड़ो तब वह कडवा
आम से रस निचोड़ो तब वह मीठा
मतलब जो जैसा है वैसा ही परिणाम
आप में  क्या है
कहीं द्वेष , क्रोध  ,हिंसा  तो नहीं
चेहरे पर भी वही भाव
चेहरा भी विद्रूप नजर आएगा
तब अगर मन ठीक हो
तब चेहरे पर हास्य और स्मित
खिला-खिला  ,शांत और सौभ्य
क्यों  दूसरे के कारण  अपने को खराब करना
अंदर भी बाहर भी
अच्छे  रहिए
अच्छाई , अच्छाई  ही रहती है
बुराई कभी उसकी जगह नहीं  ले सकती