Tuesday, 29 January 2019

शब्द ही हमारी पहचान है

मैं ही शब्द
मैं ही अर्थ
मैं ही एहसास
मैं ही दुनिया- संसार
मैं ही सृजनहार
खेल है शब्दों का
शब्दावली बेशक अलग - अलग
यह उम्र हमें नचाता है
अपना जाल बिछाता है
बाद मे तमाशा भी देखता है

अतीत के भंवर मे गोते लगाता
कानों मे कुछ न कुछ फुसफुसाता
धीरे धीरे हम पर हावी हो जाता
हमें बरगलाता
अपनी गिरफ्त मे कस कर धर लेता
हम छटपटाते रहते
लेकिन बाहर न निकल पाते

भविष्य मे भी गोते लगाते
लगातार उसी पर विचार करते
आने वाले कल की चिंता मे
अपना आज भी दांव पर लगा देते

बेचारा वर्तमान इन दोनों के बीच पीसता रहता
कभी चैन की सांस नहीं लैता
स्वयं को जी ही नहीं पाता
जबकि वह भी जानता है
सत्य केवल वही है
पल भी वही है
समय भी वही है

चलो इस मायाजाल से मुक्त हुआ जाय
अपने शब्दों को कायम रखा जाय
जो हुआ सो हुआ
जो होगा सो होगा
उसमे वक्त नहीं गंवाना है

चाहा - अनचाहा
पसंद - नापसंद
मान - अपमान
इन सबसे परे हटना है
हम जो है वह हमारे शब्दों से हैं
शब्द ही हमारी पहचान है ।

Sunday, 27 January 2019

आज वह बात नहीं है

तब पैसा न था
समय न था
साथ भी न था
किराए का घर था
आज पैसा भी है
समय भी है
साथ भी है
अपना घर भी है
पर वह बात नही है
उम्र बीत गई
गृहस्थी का जुगाड़ करते
मैं और तुम अलग-अलग
नौकरी के कारण
वर्ष में दो या तीन बार छूट्टी
पर वह भी साथ सुकून से नहीं
जब तुम आते
पर मैं काम पर रहती
शाम को थकी हारी आती
कभी बच्चों की पढाई आड़े
कभी घूमने नहीं गए
रिटायर होने पर जाएंगे

आज वह भी वक्त आ गया
सेवानिवृत्त हो गए
बच्चे बड़़े हो गए
अपना घर हो गया
पर शौक अधूरे ही रह गए
शरीर थक गया है
बीमारियों ने घेर लिया है
कान्फीडेंस रहा नहीं
अब तो रास्ता क्रास करने मे भी डर
जहाँ पहले दौड़ कर बस और ट्रेन पकड़ने वाले
पैर अब खिसकते घसीटते लगते हैं
हाथ कांपते हैं
दृष्टि धुमिल हो चली है
आत्म नियंत्रण कम हो गया है
खर्च को पैसा भी है
पर वह बात नहीं है

हम भी वही
तुम भी वही
पर लोग अजनबी लगते हैं
वक्त जो बदल गया है
जब स्वयं का शरीर ही साथ न दे
तब दूसरों से क्या अपेक्षा
ईश्वर से भी कोई शिकायत नहीं
जीवन है
पर वह बात नहीं है

जूते को मत समझिए साधारण

जूता सबसे उपेक्षित
घर की जूती है यह तो सबसे प्रचलित मुहावरा
दरवाजे के किसी कोने मे इसकी जगह
इसका महत्व सबसे अंत
कभी सोचा है यह उपेक्षित
हमारे पूरे शरीर का भार उठाता है
होता है हल्का पर रहता मजबूती से
यह हमें बहुत कुछ सिखाता है

कंकड़ आ जाय तो यह सहन नहीं करता
उसको निकाल कर ही दम लेता है
अनचाहा को बर्दाश्त नहीं करना है

नया होता है तो काटता है
धीरे धीरे अभयस्त हो जाता है
यानि नये को स्वीकार करना है
चाहे वह टेक्नोलॉजी हो या रिवाज

हमेशा जोड़ी मे रहता है
एक न रहे तो दूसरा बेकार
यानि जीवन में अकेले नहीं
साथ चलने मे सार्थकता है
एक आगे तो दूसरा पीछे
फिर भी द्वेष नहीं
सहयोग की भावना

हमेशा इसको पालिश और सफाई की जरुरत
नहीं तो गंदा और बदबूदार
जीवन की कुछ सड़ियल बातों को छोड़ना है
हर वक्त समय के अनुसार चलना है

कड़ी धूप ,कड़कती ठंडी
कीचड भरी बरसात
हर मौसम का सामना
यही तो हमें भी करना है
हर परिस्थिति का सामना करना है
घबराना कतई नहीं है

यह कम कीमत में भी उपलब्ध
मंहगे से मंहगा भी
अमीर गरीब
जाति धर्म
प्रांत देश
सुंदर या साधारण
सबकी आवश्यकता
कोई भेदभाव नहीं

है तो यह जूता
पर संदेश देता बड़ा

जीवन और मोबाइल

मोबाइल है
लाइक और डिसलाइक
पसंद और नापसंद
अच्छा और बुरा
यह तो संभव है
ब्लाक कर
डिलेट कर
सब कुछ संभव है

यह संभावना हर  जगह नहीं
कुछ यादें जो मिटाए नहीं मिटती
वह अच्छी हो सकती है
बुरी हो सकते है
पसंद हो सकती है
नापसंद हो सकती
चाहा या अनचाहा भी

इसे डिलेट या ब्लॉक नहीं कर सकते
चाहकर भी
कुछ मुस्कान लाती है
कुछ भावविभोर करती है
कुछ आँसू ले आती है
कुछ परेशान भी करती है
लेकिन इस पर बस नहीं
यह हमारे साथ ही रहती है ताउम्र

मोबाइल और जीवन मे यही फर्क है
वह मशीन है
निर्जीव है
जीवन सजीव है
चेतन है
उसके पास वह बटन नहीं है
स्वीच आँफ करने का
ब्लाक करने का
डिलीट करने का
हम मोबाइल को संचालित करते हैं
मोबाइल हमें नहीं
मशीन जीवन तो नहीं है
हो भी नहीं सकता
तरक्की कितनी भी हो
जीवन सब पर भारी है