Wednesday, 16 July 2025

राधिका यादव -- दोषी कौन ??

राधिका यादव एक टेनिस खिलाड़ी 
न जाने कितने मेडल अपने नाम किया था 
उसकी इस कामयाबी के पीछे पिता का हाथ होगा जिन्होंने प्रोत्साहित किया होगा 
पैसे खर्च किए होगे 
उसी पिता ने उस बेटी की गोली मारकर जान ले ली 
आखिर कारण क्या ??
बेटियां गर्भ में ही मार डाली जाती है जाती थी अब बच जा रही है तो कभी बलात्कार या फिर समाज के ताने से मर रही है । बेटी अपने पिता के घर भी चैन से नहीं रह सकती है 
अगर अच्छा ससुराल नहीं मिला तो मायके में भी यह समाज चैन से नहीं रहने देता 
आत्मनिर्भर हो लेकिन अनब्याही हो तब भी प्राब्लम 
जिंदा में भी मरने के बाद भी 
चैन से माता - पिता नहीं रह सकते 
समाज का क्या 
किसी को भी तोहमत लगा देना 
ताना मारने में सबसे आगे 
सब मजाक लगता है 
राधिका के पिता से ज्यादा दोषी तो यह समाज है 
बेटी की कमाई खाने का ताना देना 
सबके पास मजबूत दिल नहीं होता 
अभी दोष दे रहे हैं 
जीते जी जीने नहीं दिया मरने पर सहानुभूति
कुछ भी बोलो 
हंसो ताना मारो 
अपनी औकात भले कौड़ी की न हो 
यह केवल कम पढ़े - लिखे की बात नहीं 
पढ़े - लिखे चार कदम आगे 
किसी की दुखती रग को छेड़ने में मजा आता है 
किसी की तरक्की देखी नहीं जाती 
कभी कैरेक्टर पर कीचड़ उछालकर 
कभी मनगढ़ंत कहानी बनाकर 
कहने को सभ्य लेकिन असभ्यता में पशु को भी पीछे छोड़ दें 
घिन आती है लेकिन रहना भी इन्हीं के साथ है 
क्या करें अकेले भी तो रह नहीं सकते 

Tuesday, 15 July 2025

अचार और परिवार

परिवार और अचार
मिलते - जुलते हैं 
सबको साथ लेकर चलना 
सबके साथ होना 
वह होता है परिवार 
अच्छा परिवार 
हर व्यक्ति का महत्व 
सबको अहमियत 
प्यार, अपनापन, भरोसेपन पर टिका 
अचार भी स्वादिष्ट 
बहुत सारे मसालों और तेल के साथ 
भोजन का स्वाद बढ़ाता 
हमेशा जरूरत चाहे कोई सा भी भोजन

कई बार परिवार के चक्कर में 
इंसान बन जाता अचार 
जब चाहे जैसा इस्तेमाल कर लो 
स्वादिष्ट तो लगता है 
न रहे तब भी चलेगा 
जरुरी तो है जरूरत नहीं 
अचार को कोई फर्क नहीं 
इंसान को पड़ता है 
भावनाओ में बंधा प्राणी 
अनदेखा करने पर चोट लगती है 
अचार नहीं है न कि मन नहीं कर रहा तो छोड़ दो 
यहाँ तो वह उपेक्षित महसूस करता है 
अपेक्षा रहती है अपने उस परिवार से 
अचार को साल भर संभाल कर रखना पड़ता है 
नहीं तो खराब हो जाएगा 
परिवार को ताउम्र संभालना पड़ता है 
तभी टिकेगा 
वर्ना छिन्न भिन्न होने में देर नहीं लगती 
परिवार में न अचार बनना है न बनाना है किसी को 
अपने आचार और आचरण को बहुत सोच समझकर रहना है

Monday, 14 July 2025

गुजरने के पहले

कभी नर्म कभी गर्म
ये है शरीर का धर्म 
तुम करो अपना कर्म 
उम्र ने दी है दस्तक 
अब छोड़ दो सब झंझट 
क्या करना है दस्तावेज का 
अब बस अपना ध्यान रखो 
चिंता करने की अब शक्ति नहीं 
चिंता कर चित्त हो जाओगे 
उन्हीं पर बोझ बन जाओगे 
जिसके लिए चिंतित हो 
समय को समेट लो
बस अब अपने लिए 
कुछ समय तो गुजार लो जीवन संग 
हंसकर- बोलकर 
समय के साथ तो सब गुजर जाना है 
गुजरने के पहले हर पल जी लो 

Thursday, 10 July 2025

ऐसा सम्मान????

चरण स्पर्श कर लिया फिर मजाक उड़ाया 
ऐसे सम्मान का क्या फायदा 
जहॉ सम्मान मन से न हो वहॉं से हट जाना ही बेहतर 
रिश्ता अपनी हैसियत वाले लोगों से ही रखना चाहिए बड़े लोगों से रख अपना ही अस्तित्व समाप्त करने जरूरत नहीं है 
लाचार और उपहास का पात्र बनने के अलावा कुछ हासिल नहीं 
समाज में हैसियत देख रिएक्शन होता है 
डार्विन की थ्योरी लागू होती है 
शक्तिशाली बनो स्वयं और आत्मनिर्भर भी 
एहसान का एहसास ताउम्र झेलना आसान नहीं होता 
लोग समय-समय पर दंश चुभाते रहेगे , जताते रहेगे 
अपना याद रहता है आपका याद नहीं रखेंगे 
यह सिलसिला चलता रहेगा कम से कम दो पीढ़ी तक
उनकी औलाद भी यही सोचती रहेंगी 
आपके साथ आपके बच्चों को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी 
वहाँ कभी जाना नहीं जो कहने को होते तो है अपने लेकिन रहते हैं अजनबियों सा