भाजपा की बिहार में हार के साथ ही एक-दूसरे पर अपशब्दों और कुत्ते का संबोधन हमारे नेता कर रहे हैं
वैसे तो यह जानवर वफादार माना जाता है
इसका नाम क्यों बीच में उछाला जा रहा है
कभी शत्रुघ्न सिन्हा के लिए तो कभी और कुछ
दीपावली में लक्षमी ,सरस्वती और दुर्गा की पूजा होती है
लक्षमी प्राप्त करने के पीछे सब लगे हैं
शक्ति यानि पावर वह भी
पर सरस्वती जो नैतिकता का पाठ पढाती है
उसको हम ज्यादा तवज्जो नही दे रहे हैं
पढाई करने के पीछे उद्देश्य हैं पैसा कमाना
बचपन में एक कहानी सुनी थी
देवी जुडवा बहनों के घर आती है बारी-बारी से
एक संपत्ति मॉगती है दूसरी सुमति मॉगती है
उसका परिणाम एक के घर रोज लडाई तो दूसरी अभावों में भी परिवार के साथ खुश
भाजपा को सत्ता तो मिल गई पर वाणी बेकाबू हो गई है जिसका परिणाम देखने को मिल रहा है
कम से कम सत्ता के मद में न आकर विनम्र हो जाय
सरकार उनकी है वे विपक्ष में नही है
Hindi Kavita, Kavita, Poem, Poems in Hindi, Hindi Articles, Latest News, News Articles in Hindi, poems,hindi poems,hindi likhavat,hindi kavita,hindi hasya kavita,hindi sher,chunav,politics,political vyangya,hindi blogs,hindi kavita blog
Wednesday, 11 November 2015
कौन सी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है नेताओ द्वारा
Monday, 9 November 2015
बिना सम्मान के पद पर बने रहना गजेन्द्र चौहान को शोभा नहीं देता
सिने जगत वाले कुछ महीनों से पुणे फिल्म इंस्टियूट पर चौहान की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर नाराज है
छात्रों ने आंदोलन भी छेड रखा है
एफ टी आई आई का मुद्दा कोई छोटा नहीं है
यहॉ सभी वोट करने वाले बालिग है
अगर इनके वोट पर सरकार बन सकती है तो संस्था के अध्यक्ष पद पर कोई अखरता है तो उस पर भी ध्यान देना चाहिए
सबको मिल जुलकर बातचीत करनी चाहिए
जहॉ उनका स्वागत नहीं हो रहा है उसे पकड कर बैठने की क्या जरूरत है यह गजेन्द्र चौहान को भी सोचना चाहिए
महाभारत में युधिष्ठिर की भुमिका निभा चुके चरित्र से भी प्रेरणा लेनी चाहिए
अपनी और इंडस्ट्री दोनों की इज्जत का सोचना चाहिए
ऐसा न हो कि मामला बद से बदतर हो
समय रहते ही प्रतिषठा बचा ली जाय तो बेहतर हैं
कही यह मामला एक मजाक बन कर न रह जाए
दीपावली - घर ऑगन के साध मन को भी ज्योतिर्मय करने का त्योहार
दीपावली आ गई है धनतेरस से यह उत्सव शुरू हो गया है ,हम त्योहार मनाते क्यों है?
एक -दूसरे से जुडने के लिए
जीवन के प्रति सकरात्मक दृष्टिकोण के लिए
ईश्वर के प्रति कृतग्यता जताने के लिए
सबके साथ खुशियॉ बॉटने के लिए
सच तो यह है कि त्योहार हमें विनम्र बनाते हैं
हमें अपना अंहकार छोड दूसरों के आगे झुकना सिखाते हैं
हर धर्म में त्योहार मनाने का यही उद्देश्य हैं कि हम लोगों से जुडे रहे उन्हें भूले नहीं ,इसलिए समय-समय पर ये त्योहार मनाये जाते हैं
जब हम जिंदगी की भागदौड से परेशान होते हैं तो हमारे अंदर नकरात्मक उर्जा इकठ्ठी होने लगती है
इसका असर यह होता है कि हम नीरस होते जाते हैं
हमारे अंदर का प्रेम कम होने लगता है
हम मतलबी और व्यक्तिकेंन्द्रित होने लगते हैं
ऐसे में जब हम त्योहार मनाते हैं तो लोगों से सारे गिले -शिकवे भूला कर मिलते हैं
उत्सव मनाते हैं तो द्वेष कम होता है
सभी परेशानियों और तनाव को भूलकर हम त्योहार की तैयारी करते हैं
मनुष्य सामाजिक प्राणी है बिना एक -दूसरे के साथ के नहीं रह सकता
त्योहार एक ढर्रे की जिंदगी को बदल देते हैं
कुछ नयापन का अहसास होता है
जिस तरह से दुख बॉटने से कम होता है वैसे ही खुशी बॉटने से बढ जाती है
दिए जलाए और लोगों से प्रेम बढाए
Friday, 6 November 2015
बिहार की जीत एक चुनौती मोदी सरकार के लिए
बिहार की जीत के साथ ही सरकार को यह सोचने पर बाध्य होना पडेगा कि ऐसा क्यों हुआ अब तो उनके नेता सोच समझ कर बोले जनता का मिजाज कोई नहीं जानता लालू प्रसाद यादव ने हर बात को भुनाया यह दिल्ली के बाद भाजपा को दूसरा झटका है कहीं ऐसा न हो कि फिर उसकी वही पुरानी हालत हो विकास के कारण नितीश की जीत हुई है जाति ,धर्म को छोडकर विकास के मुद्दे पर जन धन प्रधानमंत्री की महत्त्वकांक्षी योजना है यह
पर यह कभी सोचा गया कि खाते तो खुल गए
उसमें डालने के लिए पैसे कहॉ से आएगे
रोजगार बढाने के लिए क्या किया जा रहा है
मंहगाई अपनी चरम सीमा पर है
दाल और सब्जी के दाम चरम सीमा पर है
किसान आत्महत्या कर रहे हैं
इस समय आर्थिक सुधारों की जरूरत है
देश के विकास की जरूरत है.
बेरोजगारी की समस्या बढ रही है
युवा आशा लगाए बैठा है
कब तक लोगों को इंतजार करना पडेगा
विकास की बात को छोडकर सारी बातें हो रही है
गरीब का भी ध्यान रखना चाहिए
सतरह महीने हो गये नयी सरकार को
कौन से कदम उठाए जा रहे हैं
पहले पेट भरे लोगों का बाकी बाद में
रोटी ,कपडा ,मकान ,रोजगार ,सुरक्षा जनता को चाहिए
विदेश नीति ,विदेश में प्रसिद्धी से सामान्य जनता को लेना -देना नहीं होता
आम आदमी की आम जरूरते हैं उसका जीवन सुगम बने