लंबी बीमारी से ग्रस्त हुई है
मन कचोट उठता है
जब उनको इस अवस्था में देखते हैं
फोडे से ग्रसित
मृत्युवत पडी हुई
लाशों का ढेर
देखा नहीं जा रहा
तैतीस करोड़ देवी - देवता जिसके शरीर में वास कर रहे हो
उसकी यह दुर्दशा
ईश्वर से तो प्रार्थना है ही
सरकार से भी प्रार्थना है
कुछ तो करें
इस समस्या का समाधान निकाले
केवल गायों पर राजनीति ही न किया जाएं
उनके लिए समुचित प्रबंध किया जाएं
पहले तो यहाँ वहाँ भटक ही रही थी
ऊपर से लंपी
माता तो कहा जाता है उसी माता को बूढी होने पर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है
मानव जब अपने माता का तिरस्कार कर सकता है
उसको घर से निकाल सकता है तब तो यह पशु है
अतः सरकार और प्रशासन को चाहिए
उनका समुचित प्रबंध किया जाएं।
No comments:
Post a Comment