आप साधु वेश में सीता का हरण किए
राम के वेश में क्यों नहीं , आसानी होती
रावण ने कहा
हाॅ मैंने भी सोचा तो था पर राम के वेश धारण करने का विचार किया
तब तो हर जगह पवित्रता ही नजर आई
साधुओं पर ज्यादा विश्वास किया जाता है
उसी विश्वास का फायदा उठाकर धोखा भी दिया जाता है
जगत को पता चले कि
साधु के वेश में भी कपट - छल छिपा होता है
आज के संदर्भ में यह देखा जाएं
कितना खरा सत्य है
जगह-जगह पर ढोंगी और भोगी बाबा
लोगों के विश्वास से खिलवाड़ करते हैं
नारी की अस्मिता से खेलते हैं
सैकड़ों उदाहरण भरे पडे हैं
बडे बडे संत - महात्मा कहे जाने वाले भी इससे अछूते नहीं रहें
सीता ने लक्ष्मण रेखा तोड़ कर साधु को भिक्षा दी थी
उसका परिणाम अपहरण हुआ
आज भी भोली - भाली इनके चंगुल में फंस जा रही है
कभी संतान की कामना तो कभी खुशहाल घर - वर की कामना
इनका इतना बडा साम्राज्य होता है वह किसके बल पर होता है
यह वस्तुस्थिति छिपी नहीं है किसी से
संन्यासी तो माया - मोह से परे होता है
यह तो माया को ही लेकर बैठे हैं, उपभोग कर रहे हैं
सबको मूर्ख बना रहे हैं
साधु के वेश में ठग ।
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