ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति
पिता तो पिता होता है
सर्वेसर्वा होता है
एक खुला आकाश होता है
छायादार वृक्ष होता है
घर की छत होता है
सर पर एक छत्रछाया होता है
वह क्या है
क्या कर रहा है
रोजी - रोटी का जुगाड़ कैसे कर रहा है
इसकी तो भनक नहीं लगने देता
संतान को अपने सर - ऑखों पर बिठाया है
मन में रखता है
भरपूर प्यार करता है
ऊपर से कठोर दिखता है
अनुशासन जो सिखाना है
घर को व्यवस्थित चलाना है
कहने को तो वह मुखिया है
लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी का सामना उसे ही करना है
वह वो है जिसको अपनी भावनाएँ छुपा कर रखना है
ऑसू अंदर ही अंदर पी जाना है
वह मर्द है न
घर का सर्वेसर्वा है न
अगर वह धीरज और हिम्मत छोड़ देगा तब ??
जब तक वह
तब तक सब व्यवस्थित
वह मेहनत करता है
तब घर - परिवार चलता है
सबके हिस्से की परेशानी हर लेता है
जो करना हो वह सब करता है अपनी संतान के लिए
वह बाप है न
तभी तो खास है
Happy father's day
हर पिता के लिए
No comments:
Post a Comment