Sunday, 12 April 2026

विवश मानव

आज मन विचलित है
नींद नहीं आ रही
दिमाग में कुछ उमड घुमड रहा है
विचारों का झुंड है
पर विषय एक ही है
  करोना
समाचार देख 
मोबाइल देख
टेलीविजन पर खबर
हर जगह हाहाकार
परमाणु बम बनाने वाला यह मानव
आज कितना विवश
सब विवश
कब कहाँ से और कैसे आक्रमण
यह समझना मुश्किल
हाथ पर हाथ धोएं जा रहे हैं
मास्क लगा रहे हैं
दूरी बना रहे हैं
फिर भी डर तो समाया
यहाँ तक कि सपने में भी
कितना खौफ
क्या है जीवन
क्या है इसका सार
मौत के मुहाने पर खडा मानव
लडता रहता है 
सभी आपदाओं से
कभी अकाल
कभी भूकंप
कभी बाढ 
कभी महामारी
और युद्ध भी
जिसका रचनाकार तो वह स्वयं
जीवन की जद्दोजहद के बीच
हम फंसे रहते हैं
क्या यही मानव की अहमियत
हमेशा डरा और सहमा
मृत्यु के नाम पर

Wednesday, 8 April 2026

हिम्मत

घना अंधेरा हो तब भी क्या 
दूर से आ रही एक रोशनी की किरण काफी है
लाख घने बादल छाए हो 
उसमें से एक इंद्रधनुष की पतली रेखा काफी है 
मरूस्थल में भी पौधे पनपते हैं 
जीवन की हर एक सांस बहुमूल्य है 
स्थायी यहाँ कुछ भी नहीं 
अंधेरा कब तक रहेगा 
बादल कब तक छाए रहेंगे 
उनको तो जाना ही है 
बस आशा रखना है 
वक्त- वक्त की बात है 
अच्छा भी आएंगा 
हिम्मत नहीं हारना है