तेरी बातों में गजब का जादू
किसी के आगे न झुकने वाली
हर बात में अपनी मनमानी करने वाली
किसी की छोटा सी बात और मजाक भी नागवार
वही शख्स तेरी हर बात पर हार मानता
अपने को सरेंडर कर देता
तेरा गुस्सा भी प्यारा लगता
तेरे बिना मेरा मन भी सूना
तू ही तो मेरी हमसफर
कब मेरी उंगली छोड़ मेरा हाथ पकड़ने लगी
मुझे रास्ता पार करवाने लगी
मेरा बोझ अपने कंधों पर उठाने लगी
मुझे दुनिया घुमाने लगी
मुझे रहने का सलीका सिखाने लगी
मुझे अच्छे कपड़े दिलाने लगी
मंहगे से मंहगे होटलों में ले जाने लगी
वह सब दिखाया जो मैंने कल्पना भी न की थी
अपने बल पर मैं तो यह कभी करती नहीं
हमसफर जरूरी नहीं जीवन साथी हो
हमसफर हमारे बच्चें भी तो है
कभी हमने उनको राह दिखाया
आज वो हमें राह दिखा रहे हैं
साथ लेकर चल रहे हैं
हमने उनको वह सब नहीं दिया
आज वो दे रहे हैं
हमने उनकी इच्छा को दबाया
वो हमारी इच्छा पूरी कर रहे हैं
ईश्वर मेरे इन हमसफर और हमराही को ऐसा बनाए
हम उन्हें देख खुश होते रहें
जो हम न कर पाए
वो करते रहें
सफलता का परचम फहराते रहें
ईश्वर से यही पार्थना
उनकी राह आसान हो
उन्नत हो
प्रगतिशील हो
खुश और सुखी हो
इन्हें देख और कोई खुशी नहीं
इनके चेहरे पर मुस्कान ही मेरी खुशी
अगर खुदा आकर खुद कहें
चलो हमारे साथ स्वर्ग
मैं इन्कार कर दूंगी
नहीं जाना है यही रहना है
इनको देख जीना है
आँसू ठीक है , मिटना ठीक है
तभी तो
मन कह उठता है
रहने दो हे देव , मेरा मिटने का अधिकार
वह जीवन ही क्या जिसमें अपनों की कहानी न हो
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