उसने जिंदगी की दशा और दिशा ही बदल दिया
जिंदगी को दशकों पीछे कर दिया
न जाने क्या-कुछ सोचा था
क्या-कुछ सपने देखे थे
भविष्य के ताने - बाने बुने थे
ऐसा मझधार में पहुंच गया
उसमें अभी तक डूब - उतरा रहा हूँ
बाहर आने की कोशिश भी की
सफल भी हुआ
लेकिन क्रम अभी जारी है
कब खत्म होगा पता नहीं
फिर भी सुकून है
उससे तो बाहर आया
बहुत कुछ समझ आया
अब तो हर पग सोच-समझकर धरना है
जल्दबाजी कभी अच्छी नहीं होती
समय को भी समय चाहिए
वैसे यह भी पता है
हमारे चाहने से कुछ नहीं होता
होता वही है
जो वह चाहे
होयहै वही जो राम रचि राखा
अब नजर उस पर
कर्म हमारा फल उसका
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