मै एक स्वतंत्र व्यक्ति हूँ पर यह सच है क्या?
स्वतंत्र देश,हर चीज की आजादी ,रहने ,खाने पीने घूमने सोचने की फिर भी मै खुश नही
डर लगा रहता है हमेशा
घर से बाहर निकला तो हूँ पर वापस लौटूगा या नही
कही दुर्घटना हो गई तो घर मे चोरी हो गई तो
दफ्तर समय से पहुँचुगा या नही
कब काम से निकाल दिया जाऊ पता नही
बेटी पढने गयी है सुरक्षित घर वापस आएगी ना?
बेटे को एडमिशन और नौकरी मिलेगी ना?
बैंक से लिया कर्ज चुका पाऊगा या नहीं
क्यो हम परेशान है न चैन से जीते है न मरते है
चारो तरफ भ्रष्टाचार,मंहगाई,लूट खसोट,अपराध
छेडछाड,बलात्कार ,की बातें ही सुनाई दे रही है
हमारे नेता ,देश के कर्णधार जुमले पर जुमले पर छोड रहे हैं
संसद को दंगल का अखाडा बना दिया है
आम आदमी की जिन्दगी को नर्क बना दिया है
जी रहे है हम डर के साये में
फिर भी हम गर्व से कहते है
हम भारतीय है हम भारतीय है
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Wednesday, 9 September 2015
हम भारतीय है स्वतंत्र हैं
Monday, 7 September 2015
वाह रे दुनियॉ
यह दुनियॉ भी अजब है
जब इसकी लीक से अलग हटकर कोई काम करता है
तो वह उसे पागल दीवाना कहती है
फिर विरोध करती है और अंत में मार देती है
मरने पर पूजा करने लगती है
पुष्पो का हार चढाती है
ईसा को सूली पर चढाया
गॉधी को गोली मारी
ज्योतिबा फूले पर गोबर पत्थर फेके
आईस्टाइन को पागल कहा और
अब उनके नाम की माला जपते है
उनके आदर्शो पर चलते है
जिन्दगी
मौत का नाम सुन कर ही रूह कॉप जाती है
क्यों जिन्दगी से इतना प्यार??
नही शायद जिन्दगी से जुडे लोगो से प्यार
कोई नही रहे तो यह संसार खत्म नहीं होता
संसार तो चलता रहता है, समय भी आगे बढता जाता है लेकिन किसी के न रहने से प्रभाव तो पडता ही है
जिन्दगी उथल पुथल हो जाती है
उसके मायने बदल जाते है
सँवरने में दशको बीत जाते है
मरने वाला स्वंय तो मर जाता है पर अपने से जुडे लोगो को जीते जी मार जाता है
त्याग और समर्पण ही जिन्दगी है
अपनो के लिए त्याग मे जो आनन्द है
उसमे तो शायद स्वर्ग का सुख भी फीका पड जाय
अपने लिए न सही अपनो के लिए जीए
Sunday, 6 September 2015
जीवन दान से पुण्य कुछ भी नहीं
किसी को जीवन दान देना इससे बडा पुण्य का काम क्या होगा?
दफनाने,जलाने से बेहतर क्योकि किसी को ऑखो की रोशनी किसी का दिल धडकना किसी को किडनी देकर जीने लायक बनाना
मरनेवाले के अंग किसी का जीवन सँवार सकते है
ऊनकेऔर उनके परिवार को जीवनदान दे सकते है
उन अंगो के माध्यम से वह फिर उन व्यक्तियो मे जीवित हो उठता है
शास्त्र चाहे जो कहे लेकिन विग्यान का यह अटल सत्य है
ईस तनाव भरी जिन्दगी में और जहॉ हर जगह यह समस्या मुँह बाए खडी है वहॉ इस तरह के योगदान की अत्यंत आवश्यकता है
मौत से बेहतर किसी को जिन्दगी देना
इससे बडा इन्सान का कर्म और धर्म क्या हो सकता है
इसलिए अंगदान करिए और दूसरो को जीवन दान दीजिए