गिलवान घाटी का सच क्या ??
हमारे सैनिक क्यों मरे ??
वे निहत्थे क्यों ??
गिलवान घाटी किसकी सीमा में ??
चीनी अंदर आए हैं क्या ??
कब्जा किया है क्या ??
जो बात है वह सच बताओ
देश अपने चौकीदार से जानना चाहता है
ऐसा तो नहीं
प्रधान सेवक इतिहास बदलते बदलते भूगोल बदल दे
भारत की जगह चीन को झूला झूलने के लिए दे दे
इंदिरा गांधी ने तो विश्व का नक्शा बदल दिया था
एक नए बांगला देश का निर्माण कर दिया
दुश्मन के टुकडे कर दिए
पंडित जवाहरलाल नेहरू को तो दोष
तब तो भारत गुलामी से मुक्त ही हुआ था
उतना शक्तिशाली नहीं था
आज तो पूरे विश्व में डंका बज रहा है
वह आप बजा रहे हैं
सैनिको की बात न की जाए
वह तब भी सक्षम थे आज भी सक्षम है
वह तो जवाब देंगे ही
देश आपसे जवाब मांग रहा है
मनमोहन सिंह तो मौन रहते थे
आप तो बोलने वाले हैं धाराप्रवाह
तब सच सच बताओ
बात को तोड़ मरोड कर नहीं
इतिहास को भूल कर
भूगोल पर ध्यान केंद्रित करें
सरकार आपकी जिम्मेदार भी आप
अब देखना है
हमारा यह चौकीदार देश को किस तरह संभाल रहा है
अपनी ड्यूटी सही से निभा रहा है या नहीं
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Tuesday, 23 June 2020
चौकीदार की चौकीदारी
Monday, 22 June 2020
वाह रे बडा पाव
जहाँ जहाँ मैं
वहाँ वहाँ लोग
ठेले पर दुकान में
हर गली मोहल्ले में
स्कूल में काॅलेज में
ऑफिस की कैंटीन में
बाजार में चौराहा पर
रेलगाडी में सिग्नल पर
नहीं किसी की जेब पर भारी
सबका पेट भरना मेरी जिम्मेदारी
बच्चों की भी पसंद
युवा की पसंद
बुजुर्गों की भी पसंद
नहीं समय है
कोई बात नहीं
कहीं भी खा लो
सडक पर खडे हो
या चलते चलते
बस कागज में बंधा लो
अमीर गरीब सभी
खाते हैं चाव से
सस्ते में मिल जाता हूँ
पर पेट भर देता हूँ
चाय की दुकान की रौनक
टैक्सी वाले
बस ड्राइवर और कंडक्टर
मुलाक़ात करते मुझसे सुबह शाम
बाढ और बरसात में फंसने पर
भूख लगने पर मेरी ही याद
जम कर पेट में रहता हूँ
देर तक भूख को रोके रखता हूँ
खाना न मिले तब भी
कितनों का चल जाता काम
नाश्ता या खाना
सबका काम चला लेता हूँ
चटनी और पाव में डाल
जब चटखारे लेकर खाते सब
कोई धीरे धीरे
कोई जल्दी में
तब मैं मन ही मन खुश हो जाता
अपनी पीठ आप थपथपाता
कहता वाह रे कमाल का
तू बडा पाव
ज्यादा बड़बोला न बने टेलीविजन
इसको घुस कर मारों
उसको घुस कर मारों
यह इतना आसान है क्या ??
हम मारेंगे तो दूसरा तमाशा देखेंगा
वह भी तो वार करेंगा
छक्के छुड़ा देंगे हमारे जवान
मुंहतोड़ जवाब देंगे
यह हमला किया
वह हमला किया
इतनो को मारा
इतनो को ध्वस्त किया
यह हिसाब तो है
पर हमारे कितने ??
कितनों की शहादत
टेलीविजन पर इस तरह
जैसे सीमा पर खडे हैं
लडाई हो रही है
पुरजोर जवाब दे रहे हैं
राजनीति को दूर रखिये
सेना का जिक्र क्यों ??
तब भी सेना बहादुर थी
आज भी है
सेना सरकार नहीं है
सरकार बदले या वही रहें
जवानों को क्या फर्क
उनको तो उस पार का दुश्मन दिखता है
गोली दिखती है
टेलीविजन देशद्रोह और देशभक्त का पाठ पढाने वाला
जब टेलीविजन नहीं था
तब भी लडाईया हुई है
ज्यादा बड़बोला बन कर लडाई नहीं जीती जाती
कूटनीति काम करती है
विदेशनीति काम करती है
संसद में चर्चा होती है
निर्णय लिया जाता है
देशहित में क्या सही
क्या नहीं
फिर युद्ध कोई भी हो
कैसा भी हो
विनाशकारी ही होता है
तब बड़बोला न बना जाय
सबकी सुनी जाय
सोचा जाय
समझा जाय
तब कदम उठाया जाय
प्यार में धोखा
किसी लड़की ने धोखा दिया
किसी लड़के ने धोखा दिया
आत्महत्या के कारण में गौर फरमाए
पचास फीसदी इस वजह से
आज से नहीं पहले से
उस धोखेबाजी के कारण जान दे दी
दिल टूट गया
किसी ने एक का दिल तोड़ा
वह कितनों का दिल तोड़ गया
अपने माता-पिता
अपना परिवार
अपने शुभचिंतक
अपने अजीज दोस्त
बहुत सारे लोग इनमें शामिल
इन सबके प्यार पर एक भारी
जबकि वह प्यार था ही नहीं
स्वार्थ था
प्रेम में धोखा नहीं त्याग होता है
समर्पण का भाव होता है
तब अदने से कारण के लिए
अपनी जान ले लेना
दिल कोई पत्थर नहीं है
जो टुकडे हो गए
तब जुड़ेगे नहीं
वह तो हाड मांस के शरीर में सुरक्षित है
लहू संचार करेंगा
सब व्यवस्थित
बस वक्त दे दो
धैर्य रखों
पर जान मत लो