Monday, 23 November 2020

प्रकाश की ओर

दीया बुझने लगा है
अब तो बस तारे ही टिमटिमा रहे हैं
वे भी कुछ समय में ओझल हो जाएंगे
रात भी खिसकने लगी है
भोर अभी अंगडाई ले रहा है
कुछ समय बाद किरण पसरेगी

सब जगह प्रकाश ही प्रकाश
उसके प्रकाश में किसी की जरूरत नहीं
सब अपने आप प्रकाशित

ऐसे ही प्रकाश बन उभरना है
चहुँ दिशाओं में पसरना है
तारा और दीया बन टिमटिमाता नहीं
अपना प्रकाश स्वयं बनना है
अपनी आभा स्वयं फैलाना है

Sunday, 22 November 2020

मानो या न मानो

हम गए थे किसी के घर
दिलासा देने
सांत्वना देने
उनका दुख हल्का करने
उनकी पीड़ा में सहभागी बनने

क्या इसमें हमारा कुछ स्वार्थ न था
उनको बताने गए थे
जताने गए थे
हम तुम्हारे साथ है
इस मुश्किल घडी में
उपकार कर रहे थे
एहसान का एहसास दिला रहे थे

और तो और अपना दुख हल्का कर रहे थे
यह तो सबके साथ होता है
हमारे साथ भी हुआ था
हमारे मन को भी तसल्ली
इस दुनिया में गम के मारे हम अकेले ही नहीं
बहुत से है
कुछ देने से ज्यादा
सहने की ताकत लेने गए थे
यह हम जान बूझकर नहीं कर रहे थे
न सोच रहे थे
कि बुरा हो जाय
यह हमारा स्वार्थी अचेतन मन कर रहा था
कितनी ठंडक
जब हमारे जैसी पीडा किसी और को
तब जीने का
सहने का बहाना मिल जाता है

मानो या न मानो
है तो यह सच्चाई

यह बच्चा है ??

अरे । कितना क्यूट बच्चा है
एकदम शांत
चुपचाप बैठा है
कोई तोड़ फोड़ नहीं

एक हमारा है कि
एक जगह टिकने का नाम नहीं लेता
पूरा दिन घर में हुडदंग
कभी यह तोड़ दिया तो कभी वह
अभी अपने पापा के साथ जिद कर बाहर गया है
तभी घर शांत
मैं तो परेशान हो गई हूँ
इसी एक से
पहले लोगों के  कितने बच्चे होते थे
कैसे संभालते होंगे
तौबा तौबा
एक ही बहुत है

हाँ यह बच्चा औरों से अलग है
वह समय से पहले बडा जो हो गया है
समझदार जो हो गया है
इसकी माॅ कामकाजी महिला है
नैनी के सहारे पला
अब क्रेश यानि पालनाघर
वह जिद कैसे करेंगा
जिद तो माँ से की जाती है
तोड़ फोड़ तो अपने घर में

इसका बचपन छूट गया है
वह बच्चा क्या
जो शांत हो
समझदार हो
उत्पाती न हो
चंचल न हो
गंभीरता बच्चों की निशानी नहीं
वह तो बडो की
शायद आज की हकीकत भी यही है
कमोबेश ज्यादातर बच्चे अपनी उम्र से बडे हो गये हैं

आवाज तो मिली है

कौआ कांव कांव की रट लगाए था
उसकी आवाज सुन जी खीज उठा
भगा दिया खिड़की से
फिर एक कबूतर कबूतरी आ बैठे
लगे करने गुटरगू गुटरगू
आज इतवार है
शांति से सोना है
आराम करना है
कुर्सी पर पैर फैला पेपर पढना है
साथ में चाय की चुस्कियां लेना है
पर ये लोग तो भोर में ही आ धमके
सोच ही रहा था
आलस की अंगडाइया ले रहा था
एक - दो चिडिया आ बैठी
लगी सुर में चींचीयाने
नीचे गली में कुत्तों के भौंकने की आवाज
फिर किसी की गाडी की पो पो
स्कूटर की घुर्र घुर्र
आज सब परेशान कर रहे हैं
आवाज मिली है सबको
पर असमय , बिना कारण
वह बहुत परेशान करता है
जब जरूरत हो
जहाँ जरूरत हो
जितनी जरूरत हो
नाप तौल कर बोले
जिह्वा पर नियंत्रण जरूरी
जो सुनना चाहता है
उससे ही बोलना
जबरन सर पर सवार नहीं होना
तभी आपस में मिठास
अन्यथा खटास