Monday, 29 February 2016

जेटली जी की पोटली नौकरीपेशा के लिए खाली

वित्त मंत्री जी ने बजट पेश कर दिया है सबकी निगाहे बजट की ओर लगी हुई थी
लग रहा था कि टेक्स में कुछ छुट मिलेगी
मध्यम वर्ग नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलेगी
पर ऐसा कुछ नहीं हुआ
ऊपर से सर्विस टेक्स की भी मार पडी
इससे अप्रत्यक्ष रूप से होटल में खाना ,यात्रा करना ,कुरियर सर्विस ,ब्युटिपार्लर जैसी चीजें मंहगी हुई जिसका असर सबसे ज्यादा इसी वर्ग पर पडनेवाला है
यही वर्ग है जो ईमानदारी से टेक्स देता है
उसके लिए कुछ नहीं
यह तबका जो थोडा सा जीवन शैली ऊंचा रखने का प्रयत्न करता है
सबसे ज्यादा मार इस पर पडेगी
मध्यम वर्गीय युवाओ के लिए रोजगार का कोई प्रावधान नहीं दिखता
शहरी मध्यमवर्गीय जिसका कि एक नौकरी के सिवाय और कुछ नहीं
कम से कम जीवन शैली ऊँचा रखना , बच्चों को पढाना सब यही वर्ग के जिम्मे है
समाज को दशा और दिशा देनेवाले वर्ग के लिए जेटली  जी की पोटली से कुछ नहीं निकला

संसद प्रजातंत्र का मंदिर है युद्ध का अखाडा नहीं

प्रधानमंत्री जी संसद में पहली बार प्रवेश करते समय उसकी देहली पर मत्था टेका था
वैसे भी सभी सांसदों के लिए वह प्रजातंत्र का मंदिर ही होना चाहिए
पर पिछले कुछ समय से वह बातों का अखाडा बना हुआ है
इतना उग्र होकर बात का जवाब देना
एक दूसरे की ओर उंगली दिखा -दिखाकर बोलना
संसद जनता की समस्याओ को सामने रखने के लिए है
न कि अच्छा वक्ता और भाषण के लिए
एक -दूसरे पर दोषारोपण करना
मुद्दे को छोडकर व्यक्तिगत आक्षेप करना
मॉ दुर्गा के लिए अपमानित शब्दों और लेख को पढना
सर काट कर दूसरे नेता के चरणों में डालने की बात करनी अगर वह संतुष्ट नहीं हुई तो ?
विपक्ष क्यों नहीं विरोध करेंगा?
वह तो उसका काम ही है
यह संसद है स्टेज नहीं ,जहॉ भाषण पर तालियॉ बजेगी
फिर आप विपक्ष से कैसे सहयोग की अपेक्षा कर सकते हैं
सोशल मीडिया में भले ही वाह वाही हुई हो लेकिन दुसरे दिन से ही किरकिरी होने लगी
रोहित की मॉ का सामने आना और झूठा साबित करना
यह हंगामा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है
जबकि जरूरत थी कि सब मिल -जुलकर हल निकाले
कब तक अगडो -पिछडो के नाम पर राजनीतिक दल अपनी -अपनी रोटियॉ सेकेंगे ?
जनता को कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर बरगलाते रहेंगे
ये लोग इमानदारी से जनता के बारे में सोचे और कार्य करें न कि एहसान जताए कि हमने आपका यह काम किया है
एडमीशन करवाया है या और कोई काम
आप लोगों तो इन्हीं लोगों ने सत्ता पर बिठाया है
यह हमेशा याद रखना है

Saturday, 27 February 2016

अपनी मातृभाषा में बोलना गौरव की बात

मेरी मातृभाषा हिन्दी है  पर मुझे पढने का शौक है
तो मैं मराठी ,गुजराती पढ लेती हूँ
मुंबई में रहने के कारण मराठी आती ही है
घर पर    पेपर  देनेवाले ने बताया कि टाइम्स आँफ इंडिया की स्कीम चल रही है
तो आपको एक पेपर उसके साथ मिलेगा तो मैंने महाराष्ट्र टाइम्स के लिए कहा
पर दो -चार दिन तक मुंबई मिरर आते देख मैंने पूछा तो उसका जवाब था मैंने समझा ,आप मजाक कर रही है आपको मराठी आती है यह मालूम नहीं था
क्योंकि वह जानता था कि मैं उत्तर भारत से हूँ
हिन्दी और मराठी दोनों देवनागरी लिपी में है
और वर्षों से रहते हैं तो भाषा आ ही जाती है.
आज दक्षिण मुंबई के मराठी और दूसरी भाषाओं की पाठशालाएं बंद हो रही है
हर व्यक्ति अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढाना चाहता है
ठीक है पर घर पर भी न बोलना
फिर तो धीरे -धीरे यह खत्म हो जाएगी
भविष्य दिखा रहा है कि आज से पचास साल बाद तो शायद ये सुनने को भी न मिले
अगर अंग्रेजी गलत बोले तो ठीक है तो दूसरी क्यों नहीं
भाषा का इस्तेमाल होगा तभी वह जिंदा बचेगी
नहीं तो इनकी हालत भी संस्कृत जैसी हो जाएगी
उसे लचीला बनाया जाय
रोजी -रोटी का जरिया बनाया जाय
बोलने में सम्मान महसूस हो न कि उसे रोका जाय
प्रोत्साहन दिया जाय
अगर हम अपनी भाषा का सम्मान नहीं कर सकते
तो दूसरों की क्या करेंगे
महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी आनी चाहिए
विदेशी भाषा सीखी जा सकती है तो अपनी क्यों नहीं?
फिर चाहे वह हिन्दी हो ,मराठी हो या अन्य कोई
पारंगत न हो लेकिन बोलचाल का माध्यम तो हो ही

Friday, 26 February 2016

You could be shameless , I am not. - Ratan Tata


Few months after 26/11, Taj group of Hotels owned by TATAs launched their biggest tender ever for remodeling all their Hotels in India and abroad. Some of the Pakistani companies also applied for that tender.
To make their bid stronger, two big industrialists from Pakistan visited Bombay House (Head office of Tata) in Mumbai without an appointment to meet up with Ratan Tata since he was not giving them any prior appointment.
They were made to wait at the reception of Bombay house and after a few hours, a message was conveyed to them that Ratan Tata is busy and can not meet anyone without a prior appointment.
Frustrated, these two Pakistani industrialists went to Delhi and through their High Commission met up a Congress Minister. Then this minister, Anand Sharma immediately called up Ratan Tata requesting him to meet up with the two Pakistani Industrialists and consider their tender "ENTHUSIASTICALLY."
Ratan Tata replied..."You could be shameless, I am not" & put the phone down.
Few months later when Pakistani government placed an order of Tata Sumos to be imported into Pakistan, Ratan Tata refused to ship a single vehicle to that country.
This is his respect and love for his motherland. He placed the nation above money & business.