फूल कोमल है
पानी कोमल है
पानी में ही फूल का जन्म
जब तक पानी में है
खिला है
जब तक जडो से जुड़ा है
मजबूत है
जिस दिन पानी से अलग
वह मुरझा जाएगा
जिंदा भी रहा
ज्यादा दिन नहीं
पानी भले कीचड़ भरा हो
वह पोषण तो करता है
तब जन्मदाता है
वह कैसा भी हो
आपके लिए तो वरदान है
उसकी वजह से आप खडे हैं
भले ही लहलहाए
पर उसे मत भूलिए
कीचड़ में भी इतना सुन्दर रूप
इतना मौल्यवान
इतना आकर्षक
उस दाता की वजह से
कीचड़ का दाग लगने नहीं देता
अपने में डुबोता नहीं
मारता नहीं जिलाता है
ऊपर उठा कर रखता है
खिलने का मौका देता है
स्वयं बदबू करता है
आपको सुगंधित करता है
तब उस कीच भरे पानी की महत्ता है
तभी तो आपकी है
इतनी सुन्दर उपमा है
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Sunday, 12 January 2020
पानी और फूल
वक्त और ख्वाब
हर ख्वाब पूरा नहीं होता
हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती
हर सोच पूरी नहीं होती
यही तो फर्क है
हम जो ख्वाब देखते हैं
वह पूरा हो जाय
तब जद्दोजहद क्यों ??
जिंदगी को यह पता है
क्योंकि यही से कोशिश की शुरुआत
हर कुछ कर गुजरने को तैयार
जब तक कि
वह मिले नहीं
कभी-कभी भटकाव भी
अचानक नींद से जग जाते हैं
अरे यह क्या ??
हमने तो ऐसा सोचा ही नहीं था
खैर यह नहीं तो और सही
तब वह कर गुजरते हैं
जिसकी कल्पना भी नहीं की
अगर सफल
तब तो जिंदगी इतराती है
सब भूल जाती है
उसे याद भी नहीं रहता
कि हमने ऐसा सोचा था
ऐसा ख्वाब देखा था
यह ख्वाहिश की थी
इन सबको छोड़
कामयाबी पर जश्न और उत्सव मनाती है
यह जिंदगी
ख्वाब तो बहुतेरे देखे
हर वक्त देखे
वक्त ने कुछ और किया
वक्त का तो ठिकाना नहीं
कब करवट ले ले
तब फिर वक्त के साथ प्रयत्न
जरूरी है
क्रिया की है
प्रतिक्रिया भी अवश्य
वह किस रूप में
यह वक्त बताएंगा
Saturday, 11 January 2020
माँ बस माँ है
माँ के हाथ का खाना
माँ के हाथ की थपकी
माँ के हाथ फिराते दुलार
माँ के सिर सहलाते हाथ
माँ के गोदी में छुपाते हाथ
माँ के हाथ की छडी
सब लगती है
बहुत प्यारी
वह निस्वार्थी है
वह भोली है
वह सब कुछ वार जाती
बच्चों की मुस्कान पर
वह देना जानती है
सुरक्षा करना जानती है
हर बुराई से बचाना चाहती है
वह चाहे कैसी भी हो
पर संतान का उससे बडा
हितकारी कोई नहीं
उसकी जगह और कोई ले ही नहीं सकता
माँ की जगह बस माँ ही ले सकती है
Friday, 10 January 2020
विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
वह माँ है
ऐसी माँ जो अपने हर बच्चे को आंचल में ले लेती है
दुलराती है
उसकी अटपटे बोल पर मुस्कराती है
कैसे भी बोले
कुछ भी मिला कर बोले
अनपढ़ बोले
अपराधी बोले
पढे लिखे बोले
कवि और साहित्यकार बोले
नेता और अभिनेता बोले
भिन्न-भिन्न भाषाभाषी बोले
देशी विदेशी बोले
उसे कोई फर्क नहीं पड़ता
सब उसके अपने जो है
वह सबकी है
सब उसका सहारा ले सकते हैं
संवाद कायम कर सकते है
रोजी रोटी का साधन
दिलों को आपस में मिलाने का साधन
एक दूसरे को समझने का माध्यम
इतनी बड़ी शक्ति
इसी माॅ के पास है
यह हमारा मान और सम्मान है
शानदार और जानदार
भारत की शान
हमारी जान
सबसे प्यार करने वाली
हमारी हिन्दी है
विश्व हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामना