यह आज का नारा नव युवतियों का
गूंज रहा है सड़क - मोहल्लों पर
अब हर मर्द शक की नजर से देखा जा रहा है
देखने का नजरिया भी बदला है
उसमें आपके घर के पुरुष भी हैं
आपका पति , आपका पिता , आपका पुत्र , आपका ब्रदर
सबको एक ही कैटिगरी में लाकर खड़ा कर देना
हर युग में राम और रावण दोनो हुए हैं
जटायु भी हुए हैं
दुर्योधन और कृष्ण भी हुए हैं
इस युग में भी हैं
हर नारी सही है
हर पुरुष गलत है
यह सोच हावी होना सही नहीं है
वह पिता जिसके घर में आप सुरक्षित हैं
आपकी हर जिम्मेदारी वह उठाता है
वह पति जो आपको बराबर का दर्जा देता है
आपके हर नाज - नखरे को उठाता है
आपके लिए सब कुछ करने को तैयार रहता है
वह भाई जो सुख - दुख में आपके साथ खड़े रहते हैं
आपके एक आवाज पर हाजिर
वह आपका पुत्र
जो आपका गुरुर है
आपको उस पर सबसे ज्यादा भरोसा
वह आपका दोस्त , सहकर्मीं, पड़ोसी
वक्त- बेवक्त तैयार
हां मानसिक रूप से कुछ बीमार भी हैं संसार में
आसपास - पहचान में
तब क्या करें
विश्वास किसी का न करें
प्रेम और सम्मान के भागीदार सब नहीं हो सकते
आखिर में
रहना तो इसी दुनिया में हैं
सजग रहें
सर्तक रहें
धोखा देने वाला ही नहीं धोखा खाने वाला भी जिम्मेदार हैं
पुरुष प्रधान समाज है हमारा
हैं कुछ ऐसे नराधम
जो औरत को केवल भोग्या समझते हैं
पर पूरी पुरुष जाति नहीं
यह संस्कार पर निर्भर है
दोनों ही इस दुनिया के अंग है
एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं