Tuesday, 20 October 2026

यह समाज ???

रावण ने सीता का हरण किया 
गलत था 
उसका कोई समर्थन नहीं 
सीता वहाँ सुरक्षित थी 
सीता के चरित्र पर कोई आंच नहीं आई
लंका में रहकर 
शत्रु के घर ससम्मान 
वापस भी लौटी 

यह समाज पीछे नहीं रहा 
उंगली यही उनके चरित्र पर उठी 
उनको अयोध्या से निष्कासित किया गया 
एक बार सास 
एक बार समाज 
एक बेटा एक राजा 
राम आदर्श 
सीता एक आदर्श पत्नी नहीं बन पाई 
यह वह समाज है 
जिसने माता सीता पर लांछन लगाने से नहीं चूका 
तो साधारण औरत की क्या बिसात है 

राम बन जाओ??

सब कहते हैं 
राम बन जाओ 
क्या करें 
अपना हक छोड़ दे 
संन्यास धारण कर ले
राम बन भी गए 
तो भरत कहाँ कोई बन पाएगा 
राम तभी बना जा सकता है 
जब भरत और लक्ष्मण भी हो 
यहाँ तो दुर्योधन का बोलबाला है 
नहीं तो नहीं 
सुई के नोक बराबर भी जमीन नहीं 
राम तभी बना जा सकता है 
जब रावण जैसा विद्वान और भक्त हो 
जिसने सीता का हरण तो किया 
अशोक वाटिका में ससम्मान रखा 
लंका में विभीषण भी थे 
मंदोदरी भी थी 
यहाँ तो सब धृतराष्ट्र बने हैं 
उनका साथ दे रहे हैं 
भीष्म,  विदुर और द्रोणाचार्य 
गलत को गलत नहीं कह सकते 
बलशाली होते हुए भी 
एक नारी का चीरहरण देखते रहें 
तब कैसे इस युग में कोई राम बने 
यहाँ तो कृष्ण जैसा बनना पड़ेगा 

Monday, 19 October 2026

आप अनमोल हो

अपने आप को कमतर समझना छोड़ दो 
किसी के लिए जिंदगी जान पर मत लगाओ 
तुम कल भी नायाब थे 
आज भी हो 
कल भी रहोगे 
उनसे पूछो 
जिनकी जिंदगी तुम हो 
जिनके जीने का मकसद हो 
जिनकी खुशी आपके इर्द-गिर्द घूमती हो 
दूसरों की बातों को तव्वजों न दें 
आप उनकी आँखों से देखो 
उनके मुख को देखो 
मत निराश हो 
जीवन बहुत अनमोल है 
उसे व्यर्थ न गंवाये 
जीकर तो देखिए 
मजा आ जाएगा 
क्या हुआ कभी ट्रेफिक में फंस गए 
कितने समय 
निकल ही जाओगे 
आपके साथ  
आपके आगे - पीछे न जाने कितने लोग होगे 
रास्ता खुल ही जाएगा 
ट्रेफिक पुलिस जो ऊपर वाला है 
वो आ जाएगा 
विश्वास रखें 
कुछ समय के लिए 
पौं पौं को सुन लें 
इधर-उधर का नजारा देख लें 
जब खुल जाए 
आगे रफ्तार से बढ़ लें 
कोई रोक ही नहीं पाएगा 

बेटा घी का लड्डू नहीं

घी का लड्डू गोल न हो टेढा ही सही
बेटा कैसा भी हो
काला नाटा मोटा
तब भी बेटा ही है
अनमोल है
तब बेटी क्यों नहीं ??
इन सबसे ज्यादा गुण मायने रखता है
रंग और बनावट नहीं
खूबसूरती को देखने का नजरिया होना चाहिए
बेटे के लिए तो कहा जाता है
राम और कृष्ण भी सांवले थे
बेटी से फिर वह अपेक्षा क्यों ??
वह नकुसा क्यों 
अनवान्टेड क्यों 
संतान तो संतान होती है
जैसी भी हो प्यारी होती है
उसको दोयम दर्जा क्यों ??
उसे एहसास होना चाहिए
वह अपने परिवार के लिए अनमोल है
उसका अस्तित्व महत्त्वपूर्ण है
लोगों की सोच कुछ भी हो
माता-पिता की सोच ऐसी न हो
उसे हेय न समझा जाए
अपने जिगर के टुकड़े को हीरा समझे 
कोयला नहीं
उसको चमकने का मौका दें
सांवले और कालापन के सोच की आग में जलने न दे
आत्मविश्वास से भरपूर ऐसा सशक्त व्यक्ति बनाएं
कि सारी खूबसूरती उसके सामने पानी भरे
दूर से देख ईर्ष्या करें
उसके जैसे बनने की कोशिश करें