Saturday, 30 May 2026

बाप तो बाप होता है

बाप तो बाप होता है
हर हाल में बच्चों का भार ढोता है
अपने स्वयं कपडे पुराने पहनता
बच्चों को नया पहनाता
दिन रात एक करता
अपना निवाला उनके मुंह में डालता
सर पर बोझ लेकर चलता
बैल की जगह खुद भी जूत जाता
श्रम पसीना एक करता
संतान के भविष्य को बनाता
कहना बहुत कुछ चाहता
कह नहीं पाता
उसकी कठोरता संतान को नहीं भाता
उसके अंदर की कोमलता कोई देख नहीं पाता
वह भी चाहता तो आराम से रहता
वह ऐसा नहीं करता
वह दशरथ की तरह पुत्र मोह में प्राण भी देता
वह धृतराष्ट्र की तरह इतिहास में बदनाम भी होता
वह किसी से नहीं हारता
अपनी संतान से हारता
कितना प्रेम करता
वह नहीं किसी को दिखता
माता का प्रेम जग-जाहिर
पिता का प्रेम उसका उल्लेख कहीं नहीं
आसमान की छत्रछाया है पिता
धरती डोलती है
आसमान नहीं डोलता
नदी पिघलती है
पर्वत नहीं पिघलता
वह प्रहरी बन हमेशा खडा रहता
टूट जाता है
पर झुकता नहीं
वह पिता है
संतान से उपेक्षित
फिर भी उसके लिए चिंतित
घर का कर्ता धर्ता
सब कुछ पिता
सब निश्चिंत होते
जब तक साथ रहता पिता का
अपने से ज्यादा संतान को प्यार करता
बाप तो बाप होता है
हल हाल में बच्चों का भार ढोता है

Thursday, 28 May 2026

रफ बुक

रफ बुक 
परिवार  में  रहना और निभाना
त्याग  और बलिदान 
सबको समेट  कर  चलना
इतना  आसान  नहीं  होता 

हम पढते समय रफ  बुक का उपयोग  करते  हैं 
शुरुआत  में  ही  स्कूल- काॅलेज  में  पहले दिन ही
हाथ में  जो होती  है  वह एक बुक
और सब बाद में  बनती है
हर विषय  की अलग-अलग 
कवर के साथ साफ - सुथरा 
कभी भूल गए  ले जाना
रफ नोट बुक में  लिख लिया 
उसके बिना काम  नहीं  चलने वाला 

परिवार  में  भी कोई  न कोई  ऐसा होता है
जो सबको अपने  में समाहित  करता  है 
उसकी मदद  से सब काम  हो जाते हैं 
जिसको भी जरूरत  पडती है
वह उसके  पास आता है

ऐसे व्यक्ति  की वैल्यू  नहीं  होती 
न समझ में  आती  है 
जैसे रफ बुक 
वह न हो तो सारा गणित  गडबडा जाएंगा
मुखिया  का महत्व  तो जग-जाहिर है 
पर उस व्यक्ति  का ??

Monday, 18 May 2026

मां उदास है

माॅ है कि वह खुश नहीं रहती
जब देखो उदास
ऑखों में ऑसू
क्या कमी है
समय पर खाना पीना
दवाई और जरूरत का सामान
वैसे ज्यादा किसी चीज की जरूरत नहीं है
फिर ऐसा क्यों ??
माॅ के मन को कैसे समझेगा कोई
उसे प्यार चाहिए
सम्मान चाहिए
अपनापन चाहिए
बतियाना चाहिए
वह तो मिलता नहीं
सब अपना कर्तव्य निभा रहे हैं
मैने भी तो कर्तव्य निभाया है 
खुशी खुशी
बडा किया
लिखाया पढाया
आत्मनिर्भर बनाया
पर कभी जताया नहीं
बच्चों की खुशी के आगे स्वयं को तवज्जों नहीं दी
रसोई में लगी रही
सुस्वादु भोजन बनाने में
फरमाइश पूरा करने में
बच्चों को खाते देख स्वयं तृप्त
आज तो मेरे चेहरे की तरफ भी देखने की फुर्सत नहीं
बात करने की तो छोड़ो
समय नहीं है
यह तो बहाना है
अगर चाहे तो समय क्यों नहीं
सब काम समय से
बस मेरे पास दो घडी बैठने का समय नहीं
मैने तो अपनी जिंदगी न्योछावर की है
तुम लोग थोड़ा सा समय नहीं दे सकते

Saturday, 16 May 2026

परिवार

परिवार  तो परिवार  होता है
अपने  तो अपने  होते हैं 
नोक - झोंक  , लडाई  - झगड़ा 
यह तो होता  ही रहता है
इनके  बिना तो जीने का मजा भी जाता रहता है 
प्रेम  और अपनापन  भी होता है
संपूर्ण  अधिकार  होता है
जताना और बताना नहीं  पडता 
मन की डोर एक - दूसरे से बंधी रहती  है 
हर रिश्ते का एक नाम होता है
ननिहाल  ,ददिहाल, मायका ,ससुराल 
एक माता का और एक पिता का
दोनों  के रिश्तों  से बंधे सारे रिश्ते 
चचेरा ,ममेरा  ,फुफेरा 
सब रक्त  संबंधों  में  लिपटे
इनको अपने आप से लिपटाना 
संबंधों  की  अहमियत  समझना 
इनको जीवित रखना
अगर वेंटिलेटर  पर है
सांस है तब मरने नहीं  देना है
अभी भी बचाया जा सकता है
कुछ  भूले कुछ  याद करें 
खट्टी  मीठी यादों  में  विचरण  करें 
कडवाहट  को  दूर करें 
चार दिन की जिंदगी 
इसके दायरे को असीमित  करें 
अपने ही परिवार  नहीं  औरों  को भी  साथ जोड़े 
जोड़ने  में  जो मजा वह तोड़ने  में  कहाँ 
मिलने में  जो आनंद  हैं  वह बिछुड़ने  में  कहाँ
अपनाने में  जो मजा है वह छोड़ने  में  कहाँ 
सबको साथ लेकर चलने में  जो मजा वह अकेले में कहाँ