Wednesday, 1 July 2026

हर डाॅक्टर यह पढ़े

हर डाँक्टर यह पढें
अपनी ही किसी किताब में यह कहानी पढी थी
कहानी तो बडी है उसको मैं संक्षेप में ही बता रही हूँ

एक साधारण ग्रामीण खेत खलिहानों में मजदूरी कर गुजारा करने वाला
एक बार बेटे को बुखार आया । तप रहा था ।तबीयत बिगड़ती जा रही थी ।किसी ने सलाह दी
शहर के बडे डाँक्टर है उनके पास ले जाओ
वही ठीक कर सकते हैं
रात का समय था वह बेटे को कंधे पर लादकर पहुंचा
डाँक्टर साहब ने मिलने से मना कर दिया
रात हो गई है हमारा सोने का समय है
द्वारपाल को गेट बंद करने का आदेश दे अंदर चले गए
बेचारे गरीब के बेटे ने दम तोड़ दिया

समय बीता
कुछ बरसों बाद डाँक्टर साहब के बेटे को जहरीला सांप ने काट लिया
कोई औषधि काम नहीं कर रही थीं
किसी ने कहा कि फलां गांव में एक व्यक्ति है जो जहरीले से जहरीले सांप का जहर मंत्र द्वारा निकाल सकता है
डाँक्टर साहब को इन सब बातों पर विश्वास नहीं था
पर एकलौता जवान बेटे का प्रश्न था
उन्होंने आदमी भेजे पर आने को मना कर दिया
रात गहरा रही थी पर इस गरीब का मन नहीं माना
लाठी ठेगते पहुंच गए
आवाज दी
डाँक्टर साहब पैरों पर गिर पड़े
बचा लो मेरे बेटे को
जो मांगोगे वह दूंगा
अब इन्होंने अपने मंत्र विद्या के बल पर विष निकाल दिया
लडका ऑखे मलता हुआ उठ बैठा
डाँक्टर साहब ने खुश होकर कहा
क्या चाहिए
कुछ नहीं
याद कीजिए मैं वही हूँ जो अपने बेटे के इलाज के लिए आपके पास आया था
आपने वापस लौटा दिया
मेरा बेटा मर गया

पर मैं आप जैसा नहीं बन सका
मन तो हुआ 
मर जाने दो
पर ईश्वर ने मुझे यह हुनर दिया है जहर उतारने का
जान बचाने का
मैंने अपना कर्तव्य किया
आप भूल गये थे
आइंदा किसी मरीज को बिना देखे मत लौटाना ।
कहते हुए लाठी टेक गेट से बाहर निकल गए ।

आई जुलाई

आई जुलाई बारिश लाई 
झम झमाझम बूंदे बरसाई 
तपती गर्मी को दूर भगाई 
सबके लिए खुशियों का सौगात लाई 
हर मन प्रफुल्लित देख हरियाली छाई 
आई जुलाई सबके मन भायी जुलाई 

बता तेरी रजा क्या है

यह नहीं मिला 
वह नहीं मिला
मेरे साथ ऐसा हुआ 
मेरे साथ वैसा हुआ 
बहुत अन्याय हुआ 
घर - बाहर कहीं भी न्याय न मिला
बार - बार मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची
मुझे नीचा दिखाने का प्रयास किया गया
दस लोगों के बीच मुझे अपमानित किया गया 
मुझे कोई  तवज्जों नहीं दी गई 
मेरे लिए किसी ने कुछ नहीं  किया
किसी का प्रेम और अपनापन नहीं मिला 
मेरी बात को सुना नहीं गया
मेरा तो भाग्य ही खराब है
मेरा कोई नहीं सुनता
बस मुझी पर दोषारोपण किया जाता है
कटघरे में खड़ा किया जाता है
अपनी गलती छुपाने के लिए मेरे कंधे पर रखकर बंदूक चलाई जाती है
ऐसा अमूमन किसी न किसी  शख्स से सुनने को मिलता है
हमारे मन में भी यह सब चलता रहता है

अरे जनाब  / मैडम 
छोड़िए इन बातों  को 
अपने को इतना नीचे मत गिराओ 
आप भिखारी नहीं है
जो आपको प्रेम और सम्मान भीख में मिले
भाग्य को दोष मत दो
अपना भाग्य खुद बनाओ
किसी के बनाने और बिगाड़ने से आपका कुछ नहीं होगा
न किसी के दोषारोपण करने से
यह तो लोग है कहेंगे ही
मुंह देखी बात करने की आदत होती है 
पर सत्य तो सत्य ही होता है 
कब तक छुपेगा 
उजागर होना ही है

सब छोड़कर अपना कर्म करें 
भीख में मांगी वस्तु नहीं टिकती है
लोगों को एहसास कराए
अपना महत्व बताएं 

खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे को बनाने से पहले खुद पूछें 
बता तेरी रजा क्या है ।

Tuesday, 30 June 2026

क्या यही जीवन है

जो चला गया वह तो चला गया 
पीछे अपनी यादें छोड़ गया 
दुख हमेशा का दे गया 
रोते- बिलखते अपने रह गए 
आज यादों में बसाए वक्त- वक्त पर याद कर लेते हैं 
मन में कसक है बिछड़ने का 
कभी न उससे मुलाकात होने का 
वह हंसने - खिलखिलाने , लड़ने - झगड़ने का 
साथ में सब मिल - बांटने का 
कोई कुछ न कर पाया 
न उसे रोक पाया 
वह भी तो कहाँ जाना चाहता होगा अपनों से दूर
मन में न जाने कितने सपने संजोये होगे 
जीने की आस होगी 
कुछ कर गुजरने का सपना होगा 
कितना विवश होगा 
जब देखा होगा 
जिंदगी हाथ से फिसली जा रही है 
अपनों से दूर हो रहा है 
ईश्वर की तरफ दृष्टि है 
कुछ चमत्कार हो जाए 
कितनी तड़प होगी 
जीना चाहता है जो उसी से जीवन छिना जा रहा है 
अंतिम समय तक आस होगी 
नियति के आगे सब मजबूर 
काल की गति न्यारी 
सब प्रार्थना- दुआ नाकाम 
वश किसी का नहीं 
मृत्यु जीवन का सच 
पर वह इतना भयावह
भावनाओं पर तो कोई नियंत्रण नहीं 
सत्य स्वीकार करना बहुत मुश्किल 
आसान नहीं होता जीना भी मरना भी 
सारी सहानुभूतियां- सांत्वना सब बेकार 
ईश्वर पर भी आस्था डगमगाने लगती है 
मन में विचार उमड़ता रहता है 
भारी मन से कहता है 
क्या यही जीवन है