Monday, 24 August 2026

ऐसा रिश्ता जो होता दिखावा

वे लोग मेरे अपने थे 
बहुत खास 
दिल के पास 
मन हमेशा मिलने को बेताब 
मुलाकात होती नहीं थी व्यस्तता में 
कभी-कभार त्योहार- अवसर पर 
देख कर दिल खुश हो जाता था 
दूसरे ही क्षण डर भी जाता था 
मन सर्तक हो जाता था 
संभल कर रहना है 
कुछ बोलना नहीं है 
कोई कुछ भी कहे 
मजाक उड़ाए तब भी 
हंसते रहना है 
स्वयं का कष्ट हो तब भी 
जाहिर नहीं करना है 
कुछ समय की तो बात है 
लेकिन होता कुछ और ही 
ऐसा कुछ हो जाता 
सब दोष मुझ पर आ जाता 
सारी तैयारी - आवभगत, 
सब धरी की धरी रह जाती 
वो तो लोग खा - पीकर इंजॉय कर चले जाते 
मैं एकाध हफ्ते वही सब सोचती रहती 
मेरी क्या गलती हुई 
तब तक फिर दूसरा अवसर आ जाता 
सालोंसाल यही चलता रहा 
अब तो डर लगता है 
मिलने में 
देखने में 
जहाँ आप अपने मन की बात न रख सको 
अपनी सफाई न दे सको 
प्रत्युत्तर न दे सको 
सब एक तरफ
मिलकर आपकी कमियां गिनाने में जुटे 
परिवार की कमियां 
खानदान की कमियां 
परिस्थिति की कमियां और मजाक 
वो शायद उनका भी है 
वो कैसा अपना जहाँ बोलने से पहले सोचना 
वह कैसा परिवार जो पल - पल बदले 
उससे तो हिटलर जैसा बाॅस भी अच्छा
जहाँ सतर्क रहता है इंसान 
सर काटे और बाल की रक्षा करें 
ऐसे में मिठास कहाँ 
ऐसा रिश्ता अपना नहीं औपचारिक होता है 
कहने को संबंध खून के पर वह पानी से भी पतला होता है 
जबरदस्ती का थोपा हुआ लगता है 
वह ईश्वर प्रदत्त जो है 
समाज को दिखाने के लिए 
अपनी महत्ता जताने के लिए 
सब ठीक लगता है होता कुछ नहीं 
हर समय एहसास दिलाया जाता हो 
वह रिश्ता टूटा हुआ जोड़ लगा हुआ 
कब तक निभेगा 
आज हर जगह यही है 
रिश्ता नहीं व्यापार है 
एक हाथ ले एक हाथ दे 
तुम अगर सक्षम नहीं 
तुम्हारी जरूरत नहीं 
तब बस दिखावा तक सीमित 
विडंबना यह भी कि ईश्वर से प्रार्थना भी उन्हीं के लिए 
उनकी परेशानी बर्दाश्त नहीं 
उनके लिए बुरा सोचना सपने में भी नहीं 
शरीर के अंग जैसे 
अगर कांटा चुभा पैर में 
तकलीफ होगी मन भी दुखी होगा 
सलामत रहें सब 
रिश्ता रखे या न रखे 
सुरक्षित रहें वह 

अपनी दुनिया

मत सोचे 
यहाँ तो किसी ने मेरी बात सुनी नहीं 
मुझे समझा ही नहीं 
मेरी भावना को देखा ही नहीं 
मैं प्रेम बांटता रहा वो कमियां निकालते रहे 
मैं प्रयास रत रहा 
रिश्तें संभालने में 
वो करते रहें मुझे अनदेखा 
यह तो नहीं है कि सारी दुनियां उन्हीं तक है 
छोड़ दो ऐसे को 
संसार बहुत बड़ा है 
उस शहर को छोड़ दो 
उस गली को छोड़ दो 
उस कुएं के मेंढ़क की तरह मत बने 
जो कुएं को ही अपना सारा संसार मानता हो 
बहुत बड़ी दुनिया है 
जहाँ कद्र नहीं वहाँ जाना नहीं 
अपने पर भरोसा रखना 
बहुत लोग मिलेंगे 
विषधर रिश्ता बस डसेगा और कुछ नहीं 
बिच्छु की तरह समय-समय पर डंक मारता रहेगा 
जो स्वयं अपने को खत्म कर लेता है 
वह आपको क्या देगा 
अपने पौरुष पर विश्वास 
बेकार का झमेला क्यों 
हम अपनी दुनिया खुद बनाएंगे 
अपने हिसाब से चलाएंगे 
अपनी राह स्वयं निकालेंगे 
दुनिया बहुत बड़ी है 
याद रहें 
ये कुछ लोगों पर अपनी दुनिया सीमित न करें 

Sunday, 23 August 2026

हर युवा को यह समझना होगा

ले लिया एक मोबाइल ने जान 
वह भी एक नहीं तीन - तीन
मां - पिता और युवा 
मोबाइल न दे पाए अपनी युवा औलाद को 
वह पहाड़ी पर चढ़ गया जान देने 
मनाने की कोशिश हुई नहीं माना 
आखिर में सबकी जान चली गई 
आज लोगों की जान मोबाइल में टिकी है 
बचपन से हाथ में मोबाइल 
यह ऐसा खिलौना है जो जिंदगी लील रहा है 

एक जमाना था 
जब बच्चें अपने पालक की परिस्थिति को समझते थे 
कुछ भी नहीं मांगते थे 
हर बात की जिद नहीं करते थे 
हमने ब्लेक - व्हाइट टेलीविजन के लिए दूसरों के घर जाते थे 
दुत्कारना जाते थे 
भगाए जाते थे 
हंसते हुए बाहर आ जाते थे 
कभी मांग नहीं की 
यहाँ तक कि पढ़ने के लिए पुस्तक की भी मांग नहीं की 
लाइब्रेरी से किताब लेकर नोट्स बनाए कर पढ़ते थे 
प्रेमचंद की ईदगाह कहानी में इसका बखूबी चित्रण है 
हामिद को मिठाई के लिए दादी पैसे देती है 
तो वह चिमटा लेकर आता है ताकि दादी के हाथ रोटी बनाते हुए नहीं जले 
उसका भी बालमन मचलाता है 
मिठाई और खिलौने के लिए 
बेटी होने के कारण बेटियां सब दुख सह लेती थी पर जाहिर नहीं करती थी 
बेटा अपने आंसू छिपा लेता था ताकि मां की आँखों में आंसू न आए 
शिक्षक से मार खा लेते थे पर घर पर नहीं बोलते थे 
पड़ोसी भी डांट लगा देते थे 
दो कपड़ों में पूरा वर्ष निकाल देते थे 
घर के पकवान वो भी त्योहार में खाकर मस्त रहते थे 

आज जरूरतें बढ़ गई है 
हर बच्चें को मोबाइल और बाइक चाहिए 
उसको भराने के लिए भी पैसा चाहिए 
आमदनी है नहीं न काम करना है 
माता - पिता सामर्थ्य वान न हो तब 
पढ़े - लिखे और अपनी कमाई से अपने शौक पूरे 
यह युवाओं को समझना होगा 
इतना अमूल्य जीवन यू ही गंवाना 
मजबूर न करें अपने पालक को 
परिस्थिति को समझे 
छोटी - छोटी बात पर जान देना लगता है फैशन हो गया है 
आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही है 
क्षुद्र कारणों से जान देना 
जीना सीखिए 
प्यार में धोखा 
मोबाइल,  मोटरसाइकिल,  इन सब के लिए जान देना 
जिंदा रहेंगे तभी तो मोबाइल चलाएंगे 
दूसरों की कहानियां देखने की अपेक्षा अपनी कहानी खुद लिखे 
अपने जीवन की 
मां - बाप के सपनों को 
अपने सपनों को साकार करें 
जान मत दें 
जान है तो जहान है 
आप तो चले जाएंगे 
अपने पीछे जो प्रियजन है उनको जीते - जी मार जाओगे 
मत करो ऐसा 

Saturday, 22 August 2026

देखना है होता क्या है

दो तिनके नदी में बहते जा रहे थे 
नदी का प्रवाह तेज था 
एक तिनका नदी की धारा के साथ ही बह रहा था 
उसने सोच लिया था 
जहाँ ले जाएगी चला जाऊंगा 
अपने को भाग्य भरोसे छोड़ दिया 
दूसरा तिनका यह मानने को तैयार नहीं था 
जद्दोजहद कर रहा था 
लड़ रहा था 
कोशिश कर रहा था 
वह नदी की धारा के अनुसार बहने को तैयार नहीं 
अब तो दोनों का दृष्टिकोण अलग- अलग 
कौन सही कौन गलत ???
यह भी तो नहीं कहा जा सकता 
एक जा रहा है जहाँ उसको ले जाया जा रहा है 
वह संघर्ष भी नहीं करना चाहता 
न विरोध भी करना चाहता 
दूसरे को यह स्वीकार नहीं 
किसका क्या हश्र होगा 
कौन कहाँ जाएगा 
क्या हासिल होगा 

एक बूंद की आपबीती 
जो ऊपर से तो गिरती है 
कहाँ जाएगी वह यह नहीं जानती 
सीप का मोती बनेगी 
किसी की प्यास बुझाएगी 
समंदर में मिल अपने को खारा करेंगी 
नदी - कुएं में मिल मीठा जल बनेगी 
खेतों को सींचेगी 
पेड़ - पौधों को लहलहाएंगी 
गंदी नाली में गिरेगी 
अब तो वह बादलों को छोड़ निकल चुकी है 
जो होगा वह देखा जाएगा 
उसे बादलों की बंदिश स्वीकार नहीं 
चल पड़ी है 
देखना है होता क्या है