Wednesday, 22 July 2026

वादा है तुम भूखे नहीं रहोगे

एक समय था जब पेट भर भोजन भी नहीं मिलता था 
मजूरी करना मानो गुलामी करना था 
पेट के कारण गालियां सुननी पड़ती थी 
मारा - पीटा जाता था 
गुलामी का दौर खत्म हुआ 
भूखमरी का भी अंत 
अब मजबरी - काम नहीं करें 
तब भी जीवनयापन हो जा रहा है 
मुफ्त में अनाज मिल रहा है 
पैसे भी मिल रहे हैं जो नशा- पानी के लिए पर्याप्त है 
समय- समय पर बिजली बिल भी माफ 
चुनाव आने पर कर्ज भी माफ 
अब तो मजे ही मजे हैं 
संविधान ने हमें अधिकार भी दिया है 
दवाई भी मुफ्त अस्पताल भी 
तीर्थ यात्रा भी भगवान के दर्शन भी 
और क्या चाहिए 
सही है 
अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम 
दास मलूका कह गए सबके दाता राम
यहाँ सबके दाता सरकार है 
पूँजीपति अमीर हो रहे हैं 
कुछ यहाँ पांच किलो पर खुश हैं 
पढ़ने की क्या जरूरत 
पकड तल कर कमा लेंगे 
ठगी कर कमा लेंगे 
लेकिन घूमेंगे आलिशान  गाड़ी में 
बड़े - बड़े बंगले बनाएंगे 
भले ही चंदा चोरी करना पड़े 
हमको अपनी पड़ी है 
लोग जाए भाड़ में 
नेताओ का एक ही नारा 
तुम भी खुश रहो 
हम भी खुश रहेंगे 
हमको जीताओ हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे 
वादा है तुम भूखे नहीं रहोगे 

Tuesday, 21 July 2026

आजादी का जश्न ???

कुछ ही दिन बाद हम आजादी का जश्न मनाने वाले हैं 
स्वतंत्रता दिवस आ रहा है 
बड़े शान से मनाते हैं हम 
कोई कमी नहीं छोड़ते 
एक ही दिन ही सही बलिदानियों को याद करते हैं 
आजाद हैं क्या हम ??
अपनी आवाज उठाने का हक है 
अधिकार प्राप्त है ??
बोलने की आजादी हैं ??
रोटी - कपड़ा - मकान सबको उपलब्ध है ??
रोजगार के साधन हैं ??
शिक्षा  सबके लिए निष्पक्ष ??
भ्रष्टाचार खत्म ??
आदर्श सत्ताधारी नेता ??
दवा और अस्पताल??
सरकारी कामकाज??
और न जाने क्या - क्या ??
योग्यता की कद्र या फिर उसकी बलि पैसों के आगे 
निर्भय और निडर हैं देश में ??
पुलिस और प्रशासन का कर्तव्य 
लगता है ऐसा है नहीं 
सब परेशान हैं 
आखिर क्यों ??
क्यों लोगों को अंग्रेजी हुकूमत की याद आ रही है 
अब तो जलियांवाला बाग जैसा कुछ नहीं होने वाला है ना ??
फिर लगता है 
कहीं कुछ तो सही नहीं है 

इस शहर में हर शख्स परेशान क्यों हैं ????


Monday, 20 July 2026

अपना कर्म करते रहे

सुबह हुई 
बहुत कुछ साथ लाई 
एक नयी आशा 
एक नया दिन 
आज का भविष्य  ??
ज्योतिषी की भविष्य वाणी सुनते हैं 
कुछ कल्पना करते हैं 
कभी खुश हो जाते हैं 
कभी निराश हो जाते हैं 
कर तो कुछ नहीं सकते 
मन में ताना - बाना बुनते हैं 
यह भलीभाँति जानते हुए 
यह सब जरुरी नहीं कि 
सच हो 
मन को समझाते हैं 
उपाय में विश्वास नहीं 
बस सुनना है 
अगले दिन फिर सुबह 
टेलीविजन के सामने बैठ जाना है 
आज का दिन कैसा जाएगा 
यही मानव मन है 
वह भविष्य जानना चाहता है 
वर्तमान को छोड़ उसमें उलझा रहता है 
उसके अपने वश में कुछ नहीं 
सब ऊपर वाले के हाथ में 
हाथ की लकीरे तो बदलती नहीं है ना 
जो लिख दिया है वह तो हैं 
फिर भी मन को संतोष देने के लिए 
शायद ईश्वर सुन ले 
भाग्य को थोड़ा संवार दें 
यह विश्वास तो होता है उस पर
और वो चाहे तो फिर क्या न हो 
सब संभव है 
भविष्य नहीं भगवान पर विश्वास करें 
जो करता है हमारे भले के लिए ही 
चिंता नहीं चिंतन करें 
जिम्मेदार अपने को न माने 
उसको माने 
उसकी इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता 
बस आप अपना कर्म करते रहे 

Saturday, 18 July 2026

नीरज

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गयी
पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गयी
पात-पात झर गए कि शाख-शाख जल गयी
चाह तो सकी निकल न पर उमर निकल गयी
गीत अश्क़ बन गए
छंद हो हवन गए
साथ के सभी दिए, धुआँ पहन-पहन चले
और हम झुके-झुके
मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे!

    गोपालदास "नीरज"