Monday, 20 July 2026

अपना कर्म करते रहे

सुबह हुई 
बहुत कुछ साथ लाई 
एक नयी आशा 
एक नया दिन 
आज का भविष्य  ??
ज्योतिषी की भविष्य वाणी सुनते हैं 
कुछ कल्पना करते हैं 
कभी खुश हो जाते हैं 
कभी निराश हो जाते हैं 
कर तो कुछ नहीं सकते 
मन में ताना - बाना बुनते हैं 
यह भलीभाँति जानते हुए 
यह सब जरुरी नहीं कि 
सच हो 
मन को समझाते हैं 
उपाय में विश्वास नहीं 
बस सुनना है 
अगले दिन फिर सुबह 
टेलीविजन के सामने बैठ जाना है 
आज का दिन कैसा जाएगा 
यही मानव मन है 
वह भविष्य जानना चाहता है 
वर्तमान को छोड़ उसमें उलझा रहता है 
उसके अपने वश में कुछ नहीं 
सब ऊपर वाले के हाथ में 
हाथ की लकीरे तो बदलती नहीं है ना 
जो लिख दिया है वह तो हैं 
फिर भी मन को संतोष देने के लिए 
शायद ईश्वर सुन ले 
भाग्य को थोड़ा संवार दें 
यह विश्वास तो होता है उस पर
और वो चाहे तो फिर क्या न हो 
सब संभव है 
भविष्य नहीं भगवान पर विश्वास करें 
जो करता है हमारे भले के लिए ही 
चिंता नहीं चिंतन करें 
जिम्मेदार अपने को न माने 
उसको माने 
उसकी इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता 
बस आप अपना कर्म करते रहे 

Saturday, 18 July 2026

नीरज

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गयी
पाँव जब तलक उठें कि ज़िन्दगी फिसल गयी
पात-पात झर गए कि शाख-शाख जल गयी
चाह तो सकी निकल न पर उमर निकल गयी
गीत अश्क़ बन गए
छंद हो हवन गए
साथ के सभी दिए, धुआँ पहन-पहन चले
और हम झुके-झुके
मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे!

    गोपालदास "नीरज"

Tuesday, 14 July 2026

समुंदर होना ????

समुंदर होना आसान नहीं है 
सब कुछ अपने में समा लेना 
अपनी गहराई की थाह किसी को न लगने देना 
अपनी सारी पीड़ा को नमक में रूपांतरित कर देना 
वेग आता भी तो फिर तुरंत पीछे हट जाना 
अपनी सीमा में रहना 
अवांछित को बाहर निकाल देना 
साफ हो या गंदा 
नदी हो या नाला 
सबके पानी को अपने अंदर ले लेना 
धूप में अपने को जला वाष्प बनाना 
उसी को फिर से स्वच्छ जल में बरसवाना 
पाटता  जाता फिर भी कुछ नहीं कहता 
न जाने कितने जीवों का घर 
सीप में मोती बनाता 
न जाने कितने अमूल्य जवाहरात इसके गर्भ में 
फिर भी घमंड नहीं 
जो आता अपने किनारे बैठा लहरों से सहलाता  
तुम भी ऊंचे बनो अपनी मर्यादा में रहकर 

पाठ्यक्रम जीवन का

अपनी किताब बंद मत करें 
हो सकता है कुछ पन्ने पसंद न आएं 
तो आगे बढे 
अगले पन्नों को पलटें 
कुछ तो पसंद आ ही जाएंगे
न जाने कितने चैप्टर हो
हर चैप्टर पसंद हो यह जरूरी नहीं 
समझ भी आए यह भी जरूरी नहीं 
उन चैप्टर को छोड़ आगे बढ़ें 
जो पसंद आए उन्हें पढें 
प्रथम और अंतिम को मत छोड़े
खत्म तो करें ही
आखिर तक आते-आते सब समझ आ जाएंगा 
इतना गुणा- गणित की जरूरत नहीं है 
सब कुछ पढना
सब कुछ समझना
यह तो मुश्किल है
मुमकिन बनाइए 
आसान बनाइए 
अपनी पसंद को साथ रखें 
उसे मत छोड़े 
जितना जरूरी है उतना करें 
हो सकता है जो चैप्टर या पन्ना समझ में  आया है 
प्रश्न पत्र में प्रश्न उन्हीं से हो
जिसका उत्तर आप आसानी से दे सकते हो
तब यह तो करना ही है
अपनी किताब बंद नहीं करना है
फिर वह चाहे 
जिंदगी की हो
पाठ्यक्रम की हो ।