Sunday, 1 November 2026

सब ठीक है ???

मैं इंतजार करती आ रही हूँ 
ना जाने कब से 
कब सब ठीक होगा 
मैं इत्मीनान से कह सकूं 
अब सब ठीक है 
वह समय अब तक आया ही नहीं 
एक खत्म कि दूसरा शुरू 
जिंदगी कुछ न कुछ लेकर उपस्थित हो जाती है 
मैं फिर जुट जाती हूँ 
उनका निवारण करने 
समाधान ढूंढने 
इसी जद्दोजहद में जिंदगी आखिरी सफर पर आ गई 
वह किनारे पर खड़ी है 
मैं किनारा न पा सकी 
प्रतीक्षारत हूँ 
कब सब ठीक होगा 
कारण भी है 
मैं अकेली नहीं हूँ ना 
मुझसे कुछ लोग जुड़े हैं 
ले मेरे जीवन का अभिन्न अंग हैं 
यू कहा जा सकता है 
वे जीवन ही है मेरा 
यहाँ अकेला कोई नहीं 
आता भी कहते हैं कि अकेला आया 
कहाँ कोई अकेला आता है 
मां के नाल से गर्भ में ही जुड़ जाता है 
बाहर आकर ना जाने कितने लोगों से जुड़ता है 
बचपन से वृद्ध  तक यह क्रम जारी रहता है 
आपके पास मकान है 
आपके अपनों के पास नहीं है 
आपके पास भोजन है 
अपनों के पास भरपूर नहीं है 
आपके पास पैसा है 
अपनों के पास अभाव है 
तब आप कैसे खुश रह सकते हैं 
आपके पास ना हो 
उनके पास हो 
तब भी आप खुश रह सकते हैं 
वह हुआ ही नहीं अब तक 
तब खुश कैसे रहा जा सकता है 
ना अकेले आए 
ना अकेले जाएगे 
इंतजार में हूँ 
कब कह सकूं 
अब सब ठीक है जीवन में 

Thursday, 29 October 2026

जीने का असली मजा

अपनों के आगे झुकने से कोई छोटा नहीं होता
अडकर बैठ रहने से जीना आसान नहीं होता
मन मसोसकर प्यार दबाने की अपेक्षा जताना
दिल से दिल  मिलाना कुछ ज्यादा मुश्किल नहीं होता
रिश्तों को पास लाना  उनकी कदर करना
उस आनंद से बडा कुछ नहीं होता ।
जोड़,  गुणा, घटाना 
मान - अपमान से ऊपर उठ 
जीना सहज हो जाता है
जीने का असली मजा आ जाता है ।

Wednesday, 28 October 2026

हाय मेरी प्यारी शराब

तू है मेरी जान
तेरे बिना मैं बेहाल
मेरे रातों की नींद तू
मेरे दिल का चैन तू
मेरी हमसफर
मेरे अकेलेपन की साथी
मैं और तू 
उसमें नहीं किसी और का काम
तुझसे बिछुडना नहीं गंवारा
कोई नाराज हो या खुश
उसकी नहीं कोई परवाह
तू ही खुदा मेरी
तुझमे सारा जग दिखता
मेरी दुनिया तुझमे समाई
एक बार जब थाम लिया
तब सब स्वर्ग का आंनद मिल गया
घूंट घूंट उतरती तब दिल को ठंडक मिलती
अमृत की बूंदों की तरह छलकती
गले को तर करती
कुछ न साथ बस हो तेरा साथ
तब क्या गम
मेरा सब गम तू हर लेती
सब दुख दर्द भूला देती
जब एक घूंट अंदर जाती
तब सब कुछ हो जाता हवा हवा
मदहोशी का आलम
साकी और प्याला
इससे दूजा न कोई प्यारा
तू ही मेरी जान
तू ही मेरा जहान
तुझ बिन लागे सब अधूरा
तू है मेरी प्यारी शराब

Tuesday, 27 October 2026

जो डरा वह गया

वह फूल क्या जिसमें कांटे न हो
वह डगर क्या जो पथरीली न हो
वह नदी क्या जिसमें भंवर न हो
वह मौसम क्या जिसमें झंझावात न हो
वह बिजली क्या जिसमें कडकडाहट न हो
वह सपने क्या जिसमें उडान न हो
वह मंजिल क्या जो कठिन न हो
वह जीवन क्या जिसमें संघर्ष न हो

कंकरीली पथरीली राहों पर चलना है
हर राह को आसान बनाना है
कितनी भी मुश्किल हो डगर
कितना भी ऊंचा हो पहाड़
चढना तो तब भी है
नीचे बैठ दृश्य नहीं देखना है
तैरना न आए कोई बात नहीं
नदी में उतर जाइए 
हाथ पैर मार कर तो देखो
क्या पता किनारा मिल ही जाए
जो डरा वह कुछ नहीं कर पाया