किसी का आगमन किसी का प्रस्थान
किसी की ऑख खुली
कोई हमेशा के लिए सो गया
किसी पर गाजे - बाजे और बधाई
किसी पर चार कंधों का सहारा
किसी पर हंसी - खुशी
किसी पर रूदन - दुख
किसी से आशा - आकाक्षा
किसी से घनघोर उदासी - निराशा
किसी के आने की प्रतीक्षा
किसी के जाने की प्रतीक्षा
किसी के आने से हर्ष की लहर
किसी के जाने से गमगीन सब
आने पर खुशी से भोज बरही बारह दिन पर
जाने पर भी दुख में भोज तेरही तेरह दिन पर
एक गर्भ से बाहर आ रहा
एक इस लोक से बिदा ले रहा
इस आवागमन को रोका नहीं जा सकता
सब ऊपर वाले के हिसाब से
बड़े - बड़े शूरमा कुछ न कर पाए
स्वर्ग तक की सीढ़ी बनाते - बनाते स्वर्ग की राह हो लिए
इच्छामृत्यु का वरदान पाकर भी मृत्यु को वरण कर लिया
अश्वत्थामा भी यहाँ कोई नहीं बनना चाहता
जीना सब चाहते हैं
अमरता कोई नहीं
यही प्रकृति का नियम है
एक भूतकाल है
दूसरा भविष्य की धरोहर है
आते हैं सब रोते हुए
जाते हैं रुलाते हुए
सबका अंत होना निश्चित है
यह विधाता का विधान है
जिस पर किसी का कोई वश नहीं