Tuesday, 7 July 2026

ये हमारी मुंबई

ये हमारी मुंबई 
पानी - पानी हुई 
हर जगह पानी की मारी 
सबको घरों में कर दिया कैद 
लोकल की रफ्तार भी मंद 
कही कही तो ठप्प 
काम फिर भी जारी है 
कहीं नहीं थमी है 
दूध - अखबार भी टाइम से 
कामवाली और सुरक्षा गार्ड भी 
सबकी दुकान खुली है 
घुटना भर पानी है 
तब भी सब जारी है 
यहाँ बस काम ही भारी है 
कुछ समय बारिश रुक जाए 
फिर सब वैसे ही दौड़ पड़ेगे 

बेबस जीवन

प्रकृति भी खेल दिखा रही है 
बेहिसाब गर्मी 
बेहिसाब बारीश 
इनके बीच पीसता जीवन
एक पल में सब छीन लेती है 
पहले गर्मी का कहर 
अब बरसात का तांडव
बेबस जीवन 

मानवता शर्मसार

मानवता  शर्मसार  हो रही है 
तेरह साल की मासूम बच्ची बलात्कार का शिकार
वह भी एक - दो नहीं 
गिनती नहीं एक - दो दर्जन 
क्या किसी के घर भी कोई स्त्री नहीं होगी 
न सही 
मां तो होगी ही 
क्या ख्याल नहीं आया 
मानवता - नैतिकता नहीं जागी 
हैवानियत की हद पार
जानवर से भी गया - बीता इंसान 
हर दिन एक खबर सुर्खियों में 
नित नया कांड 
सब डरे हुए हैं 
बच्चें कहीं भी सुरक्षित नहीं है 
न घर न बाहर न आस - पड़ोस न रिश्तेदार 
न सड़क पर न स्कूल में 
किस तरह की परवरिश हुई है इन हैवानों की 
समाज पर कलंक हैं ये 
इनके लिए तो कानून कोई मायने नहीं रखता 
तब कानून को भी इनकी हिफाजत करने की 
इनकी दलील सुनने की 
अपना पक्ष रखने की 
इजाजत न दिया जाए 
बीच चौराहे पर गोली मारी जाए 
कानून मजबूर है लेकिन 
इसीलिए ये अपराधी हैवान मजबूत हो रहे हैं 
समाज को भी इन्हें बहिष्कृत कर देना चाहिए 
पहले की पंचायती न्याय भी सही था 
लोग डरते थे 
आज डर गायब है 
न घर-परिवार का 
न समाज का 
न सरकार का 
तब क्या किया जाए 

Monday, 6 July 2026

माझी

अपना माझी खुद ही बनना होगा 
जीवन नैया को मझधार से निकाल 
किनारे पर खुद ही लाना होगा 
पतवार खुद ही चलाना होगा
नहीं कोई आएगा 
खुद ही नैया पार लगाना होगा