Tuesday, 14 July 2026

समुंदर होना ????

समुंदर होना आसान नहीं है 
सब कुछ अपने में समा लेना 
अपनी गहराई की थाह किसी को न लगने देना 
अपनी सारी पीड़ा को नमक में रूपांतरित कर देना 
वेग आता भी तो फिर तुरंत पीछे हट जाना 
अपनी सीमा में रहना 
अवांछित को बाहर निकाल देना 
साफ हो या गंदा 
नदी हो या नाला 
सबके पानी को अपने अंदर ले लेना 
धूप में अपने को जला वाष्प बनाना 
उसी को फिर से स्वच्छ जल में बरसवाना 
पाटता  जाता फिर भी कुछ नहीं कहता 
न जाने कितने जीवों का घर 
सीप में मोती बनाता 
न जाने कितने अमूल्य जवाहरात इसके गर्भ में 
फिर भी घमंड नहीं 
जो आता अपने किनारे बैठा लहरों से सहलाता  
तुम भी ऊंचे बनो अपनी मर्यादा में रहकर 

पाठ्यक्रम जीवन का

अपनी किताब बंद मत करें 
हो सकता है कुछ पन्ने पसंद न आएं 
तो आगे बढे 
अगले पन्नों को पलटें 
कुछ तो पसंद आ ही जाएंगे
न जाने कितने चैप्टर हो
हर चैप्टर पसंद हो यह जरूरी नहीं 
समझ भी आए यह भी जरूरी नहीं 
उन चैप्टर को छोड़ आगे बढ़ें 
जो पसंद आए उन्हें पढें 
प्रथम और अंतिम को मत छोड़े
खत्म तो करें ही
आखिर तक आते-आते सब समझ आ जाएंगा 
इतना गुणा- गणित की जरूरत नहीं है 
सब कुछ पढना
सब कुछ समझना
यह तो मुश्किल है
मुमकिन बनाइए 
आसान बनाइए 
अपनी पसंद को साथ रखें 
उसे मत छोड़े 
जितना जरूरी है उतना करें 
हो सकता है जो चैप्टर या पन्ना समझ में  आया है 
प्रश्न पत्र में प्रश्न उन्हीं से हो
जिसका उत्तर आप आसानी से दे सकते हो
तब यह तो करना ही है
अपनी किताब बंद नहीं करना है
फिर वह चाहे 
जिंदगी की हो
पाठ्यक्रम की हो ।

Monday, 13 July 2026

आंटी मत कहो ना ???

आंटी और अंकल के चक्कर में 
उलझ गए हैं  हम
सारे रिश्ते गुम 
बस सबका एक ही रिश्ता 
चाची , काकी ,मामी, बुआ 
चाचा , मामा , फूफा , मौसा 
सिमट कर रह गए हैं 
आंटी और अंकल के मायाजाल में 
अंग्रेजी बोलने के चक्कर में 
रिश्तों के नाम की बलि चढा दी हमने 

कितनी मिठास 
कितना प्यार 
झलकता था
पापा का भाई चाचा
माँ का भाई मामा
फूफा और मौसा भी अपने
अपनापन और प्यार 
हक से अधिकार से

अब तो सब अंकल और आंटी 
भईया - भाभी
दादा - दादी 
काका - काकी
का भी संबोधन हुआ लुप्त 
अब तो छोटा हो या बडा
सब है अंकल - आंटी 
कभी-कभी नागवार भी गुजरता है
जब अपने से उम्र दराज व्यक्ति आंटी और अंकल कहता है
हम उम्र  को भी संबोधते हैं
तब खीझ और गुस्सा आ जाता है

अब किसको रोके
किसको टोके 
किसको समझाए 
जब अंकल - आंटी का है बोलबाला
सुनते रहिए
पसंद आए या न आए 
बस सुन कर अनदेखा करिए
या फिर निगलते रहिए
टोकमटाकी कर क्या हासिल 
जब जमाना ही है अंकल - आंटी का पक्षधर

Sunday, 12 July 2026

साथ कौन ???

साथ बहुत से चलते हैं 
साथ खड़ा कोई नहीं होता 
हंसते तो बहुत साथ में हैं 
तुम्हारी खुशी में कोई खुश नहीं होता 
दुख में सहानुभूति तो बहुत दिखा देंगे 
कोई तुम्हारें साथ रोने वाला नहीं यहाँ 
दुनिया बहुत मतलबी है 
तुम पर हंसने वाले बहुतेरे मिल जाएगे 
बातें बनाने वाले भी 
यहाँ अकेले ही सब करना है 
कहने को अपने पर कभी काम में नहीं आते 
अजनबी भी कभी-कभार अपनों से ज्यादा हो जाते हैं 
जानते तो सब हैं तुम्हें 
असलियत तो यह है 
कि वह बस ऊपर से 
कोई मन में झांककर देखना नहीं चाहता 
दोस्त तो बहुत हैं कहने को 
दोस्ती निभाना नहीं जानते 
रिश्तेदार तो उससे भी आगे 
रिश्ता कैसे बनाए रखना है 
यह तो उनको भी नहीं मालूम 
बस अवसर की प्रतीक्षा करते हैं 
कब खाने को मिले 
वह बरही हो या तेरही 
खाकर गायब हो जाते हैं 
हैसियत देखने आते हैं 
फिर सब जगह प्रचार करते हैं 
सब मिला कर देखा जाए 
तो दोस्ती- रिश्तेदारी 
सब बेमानी 
सच्ची हो तो अच्छी है 
अन्यथा न हो तो ही ठीक