Thursday, 20 August 2026

दोषी केवल औरत ???

प्रेम का पैमाना क्या 
प्रेम न बांटा जा सकता है न खरीदा 
समय-समय पर प्रेम में बदलाव हो जाता है 
क्या प्रेम सचमुच बदलता है ??
आज सुनीता - गोविंदा के चर्चे सब जगह
चालीस साल का वैवाहिक जीवन खतरे में 
धज्जियाँ उड़ाई जा रही है सुनीता द्वारा 
असलियत तो कोई नहीं जानता 
जो औरत दो बड़े बच्चों की माँ 
पूरा जीवन परिवार के लिए समर्पित 
आज वह क्यों ऐसा कर रही है 
कहीं न कहीं कुछ बात तो है 
अच्छा अभिनेता अच्छा पति हो 
यह जरूरी तो नहीं 
वे शालीनता से बोल रहे हैं 
जिसका मन टूटा हो वो कैसे बोलेगी 
उसकी भाषा बंबईया जरूर है 
बिना लाग - लपेट के 
पर भाषा से किसी को परखना 

जया भादुड़ी इसका सबसे अच्छा उदाहरण 
अमिताभ और रेखा के प्रेम के चर्चे 
उस औरत ने कैसे झेला होगा और झेल रही है 
उसका चिड़चिड़ापन सबको दिखाई देता है 
कारण नहीं 
अभिनेता जाना - माना पर पति 
यहाँ तक कि लोग बोलते हैं 
जया अमिताभ के लायक नहीं है 
बहुत मगरूर है 
रेखा से शादी नहीं करने दी 
उसकी जिंदगी खराब की 

अरे यह कौन सी बात हुई 
कौन पत्नी यह स्वीकार करेंगी 
यह भी याद रहें कि यह प्रेम विवाह था 
उस समय जब जया शीर्ष पर थी 
अमिताभ फ्लाप हो रहे थे 
घर - बच्चों के कारण काम छोड़ा 
भादुड़ी से बच्चन बनी 
अपने को पूर्ण समर्पित किया 
और आज वह विलेन बन गई 

राधा का नाम कृष्ण के साथ 
पूजा भी जाता है 
रूक्मणि ने क्या अपराध किया था 
यही तो वह समाज है 
कब किसको उठाए और किसको गिराए 
ऊपर से दोषी केवल औरत ??

कर्म हमारा

एक गलत फैसला क्या लिया 
उसने जिंदगी की दशा और दिशा ही बदल दिया 
जिंदगी को दशकों पीछे कर दिया 
न जाने क्या-कुछ सोचा था 
क्या-कुछ सपने देखे थे 
भविष्य के ताने - बाने बुने थे 
ऐसा मझधार में पहुंच गया 
उसमें अभी तक डूब - उतरा रहा हूँ 
बाहर आने की कोशिश भी की 
सफल भी हुआ 
लेकिन क्रम अभी जारी है 
कब खत्म होगा पता नहीं 
फिर भी सुकून है 
उससे तो बाहर आया 
बहुत कुछ समझ आया 
अब तो हर पग सोच-समझकर धरना है 
जल्दबाजी कभी अच्छी नहीं होती 
समय को भी समय चाहिए 
वैसे यह भी पता है 
हमारे चाहने से कुछ नहीं होता 
होता वही है 
      जो वह चाहे 
होयहै वही जो राम रचि राखा 
अब नजर उस पर
कर्म हमारा फल उसका 

Monday, 17 August 2026

तू है तो मैं भी

जिंदगी ने मुझसे कहा 
अभी तो बहुत से इम्तिहान बाकी है 
मैने भी हंसकर कहा 
तू उसे जारी रख 
अभी मुझमें जान बाकी है 
तू अपना कर्म कर मैं अपना 
इतनी जल्दी तो मैं भी हार मानने वाली नहीं 
तू भी तो इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं 
जान है तो जहान है 
तू मुझसे अलग तो नहीं 
तू है तो मैं भी हूँ 

Happy Nagpanchami

हम हिन्दू हैं 
हिन्द के वासी है 
सबसे न्यारे हैं 
हम वह हैं 
जो सर्प की भी पूजा करते हैं 
विषधर है यह जानते हुए भी 
हमारे शिव तो उसको अपने गले में धारण कर रखे हैं 
सबको जीने का अधिकार 
सब ही हैं प्रकृति के अंग 
सभी का योगदान यहाँ 
कोई जीव बेकार नहीं यहाँ 
सबकी अपनी महत्ता 
दोस्त कहते हैं इसे किसानों का 
सर्प को भी मित्र 
यही तो हैं हम
हमारी संस्कृति 
जब तक हमें कोई छेड़ता नहीं तब तक हम कुछ नहीं करते 
छेड़ा तो हम छोड़ते भी नहीं 
ऐसे ही तो हैं हमारे नागराज 
भोले के गले की शोभा 
नमन है तुम्हें 
सभी को नागपंचमी की शुभकामना