Thursday, 3 September 2026

मत रुको

मत रुको चलते रहो 
चलना जरूरी है इसलिए नहीं 
चलना तुम्हारा स्वभाव है इसलिए 

हंसो , हंसते रहो 
हंसना है इसलिए नहीं 
हंसना - मुस्कराना हर परिस्थिति मे तुम्हें आता है इसलिए 

गिरो और उठो 
उठते रहो 
उठना जरूरी है इसलिए नहीं 
उठना तुम्हें आता है इसलिए 

समझौता करना तुम्हें आता है 
इसलिए नहीं करना 
तुम्हें अपने निर्णय पर भरोसा है इसलिए 
होगा जो चाहता हूँ 
यह ईश्वर पर भरोसा है 

असफलता से तुम्हें डर नहीं 
प्रयास जारी रखे 
इसलिए नहीं कि अब कुछ नहीं हो सकता 
असफलता को सफलता में बदलाव करना तुम्हारा स्वभाव है 

नैतिकता पर कायम रहना आता है 
भले कितनी भी बुराई हो 
तब भी अच्छाई तुमको भाता है इसलिए 

इस दुनिया से अब भी लगाव है 
इसलिए नहीं कि दुनिया बहुत बुरी है 
अच्छाई अभी भी कायम है 
विश्वास है तुम्हें 

यह जग किसी एक का नहीं 
तुम्हारा भी है 
प्रकृति का कण - कण तुम्हारा है 
रहना और स्वयं को स्थापित करना तुम्हारा अधिकार है 

Wednesday, 2 September 2026

समय का प्रभाव

तालियाँ बजी 
लोग खुश हुए 
बातें - ताने भी दिए 
यह उस समय जब समय खराब चल रहा था 
जिंदगी हिचकोले ले रही थी 
कहते हैं 
समय बदलता जरूर है 
बदला भी 
तालियाँ फिर बजी 
लोग खुश भी दिखाए स्वयं को 
बातें - ताने भी दिए 
यह भी उस समय जब समय अच्छा हो गया 
लोग तो वही थे 
स्वाभाविक है 
प्रतिक्रिया भी उनकी ही होगी 
बुरा हो या अच्छा
बोलना तो है ही 
चुप कैसे रहेगे 
कभी गिराना कभी उठाना 
यह तो इनकी आदत में शुमार 
न करें परवाह 
अपने ही प्रवाह में बढ़ते जाए 
समय सबका असली चेहरा दिखा देगा 
वह ऐसा आईना है 
जिससे कभी कुछ छुपता नहीं है 

Sunday, 30 August 2026

हे मानव

देखो तो देखने में क्या जाता है 
सोचो तो सोचने में क्या जाता है 
आपने चांद को देखा तो ईश्वर की सुंदरता दिखी
आपने सूर्य को देखा तो ईश्वर का बल देखा 
आपने अपने को आईने में देखा तो ईश्वर की सबसे बुद्धिमान रचना दिखी 
आपने पंछी को देखा तो उड़ान दिखी 
आपने पेड़ को देखा तो दानवीर दिखा 
आपने समुद्र को देखा तो धैर्य दिखा 
आपने नदियों को देखा तो माता दिखी 
आपने पर्वत को देखा तो मजबूती दिखी 
आपने मोर को देखा तो खूबसूरती दिखी 
आपने कोयल को देखा तो वाणी की मिठास दिखी 
आप यह सब रोज देखते हैं 
जरा सोचिए तो 
ईश्वर ने आपको ही बुद्धिमान सबसे क्यों बनाया है 
औरों के पास वह सब नहीं जो आपके पास है 
आप परिपूर्ण हैं 
बल , सुंदरता , वाणी , दया , धैर्य  सब सम्मिलित है 
तब ईश्वर की सबसे सुंदर रचना 
     हे मानव 
अपनी महत्ता को पहचान 
वह कर जिसके लिए यह जीवन मिला है 


बदलाव

सब बदल रहा है 
मौसम का मिजाज भी बदल रहा है
परंपराएं - रिवाज बदल रहे हैं 
लोग भी बदल रहे हैं 
भावनाएं बदल रही है 
अब वह पहले जैसा कुछ नहीं रहा 
तुमको भी समय के साथ चलना है 
न चलोगे तो पीछे सब छूट जाएगा 
तुम खड़े देखते रह जाओगे 
समय आगे चल देगा 
सब छोड़कर 
रिश्तों के बंधन में मत जकड़ो 
यहाँ परिस्थिति बदलती है 
उसके अनुसार सब बदल जाता है 
जो कल तक था वह आज नहीं 
यहाँ तक कि सत्य की भी परिभाषा बदल जाती है 
बदलाव पीछे मुड़कर नहीं देखता 
वह आगे की ओर चलता है 
उसके स्वभाव को समझो 
अपने को भी उसी के अनुसार ढाल लो