Sunday, 31 May 2026

अब भी संभल जाओ

अब भी संभल जाओ
मंदिर और मूर्ति को छोड़ अस्पताल निर्माण करो
पूजाघर कम रहेंगे तब भी कोई बात नहीं
ईश्वर के दर्शन कर लेंगे
जीवित रहेंगे तभी न
आज अस्पताल खुले है
पूजास्थल बंद है
अस्पताल की संख्या कम पड रही है
हर कस्बे , गाँव और कुछ कुछ दूरी पर धार्मिक स्थल
पर हर जगह अस्पताल नहीं
जनसंख्या के अनुपात से अस्पताल नहीं के बराबर
महान विभूतियों के स्टेच्यू बनाए जा रहे हैं
करोडों रूपए खर्च
भव्य से लेकर छोटे छोटे तक
न जाने कितने
जिन पर पक्षियों का बसेरा
बीट पडे हुए
जो उनका भी अपमान
इससे अच्छा तो मानव सेवा की खातिर
उसी जगह में उनके ही नाम से छोटा दवाखाना होता
आज संकट काल में महसूस हो रहा है
किसकी आवश्यकता है
ऐसा नहीं कि पहले से नहीं है
बीमार होने पर अस्पताल में कैसे एडमिट होंगे
कौन सा और कितना खर्चीला
लेंगे कि नहीं
यह भी सोचना पडता है
हर एक दो किलोमीटर के दायरे में अस्पताल हो
बीमार होने पर यह चिंता न करनी पडे
स्वस्थ रहेंगे तभी ईश्वर का दर्शन भी करेंगे
जिंदा रहेंगे तभी पूजा-पाठ भी करेंगे
कहते हैं न
भक्त से ही भगवान है

बदलाव

कुछ नहीं बदला है 
समाज वहीं का वहीं खड़ा है 
उसकी सोच भी वैसी ही है 
बस दिखावा रहता है 
सोच वैसी की वैसी है 
औरत के प्रति नजरिया 
बदला नहीं है 
विवाह की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है 
सब कुछ छिन्न भिन्न 
क्योंकि जिस पर दारोमदार था 
वह ही बदल रही है 
अपना महत्व समझ रही है 
और जहाँ अपने लिए सोचा 
वहाँ त्याग की बातें बेमानी 
बदलाव पर खड़ा समाज 
क्या होगा 
राम जाने 

Saturday, 30 May 2026

बाप तो बाप होता है

बाप तो बाप होता है
हर हाल में बच्चों का भार ढोता है
अपने स्वयं कपडे पुराने पहनता
बच्चों को नया पहनाता
दिन रात एक करता
अपना निवाला उनके मुंह में डालता
सर पर बोझ लेकर चलता
बैल की जगह खुद भी जूत जाता
श्रम पसीना एक करता
संतान के भविष्य को बनाता
कहना बहुत कुछ चाहता
कह नहीं पाता
उसकी कठोरता संतान को नहीं भाता
उसके अंदर की कोमलता कोई देख नहीं पाता
वह भी चाहता तो आराम से रहता
वह ऐसा नहीं करता
वह दशरथ की तरह पुत्र मोह में प्राण भी देता
वह धृतराष्ट्र की तरह इतिहास में बदनाम भी होता
वह किसी से नहीं हारता
अपनी संतान से हारता
कितना प्रेम करता
वह नहीं किसी को दिखता
माता का प्रेम जग-जाहिर
पिता का प्रेम उसका उल्लेख कहीं नहीं
आसमान की छत्रछाया है पिता
धरती डोलती है
आसमान नहीं डोलता
नदी पिघलती है
पर्वत नहीं पिघलता
वह प्रहरी बन हमेशा खडा रहता
टूट जाता है
पर झुकता नहीं
वह पिता है
संतान से उपेक्षित
फिर भी उसके लिए चिंतित
घर का कर्ता धर्ता
सब कुछ पिता
सब निश्चिंत होते
जब तक साथ रहता पिता का
अपने से ज्यादा संतान को प्यार करता
बाप तो बाप होता है
हल हाल में बच्चों का भार ढोता है

Thursday, 28 May 2026

रफ बुक

रफ बुक 
परिवार  में  रहना और निभाना
त्याग  और बलिदान 
सबको समेट  कर  चलना
इतना  आसान  नहीं  होता 

हम पढते समय रफ  बुक का उपयोग  करते  हैं 
शुरुआत  में  ही  स्कूल- काॅलेज  में  पहले दिन ही
हाथ में  जो होती  है  वह एक बुक
और सब बाद में  बनती है
हर विषय  की अलग-अलग 
कवर के साथ साफ - सुथरा 
कभी भूल गए  ले जाना
रफ नोट बुक में  लिख लिया 
उसके बिना काम  नहीं  चलने वाला 

परिवार  में  भी कोई  न कोई  ऐसा होता है
जो सबको अपने  में समाहित  करता  है 
उसकी मदद  से सब काम  हो जाते हैं 
जिसको भी जरूरत  पडती है
वह उसके  पास आता है

ऐसे व्यक्ति  की वैल्यू  नहीं  होती 
न समझ में  आती  है 
जैसे रफ बुक 
वह न हो तो सारा गणित  गडबडा जाएंगा
मुखिया  का महत्व  तो जग-जाहिर है 
पर उस व्यक्ति  का ??