Saturday, 10 October 2026

Evil dead

आज किसी महान अभिनेता की मृत्यु हुई 
सोशल मीडिया , टेलीविजन पर यह खबर दिन भर चलती रही 
और भी कुछ दिन चलेगी 
अखबार का पेज भरा रहा उनकी उपलब्धि पर 
प्रधानमंत्री से लेकर हर छोटे - बड़े नेताओं ने शोक संवेदना प्रकट की 
मुख्यमंत्री ने कांधा भी दिया 
ज्यादा संख्या में लोग उपस्थित रहें 
क्या नेता क्या अभिनेता क्या जनता सबने संवेदना दिखाई 
वे उम्दा कलाकार तो थे ही बहुत बेहतरीन इंसान भी थे 
समाज सेवा भी करते थे 
किसानों और गरीब के लिए बहुत कुछ किया 
उनकी आमदनी का बहुत सा हिस्सा चैरिटी में जाता था 
सादा जीवन जीते थे 
गांव से जुड़े थे 
घमंड और तामझाम से दूर 
अपनी मेहनत और संघर्ष से इस मुकाम पर पहुंचे थे 
स्पष्ट और निडर वक्ता थे 
यह सब गुण तो थे पर यह नहीं भूलना चाहिए 
वह एक व्यक्ति भी थे 
गुस्सैल थे 
पत्नी से निभी नहीं 
अलग रहते थे वर्षों से 
यह भी कोई अनोखी बात नहीं है 
पर विवाद के घेरे में रहें 
उन पर दोषारोपण हुआ था अपने ही साथ कई एक कलाकार से दुर्व्यवहार करने का 
उसने उस वक्त शुटिंग पर भी विरोध किया था यह सबको पता है 
कुछ समय बाद उसने केस भी किया हालांकि वह इल्जाम सिद्ध नहीं हुआ 
ME  TOO  का अभियान उसने छेड़ा था 
उस समय बहुत से उसके समर्थन में आए थे 
ऐसी महिलाएं जिनके साथ वर्षों पहले इससे गुजरना पड़ा था
और यह सही है 
समाज में यह घर से ही शुरुआत होती है 
परिवार में भी महिला सुरक्षित नहीं होती कभी-कभार 
सबके सामने घूंघट निकलवाने वाले बहू का ही उसके जेठ और ससुर द्वारा शारीरिक शोषण 
कार्य स्थल पर शोषण 
वह कमजोर पड़ जाती है आवाज नहीं उठाती 
उसको ही गलत मान लिया जाएगा इस भय से 
आज उसने कहा है 
Evil dead 
सबको बुरा लग रहा है 
मरे हुए के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए 
मृत्यु चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं है 
उसके ऊपर छींटाकसी की जा रही है 
कोई सच बात नहीं जानता 
जिसके साथ हुआ है वह ही जानता है 
यहाँ तो भगवान कहें जाने वाले महात्मा और संन्यासी का हाल लोगों ने देखा है 
अभी कुछ दिन पहले विश्व के बड़े - बड़े नेताओं का एक फाइल मे नाम आ चुका है 
तो निष्कर्ष निकालना बंद करें 
जो सबके लिए अच्छा हो वह
हर किसी के लिए अच्छा हो 
यह जरुरी नहीं है 
व्यक्तिगत कमजोरियां होती है 
धुआं भी वहीं उठता है जहाँ आग जली हो 

Friday, 9 October 2026

रोटी

मैं रोटी हूँ 
आप सब मुझसे अंजान नहीं 
हर जगह मेरी मांग है 
मुझे बनाना इतना आसान नहीं 
बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं 
पहले गूंथना 
फिर कटना लोई में 
फिर तवे पर चढ़ना 
दोनों तरफ सेंकना 
फिर फूलना 
तब जाकर थाली में आना 
उदर तृप्ति करना 
मेरा अलग अलग आकार 
कुछ भी मुझमें मिलाकर स्वादिष्ट बना लो 
ऐसा लगा रोटी 
मुझसे यह सब कह रही है 
जीवन भी तो ऐसा ही है 
खूब निचोड़ता है यह 
तब जाकर कहीं कुछ हासिल होता है 
सफलता केवल अपने लिए नहीं 
सबके लिए होती है 
परिवार खुशहाल हो जाता है 
हर किसी की आशा जुड़ी रहती है 
रोटी की तरह सींकना तो पड़ेगा 
तभी जीवन खुशियों से फूलेगा 

Thursday, 8 October 2026

अलविदा नाना

परिंदा उड़ गया 
काल के प्रहार से वे भी नहीं बच पाए
क्रांतिवीर अब तिरंगा में लिपट कर हमेशा के लिए बिदा हो जाएगे 
किसानों की समस्या 
सामान्य जन का दर्द समझने वाला वह  नट सम्राट    हमारे बीच नहीं रहें 
नाना आपके अभिनय का लोहा सबने माना 
दिल के दौरा पड़ने से 
इतना कोमल दिल था क्या??
ऊपर से कठोर , स्पष्ट बोलने वाला यह शख्स 
बेबाक आवाज  , बेमिसाल अभिनय 
अमर किरदार  , अभिनय के सम्राट 
अलविदा 
आपका योगदान 
फिल्मों में , समाज में 
जमीन और गांव से जुड़ा 
न कोई तामझाम न दिखावा 
हर किसी को याद रहेगा 

नट सम्राट  आपने तो सबको रूला दिया जाते - जाते 

अब नहीं चलेगा

पत्नी घर वापस लौटी 
तब वह चरित्र हीन 
पुरुष वापस लौटा 
भटक गया सही रास्ते पर आ गया 

बलात्कार हुआ 
दोषी सर उठाकर घुम रहे 
वीडियो शूटिंग कर दिखा रहें 
जिसका हुआ 
वह मुंह छिपा रहा 
उसके परिजन शर्मसार हो रहे 
उसमें ही दोष निकाला जा रहा 
छोटे कपड़े पहने होगी 
रात में देर तक बाहर क्यों रही 
अकेले नहीं जाना था 
दोस्त के साथ क्यों घूम रही थी 

लड़का है पुरुष है 
उसका सब कुछ माफ है 
यही सोच संस्कार में पड़े हैं 

माता जानकी पर भी लांछन लगा दिया गया था 
एक प्रजा के द्वारा 
उनको भी राजमहल से निष्कासित होना पड़ा 
कभी यह भी कहा गया 
उन्होंने लक्ष्मण रेखा क्यों पार की 
द्रोपदी को भरी सभा में चीरहरण की कोशिश 
यह भी दलील किसी - किसी की 
व्यंग्य क्यों किया 
अंधे का पुत्र अंधा 
गलत था
पर इतनी बड़ी सजा 

उन मां - बहनों की क्या गलती 
जो हर बात में हर जबान पर गाली सुनती है 
गलती पुरुष करता है 
गाली उसकी मां - बहन और बेटी पर
शहर में तो गनीमत है 
गांव में तो बिना गाली बात ही नहीं 

आज समय बदल रहा है 
अब औरतों का नजरिया और सोच बदल रही है 
अब पति वह परमेश्वर नहीं रहा 
जिसकी मार खाकर भी वह संबंध निभाती थी 
बच्चों का मुख देखती थी 
मां - बाप की इज्जत की परवाह करती थी 

अब वह सोच रही है 
जब मेरी ही इज्जत नहीं तो क्यों किसी की परवाह 
कोई भी कदम उठा रही है 
समाज लाचार बना देख रहा है 
कह रहा है 
जमाना बदल गया 

जमाना बदल गया 
तुम उसी सोच में अटके हो 
खुद को बदलो 
जितनी जिम्मेदारी उसकी उतनी तुम्हारी 
घर वह चलाए मालिक तुम 
अब नहीं ऐसा चलेगा 
परिवर्तन जारी है