पर मेरी बेटी जैसी कोई नहीं
वह कभी पापा की परी नहीं रही
न माॅ की नाजुक कोमल गुड़िया
वह फौलाद सी मजबूत है
मैं उसको संभालना चाहती थी
न जाने कब उसने संभालना शुरू कर दिया
उसका हाथ पकड़कर रास्ता दिखाते कब वह मुझे रास्ता दिखाने लगी
उम्र से पहले ही समझदार हो गई
मेरे कंधों के बोझ को अपने कंधों पर ले लिया
मैंने बहुत से सपने देखे थे
उसकी राह कभी मुश्किल न हो
ऐसा सोचा था
दुनियाभर का हर सुख और खुशी मिले यह हर मां की तरह मेरी भी इच्छा थी
मेरे जीवन जैसा जीवन न मिले
कभी लाचार और मायूस न हो
वैसे हर परिस्थिति पर मात करना सिखाया है
फूल और नाजुक कली जैसा नहीं पोसा है
हद दर्जें की मेहनती
वर्कोहलिक लगती है
कभी सोचती हूँ
मैं थोड़ा भी इसकी तरह मेहनती होती
लोग मां से सीखते हैं
मैं उससे सीखती हूँ
माँ भी बन जाती है मेरी
डरती भी हूँ
कुछ गलत तो नही कर दिया
अपने पालकत्व पर अभिमान होता है
गलत बर्दाश्त नहीं उसे
बस ईश्वर से यही प्रार्थना
मैं तो कुछ न कर पाई
तुम तो अपनी कृपा बनाए रखना
मेरे जीवन के अच्छे कर्मों का फल उसकी झोली में डाल देना
मैं और कुछ नहीं चाहती
बस उसे खुश देखना चाहती हूँ