Tuesday, 9 June 2026

औरत आज भी वहीं खड़ी है

मैं नारी हूँ 
मैं औरत हूँ 
मैं बेटी हूँ 
मैं बहन हूँ 
मैं बहू हूँ 
मैं पत्नी हूँ 
मैं माँ हूँ 
इसीलिए सारे समाज का ठेका मैंने ले रखा है 
उनके इज्जदार होने का कारण मैं हूँ 
यह दीगर बात है मेरा कोई इज्जत- सम्मान नहीं 
हर बात पर दबाना
ताने मारना 
स्वाभिमान को कुचलना 
मन को आहत करना 
फिर कहना कि बहुत मजबूत है 
घर का दारोमदार मुझ पर 
जो कहीं मेरा घर है ही नहीं 
निकलने की और निकालने की धमकी बात- बात में 
घर जो मेरा नहीं 
वह मेरे न रहने पर बिखर जाएंगा 
क्या त्याग का चोला पहना कर रख दिया है 
सब काम करने पर भी सुनना 
करना ही क्या है 
आदर - सम्मान मिल भी गया तो 
वह एहसान है एक तरह 
हम ऐसे नहीं होते तब पता चलता 
हमेशा से यही हुआ है 
होता भी रहेगा 
कहने को शिक्षा - स्वतंत्रता 
पर एक आदर - सम्मान- प्यार के लिए तरसती 
ममता और प्यार लुटाने वाली 
उसी के लिए न जाने क्या-कुछ सहती 
समानता का दिखावा सब ढकोसला 
आत्मनिर्भर या फिर किसी पर निर्भर 
कुछ नहीं पड़ता फर्क 
बदलाव की आंधी तो कुछ ज्यादा ही उड़ा रही है 
न इधर कई न उधर की 
घड़ी के पैंडलुम की तरह डोलती जिंदगी 
कहते हैं जमाना बदल गया 
कुछ नहीं बदला है 
औरत आज भी वहीं कई वहीं खड़ी है 
जहाँ सदियों पहले खड़ी थी 

मत मरो

मत मरो किसी के लिए 
जीओ किसी के लिए 
किसी एक शख्स के लिए 
किसी एक असफलता के लिए 
किसी एक बात के लिए 
अपनी जिंदगी को खत्म करना 
यह तो उचित नहीं 
न जाने कितने अरमानों से तुम्हें जन्म दिया 
तुम्हारी खुशी के लिए अपनी खुशी को तवज्जों नहीं दिया 
तुम्हें आगे बढ़ते देखने के लिए न जाने क्या-कुछ त्यागा 
और तुम बस एक  
        SORRY 
कहकर चले जाते हो उनके संसार से 
उनका क्या दोष
तुम्हें ठेस पहुंची है इसलिए उनसे उनका सर्वस्व यानि तुम छीन लेना 
सोचकर देखना फिर नहीं मरोगे 
ठीक है 
मान लो अपने को मरा , जीना नहीं चाहते 
हासिल क्या होगा 
जिंदा रहे तो किसी के मुख पर तुमको देख मुस्कान होगी 
मत बनो स्वार्थी 
तुम्हारा जीवन केवल तुम्हारा नहीं है 
बड़ा करने में मेहनत लगी है 
कायर मत बनो 
तुम तो मर जाओगे 
जीते जी लोगों को जिंदा लाश कर जाओगे 
रोते छोड़ जाओगे 
उनकी खुशी छीन लोगे 
इतने बड़े पाप का भागीदार मत बनो 
ईश्वर की  कृपा पुण्यों से जीवन मिला है 
उस आत्मा को क्यों भटकाना है
दुख आते हैं 
विश्वास घात और धोखा मिलता है 
उपेक्षा और असफलता भी मिलती है 
तिरस्कार और आलोचना भी झेलनी पड़ती है 
लेकिन इतने कमजोर कि झेल न सको 
किसी को नहीं दिखाना है 
स्वयं को साबित करना है 
परिस्थितियां  बदलती है 
यहाँ कुछ स्थायी  नहीं है 
आज जिस बात पर मरने जा रहे हो 
कल हो सकता है 
अपनी बेवकूफी पर हंसी आए 
मत मरो न किसी को जिंदा जी मारो 
मत जीओ अपने लिए अपनों के लिए तो जीओ 
मर कर रुलाने की अपेक्षा जीओ 
उनके लिए 

दूर होकर पास

तुम तो ऊपर चले गए
उस दुनिया और जहां में
जहाँ से लौटना मुश्किल
तुम तो जाना नहीं चाहते थे
मुझे छोड़कर
पर नियति के आगे तो तुम्हारा बस नहीं
कितना प्रेम था
मुझसे जुदा होना तुम्हें कभी गंवारा नहीं 
आज भी बात वही होगी
इतना तो विश्वास है
तुम ऊपर से हमें देखते होगे
कभी तारे बन
कभी बादल बन
आज यह बादल बरसे है
तब इसकी बूँदो में मुझे तुम्हारा एहसास हुआ है
यह बूंदे जब बरसी
तब हथेलियों में लेकर महसूस किया
लगा तुम्हें और मुझे मिला रही है
रह रहकर मेरे केश उडा रही है
भिगो रही है
मस्ती कर रही है
मेरे गालों को सहला रही है
अब यह बूंदे ही तो है
जो तुमको और मुझको मिला रही है
तुम उस जहां में
मैं इस जहां में
तब भी इस दूरी को पास ला रही है
चलो यही सही
मान लेते हैं
हम दूर होकर भी कितने पास पास हैं

Saturday, 6 June 2026

मेरा लाल

आज तूने मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया
घर से बाहर निकाल दिया
वह घर जो मैंने बडे प्रेम से बनाया था
तुम लोगों को पाला और पोसा था
तुम्हारी शैतानिया को नजरअंदाज करती थी
तुम्हारी अठखेलियो को निहारती थी
तुम्हारी हर इच्छा पूरी करती थी
मनभावन भोजन खिलाती थी
थोड़ी देर न देखने पर बेचैन हो जाती थी
मन में गुस्सा आता था
तुझे देख सब भूल जाती थी
सारा गुस्सा छू मंतर
तुझे मारती या डाटती
उस दिन स्वयं रोती थी
अब ऐसा क्या हो गया
तू इतना बदल गया
रह पाएंगा मेरे बिन
जो मां तेरी जान होती थी
मेरा क्या है
कितनी जान बची है
गुजर ही जाएंगी
सडक किनारे या वृद्धाश्रम में
पर तू क्या चैन से सो पाएंगा
तेरा मन नहीं कचोटेगा
तू जैसा भी है मेरा बेटा है
जिगर का टुकड़ा है
तेरे बारे में बुरा कैसे सोच सकती हूँ
तू कुछ भी करें
तब भी दुआ ही निकलेगी
बददुआ नहीं
माँ हूँ न
तुझे दुखी नहीं देख सकती
ईश्वर तुझे हमेशा सुखी रखे
फलें फूले और आगे बढें
यही बहुत है मेरे लिए