गलत था
उसका कोई समर्थन नहीं
सीता वहाँ सुरक्षित थी
सीता के चरित्र पर कोई आंच नहीं आई
लंका में रहकर
शत्रु के घर ससम्मान
वापस भी लौटी
यह समाज पीछे नहीं रहा
उंगली यही उनके चरित्र पर उठी
उनको अयोध्या से निष्कासित किया गया
एक बार सास
एक बार समाज
एक बेटा एक राजा
राम आदर्श
सीता एक आदर्श पत्नी नहीं बन पाई
यह वह समाज है
जिसने माता सीता पर लांछन लगाने से नहीं चूका
तो साधारण औरत की क्या बिसात है