Saturday, 26 September 2026

फेसबुक

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अपना फेसबुक बहुत बढिया है
अजनबियों का घेरा है
तब भी फेसबुक लगता प्यारा है
अंजाने लोग जब दाद देते हैं 
किसी पंक्ति पर लाइक और कंमेट करते हैं 
दुख में सहानुभूति और सुख में खुशी जताते हैं 
पास - पास नहीं हैं 
फिर भी सबको पास ले आते हैं 
मन की भावनाओं को व्यक्त करते हैं 
कुछ कविता - कहानियां गढते हैं 
कुछ तो लोग देखेंगे 
कुछ तो पढेंगे 
यह जान मन को सुकून मिलता है
अपने जो छूट गए
अपने जो भूल गए 
फिर उनकी याद दिलाता है
कही - अनकही न जाने कितनी बातें कह जाता है
सबको एक मंच पर ला खड़ा कर देता है
सुबह-सुबह गुलाब के फूलों और भगवान की फोटों के साथ
रात को चंद्रमा की चांदनी के साथ
गुड मार्निग और गुड नाइट बहुत भाता है
किसी अपने की उपलब्धि का बयान करता है
किसी का जन्मदिन तो किसी की मैरिज एनवर्सरी मनाता है
पहाड़ की वादियों के दर्शन के साथ-साथ सारी दुनिया की सैर कराता है
सुस्वादु व्यंजन और नए-नए फैशन - कपडे की झांकी दिखाता है
यह अमीर - गरीब का अंतर मिटाता है
सबको मौका देता है 
जो चाहे प्रस्तुत करों 
जैसा करों 
कोई प्रतिबंध नहीं 
ज्ञान की बातें बताता है
समाचार भी सुनाता है
क्या  - क्या गिनाए 
न जाने कितनी खुबिया है इसमें 
बस बटोरना है
फेसबुक से जुड़े रहना है
कह सकते हैं 
अरे फेसबुक अपना है तभी तो बहुत बढिया है ।

Asha Singh at 08:48
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Wednesday, 23 September 2026

बांट न लैहें कोय

कहना तो बहुत कुछ था
मन की बाते थी
मन में ही मुसमुसाकर रह गई
हमेशा फुसफुसाती रहती थी
बाहर आने को बेताब
पर कोई मिल न सका
इन्हें कोई सुन न सका
समय की कमी थी कुछ के पास
कुछ पर विश्वास न था
भय था अंदर
अगर बाहर आई
तो सार्वजनिक न बन जाए
गुप्त रहना चाहती थी
वह कहाँ संभव था
बहुत लोग बेताब थे
सुनने को उत्सुक थे
एक टाॅपिक मिल जाता गाॅसिप का
जो उनके लिए सबसे बडा टॉनिक
उसके बिना भोजन पचता नहीं इनका
इनकी मानसिक खुराक है यह
कुरेदते रहते हैं
कुछ तो मिले जो मन को भाए
ऐसे में कहना सुनना सब बेमानी
मन की बात मन में रखना ही सबसे बडी समझदारी
सुन इठलैहे बाँट न लैहे कोय
मन की मन में रखे
सावधान रहें
यहाँ शिकारी ताक में है
खुराक की फिराक में है
मनोरंजन का जरिया ढूंढने में लगे
तब सतर्कता भी जरूरी

Sunday, 20 September 2026

मैं चांद हूँ

मैं चांद हूँ
नीरव और शांत
शुभ्र और चलायमान
मेरी रोशनी मद्धिम-मद्धिम
किसी की ऑखों में चुभती नहीं
मुझमें सूर्य जैसा तेज नहीं
वह प्रकाश नहीं
फिर भी मैं हूँ
मेरा अस्तित्व है
मैं गतिशील हूँ
मेरी भी प्रतीक्षा होती है
मैं सुकून देता हूँ
कोई भी मुझसे नाराज नहीं होता
सबको साथ लेकर चलता हूँ
छोटे छोटे तारों को भी टिमटिमाने देता हूँ
मुझमें भी दाग है
फिर भी सौदर्य की बात हो 
तब मेरी ही उपमा दी जाती है
कोई भी परिपूर्ण नहीं
तब मैं कैसे
कभी घटता हूँ
कभी बढता हूँ
कभी संभलता हूँ
मैं जो हूँ
जैसा हूँ
सबका प्यारा हूँ
बच्चों का मामा हूँ
सुहागिनो का प्यारा हूँ
प्रेमियों का साथी हूँ
कवियों का दुलारा हूँ
शिवजी की जटा पर विराजमान हूँ
ईद की छटा में शोभायमान हूँ
मेरे बिना तो तारे भी अधूरे
मैं अंधकार में सहारा हूँ

मैं तुम्हारा प्यारा चांद हूँ

Saturday, 19 September 2026

मां हूँ

आज बहुत थकान लग रही है
मन विचलित हो रहा है
कुछ करने का मन नहीं है
घुटनों का दर्द बढ गया है
आज पूरा दिन आराम करूँगी
यह सोच चादर ओढ लिया

अचानक आवाज आई
माॅ माॅ माॅ
दरवाजा खोलो जल्दी
बहुत भूख लगी है
खाने को कुछ दो

अरे तू तो कल आने वाला था
तब फिर
आज काम हो गया तो गाडी पकड़ ली
घर पर चल भर पेट खाऊँगा
और जी भर कर सोऊँगा
आज बस आराम करना है
अभी फ्रैश होकर आता हूँ

आराम गया तेल लगाने
चलो किचन में
कुछ बनाओ 
इतनी दूर से आया है 
थका हारा , भूखा प्यासा

अरे तुम्हारे दर्द का क्या 
आराम का क्या
अचानक अंदर से आवाज आई
हंसते हुए कहा
सब काफूर हो गया
मैं माॅ हूँ न
मेरा दर्द क्या और आराम क्या ??