Friday, 16 October 2026

जरा याद उन्हें भी कर लो

सबने राम को याद किया
रावण को याद किया
लंका विजय के भागीदार रहें 
उस युद्ध के सहयोगी  बंदर और भालू
वह कहीं गुम हो गए 
विभिषण,  कुम्भकर्ण,  मेघनाथ भी याद आए

यही तो होता है
सेहरा जीत का किसी एक के सर पर
और दूसरे गुमनामी में 
गांधी राष्ट्र पिता बनें 
उस स्वतन्त्रता की लडाई में 
न जाने कितने गुमनाम 
जिनका योगदान इतना कि
आजादी मिलती ही नहीं 
अगर वे न होते

सब भूल जाते हैं 
भूला दिए जाते हैं 
समाज हो
परिवार हो
राष्ट्र हो
कौन याद रखता है
इन नींव की ईटों को 
जिनके ऊपर यह बुलंद इमारत खडी है

Thursday, 15 October 2026

किताब से नाता जोड़ लो

पढना सीख लो
किताब से नाता जोड़ लो
यह वे नायाब साथी जिनका कोई नहीं सानी
बडे बडो को झुकना सिखा देती है यह
जिंदगी जीना सीखा देती है यह
बहूमूल्य होती है यह
सारे संसार को अपने में समेटती है यह
भूत ,भविष्य ,वर्तमान से अवगत कराती है यह
यह लेती नहीं देती है
ज्ञान बांटती है
लोगों को अमर कर देती है
सब कुछ अपने पन्नों में छिपा लेती है
दुख - दर्द ,भावना - संवेदना
यह सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखती है
यह ईश्वर की नहीं मानव की अमूल्य रचना है
लेखक ,कवि और इतिहासकारों की देन हैं
वेद ,दर्शन ,धर्म से विभूषित
जिंदगी जीना सिखाने वाली
इस अमूल्य सौगात को गले लगा लो
पढना सीख लो
किताबो से नाता जोड़ लो
तुमको यह फर्श से अर्श तक पहुंचा देगी
समाज में क्रांति लाने का दम रखती है
बडे बडे को पानी पिला सकती है
यह दिखती छोटी है
पर काम बडे बडे करती है
यह किताब है
यह जीवन है
यह विश्व है
आज इससे नाता जोड़ लो
कल यह तुमको सबसे जुडवा देगी
जीवन जीना सीखा देगी
तुम्हारी दुनिया बदल देगी
पढना सीख लो
किताब से नाता जोड़ लो

Sunday, 11 October 2026

हैपी नवरात्र

आज नवदुर्गा पधार रही है 
आज इंटरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे भी है 
अपने घर आई बेटी का स्वागत करें 
उसे सुरक्षा और सम्मान से जीने का हक दे 
उसको मजबूत बनाए ताकि वह हर परिस्थिति का मुकाबला कर सके 
हर लड़ाई लड़ सके 
हर बाधा को पार कर आगे बढ़े 
महिषासुर मर्दिनी बनने का माद्दा हो 
दुर्गा आपके घर में ही है 
आसपास ही है 
उसको जीने दीजिए 
माता जी खुश होकर आशीर्वाद देकर जाएंगी 
मां के नौ रुप है 
हर रूप अपने आप में  एक विशेष है 
हैपी नवरात्र 

Happy Beti Day

आज इन्टरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे
बेटियां हमारी सबसे प्यारी
सबसे उपेक्षित
आज भी भेदभाव
बेटा और बेटी में
समय बदल रहा है
सोच भी बदल रही है
पर वह कितनी ???
सरकार योजनाओं की घोषणा कर रही है
ताकि बेटी बोझ न लगे
उनको गर्भ में न मारा जाय
वहाँ से बची तो उपेक्षा न हो
वहाँ से बढी तो आगे दहेज की बलि वेदी पर न चढे
वहाँ से बची तो
सारी उम्र घुटते सहते न बीते
बेटी को आने दे
पढाई लिखाई करने दे
उसको बोझ न समझे
वह भी घर का चिराग है
बेटा और बेटी में भेदभाव न करै
वह तो घर की रौनक है
बेटी ,बहन ,पत्नी ,माँ ,बहू के रूप में
वह अहम हिस्सा है समाज का
उसको पंख फैलाने दे
उसकी योग्यता की कदर करें
आप उसे प्यार और सम्मान दे
वह आपकी जिंदगी को बदल देगी
उसके बिना तो समाज की कल्पना भी नहीं
वह बोझ नहीं अति महत्वपूर्ण है
जरा सोचिये
अगर बेटी ही न रही
तब तो कोई नहीं रहेगा
जननी है वह 
उसका सम्मान करेंगे
तभी समाज जिन्दा भी रहेगा
मजबूत और शक्तिशाली भी