राजा राम घर आएगे
झोपड़ी के भाग्य तो खुल गए
महल बन गए
आलिशान घर और दुकान हो गई
जमीन के मालिक बन बैठे
पूरे खानदान और रिश्तेदारों का भी कल्याण हो गया
तब तो भरत थे जो अन्याय होने नहीं दिया
कैकयी और मंथरा की साजिश को सफल होने नहीं दिया
आज तो अंदर ही लुटेरे बैठे हैं
हमारे राम को लूट रहे हैं
गजनी और बाबर तो आततायी थे
ये तो रामभक्त हैं
देखभाल का जिम्मा इन पर हैं
और ये ही लुटेरे - चंदाचोर
शर्म नहीं आई
लोगों ने अपनी जमीन बेच कर दान दिया है
तुम अपनी जमीन बना रहे हो
इस बार रावण को नहीं तुमको जलाना चाहिए
विभीषण बने हो
अपनी ही रामनगरी से विश्वासघात कर रहे हो
कहाँ जाओगे
हिन्दू हो ना
कर्म का फल मिलता है
तब डर नहीं लगा अपने भगवान से
क्या मुंह लेकर नतमस्तक होंगे उनके समक्ष
कौन से दंड के पात्र??
तुम्हारा निर्णय तो रामजी ही करेंगे
होइए वही जो राम रचि राखा
वो बख्शेगे नहीं
दंड तो उन्होंने सबको दिया
चाहे वह कोई भी हो
महाबलशाली रावण हो या बालि
अनीति और अन्याय के खिलाफ ही रहें
मर्यादापुरुषोत्तम रहे हैं हमारे राम
तुम लोग अपनी मर्यादा भूल गए
राम के नाम पर चोरी
अधम पाप है यह