Tuesday, 21 April 2026

वक्त और अपने

वक्त के साथ आॅसू भले ही सूख जाए
पर अपनो को भूलाना आसान नहीं होता
चिता के साथ शरीर तो जल जाता है
पर वह अशरीर हमेशा पास रहता है
जिसके साथ जीवन के सुनहरे पल कांटे हो
लडे हो ,झगड़े हो
रूठे हो ,नाराज हुए हो
मानमनौवल किया हो
सुख दुख बांटे हो
हंसा और खिलखिलाया हो
उसकी नादानियो पर मुस्कराया हो
उसकी हर गलती माफ की हो
जम कर गुस्सा उतारा हो
थपेडे दिए हो
गले से लगाया हो
जी भर कर प्रेम लुटाया हो
अपना सर्वस्व लुटाया हो
पूरा अधिकार जताया हो
जिसके अलग होने की कल्पना से ही रूह कांप उठी हो
वह अपना अजीज जब छोड़कर जाता है
तब वह अपने साथ हमारा मन भी ले जाता है
हमें रिक्त कर जाता है
वह घाव दे जाता है
जो कभी नहीं भरता
मन के किसी कोने में छिपा रहता है
समय समय पर टीसता रहता है
यह दर्द हर कोई नहीं समझ सकता
वही समझ सकता है
जिसने अपने को खोया हो

Sunday, 12 April 2026

विवश मानव

आज मन विचलित है
नींद नहीं आ रही
दिमाग में कुछ उमड घुमड रहा है
विचारों का झुंड है
पर विषय एक ही है
  करोना
समाचार देख 
मोबाइल देख
टेलीविजन पर खबर
हर जगह हाहाकार
परमाणु बम बनाने वाला यह मानव
आज कितना विवश
सब विवश
कब कहाँ से और कैसे आक्रमण
यह समझना मुश्किल
हाथ पर हाथ धोएं जा रहे हैं
मास्क लगा रहे हैं
दूरी बना रहे हैं
फिर भी डर तो समाया
यहाँ तक कि सपने में भी
कितना खौफ
क्या है जीवन
क्या है इसका सार
मौत के मुहाने पर खडा मानव
लडता रहता है 
सभी आपदाओं से
कभी अकाल
कभी भूकंप
कभी बाढ 
कभी महामारी
और युद्ध भी
जिसका रचनाकार तो वह स्वयं
जीवन की जद्दोजहद के बीच
हम फंसे रहते हैं
क्या यही मानव की अहमियत
हमेशा डरा और सहमा
मृत्यु के नाम पर

Wednesday, 8 April 2026

हिम्मत

घना अंधेरा हो तब भी क्या 
दूर से आ रही एक रोशनी की किरण काफी है
लाख घने बादल छाए हो 
उसमें से एक इंद्रधनुष की पतली रेखा काफी है 
मरूस्थल में भी पौधे पनपते हैं 
जीवन की हर एक सांस बहुमूल्य है 
स्थायी यहाँ कुछ भी नहीं 
अंधेरा कब तक रहेगा 
बादल कब तक छाए रहेंगे 
उनको तो जाना ही है 
बस आशा रखना है 
वक्त- वक्त की बात है 
अच्छा भी आएंगा 
हिम्मत नहीं हारना है 

Thursday, 22 January 2026

बेटी

दो अक्षर से बना है शब्द 
मात्र यह शब्द नहीं पढ़ने वाला 
यह तो है दिल में बसने वाला
जिस कोख से जाई 
उसी की बन जाती एक दिन माई 
मन से रिश्ता निभाती 
जी - जान छिड़कती 
कभी डांटती कभी समझाती 
कभी हंसती कभी गले लगाती 
मुख पर उदासी को तुरंत भाप लेती 
क्या न करें वह कम 
हर बात का ध्यान रखती 
एक संरक्षिका जैसी 
वह ईश्वर की नियामत होती है 
लक्ष्मी, दुर्गा , सरस्वती का रुप होती है 
घर की रौनक होती है 
रोशन होता है उनसे घर - परिवार 
बड़ी अनमोल हौती है 
बेटियाँ सिर्फ बेटियां नहीं होती 
दो अक्षर में सिमटी सारा जहां होती है