Tuesday, 8 September 2026

पुत्र और पुत्री

कान्हा का जन्म तो सबको याद रहा
याद रहना भी चाहिए 
जगत के पालनहार का जन्मदिन था
उत्सव मनाने का दिन था
उस दिन एक और शिशु का भी जन्म हुआ था
वह थी योगमाया 
कान्हा तो गोकुल पहुँच गए 
मामा कंस के कोप का भाजन बनी थी वह बेटी
जिसने कहा था
तुम्हारा काल तो गोकुल में जन्म ले चुका है
बेटा - बेटी दोनों ही संतान 
तब खुशी के हकदार तो दोनों ही
वह योगमाया ही थी जिनको बदलकर वसुदेव कृष्ण को ले गए थे
कृष्ण की जीवन रक्षा का कारण वह बनी
सबको जीवन देने वाले का जीवन बनी
कन्हैया के साथ उनका भी स्मरण करना जरूरी है 
देवकी की आठवीं संतान तो पुत्र ही था यह तो नियति लिखित था 
कंस वध तो उनके द्वारा ही होना था पर जन्मते तो वध नहीं करते 
मनुष्य लीला करनी थी 
उस दिन भी एक पुत्र को बचाने के लिए पुत्री को सामने किया गया था
दोनों का जीवन बहुमूल्य ही था

Sunday, 6 September 2026

अस्तित्व

वह बड़ा पेड़ था 
बड़ा मजबूत और डटकर खड़ा था 
कुछ की नजरों में खटकता था 
इसको ध्वस्त करने का उपाय??
लोगों के मन में कीड़ा कुलबुलाने लगा 
अब वे उसके पीछे पड़ गए 
पहले प्रेम से उसकी डालियां छांटी 
पत्ते तोड़ लिए 
अब वह उतना आकर्षित नहीं कर रहा था 
अब न पंछी आते न कोई नीचे बैठता 
छांव तो थी नहीं 
धीरे - धीरे वह सूखने लगा 
अब उन्हीं लोगों ने सलाह दी 
इसकी उपयोगिता खत्म हो गई है 
यह ठूंठ बन गया है 
काट डाला जाए 
कम से कम कुछ काम आएगा 
अब वह कट चुका है 
किसी के घर की फर्नीचर बन शोभा बढ़ा रहा है 
उसका अस्तित्व खत्म 

Saturday, 5 September 2026

जय कन्हैयालाल की

आज आगमन हो चुका है 
युगांधर कृष्ण का 
आज पधार चुके है 
मैया यशोदा के लल्ला 
जगत को गीता का उपदेश 
कर्म का सिद्धांत समझाने वाले 
अर्जुन के सखा का जन्म दिवस है 
आज हमारे कन्हैया का जन्मोत्सव है 
धूमधाम से मनाए 
गाजे - बाजे के साथ 
नाच - गाकर 
हाथी - घोड़ा - पालकी 
जय कन्हैयालाल की 

हर गुरू को नमन

मैं भूत , वर्तमान और भविष्य 
तीनों का कारण हूँ 
मैं शिक्षक हूँ 
भूत को सुधारता हूँ 
वर्तमान को गढता हूँ 
भविष्य को निर्माण करता हूँ 

मैं ज्यादा नहीं चाहता
हाँ इतना जरुर चाहता हूँ 
मेरा हर छात्र सफल रहें 
ऊंचाइयों तक पहुँचे
मैं ही वह हूँ 
जो आपकी सफलता देख कर इतराता है
गर्व से कहता है
यह मेरा स्टूडेंट हैं 
हम ही ऐसे हैं जो आपको ऊपर चढते देख जलते नहीं 
न हतोत्साहित करते
बल्कि प्रोत्साहित करते 

हम ही वह हैं 
जहाँ हमें कोई एक नहीं सब प्रिय 
फिर वह चाहे कैसा भी हो
सबको एक ही जैसा ज्ञान 
हमारी नजरों में सब समान
हमारा एक भी छात्र असफल न हो
यही हमारी इच्छा 
क्योंकि तुम्हारी सफलता और असफलता के बीच हम जो हैं 
क्या यही सीखा है  तुमने 
यह ताना सुनने की अपेक्षा 
यह सुनना 
न जाने इनके शिक्षक कैसे होंगे और इनकी पाठशाला 
जिनकी वजह से यह मुकाम हासिल है 
हम ईश्वर नहीं है 
न हम जन्मदाता है
पर उनके भी गुरू तो हम ही हैं 
गुरू बिना ज्ञान कहाँ 
             हमारी संपूर्ण गुरू जाति को नमन