Sunday, 12 July 2026

साथ कौन ???

साथ बहुत से चलते हैं 
साथ खड़ा कोई नहीं होता 
हंसते तो बहुत साथ में हैं 
तुम्हारी खुशी में कोई खुश नहीं होता 
दुख में सहानुभूति तो बहुत दिखा देंगे 
कोई तुम्हारें साथ रोने वाला नहीं यहाँ 
दुनिया बहुत मतलबी है 
तुम पर हंसने वाले बहुतेरे मिल जाएगे 
बातें बनाने वाले भी 
यहाँ अकेले ही सब करना है 
कहने को अपने पर कभी काम में नहीं आते 
अजनबी भी कभी-कभार अपनों से ज्यादा हो जाते हैं 
जानते तो सब हैं तुम्हें 
असलियत तो यह है 
कि वह बस ऊपर से 
कोई मन में झांककर देखना नहीं चाहता 
दोस्त तो बहुत हैं कहने को 
दोस्ती निभाना नहीं जानते 
रिश्तेदार तो उससे भी आगे 
रिश्ता कैसे बनाए रखना है 
यह तो उनको भी नहीं मालूम 
बस अवसर की प्रतीक्षा करते हैं 
कब खाने को मिले 
वह बरही हो या तेरही 
खाकर गायब हो जाते हैं 
हैसियत देखने आते हैं 
फिर सब जगह प्रचार करते हैं 
सब मिला कर देखा जाए 
तो दोस्ती- रिश्तेदारी 
सब बेमानी 
सच्ची हो तो अच्छी है 
अन्यथा न हो तो ही ठीक 

Saturday, 11 July 2026

मुझमें मेरा शहर बसता है

मुझमें मेरा शहर बसता है 
क्या 
हां , सही सुना आपने 
शहर में हम अपने आप को देखते हैं 
उसकी आदत हो जाती है हमें 
उसके अनुसार हम बन जाते हैं
शहर सुबह  - सुबह उठाता है 
तैयार करता है दिन भर के लिए 
मेरा शहर कभी सोता ही नहीं है 
हमेशा भागता - दौड़ता रहता है 
लोग भी इसके साथ चलते रहते हैं 
अगर कहीं दूसरे शहर में जाते हैं 
तब लगता है 
समय ठहर ही गया है 
अपने शहर में सांस लेने को फुर्सत नहीं 
और दूसरी जगह समय कैसे व्यतीत करें 
समझ ही नहीं आता 
कुछ दिन के लिए ठीक है 
उसके बाद ऊब होने लगती है 
वहाँ की शांति भाती नहीं 
यहाँ की चिल्ल - पौ ही भाता है 
लोकल की रेस
सड़कों पर भीड़ 
बाजार में ठेलमठेल 
नहीं किसी की टोकमटाकी 
सब अपने में मग्न 
अकेले होकर भी सबके साथ होने का एहसास 
इस शहर ने मुझे कर्मठ बनाया है 
काम बहुत जरुरी है यह सिखाया है 
एडजस्ट करना सिखाया है 
सपने देखना और उसको साकार करना सिखाया है 
यहाँ की गर्मी हो बेहिसाब डूबती बरसात हो 
ठंड में भी गर्म कपड़े की जरूरत न हो 
ठेले वाले की पानी पुरी और पाव - भाजी भी भाती है 
दरिया को देख कर भी मन प्रसन्न हो जाता है 
भले ही उसका पानी नमकीन हो 
दरिया जैसा विशाल है मेरा शहर 
हर किसी को अपने में समेट लेता है 
अजनबी से भी अपनापा जोड़ लेता है 
इसने मुझे पंख दिया 
मैंने उड़ान भरा 
जीवन को व्यवस्थित करने की कोशिश की 
कुछ हद तक सफल भी रही 
आभार है इसका 
बहुत कुछ दिया 
जान ही गए होगे 
मैं किसकी बात कर रही हूँ 
मेरी मुंबई की 
वह जान है मेरी 
मुंबई देवी की कृपा बनी रहें 
मुझ पर और मेरे बच्चों पर
वे कहीं पर भी रहें 
उन पर अपना आशीर्वाद बनाए रखना 

जीना मत छोड़ना

"जो कुछ भी हो, जीवित रहो।
मृत्यु से पहले मत मरना।
खुद को खो मत देना, उम्मीद मत खोना, दिशा मत खोना। खुद से, अपने शरीर की हर कोशिका से, अपनी त्वचा की हर तंतु से जीवित रहो।

जीवित रहो, सीखो, अध्ययन करो, सोचो, पढ़ो, बनाओ, आविष्कार करो, रचनात्मक बनो, बोलो, लिखो, सपने देखो, डिज़ाइन करो।
अपने भीतर जीवित रहो, बाहर भी जीवित रहो, दुनिया के रंगों से अपने आप को भरो, शांति से अपने आप को भरो, आशा से अपने आप को भरो।
खुशी से जीवित रहो।

जिंदगी में सिर्फ एक ही चीज़ है जिसे तुम्हें व्यर्थ नहीं करना चाहिए,
और वो है खुद ज़िंदगी..."
~ वर्जीनिया वूल्फ

Friday, 10 July 2026

नींव मजबूत हो

न प्यार से रहना 
न छोड़कर जाना 
ऐसे संबंध को क्या कहना 
कहना कुछ करना कुछ 
कभी नजदीक का एहसास 
कभी देखकर अनदेखा 
कैसा जाल संबंधों का 
लगता है जकड़ लिया है 
न उनके साथ न उनसे दूर
संबंध ऐसे तो न हो 
उलझा हुआ 
जो भी हो मन से हो 
जबरदस्ती लादा न गया हो 
जिम्मेदारी निभाने की मजबूरी न हो 
नींव मजबूत हो 
तभी टिक पाएंगे 
अन्यथा भरभराकर गिरने में पल भी नहीं