न जाने कब उसकी जरूरत पड़ जाए
थोड़ी यादें मन के एक कोने में दबाकर रखना
न जाने कब मन उसमें रमने का मन करें
कुछ बातें अपने मन में छिपा कर रखिए
समय आएगा तो बताना अभी इतनी जल्दी क्या है
हर खुशी दूसरों के सामने जाहिर न करें
क्या जाने किस की बुरी नजर लग जाए
अपनी बातें अपनी यादें
अपना सुख - दुख अपने तक सीमित रखिए
ढिंढोरा पीटने की आवश्यकता क्या है
जीवन व्यक्तिगत है सार्वजनिक नहीं
हर बात का ढोल बजाना
उचित नहीं
यहाँ सब आँख गड़ाए बैठे हैं
घात लगाए बैठे हैं
शिकारी जैसे शिकार पर झपट्टें को तैयार हैं
बस कुछ सुनने में आना चाहिए
बाकी सब तो वो खुद कर लेंगे
एक चेहरे पर कई मुखौटें लगाए हुए हैं
चेहरे पर मुस्कान दिल में जहर भरे बैठे हैं
पग - पग पर सांप और बिच्छू सरीखे
डंक मारने - डसने को तैयार हैं
उनको मौका क्यों देना है
थोड़ा चालाक भी बनना है
हमारा सब हमारे तक ही सीमित रहे
सब पर जाहिर न हो