Friday, 12 June 2026

ऐसा तो न था

पहले भी वही लोग
वही जगह 
पर ऐसा तो न था
कोई किसी की ताई
कोई किसी की भौजी
कोई किसी की बेन
कोई किसी की खाला
कोई किसी की आंटी
सब अपने से लगते थे
पूरनपोली
कचौरी
ढोकला
सिवैया
केक
सबके स्वाद भी अपने घर के लगते थे
अब वह बात नहीं रही
अब तो व्यंग के सिवा और कुछ नहीं
नजरिया बदल गया 
अब प्रेम नहीं वैमनस्य ने घर कर लिया है
अब पडोसी नहीं
प्रांतीय और धार्मिक 
अब वह होली और दीवाली
गणेशोत्सव , क्रिसमस और ईद 
की रौनक पहले जैसे नहीं
त्योहार तो वही
पर हम बदल गए हैं
सोच बदल गई है
भाईचारे की भावना गायब हो गई है
चाॅल संस्कृति की जगह फ्लैट संस्कृति ने ले ली है
जहाँ सब अपने अपने घरों में बंद
प्राइवेसी हो गई है
सामुदायिक भावना तो कब की गायब हो गई है
अब लोग        हम   से    मैं 
हो गए हैं
पहले भी वही लोग
वही जगह
पर ऐसा तो न था

Thursday, 11 June 2026

यदि ऐसा होता तो

यदि ऐसा होता तो
यदि वैसा होता तो
होता तब न
हुआ नहीं
हम इसी यदि के चक्कर लगाते रहते हैं
हासिल कुछ नहीं
सिवाय पछताने के
दुखी और निराशा के गर्त में डूबने के
देखा जाय तो
नियति जब खेलती है
तब सब कुछ पलट जाता है
जीती हुई बाजी भी हम हार जाते हैं
एक ही पल में सब कुछ उलट पुलट हो जाता है
सोचा हुआ हो जाता
तब क्या कहना
यदि , लेकिन , परन्तु , फिर भी
यह केवल शब्द नहीं है
बहुत कुछ इनमें ही छिपा है
जीवन का राज
मैंने सोचा था 
बीस साल में सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा
पचास पचपन तक सब जिम्मेदारी से मुक्त
पर वह हो न सका
इस यदि ने ऐसा टांग अडाया
जिंदगी औंधे मुंह आ गिरी
अब न समझ आ रहा है
न सूझ रहा है
यह क्या से क्या हो गया
कहाँ से चले थे
कहाँ पहुँच गए
यदि वैसा हुआ होता तो
परन्तु वैसा हुआ नहीं 
लेकिन ऐसे हो गया 
फिर भी जीना तो है
मरना तो किसी समस्या का समाधान नहीं
हार मानकर चुपचाप बैठ नहीं सकते 
तब ठीक है
फिर से कमर कसकर उठ खडे हो जाओ
यदि वैसा हो गया
तब फिर क्या गम

Wednesday, 10 June 2026

कुछ लोग जो ऐसे होते हैं

कुछ लोग जो ऐसे होते हैं
मिलते है कुछ पल
बरसों दिल में घर कर जाते हैं
वह होते हैं अंजाने
पर लगते हैं जाने पहचाने
जीवन के सफर में कहाँ
कोई ऐसा मिल जाएं
कुछ पल ही सही
मुसीबत में काम आ जाएं
होठों पर एक हल्की सी मुस्कान दे जाएं
उन्हें पता है
हमें पता है
शायद फिर मुलाकात न हो
फिर कभी न मिल सके
तब भी इतने अजीज
जितने अपने परिचित भी नहीं
ये किसी भी मोड पर मिल जाते हैं
यात्रा में माॅल में
बस में ट्रेन में
होटल और लाॅज में
तबादले वाली नौकरी में
देश में विदेश में
अक्सर याद आ जाते हैं
कुछ घटनाएं जेहन में विद्यमान
अरे उस समय ऐसे मदद की थी
अगर नहीं तो क्या होता
ये होते अजनबी है
पर मददगार साबित होते हैं
इनकी एक मदद जिंदगी बदल देती है
उनका तो कुछ नहीं जाता
पर अच्छे इंसान के रूप में धर कर जाते हैं
याद आने पर मन आदर से झुक जाता है
कहते हैं किसी के बिना किसी का काम रूकता नहीं
आप न सही कोई और सही

Tuesday, 9 June 2026

औरत आज भी वहीं खड़ी है

मैं नारी हूँ 
मैं औरत हूँ 
मैं बेटी हूँ 
मैं बहन हूँ 
मैं बहू हूँ 
मैं पत्नी हूँ 
मैं माँ हूँ 
इसीलिए सारे समाज का ठेका मैंने ले रखा है 
उनके इज्जदार होने का कारण मैं हूँ 
यह दीगर बात है मेरा कोई इज्जत- सम्मान नहीं 
हर बात पर दबाना
ताने मारना 
स्वाभिमान को कुचलना 
मन को आहत करना 
फिर कहना कि बहुत मजबूत है 
घर का दारोमदार मुझ पर 
जो कहीं मेरा घर है ही नहीं 
निकलने की और निकालने की धमकी बात- बात में 
घर जो मेरा नहीं 
वह मेरे न रहने पर बिखर जाएंगा 
क्या त्याग का चोला पहना कर रख दिया है 
सब काम करने पर भी सुनना 
करना ही क्या है 
आदर - सम्मान मिल भी गया तो 
वह एहसान है एक तरह 
हम ऐसे नहीं होते तब पता चलता 
हमेशा से यही हुआ है 
होता भी रहेगा 
कहने को शिक्षा - स्वतंत्रता 
पर एक आदर - सम्मान- प्यार के लिए तरसती 
ममता और प्यार लुटाने वाली 
उसी के लिए न जाने क्या-कुछ सहती 
समानता का दिखावा सब ढकोसला 
आत्मनिर्भर या फिर किसी पर निर्भर 
कुछ नहीं पड़ता फर्क 
बदलाव की आंधी तो कुछ ज्यादा ही उड़ा रही है 
न इधर कई न उधर की 
घड़ी के पैंडलुम की तरह डोलती जिंदगी 
कहते हैं जमाना बदल गया 
कुछ नहीं बदला है 
औरत आज भी वहीं कई वहीं खड़ी है 
जहाँ सदियों पहले खड़ी थी