Friday, 10 July 2026

नींव मजबूत हो

न प्यार से रहना 
न छोड़कर जाना 
ऐसे संबंध को क्या कहना 
कहना कुछ करना कुछ 
कभी नजदीक का एहसास 
कभी देखकर अनदेखा 
कैसा जाल संबंधों का 
लगता है जकड़ लिया है 
न उनके साथ न उनसे दूर
संबंध ऐसे तो न हो 
उलझा हुआ 
जो भी हो मन से हो 
जबरदस्ती लादा न गया हो 
जिम्मेदारी निभाने की मजबूरी न हो 
नींव मजबूत हो 
तभी टिक पाएंगे 
अन्यथा भरभराकर गिरने में पल भी नहीं 

गुरूर भी जरुरी है

गुरु पूर्णिमा का ज्ञान  । 
गुरुर भी जरुरी है 
 चरण स्पर्श कर लिया फिर मजाक उड़ाया 
ऐसे सम्मान का क्या फायदा 
जहॉ सम्मान मन से न हो वहॉं से हट जाना ही बेहतर 
रिश्ता अपनी हैसियत वाले लोगों से ही रखना चाहिए बड़े लोगों से रख अपना ही अस्तित्व समाप्त करने जरूरत नहीं है 
लाचार और उपहास का पात्र बनने के अलावा कुछ हासिल नहीं 
समाज में हैसियत देख रिएक्शन होता है 
डार्विन की थ्योरी लागू होती है 
शक्तिशाली बनो स्वयं और आत्मनिर्भर भी 
एहसान का एहसास ताउम्र झेलना आसान नहीं होता 
लोग समय-समय पर दंश चुभाते रहेगे , जताते रहेगे 
अपना याद रहता है आपका याद नहीं रखेंगे 
यह सिलसिला चलता रहेगा कम से कम दो पीढ़ी तक
उनकी औलाद भी यही सोचती रहेंगी 
आपके साथ आपके बच्चों को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी 
वहाँ कभी जाना नहीं जो कहने को होते तो है अपने लेकिन रहते हैं अजनबियों सा

गुरू अनंत

गुरू अनंत 
गुरुवाणी अनंता 
इसका अंत ही नहीं 
हर मोड़ पर ज्ञान देने वाला कोई न कोई मिल ही जाता है 
उम्र चाहे कोई भी हो 
कुछ मालूम हो या न हो 
उन्हें लगता है 
दूसरे एकदम अज्ञानी हैं 
वे अभी - अभी मां के गर्भ से बाहर आए हैं 
कभी खाने पर
कभी स्वास्थ्य पर
कभी नैतिकता पर
उपदेश देना शुरु हो जाता है 
अब क्या कहें 
मूक श्रोता बने रहें 
या उल्टा जवाब दे किनारा कर लिया जाए 

Wednesday, 8 July 2026

प्यार और अपनापन ??

सब कुछ है 
अच्छी नौकरी 
बड़ा घर 
मोटर - गाड़ी 
आधुनिक सुख - सुविधा
बड़ा बैंक बैलेंस 
तब भी खुशी नहीं 
कुछ रिक्तता 
इसी को भरने में व्यक्ति लगा रहता है 
विश्वास करता है 
धोखा खाता है 
एक मन होता है 
उसको साथ चाहिए 
प्यार चाहिए 
दौलत से दिल का सुकून नहीं खरीद जा सकता 
प्यार की तलाश में भटकन जारी है 
कोई महलों में रहकर खुश नहीं 
कोई सड़क पर रह खुश 
आज जो घटनाएं हो रही है 
वह चिंताजनक हैं 
अकेले रहो आराम से रहो 
शादी मत करो 
ठीक भी है 
शादी का अर्थ बर्बाद होना नहीं होता 
घुट - घुट कर जीना नहीं होता 
ताउम्र कम्प्रोमाइज करना भी नहीं होता 
अपना अस्तित्व समाप्त करना भी नहीं होता 
पर करें क्या 
अकेला जीवन भी कोई जीवन नहीं होता ??
किसी ने एक बार कहा था 
पांच बच्चों से परेशान भले ही हूँ पर बांझ तो नहीं हूँ 
पति भले दारूबाज है पर विधवा तो नहीं हूँ 
मारता - पीटता है पर खाना और छत भी वो ही देता है 
यह तो भावना अनपढ़ और साधारण की 
पढ़े - लिखे और आत्मनिर्भर लोगों की 
सब इंसान हैं 
सबमें दिल है 
जो प्यार और अपनापन चाहता है 
उसी की तलाश में न जाने क्या-कुछ खोता है