Friday, 24 July 2026

यह वादा रहा

सावन के झूले पड़ने लगे हैं 
सावन आ रहा है 
त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है 
आनंद ही आनंद 

हंसी आ गई 
आनंद हो या न हो 
हम इन्हीं के बहाने आनंदित होने की कोशिश करते रहते हैं 
नहीं तो किस बहाने ??

लगता है 
हम जिंदगी को धता बता रहे हैं 
कह रहे हैं 
तू कितना भी झूला झुला ले 
हिचकोले खिलवा ले 
हम भी हार मानने वालों में नहीं 
चढ़ाव - उतार तो आते रहेंगे 
हम भी झूलते - झूलते 
जीवन नैया पार ही लगा लेंगे 
डर के मारे झूले से उतरने वाले नहीं 
यह वादा रहा 

पिता का घर

एक घर पिता का होता है
जहाँ अपनापन और अधिकार होता है
एक घर भाई का होता है
जहाँ हम मेहमान सरीखे होते हैं 
कुछ भी छूने से डर लगता है

एक घर पिता का होता है
जहाँ हम जिद करते हैं 
अपनी बात मनवा कर ही छोड़ते हैं 
खाने में ना - नुकुर करते हैं 
एक घर भाई का होता है
जहाँ हम समझदार हो जाते हैं 
जो मिला वह खा लेते हैं 
ना - नुकुर की कौन कहे 
रसोई में जाने पर भी डर लगता है

एक घर पिता का होता है
जहाँ हम जब चाहे आ - जा सकते हैं 
विचरण कर सकते हैं 
परमीशन की जरूरत नहीं 
एक घर भाई का होता है
जहाँ सोचना पडता है 
मौका और वक्त  देखना पडता है

एक घर पिता का होता है
जहाँ हम राजकुमारी होते है
राजदुलारी  होते हैं 
एक घर भाई का होता है
जहाँ हम सिर्फ उस घर की बेटी होते हैं 
नाज - नखरे नहीं कर सकते
उसे उठाने वाला कोई नहीं 
हर भाई पिता समान नहीं हो सकता

पिता तो पिता ही होता है
उसकी जगह कोई नहीं ले सकता 
न किसी का दिल इतना बडा होता है
अपना सर्वस्व लुटाकर भी हमारे चेहरे पर मुस्कान हो 
यह तो पिता ही कर सकता है।

Thursday, 23 July 2026

वह किताबों की दुनिया

आज आलमारी साफ कर रही थी 
बहुत सी पुरानी चीजें निकाल कर फेंक रही थी 
कुछ पुराने अखबार के पन्ने 
कुछ कतरने 
कुछ पत्रिकाऍ  
जो पुरानी और पीली पड़ गई थी 
एक किताब मिली 
जो मैंने संभाल कर  रखी थी 
पहले तो न जाने कितनी बार पढ़ी थी 
बीच के वर्षों में भूल गई थी 
आज फिर वह जमाना याद आ गया 
किताब तो पुरानी हो गई थी 
उसका महत्व??
वह तो आज भी बरकरार है 
तभी तो पुरानी स्मृतियाँ ताजा हो उठी 
जीवन उतना पीछे चला गया 
जब हम रात भर जागकर इसे खत्म कर ही चैन लेते थे 
जब भी मन में उलझन होती 
इसके पात्रों से तुलना कर लेते थे 
प्रेरणा प्राप्त होती थी 
यही तो जीवन है शायद 
उम्र बढ़ने से महत्ता खत्म नहीं होती 
हम ऐसे - वैसे नहीं हैं 
जीवन में हर संघर्ष का सामना किया 
हारे नहीं 
मुश्किल और असफल होने पर फिर खड़े हुए 
आज कुछ बहुत याद आए 
प्रेमचंद,  शरतचंद्र,  शिवानी , मन्नू भंडारी , महादेवी वर्मा 
अज्ञेय , पंत , प्रसाद , निराला और न जाने कितने 
किताबों से नाता था हमारा 
उन पीढ़ियों से पूछो 
आज शायद मोबाइल और इंटरनेट पर सब झटपट उपलब्ध 
कहीं सहेजना नहीं 
जब चाहे तब हाजिर 
पर जनाब 
वह मजा मोबाइल में कहाँ जो किताबों में थी 

Wednesday, 22 July 2026

वादा है तुम भूखे नहीं रहोगे

एक समय था जब पेट भर भोजन भी नहीं मिलता था 
मजूरी करना मानो गुलामी करना था 
पेट के कारण गालियां सुननी पड़ती थी 
मारा - पीटा जाता था 
गुलामी का दौर खत्म हुआ 
भूखमरी का भी अंत 
अब मजबरी - काम नहीं करें 
तब भी जीवनयापन हो जा रहा है 
मुफ्त में अनाज मिल रहा है 
पैसे भी मिल रहे हैं जो नशा- पानी के लिए पर्याप्त है 
समय- समय पर बिजली बिल भी माफ 
चुनाव आने पर कर्ज भी माफ 
अब तो मजे ही मजे हैं 
संविधान ने हमें अधिकार भी दिया है 
दवाई भी मुफ्त अस्पताल भी 
तीर्थ यात्रा भी भगवान के दर्शन भी 
और क्या चाहिए 
सही है 
अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम 
दास मलूका कह गए सबके दाता राम
यहाँ सबके दाता सरकार है 
पूँजीपति अमीर हो रहे हैं 
कुछ यहाँ पांच किलो पर खुश हैं 
पढ़ने की क्या जरूरत 
पकड तल कर कमा लेंगे 
ठगी कर कमा लेंगे 
लेकिन घूमेंगे आलिशान  गाड़ी में 
बड़े - बड़े बंगले बनाएंगे 
भले ही चंदा चोरी करना पड़े 
हमको अपनी पड़ी है 
लोग जाए भाड़ में 
नेताओ का एक ही नारा 
तुम भी खुश रहो 
हम भी खुश रहेंगे 
हमको जीताओ हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे 
वादा है तुम भूखे नहीं रहोगे