Wednesday, 2 September 2026

समय का प्रभाव

तालियाँ बजी 
लोग खुश हुए 
बातें - ताने भी दिए 
यह उस समय जब समय खराब चल रहा था 
जिंदगी हिचकोले ले रही थी 
कहते हैं 
समय बदलता जरूर है 
बदला भी 
तालियाँ फिर बजी 
लोग खुश भी दिखाए स्वयं को 
बातें - ताने भी दिए 
यह भी उस समय जब समय अच्छा हो गया 
लोग तो वही थे 
स्वाभाविक है 
प्रतिक्रिया भी उनकी ही होगी 
बुरा हो या अच्छा
बोलना तो है ही 
चुप कैसे रहेगे 
कभी गिराना कभी उठाना 
यह तो इनकी आदत में शुमार 
न करें परवाह 
अपने ही प्रवाह में बढ़ते जाए 
समय सबका असली चेहरा दिखा देगा 
वह ऐसा आईना है 
जिससे कभी कुछ छुपता नहीं है 

Sunday, 30 August 2026

हे मानव

देखो तो देखने में क्या जाता है 
सोचो तो सोचने में क्या जाता है 
आपने चांद को देखा तो ईश्वर की सुंदरता दिखी
आपने सूर्य को देखा तो ईश्वर का बल देखा 
आपने अपने को आईने में देखा तो ईश्वर की सबसे बुद्धिमान रचना दिखी 
आपने पंछी को देखा तो उड़ान दिखी 
आपने पेड़ को देखा तो दानवीर दिखा 
आपने समुद्र को देखा तो धैर्य दिखा 
आपने नदियों को देखा तो माता दिखी 
आपने पर्वत को देखा तो मजबूती दिखी 
आपने मोर को देखा तो खूबसूरती दिखी 
आपने कोयल को देखा तो वाणी की मिठास दिखी 
आप यह सब रोज देखते हैं 
जरा सोचिए तो 
ईश्वर ने आपको ही बुद्धिमान सबसे क्यों बनाया है 
औरों के पास वह सब नहीं जो आपके पास है 
आप परिपूर्ण हैं 
बल , सुंदरता , वाणी , दया , धैर्य  सब सम्मिलित है 
तब ईश्वर की सबसे सुंदर रचना 
     हे मानव 
अपनी महत्ता को पहचान 
वह कर जिसके लिए यह जीवन मिला है 


बदलाव

सब बदल रहा है 
मौसम का मिजाज भी बदल रहा है
परंपराएं - रिवाज बदल रहे हैं 
लोग भी बदल रहे हैं 
भावनाएं बदल रही है 
अब वह पहले जैसा कुछ नहीं रहा 
तुमको भी समय के साथ चलना है 
न चलोगे तो पीछे सब छूट जाएगा 
तुम खड़े देखते रह जाओगे 
समय आगे चल देगा 
सब छोड़कर 
रिश्तों के बंधन में मत जकड़ो 
यहाँ परिस्थिति बदलती है 
उसके अनुसार सब बदल जाता है 
जो कल तक था वह आज नहीं 
यहाँ तक कि सत्य की भी परिभाषा बदल जाती है 
बदलाव पीछे मुड़कर नहीं देखता 
वह आगे की ओर चलता है 
उसके स्वभाव को समझो 
अपने को भी उसी के अनुसार ढाल लो 

Saturday, 29 August 2026

चांद मुझे लगता प्यारा

आज रात को चांद देखा 
पूर्णिमा का चांद 
पूर्ण रूप से गोलाकार 
दुधिया प्रकाश बिखेरता 
बड़ा ही खूबसूरत 
सारी धरती उसकी शीतल चांदनी में नहाई हुई 
क्या यह हमेशा ऐसा ही रहेगा 
नहीं ना 
घटता - बढ़ता रहता है 
इस पर भी अमावस की छाया पड़ती है 
कभी-कभार बादल भी ढक लेते हैं 
इसमें भी दाग है 
तब भी तो हमने उसे स्वीकार किया 
प्यार- सम्मान दिया 
पूजते हैं सब
उसकी प्रतीक्षा रहती है 
उसकी बाट जोहते हैं 
उसके तारों को भी प्यार करते हैं 
यही तो है 
हमारा और उसका रिश्ता 
हम उसको बदलने की कोशिश नहीं करते 
जो भी है जैसा भी है 
हमें तो प्यारा है 
तभी तो यह नाता सदियों से टिका है 
हम यह बात रिश्तों में क्यों नहीं स्वीकार करते 
बस कमियां देखते हैं 
अगर चंद्रमा को हमने स्वीकार किया 
तब अपनों को क्यों नही 
प्यार करें और प्यार पाए 
बदले न 
ना बदलने की कोशिश करें