Tuesday, 5 May 2026

हम मिडिल क्लास

क्या मिडिल क्लास  मेंटालिटी है
बहुत  बार सुना 
हंसते  - हंसते  टाल दिया 
मिडिल  क्लास  को समझना  सबके बस की बात नहीं 
यह वे लोग हैं  जो राष्ट्र निर्माता  है
समाज  निर्माता  है 
टेक्स पेयर है
सारा दारोमदार  इन्हीं  के  कंधों  पर
सारी अपेक्षाएं इन्हीं  से
परम्परा  का पालन करना 
वर्तमान  में  रहते हुए  उज्जवल भविष्य  का ख्वाब  बुनना
शिक्षा  को पुरजोर बढावा 
विरासत को कायम  रखना
आधुनिकता  को स्वीकार  करना

रहते है दो कमरों  के  घर में 
स्वप्न देखते हैं  अट्टालिकाओं के 
पैसा होते हुए  भी सोच समझ  कर खर्च करते  हैं 
फिजुलखर्ची  इन्हें  बर्दाश्त  नहीं 
चीजों  का इस्तेमाल  करना इन्हें  बखुबी  आता है
टूथपेस्ट  खत्म  होने पर भी काट - पीट कर जब तक खत्म  न हो जाएं  दम  नहीं 
जूस की बोतल में  पानी डालकर खंगार  लेंगे 
रसगुल्ले  की  बची  चाशनी से मीठी  पुरी बना लेंगे
सर दर्द  में क्रोशीन  से काम  चला लेंगे
साबुन जब घिस जाय तब उसके टुकडे  टुकड़े  कर डिटर्जेंट  बना लेंगे
हाथ से बुना स्वेटर 
हाथ से कूटे मसाले बहुत  भाते हैं 
कपडा फट जाएं  तो उसका पोछा बना लेते  हैं 
मगर कामवाली  बाई  को नई साडी भी दीवाली  पर देते हैं 
वाॅचमैन  , पोस्ट मैन को बख्शीश भी देते हैं 
सब्जी वाले से सब्जी  पर धनिया - मिर्ची  मुफ्त  में  मांगते हैं 
पर मेहमानों  की खूब  आवभगत करते हैं 

टैक्सी  नहीं  बस और ट्रेन  से सफर करते हैं 
पर बच्चों  की  शिक्षा  में  कोताही  नहीं  करते हैं 
किश्त पर सामान  लेकर  घर को सजाते हैं 
किसी को अपनी कमजोरी  का एहसास  नही होने देते
कभी-कभी  महंगे होटलों  में  भी खाना खा आते हैं 
मेनू  पर कीमत   देखकर डिश आर्डर  करते हैं 
कभी  कभी  पिकनिक  पर भी जाते हैं 
नाश्ता  घर से बनाकर ले जाते हैं 

रात - दिन मेहनत  करते है
कभी चुपचाप  नहीं  बैठते हैं 
डाॅक्टर  , इंजीनियर  , टीचर यही तैयार  करते हैं 
नेतागिरी इनके बस की बात नहीं 
ये वोट भी मुश्किल  से देने जाते हैं 
हाॅ चर्चा  में  ये किससे पीछे नहीं 
तभी तो बुद्धिजीवी कहलाते हैं 

अमीर  तो अमीर  है उसे पैसे  की  परवाह  कहाँ  
गरीब  तो गरीब  है उसे दो जून को रोटी ही बहुत  है
समाज  की  परवाह  भी इन दोनों  तबको  को नहीं 
यह  मिडिल  क्लास  ही है जो सबको साथ लेकर चलता है
फिर भी सबसे ज्यादा  वहीं  पीसता है
उसे किसी  चीज में  छूट नहीं 
नहीं  कोई  सरकारी बैनिफिट्स 
क्योंकि वह वेतन भोगी है
उसकी कमाई  जग-जाहिर  है
भले यह सब करते-करते  महीने के आखिर  तक कंगाल  हो जाएं 
फिर भी फर्ज  निभाना है
देश और समाज  का भार तो उसे  ही निभाना है ।

जीवन का सार

ऐसा क्यों लगता है 
जीवन एक चोला है 
जिसे हमने वर्षों से धारण किया है 
कभी नया रहा होगा यह
दिन ब दिन पुराना होता जा रहा है 
कभी थोड़ा सा छेद हुआ 
कभी हल्की सी खरोंच आई 
हम उसे रफू करते रहें 
अपने अनुसार बनाते रहें 
पर कब तक ऐसा चलता रहेगा 
अब वह पुराना भी हो रहा है 
घिस भी रहा है 
रंग भी फीके हो रहे हैं 
कहीं - कहीं फट भी रहा है 
जो रफू करने की स्थिति में नहीं 
इस चोले को देखने की चाहत अब नहीं बची 
अब लोगों को यह नहीं लुभाता 
इसका बेरंग आकर्षित नहीं करता 
अब यह शीशे के सामने इतराता नहीं 
अब यह ढंग से संवरता भी नहीं 
अब वह मन भी न रहा 
ऐसा लगता है इससे छुटकारा मिल जाए 
वह हो नहीं सकता 
मोह इतना है कि जकड़ कर रखे हुए हैं 
बहुत प्यार है इससे 
पुराना भले है तो अपना ही 
इसी पर इतराए 
ठहाके लगाए 
हंसे और खिलखिलाएं 
गर्व और घमंड भी किया 
सबसे अच्छा सबसे श्रेष्ठ 
अपने आगे कोई नहीं 
बड़े - बड़ों की छुट्टी कर दी 
परचम लहराया 
हर मुश्किल को आसान किया 
अपनी राह खुद बनाई 
इसकी काबिलियत पहचानी 
वह आज उम्र के कगार पर खड़ा है 
परिस्थितियां बदल गई 
साथ छूटे वह साथ है 
निभा रहा है 
तब तो संभालना इसे भी है 
बहुत मनमानी हो चुकी 
बहुत उपेक्षा कर ली 
अब तो सब छोड़कर शिद्दत से इसका साथ निभाओ 
अंतिम सत्य यही है 
इसका साथ 
जीवन का सार 

Monday, 4 May 2026

सब ठीक है ना

सब कुछ ठीक है
यह छोटे छोटे से शब्द कितना सुकून देते हैं
आई लव यू    से भी ज्यादा
बहुत ताकत है इनमें
अपनों की खैरियत पता चलती है
माँ दूर रहने वाले बेटे से जब पूछती है
बेटा तू ठीक है न
तब माँ के चेहरे पर तसल्ली के भाव आ जाते हैं
ससुराल में नई-नई बेटी से जब माता पिता पूछते हैं
बेटा तू ठीक है न
उसकी हाॅ सुनकर ही अंदाजा लगा लेते हैं
बेटी किस हाल में है
काम पर गए पति को देर होने पर जब पत्नी पूछती है
सब ठीक है न
आज कोई परेशानी तो नहीं
उनकी हाॅ सुनकर वह मुस्कान से भर जाती है
बच्चों को देर हो जाती है कई
स्कूल - कालेज या ऑफिस
बस यही वाक्य सुनने को बेताब रहते हैं
कोई कुछ कर तो नहीं सकता
खुदा नहीं है
पर अपनो की खैरियत की हमेशा दुआ करता है
जब तक घर का हर सदस्य घर नहीं आ जाता
तब तक चैन की नींद नहीं आती
हमारे अपने कहीं भी रहे
सुरक्षित रहे
सब यही चाहते हैं
सब ठीक है
सुनना चाहते हैं हमारे कान
सब कुछ ठीक है
चिंता मत करो
और क्या चाहिए
सब ठीक रहेगा
तभी तो प्यार 'ममता 'और उन्नति होगी
आई लव यू 
कभी-कभी बोला जाता और सुना जाता है
सब ठीक है
यह सुनने और कहने को हम हमेशा तत्पर

Sunday, 3 May 2026

पेट की भूख

भूख तो भूख होती है
वह किसी की भी हो
अमीर की हो
गरीब की हो
पढे लिखे की हो 
अनपढ़ की हो
देशी की हो या विदेशी की हो
पशु की हो
मानव की हो
सारा संसार इसी के इर्द-गिर्द
सारे जतन इसी के लिए
जब पेट की अंतडिया कुलमुला रही हो
तब स्वाद नहीं देखा जाता
पेट किसी तरह से भरे
कुछ भी मिल जाय
बस भूख मिट जाए
आज महसूस हुआ
खाने में थोड़ी देर क्या हुई
भूख से हाल बेहाल हो गया
वही किचन में सब्जी को कलछी चलाते चलाते
दो बिस्किट पानी से गटका
तब जाकर जान में जान आई
याद आई 
उन मजदूरों की जो भूखे हैं
खाने के लिए लाईन लगानी पड रही है
दूसरे पर आसरा
नहीं मिला तो भूखे
ऊपर से बीवी बच्चों के साथ
तब और मुसीबत
सोशल मीडिया पर ऐसे दृश्य देखकर
कलेजा मुंह को आ जाता है
कहावत है न
पेट की भूख जो न कराए