Saturday, 5 September 2026

हर गुरू को नमन

मैं भूत , वर्तमान और भविष्य 
तीनों का कारण हूँ 
मैं शिक्षक हूँ 
भूत को सुधारता हूँ 
वर्तमान को गढता हूँ 
भविष्य को निर्माण करता हूँ 

मैं ज्यादा नहीं चाहता
हाँ इतना जरुर चाहता हूँ 
मेरा हर छात्र सफल रहें 
ऊंचाइयों तक पहुँचे
मैं ही वह हूँ 
जो आपकी सफलता देख कर इतराता है
गर्व से कहता है
यह मेरा स्टूडेंट हैं 
हम ही ऐसे हैं जो आपको ऊपर चढते देख जलते नहीं 
न हतोत्साहित करते
बल्कि प्रोत्साहित करते 

हम ही वह हैं 
जहाँ हमें कोई एक नहीं सब प्रिय 
फिर वह चाहे कैसा भी हो
सबको एक ही जैसा ज्ञान 
हमारी नजरों में सब समान
हमारा एक भी छात्र असफल न हो
यही हमारी इच्छा 
क्योंकि तुम्हारी सफलता और असफलता के बीच हम जो हैं 
क्या यही सीखा है  तुमने 
यह ताना सुनने की अपेक्षा 
यह सुनना 
न जाने इनके शिक्षक कैसे होंगे और इनकी पाठशाला 
जिनकी वजह से यह मुकाम हासिल है 
हम ईश्वर नहीं है 
न हम जन्मदाता है
पर उनके भी गुरू तो हम ही हैं 
गुरू बिना ज्ञान कहाँ 
             हमारी संपूर्ण गुरू जाति को नमन

Friday, 4 September 2026

अकेले कैसे ??

अकेले आए हैं अकेले जाएगे 
यही सुनते आए हैं 
क्या यह सच है ??
शायद नहीं 

जब इस दुनिया में जब कोई आता है 
तो किसी की खुशी 
किसी की उम्मीद 
किसी के सपने 
किसी की आशा - आकांक्षा 
और न जाने क्या-कुछ लेकर आता है 
किसी के लिए उसका पूरा जग ही वह होता है 

जब इस दुनिया से कोई जाता है 
तो क्या अकेले जाता है 
नहीं कदापि नहीं 
वह बहुत कुछ साथ ले जाता है 
किसी का तो सब कुछ 
यहाँ तक कि जीवन भी 
उसका साथ 
उसकी यादें 
उसके साथ गुजारे पल 
जो वापस फिर नहीं आता 

यह कोई भ्रम में न रहें 
अकेले आए अकेले जाएगे 
अकेले तो आप जन्म भी नहीं ले सकते 
मां - बाप की जरुरत होती है 
जन्म से पहले ही रिश्ता जुड़ जाता है 
गर्भ में आते ही सबकी निगाहे 
लगी रहती है इंतजार में 
खुशियाँ मनाई जाती है 
मिठाई बांटी जाती है 
सोहर गंवाया जाता है 
तुममें किसी को सारी दुनिया दिखाई देती है 
लकड़ी के झूले से लेकर अर्थी तक का सफर अकेले कर ही नहीं सकते 

जीवन में सभी का योगदान 
बहुत अमूल्य है 
संभाल कर रखें 
अपना ही मत समझे 

गोपाल से कृष्ण बनने की प्रक्रिया

आज मेरे कन्हैया का जन्मोत्सव है 
माॅ यशोदा का यशोदोत्सव है 
माखन मिसरी मुख पर लगा हुआ 
गाय  चराते कान्हा 
मार खाते गोपाल
गोपी संग रास रचाते 
ग्वालों संग हुड़दंग मचाते 
बांसुरी बजाते 
यह रूप सभी को भाता है 

इसका दूसरा रूप भी 
कंस और पूतना का वध करते 
कालिया पर नृत्य करते 
हस्तिनापुर के दरबार में विराट रूप दिखाते 
कुरूक्षेत्र में सारथी बन गीता का पाठ पढ़ाते 
सुदर्शन चक्र घुमाते 

बांसुरी से सुदर्शन की यात्रा 
इतना आसान तो नहीं हुआ होगा 
माखन से विदुर घर साग - रोटी खाना 
मां के आशिर्वाद से मां गांधारी के श्राप की स्वीकारता 
हमेशा स्मित हास्य 
भांजे अभिमन्यु की मृत्यु 
 अपने ही कुल को लड़ते - मरते देखना 
अंत में एक बहेलिएं के बाण से मृत्यु 

बहुत कुछ सहा 
बहुत कुछ सीखा 
बहुत कुछ किया 
इस प्रक्रिया में उनका दिल किसी ने नहीं देखा 
जो राधा के लिए धड़कता था 
कर्म के बंधन में जो बंधे तो कभी मुक्त ही न हो जाए 

अपने बच्चों को भरपूर प्यार दें 
बाद में तो जिंदगी के महाभारत में उतरना ही है 
कान्हा से शुरुआत कर कृष्ण तो बनना ही है 
तब तो स्वाभाविक है 
आप यशोदा भी बने 
जिंदगी के महाभारत में वह हार नहीं माने 
स्मित हास्य से सामना करें 

Thursday, 3 September 2026

तुम --

तुम जो भी हो लाजवाब हो 
ईश्वर की अनूठी रचना हो 
किसी के जैसे नहीं होना तुम्हें 
अपने आप में बहुत खूब हो 
हर रुप में तुम पूर्ण हो 
नहीं किसी से कमतर हो 
जो भी हो वह हो 
नहीं कोई गिला - शिकवा रखो 
बड़ी अनमोल हो किसी के लिए 
दुनिया की छोड़ो 
अपनी दुनिया में मस्त रहो