Sunday, 27 September 2026

तुम्हारा - हमारा रिश्ता

आज तुम उम्र के जिस पड़ाव पर हो 
एक समय हम भी थे 
फर्क यह था कि तुम बच्चे थे हम तुम्हारी  आज की उम्र के थे 
25 वर्ष पहले जो बच्चें 15 के थे वे आज 40 के हैं 
समय गुजर गया 
तुम बड़े हो गये हम बूढ़े  हो गये 
एक चीज जो नहीं बदली वह हमारा - तुम्हारा रिश्ता
 तुम बहुत उन्नति कर लिए होगे 
बड़े - बड़े पदों पर कार्यरत होंगे 
मां बन गए होगे अपने बच्चों की 
सच में बड़े हो गए हो पर
हमारे सामने तो अभी भी वही छोटी सी बच्ची हो 
जो शरारत करती थी 
गृहकार्य नहीं करती थी
पानी और सु सु के बहाने इधर-उधर चक्कर लगा आती थी
थोड़ा झूठ थोड़ा परीक्षा में नजर फेरते ही हेर - फेर
कोई बहाना कोई फंसाना कोई मजाक 
क्या हम नहीं जानते थे 
हम अंजान बिल्कुल नहीं क्योंकि हम भी तो उन राहों से होकर गुजरे थे 
तुमको ऐसा लगता था कि हम परेशान कर रहे हैं मिस को
ऐसी बात नहीं थी 
हमारे पास शिवजी की तरह तीसरा नेत्र भी है
यह अलग बात हम उसे इस्तेमाल नहीं करते 
तुम्हारा और हमारा नाता ही ऐसा है 
अगर तुम न होते तो हम पढ़ाते किसको 
हम न होते तो पढ़ते किससे 
हम एक - दूसरे के पूरक है प्रतिद्वंदी नहीं 
संसार मे माता - पिता के बाद एक गुरु ही होता है जो उसकी सफलता पर जलन नहीं खुश होता है 
सब कक्षा में पास हो गए मतलब वह असल में पास हो गया 
गुरु का गुरुर होते हैं छात्र 
तुम हमको एहसास दिलाते हो कि हम क्या है 
यह एहसान तुम्हारा कि तुमने हमें सबसे ऊंचा बनाया 
तुममें से जब कभी किसी को किसी भी माध्यम से देखती हूं 
मन में अभिमान होता है 
कहती हूँ  यह मेरी स्टुडेंट है
आज मिलने का तुम लोगों से मन तो था न हो पाया 
खैर कोई बात नहीं 
बस इतनी अपेक्षा है 
कभी भी किसी भी मोड़ पर मिलना पहचान लेना
बस थोड़ा सा सम्मान दे देना क्योंकि आज जिस मुकाम पर तुम हो उसमें हमारी भी कुछ भागीदारी है 

न तुम भूलो न हम भूले 
कभी-कभार बीते दिनों को याद कर लेना 
अपने बचपन को याद कर लेना हम मिल जाएगे 
Good morning misssss........... इस गूंज के साथ 
जीवन मे सफल बनो 
यही आशीर्वाद हमारा 


बेटी

मेरी बेटी मेरी शक्ति
मेरा मान मेरा अभिमान
मेरी छाया मेरा प्रतिरूप
मेरा सहारा मेरा आधार
वह है बेमिसाल
नाज है उस पर
इससे नहीं कि वह मेरी बेटी है
बल्कि इससे कि मैं उसकी माँ हूँ
मेरी उससे पहचान है

माँ - बेटी का रिश्ता
सबसे है अनोखा
सबसे है अनमोल
सबसे समझदार
माँ की ममता
बेटी का प्यार
इसमें नहीं किसी और का काम
नहीं किसी का मोहताज
यह संग है बेमिसाल

बिन कहे बिन सुने
मन की भाषा पढ ले
एक दूसरे को जान समझ ले
कितना भी हो गिला शिकवा
एक पल में हो जाय काफूर
माँ बेटी पर जान छिड़कती
उसको पाकर धन्य समझती
वह सपने जो उसने देखें
बेटी के माध्यम से पूरा करती
दोनों एक-दूसरे की बात दिल पर नहीं लेती
मन मिलता है
दिल खुलता है
वह तो बस उसके समक्ष
उसका भरोसा उस पर
जितना नहीं और किस पर
माॅ को तो जितना समझती है बेटी
उतना दूसरा कोई नहीं

बेटा अपना होकर भी पराया
बेटी पराया होकर भी अपनी
यही सच है जीवन का
संबंधों को जोड़ने वाली बेटी ही होती है
वह कैसी भी हो 
पर अपनी ही होती है
माता-पिता के जिगर का टुकड़ा होती है
वह पराई नहीं ताउम्र हमारी होती है
बेटी तो बेटी ही होती है
हमेशा दिल के करीब होती है
हर रिश्ते की जान होती है
सही है 
बेटी तो बहुत प्यारी होती है

Saturday, 26 September 2026

फेसबुक

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अपना फेसबुक बहुत बढिया है
अजनबियों का घेरा है
तब भी फेसबुक लगता प्यारा है
अंजाने लोग जब दाद देते हैं 
किसी पंक्ति पर लाइक और कंमेट करते हैं 
दुख में सहानुभूति और सुख में खुशी जताते हैं 
पास - पास नहीं हैं 
फिर भी सबको पास ले आते हैं 
मन की भावनाओं को व्यक्त करते हैं 
कुछ कविता - कहानियां गढते हैं 
कुछ तो लोग देखेंगे 
कुछ तो पढेंगे 
यह जान मन को सुकून मिलता है
अपने जो छूट गए
अपने जो भूल गए 
फिर उनकी याद दिलाता है
कही - अनकही न जाने कितनी बातें कह जाता है
सबको एक मंच पर ला खड़ा कर देता है
सुबह-सुबह गुलाब के फूलों और भगवान की फोटों के साथ
रात को चंद्रमा की चांदनी के साथ
गुड मार्निग और गुड नाइट बहुत भाता है
किसी अपने की उपलब्धि का बयान करता है
किसी का जन्मदिन तो किसी की मैरिज एनवर्सरी मनाता है
पहाड़ की वादियों के दर्शन के साथ-साथ सारी दुनिया की सैर कराता है
सुस्वादु व्यंजन और नए-नए फैशन - कपडे की झांकी दिखाता है
यह अमीर - गरीब का अंतर मिटाता है
सबको मौका देता है 
जो चाहे प्रस्तुत करों 
जैसा करों 
कोई प्रतिबंध नहीं 
ज्ञान की बातें बताता है
समाचार भी सुनाता है
क्या  - क्या गिनाए 
न जाने कितनी खुबिया है इसमें 
बस बटोरना है
फेसबुक से जुड़े रहना है
कह सकते हैं 
अरे फेसबुक अपना है तभी तो बहुत बढिया है ।

Asha Singh at 08:48
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Wednesday, 23 September 2026

बांट न लैहें कोय

कहना तो बहुत कुछ था
मन की बाते थी
मन में ही मुसमुसाकर रह गई
हमेशा फुसफुसाती रहती थी
बाहर आने को बेताब
पर कोई मिल न सका
इन्हें कोई सुन न सका
समय की कमी थी कुछ के पास
कुछ पर विश्वास न था
भय था अंदर
अगर बाहर आई
तो सार्वजनिक न बन जाए
गुप्त रहना चाहती थी
वह कहाँ संभव था
बहुत लोग बेताब थे
सुनने को उत्सुक थे
एक टाॅपिक मिल जाता गाॅसिप का
जो उनके लिए सबसे बडा टॉनिक
उसके बिना भोजन पचता नहीं इनका
इनकी मानसिक खुराक है यह
कुरेदते रहते हैं
कुछ तो मिले जो मन को भाए
ऐसे में कहना सुनना सब बेमानी
मन की बात मन में रखना ही सबसे बडी समझदारी
सुन इठलैहे बाँट न लैहे कोय
मन की मन में रखे
सावधान रहें
यहाँ शिकारी ताक में है
खुराक की फिराक में है
मनोरंजन का जरिया ढूंढने में लगे
तब सतर्कता भी जरूरी