Saturday, 4 July 2026

मन में रह गई

जो कहना था वह तो रह गया 
न जाने कितनी बातें थी 
वह मन में रह गई 
जब - जब कहना चाहा 
जुबां ने साथ नहीं दिया 
कहना चाहा कुछ कहा कुछ
एक कसक मन में रह गई 

एक माता - पिता का दर्द

तुम तो चले गए 
हमको रोता - बिलखता छोड़कर 
न जाने क्या-कुछ सपने देखे थे 
सब कुछ खत्म हो गया 
हमारे लिए तो वक्त ही ठहर गया 
हर वक्त हर पल तुम पर था वारा 
तुमको अपनी जान से ज्यादा चाहा था 
तुम जान थे हमारी 
दिल की धड़कन थे 
दिल खुश रहता था तुमको देख - देख कर
हमारी ऑखों  के तारें 
तुम हमसे दूर तारों की दुनिया में चले गए 
हमसे तो जीते - जी हमारी जिंदगी छीन ली 
अब किसको दे उलाहना 
उस ऊपर वाले को 
जिसने हमारी गोद में तुमको डाला था 
हमें माता - पिता बनाया था 
तुम्हारे जन्म पर खूब जश्न मनाया था 
छठी - बरही में अपनों को खिलाया था 
सोहर गीत गवाया था 
घर गूंज उठा था 
तुम्हारी किलकारी से 
वंश के दीपक थे 
नहीं सोचा था 
यह दीपक इस तरह बूझ जाएगा 
हमको इस हालत में छोड़ जाएंगा 
अपने साथ हमारी सब खुशियां ले जाएंगा 
अब क्या करेंगे जीकर 
रोना ही है जीवन भर 
वक्त ने वह मार मारा है 
अब तो संभलना मुश्किल है 
क्या करेंगे क्या न करेंगे 
कैसे रहेंगे कैसे जीएंगे कैसे सहेजेगे
 कहना मुश्किल 
अब तो आँख के आंसू भी कभी न सूखेंगे 
होठों पर हंसी भी न आएगी 
सारी इच्छाएं मर गई 
तुम नहीं मरे 
हम जीते जी मर गए 
अब इससे बड़ा दुख क्या होगा 
अपनी ही संतान को कांधा  देना 
जिस पर कभी हमको जाना था वह हमसे पहले चला गया 
किसको दोष दें 
ईश्वर को 
भाग्य को 
समझ नहीं आ रहा 
अब तो शरीर बचा है 
सांस चल रही है 
अंतर्मन मर चुका 
चूक कहाँ हुई 
सोच रहे हैं 
कैसे हुई 
कारण को ढूंढ रहे हैं 
इससे क्या हासिल 
जो होना था वह तो हो गया 
हमारा जीवन आधार हमको निराधार कर गया 
हम कुछ न कर पाए 
बस पत्थर बन 
हम विवश देखते रह गए 

Friday, 3 July 2026

जो दिखता है

कोई जब कहता है 
सब ठीक है तो कुछ ठीक नहीं होता 
कोई जब कहता है 
मैं बहुत मजबूत हूँ तो वह मजबूर होता है 
कोई जब कहता है 
स्वास्थ्य में कोई दिक्कत नहीं है पर वह सही नहीं होता 
कोई जब बहुत मुस्कराता है तो वह अंदर से रुदन कर रहा होता है 
कोई जब बहुत आत्मविश्वास दिखाता है तो वह डरा हुआ होता है 
कोई शक्तिमान साबित करता है अपने को तो वह कमजोर होता है 
जो गरीब होता है वह शान दिखाता है 
क्योकि सत्य यह है 
कि जो दिखाई देता है वह होता नहीं 
सबने एक मुखौटा पहन रखा है दुनिया के सामने 
नहीं तो दुनिया जीने नहीं देगी 
अमीर को कपड़े की परवाह नहीं गरीब को होती है 
उसका मूल्यांकन उससे होता है 
फैशन में पैबंद और अभाव में पैबंद 
यह अलग- अलग है 
यहाँ तुम्हारी कमजोरी का ढिंढोरा पीटने और विज्ञापन को लोग तैयार बैठे है 
मसाला चाहिए नमक - मिर्च वे लगा लेंगे 
अपने बोलने का सलीका न हो 
तुम.में मीन-मेख निकाल लेंगे 
हम बाहुबली 
हम ही श्रेष्ठ 
हमसा कोई नहीं 

Thursday, 2 July 2026

राम के घर चोरी

मेरी झोपड़ी के भाग खुलेंगे 
राजा राम घर आएगे 
झोपड़ी के भाग्य तो खुल गए 
महल बन गए 
आलिशान घर और दुकान हो गई 
जमीन के मालिक बन बैठे 
पूरे खानदान और रिश्तेदारों का भी कल्याण हो गया 
तब तो भरत थे जो अन्याय होने नहीं दिया 
कैकयी और मंथरा की साजिश को सफल होने नहीं दिया 
आज तो अंदर ही लुटेरे बैठे हैं 
हमारे राम को लूट रहे हैं 
गजनी और बाबर तो आततायी थे 
ये तो रामभक्त हैं 
देखभाल का जिम्मा इन पर हैं 
और ये ही लुटेरे - चंदाचोर 
शर्म नहीं आई 
लोगों ने अपनी जमीन बेच कर दान दिया है 
तुम अपनी जमीन बना रहे हो 
इस बार रावण को नहीं तुमको जलाना चाहिए 
विभीषण बने हो 
अपनी ही रामनगरी से विश्वासघात कर रहे हो 
कहाँ जाओगे 
हिन्दू हो ना 
कर्म का फल मिलता है 
तब डर नहीं लगा अपने भगवान से 
क्या मुंह लेकर नतमस्तक होंगे उनके समक्ष 
कौन से दंड के पात्र??
तुम्हारा निर्णय तो रामजी ही करेंगे 
होइए वही जो राम रचि राखा 
वो बख्शेगे नहीं 
दंड तो उन्होंने सबको दिया 
चाहे वह कोई भी हो 
महाबलशाली रावण हो या बालि  
अनीति और अन्याय के खिलाफ ही रहें 
मर्यादापुरुषोत्तम रहे हैं हमारे राम 
तुम लोग अपनी मर्यादा भूल गए 
राम के नाम पर चोरी 
अधम पाप है यह