Wednesday, 7 October 2026

मर्द जात का क्या भरोसा ???

मर्द जात का क्या भरोसा ??
यह आज का नारा नव युवतियों का 
गूंज रहा है सड़क - मोहल्लों पर
अब हर मर्द शक की नजर से देखा जा रहा है 
देखने का नजरिया भी बदला है 
उसमें आपके घर के पुरुष भी हैं 
आपका पति , आपका पिता , आपका पुत्र  , आपका ब्रदर 
सबको एक ही कैटिगरी में लाकर खड़ा कर देना 
हर युग में राम और रावण दोनो हुए हैं 
जटायु भी हुए हैं 
दुर्योधन और कृष्ण भी हुए हैं 
इस युग में भी हैं 
हर नारी सही है 
हर पुरुष गलत है 
यह सोच हावी होना सही नहीं है 
वह पिता जिसके घर में आप सुरक्षित हैं 
आपकी हर जिम्मेदारी वह उठाता है 
वह पति जो आपको बराबर का दर्जा देता है 
आपके हर नाज - नखरे को उठाता है 
आपके लिए सब कुछ करने को तैयार रहता है 
वह भाई जो सुख - दुख में आपके साथ खड़े रहते हैं 
आपके एक आवाज पर हाजिर 
वह आपका पुत्र 
जो आपका गुरुर है 
आपको उस पर सबसे ज्यादा भरोसा 
वह आपका दोस्त  , सहकर्मीं,  पड़ोसी 
वक्त- बेवक्त तैयार 
हां मानसिक रूप से कुछ बीमार भी हैं संसार में 
आसपास  - पहचान में 
तब क्या करें 
विश्वास किसी का न करें 
प्रेम और सम्मान के भागीदार सब नहीं हो सकते 
आखिर में 
रहना तो इसी दुनिया में हैं 
सजग रहें 
सर्तक रहें 
धोखा देने वाला ही नहीं धोखा खाने वाला भी जिम्मेदार हैं 
पुरुष प्रधान समाज है हमारा 
हैं कुछ ऐसे नराधम 
जो औरत को केवल भोग्या समझते हैं 
पर पूरी पुरुष जाति नहीं 
यह संस्कार पर निर्भर है 
दोनों ही इस दुनिया के अंग है 
एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं 

हमें , तुमसे प्यार

सुख मिला 
जब तक हम अनुभव करते 
जब तक किसी से कहते 
वह खिसकता गया 
दुख मिला 
हम सहते रहे 
किसी से कहने की हिम्मत न जुटा पाए 
किसी से कहा 
वह दूर तक फैला 
मन मसोस कर रह गए 
मलाल रह गया 
इस सुख - दुख के चक्कर में उलझे रह गए 
कब पता नहीं क्या हाथ से फिसल जाए 
यही सोच डरते रहे 
डर ऐसा बैठा 
अब तो हर बात से डर
हर शख्स पर शंका 
किसी पर विश्वास नहीं 
जिंदगी की असलियत जान गए हैं 
कब किस मोड़ पर ला खड़ा करें 
कह नहीं सकते 
कब आकाश की ऊंचाई तक पहुंचा दें 
कब जमीन पर लाकर पटक दें 
आज सब कुछ अच्छा दिखता है 
कब उसमें भूचाल आ जाए 
बड़ी कठिन है यह जिंदगी 
यह हमारे हिसाब से नहीं चलती 
हमें इसके हिसाब से चलना पड़ता है 

ना जाने फिर भी कुछ बात है तुममें ये जिंदगी 
तुमसे बहुत प्यार है 
तुम अपना खेल खेलती रहो 
हम भी पीछे नहीं हटने वाले 

Tuesday, 6 October 2026

यह गर्व है

मैंने तुम पर कोई एहसान नहीं किया 
तुम्हारा उपकार है हम पर 
तुमने मुझे मां बनाया 
संसार का सबसे ऊंचा स्थान दिया 
मुझे उस बुलंदी पर ला खड़ा कर दिया 
जहाँ से दूसरा सब बेमानी है 
जीना क्या होता है 
वह तुमने सिखाया 
ईश्वर की यह अभूतपूर्व संपत्ति बस मेरी है 
मेरा अधिकार है 
यह गर्व है 

Sunday, 4 October 2026

बेटी , बेटी ही होती है

बेटी , बेटी होती है
वह दलित या उच्च जाति की हो
क्या फर्क पडता है
फर्क पडता है
सोच से
संस्कार से
नजरिया से
बेटी किसी की भी हो
उसके मान और सम्मान की जिम्मेदारी सबकी बनती है
हमारी बेटी हो
तुम्हारी बेटी हो
पडोसी की बेटी हो
अपनी सोच का दायरा बढाया जाय
उसे इंसान समझा जाए
बराबरी का दर्जा दिया जाए
अपराधी कोई भी हो
हेय नजर से नारी ही देखी जाती है
वह किसी की माँ
किसी की बहन 
किसी की पत्नी तो है ही
एक नागरिक भी है
सभ्य सोसायटी में अपनी तरह रह सकें
जी सकें
उन्नति कर सकें
अपनों के और अपने सपने साकार कर सकें
वह तब होगा
जब बेटी सुरक्षित रहेंगी
उसे खिलौना न समझा जाए
उस पर राजनीति न की जाए
न्याय मिलें
सब प्रयत्नशील होंगे तभी यह संभव है
नारी पर अत्याचार
उसका परिणाम रामायण और महाभारत
राजघरानों की जब यह हालत
तब सामान्य नारी की क्या बिसात
यह परंपरा चली आ रही है
उसे ध्वस्त करना होगा
बेटी , बेटी होती है
वह दलित हो
वह ब्राह्मण हो
वह हिन्दू हो 
वह मुस्लिम हो
वह गरीब हो
वह अमीर हो
है तो वह व्यक्ति ही
सम्मान से जीने का हक उसको भी है