Thursday, 6 August 2026

यही तो है संसार

सांझ होने की तरफ
सूरज धीरे - धीरे ढलान पर
बहुत समय लग रहा है 
सब इंतजार में हैं 
कब इनका प्रस्थान हो 
आभा कम हो रही है 
जाते - जाते मद्धिम होते जाते हैं 
प्रकाश धीमी गति लेने लगता है 
अंधकार का साम्राज्य घिरने वाला है 
प्रतीक्षारत में सब
कभी प्रकाश का स्वागत 
कभी अंधकार का इंतजार 
इनके बीच में जग डोलता 
कभी उजाला कभी अंधेरा 
जीवन का यही है खेला 
यही तो है संसार 

अपनी - अपनी समझ

क्या करें 
हम सबको समझ नहीं आते हैं 
क्यों ??
समझ नहीं पाए 
ऐसा नहीं कि आप समझ न पाए 
नासमझ आप भी नहीं 
हम भी नहीं 
समझदार हम भी समझदार आप भी
अब समझना ना चाहे तो बात और है 
यह सब समझ समझ का फेर है 
जो हमको समझ गए 
हम उनके होकर रह गए 
जो नहीं समझे उनसे किनारा कर लिया 
हमें अपना स्वयं प्यारा है 
किसी और से कुछ नहीं अपेक्षा
बस हमको समझे 
दिखावट हमें पसंद नहीं 
जो है जैसे हैं 
उसी में अपना लो 
अन्यथा रास्ता नाप लो 
तुम अपने रास्ते 
हम अपने रास्ते 

Tuesday, 4 August 2026

क्या बात हुई??

मैं जा रही थी 
तुमने मुझे जाने के लिए नहीं कहा था 
मैं स्वयं गई 
तुमने मुझे रूकने के लिए भी तो नहीं कहा 
पूछा भी तो नहीं 
क्यों जाना है 
क्या हुआ 
कुछ नहीं बात
कोई नहीं प्रतिक्रिया 
घर तुम्हारा था 
गलतफहमी मेरी थी 
मैंने उसे अपना माना था 
किसी और के चीज को अपना मानना 
यह तो सरासर बेवकूफी है 
हो सकता है 
तुम चाहते हो कि मैं चली जाऊ 
संकोच वश कभी बोल नहीं पाए 
इधर-उधर की बात होती रही 
मुद्दों पर बात हुई नहीं 
हंसी - मजाक में टाल दिया गया 
हर बार मजाक नहीं भाता 
जिंदगी भी मजाक करती है तब 
तब सब कुछ खत्म कर देती है 
हंसना नहीं आता 
वह ऐसा झटका देती है कि चारो खाने चित्त 
कुछ नहीं सूझता है 
सब प्लान धरा का धरा रह जाता है 
तब न तुम कुछ कह पाते हो 
न मैं कुछ कह सकती 
बस सोचते रह गए 
क्या बात हुई  ???

जीवन एक जंग है

यह पूरा का पूरा समंदर हमारा नहीं है 
यह हम भी जानते हैं तुम भी जानते हो 
रहना भी इसी में है 
सीप - मोती - हीरे - जवाहरात भी इसी में खोजना है 
हर बार हाथ में बहुमूल्य ही लगे ऐसा भी नहीं है 
कंकर - पत्थर भी रेत के कण भी हाथ लग सकते हैं 
उतरना भी इसी में है 
डूबना - उतरना भी इसी में 
किनारा भी ढूंढना और पहुंचना भी 
कहने जितना आसान नहीं 
हजारों तरह के जीव इसमें 
न जाने कब कोई हमला कर दें 
जानलेवा हो जाए 
राह में रूकावट बन जाए 
भंवर भी इसी में 
कब अपने में लपेट ले 
सब बाधा को पार कर किनारे आना है 
अच्छा तैराक बनना है 
तभी तो इस विशाल समुंदर में जीवन नैया किनारे लगेगी 
कमजोर हो डूबना नहीं है 
डूबाने को लोग तैयार बैठे हैं 
पहचानना है 
कहाँ गहरा है 
कहाँ उतरना है 
कहाँ आगे बढ़ना है 
उतरना जरूर है घबराना नहीं है 
बिना उतरे कुछ हासिल नहीं होगा 
हर बार सफलता मिले ऐसा भी संभव नहीं 
हार - जीत तो खेल है 
जीवन एक जंग है