Tuesday, 5 May 2026

जीवन का सार

ऐसा क्यों लगता है 
जीवन एक चोला है 
जिसे हमने वर्षों से धारण किया है 
कभी नया रहा होगा यह
दिन ब दिन पुराना होता जा रहा है 
कभी थोड़ा सा छेद हुआ 
कभी हल्की सी खरोंच आई 
हम उसे रफू करते रहें 
अपने अनुसार बनाते रहें 
पर कब तक ऐसा चलता रहेगा 
अब वह पुराना भी हो रहा है 
घिस भी रहा है 
रंग भी फीके हो रहे हैं 
कहीं - कहीं फट भी रहा है 
जो रफू करने की स्थिति में नहीं 
इस चोले को देखने की चाहत अब नहीं बची 
अब लोगों को यह नहीं लुभाता 
इसका बेरंग आकर्षित नहीं करता 
अब यह शीशे के सामने इतराता नहीं 
अब यह ढंग से संवरता भी नहीं 
अब वह मन भी न रहा 
ऐसा लगता है इससे छुटकारा मिल जाए 
वह हो नहीं सकता 
मोह इतना है कि जकड़ कर रखे हुए हैं 
बहुत प्यार है इससे 
पुराना भले है तो अपना ही 
इसी पर इतराए 
ठहाके लगाए 
हंसे और खिलखिलाएं 
गर्व और घमंड भी किया 
सबसे अच्छा सबसे श्रेष्ठ 
अपने आगे कोई नहीं 
बड़े - बड़ों की छुट्टी कर दी 
परचम लहराया 
हर मुश्किल को आसान किया 
अपनी राह खुद बनाई 
इसकी काबिलियत पहचानी 
वह आज उम्र के कगार पर खड़ा है 
परिस्थितियां बदल गई 
साथ छूटे वह साथ है 
निभा रहा है 
तब तो संभालना इसे भी है 
बहुत मनमानी हो चुकी 
बहुत उपेक्षा कर ली 
अब तो सब छोड़कर शिद्दत से इसका साथ निभाओ 
अंतिम सत्य यही है 
इसका साथ 
जीवन का सार 

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