Sunday, 31 May 2026

बदलाव

कुछ नहीं बदला है 
समाज वहीं का वहीं खड़ा है 
उसकी सोच भी वैसी ही है 
बस दिखावा रहता है 
सोच वैसी की वैसी है 
औरत के प्रति नजरिया 
बदला नहीं है 
विवाह की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है 
सब कुछ छिन्न भिन्न 
क्योंकि जिस पर दारोमदार था 
वह ही बदल रही है 
अपना महत्व समझ रही है 
और जहाँ अपने लिए सोचा 
वहाँ त्याग की बातें बेमानी 
बदलाव पर खड़ा समाज 
क्या होगा 
राम जाने 

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