Sunday, 21 June 2026

मेरा बाप सबसे खास

मेरा बाप सबसे खास
उसकी हर बात मुझे याद

अपने आप में रहना
ज्यादा किसी से माथाफोडी नहीं करना

न लेना न देना
मगन रहना

दोस्ती अपने बराबरी वालों से करो

जहाँ इज्जत न हो वहाँ मत जाओ

किताबों में लगे रहो
शिक्षा से बडा कोई साथी नहीं
हार नहीं मानो 
पढते रहो , फेल तो फेल
पर पढाई मत छोड़ो

अपने आप को कम मत समझो

हम जो कर सकते हैं वहीं करें
किसी से अपनी तुलना न करें

पैसा न हो तो
कोई नहीं पूछता

अपनी संतान से प्यारा और बहूमूल्य कुछ भी नहीं

ज्यादा अपेक्षा मत करो
दुख के सिवा कुछ नहीं हासिल होगा

धोखा खा लो पर
किसी को धोखा मत दो

भले सौ लोग एक तरफ हो तुम अकेले
तब भी सच झूठ नहीं हो जाता

ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलो
बेईमानी कभी फलती नहीं है

सादा जीवन उच्च विचार

किसी के कपड़ों और सादगी से उसका मूल्यांकन मत करो

शेक्सपियर वाला वाक्य उनकी पसंद
औरत अच्छी तो स्वर्ग यही और नहीं तो नर्क यही

समाज किसी को शांति से जीने नहीं देता
क्योंकि वे समाज से एक कदम आगे रहे हमेशा
जब लोग धोती पहने तब वे पैंट पहने
जब लडकियाॅ मैट्रिक होने में ही शान समझती थी
तब बेटी को पोस्टग्रेजुएट बनाया

जब तुम आगे बढ़ते हो तो लोग
तुम्हारा पैर खींचने के लिए तैयार

व्याकरण के बिना भाषा नहीं
अंग्रेजी भाषा के कायल

लडका लडकी सब एक समान
सबसे दोस्त जैसा व्यवहार
जान से ज्यादा प्यार
बस वही उनकी दुनिया और समाज
बच्चों की बात को हंसकर टाल देना 
ऐसा मेरा बाप
बच्चों में बच्चा बन जाना
हिटलर शाही नहीं पसंद
गीता का भरपूर ज्ञान
ईश्वर में आस्था पर दिखावे से दूर

बडे बडो को देखा
बहुत इतराए
बहुत घमंड किए
और धराशायी भी हुए
नीचा दिखाने वाले स्वयं लज्जित
पर बाप जैसा था वैसा ही रहा
अंत में उन्हीं लोगों को कहते सुना
भाग्यशाली हैं कामता सिंह
कारण कि उन्होंने शिक्षा को तवज्जों दी
ज्ञान को प्रधानता दी

उनका वाक्य
जीवन में कुछ भी बेकार नहीं जाता
सागर की लहरें भी निशान छोड़ जाती है
ज्ञान की कोई पराकाष्ठा नहीं
सौ अमीर के बीच एक शिक्षित गरीब 
शान से खडा रह सकता है
सबसे बडी वही उसकी ताकत

आज का दिन क्या
हर दिन ही तुम्हारी याद

Happy  father's  day  
             मार्डन विचारों वाले मेरे बाबूजी

Saturday, 20 June 2026

मिजाज कब बदले ???

मौसम  का  मिजाज 
कब बदले 
यह कोई  नहीं  जानता
कभी-कभी  मौसम वैज्ञानिकों  की भविष्यवाणी गलत भी कभी सही भी 
आज का कहा तो आज नहीं  एक - दो दिन बाद बरखा होगी या और कुछ 
इंसान  का मिजाज कब और  क्यों ??
कहाँ  और कैसे ??
कब कहाँ पलटेगा 
यह कोई  नहीं जानता 
मुखौटा  पर मुखौटा  ओढे हुए
न जाने किस - किसकी खाल पहने हुए 
जानवर  के भेष में  इंसान 
देवता के भेष में  शैतान 
सांप जहरीला  है यह सर्वविदित  है 
इंसान  का पता नहीं  चलता
विश्वास  करना मुश्किल 
सबसे ज्यादा  धोखा अपने कहे जाने वालों  से
अपने परम मित्र  से
अपने ही परिवार जनों  से भी
तब क्या  करें??
इतिहास भी गवाह  है 
न भाई,भाई का
न बाप , बेटे का 
न बेटा ,बाप का
न पति ,पत्नी  की
यहाँ तक कि जन्म देनेवाली जननी भी ।

Thursday, 18 June 2026

साबित करना पड़ता है

नेपटोजिम कह लीजिए
भाई भतीजावाद कह लीजिए
भाषावाद कह लीजिए
जातिवाद कह लीजिए
प्रांतवाद कह लीजिए
रंगवाद कह लीजिए
यह तो हर जगह विद्यमान है
कोई इससे अछूता नहीं
न फिल्मी जगत
न राजनीति का क्षेत्र
न और कोई जगह
हाँ कहीं कम ज्यादा
पर है तो अवश्य
आज से नहीं 
बहुत पहले से
कोई नेता जब मुख्यमंत्री बनता है
तब अपनी जाति के लोगों को नौकरी की राह आसान कर देता है
कोई नेता जब प्रधानमंत्री बनता है तब अपने गृहक्षेत्र का विकास
कहीं इंटरव्यू में उन्हीं को प्रधानता जो उसी प्रांत के है
उनके भाषाभाषी है
पर लोगों ने अपना स्थान बनाया है अपनी काबिलियत से
ऊपर भी पहुंचे है
जो आपको पसंद नहीं करते उनके भी दिलों आ जगह बनाई है
यहाँ तो सबको आसानी से सब कुछ हासिल नहीं होता
वैसे तो कुछ ही भाग्यवान होते हैं
हमको तो खुद हमें साबित करना है 
हम क्या है
जब रेल में लोकल ट्रेन में धक्का मुक्की कर घुसते हैं तब कोई नहीं चाहता
आप अंदर आए
पर आप धकेल धुकुल कर अंदर आते हैं
लोगों को गुस्सा भी आता है जैसे ट्रेन उनके बाप की हो
हिकारत से देखते हैं
मजाक उड़ाते हैं
बैठने को जगह नहीं देते हैं
पर कुछ ही दिनों बाद ये आपके दोस्त बन जाते हैं
आप कहीं भी जाइए
आपका बांहे फैलाकर कोई स्वागत नहीं करेंगा
आपको बताना पडेगा
आपको समझाना पडेगा
भाई मैं ऐसा हूँ
मुझमें यह काबिलियत है
कभी-कभी सालों लग जाते हैं
कुछ समझ पाते कुछ नहीं
क्या फर्क पडता है
आप नीरमा थोड़े ही हैं जो सबकी पसंद हो
यह तो होता है
हमारे साथ भी हुआ है
आपके साथ भी हुआ होगा
कितने तो मूर्ख ही सिद्ध कर देते हैं
पर आप तो हो नहीं
कोई सीढी लगाने वाला नहीं 
खेचने को तैयार रहते हैं
कोई बात नहीं
आप अपना काम कीजिए
उनको उनका काम मुबारक

Monday, 15 June 2026

थोड़ा ठहर जाओ

थोड़ा रूक जाओ 
थोड़ा ठहर जाओ
थोड़ा इंतजार भी कर लो
जल्दबाजी क्या है
जाना तो है सबको ही
थोड़ा सोच लो
क्या बस यही एक रास्ता
इतनी मेहनत 
इतनी कामयाबी
शोहरत - दौलत भी
दिमाग बुद्धि भी
शिक्षा भी
कितनी मेहनत लगी होगी
यह सब हासिल करने में
चौंतीस साल लग गए
नष्ट करने में चौंतीस सेकंड भी नहीं
इतना स्वार्थी कैसे हो गए
बस अपनी सोचा
अपना परिवार
माता-पिता
भाई - बहन
शिक्षक - पाठशाला
दोस्त - मित्र
पडोसी - समाज
सबका हक
यह जिंदगी केवल तुम्हारी नहीं
सबकी मेहनत 
सबका प्रयास
सबकी आशा
इसे खत्म करने का हक केवल तुमको नहीं
जब मन में आए 
यह ख्याल
तब थोड़ा थमो
पीछे मुड़कर देखों
मैं नहीं तो 
उनका क्या
जिनकी जान हूँ मैं
तब उनकी जान लेने का हक तुम्हें अकेले नहीं
जीते जी उनको जीवित लाश बना देना
इससे बडा पाप कोई नहीं
न अपने लिए जीओ
अपनों के लिए तो जीओ
बहुमूल्य जीवन को इस तरह से खत्म तो न करों

Sunday, 14 June 2026

पहले वाली बात नहीं रही

समय बदल गया है
उम्र ढल गई है
अब वह पहले वाली बात नहीं रहीं
तब बात बात पर झगड़ा करते थे
रूठते थे और मनाते थे
सैर पर निकलते थे
मीलों चलते थे
घंटों बतियाते थे
झटपट झटपट काम कर डालते थे
किसी का मुंह नहीं ताका करते थे
ढेरों कहानियाँ और उपन्यास पढते थे
कभी-कभी तो पूरा करके ही दम लेते थे
क्या रात और क्या दिन
घंटों सोते थे
जी भर कर हंसते थे
मन भर कर खाते थे
चाट पकौड़ी और भेल
किसी की परवाह न करते थे
बस अपनी धुन में मस्त रहते थे
ज्यादा सोचते नहीं थे
जो समझ आता वहीं करते थे
आज वह पहले वाली बात नहीं रहीं
अब तो बंदिशो में जकड़ी जिंदगी
समय से उठना
समय से खाना
समय से सोना
समय से बाहर निकलना
ज्यादा पढना नहीं
दिमाग पर जोर डालना नहीं
खाने में परहेज करना
हम तो वही है जो थे
अब वह पहले वाली बात नहीं रहीं
अब केशों में सफेदी
ऑखों पर चश्मा
कदमो का लडखडाना
बोलने में अटकना
लगता है अब हिम्मत नहीं बची
अब हर बात में सोचना और समझना है
हर कदम को सावधानी से उठाना है
समय बदल गया है
उम्र ढल गई है
अब वह पहले वाली बात नहीं रहीं

Saturday, 13 June 2026

वैसा गांव तो नहीं है

हम तो आए थे अपने घर
महसूस हुआ 
वह घर नहीं
जो हम छोड़ गए थे
वह गांव नहीं 
जो हम छोड़ आए थे
अब तो यहाँ भी अपनापा
भाईचारा तो है गायब
घर में ही सब अलग अलग
तब एक कमाता था
खाते सब समान थे
सबका हक उतना ही
आज वह बात नहीं
अब यहाँ भी पैसा बोलता है
आमदनी के हिसाब से
रिश्तों का मूल्य
अब नहीं कोई जाता किसी के द्वार
अब तो द्वार भी सूनसान
सब अपने अपने घरों में
नीम के नीचे नहीं
अब पंखे की हवा भाती है
खाना सब एक साथ नहीं
अपने अपने कमरों में खाते हैं
नहीं बतियाता कोई
सब मोबाइल में मशगूल
नई बयार है
नया जमाना है
नए-नए शौक है
अब बारात में वह बात नहीं
आना और जाना 
बस रस्म निभाना
किसी के पास समय नहीं
अब घर के बुजुर्गों का वह रूतबा नहीं
वह तो किसी एक कोने में चारपाई डाल पडे हुए
कहने को तो सब संयुक्त है
पर सब अलग अलग
अब दातून नहीं ब्रश है
अब पोखर नहीं हैंडपम्प है
अब मिट्टी के बर्तन 
पीतल तांबा कांसा नहीं
चमचमाता स्टील है
अब राख से नहीं रगडना
साबुन से चमकाना है
सबको शहर प्यारा है
गाँव में रहना नहीं गंवारा है
अब तो कुछ बचे खुचे हैं
खेती क्यों करें
अब तो मनरेगा है
सस्ता अनाज
गेहूं चावल 
ऊपर से बैंक में आता सरकारी रूपया
बिजली और गैस मुफ्त
कर्ज लेना मजबूरी नहीं शौक
आज नहीं तो कल माफ
साइकिल और पैदल तो दूर
अब सबके पास मोटरसाइकिल है
क्या जरूरत काम की
रहना है आराम से
वह गाँव जो हम  छोड़ आए थे
वह ऐसा तो नहीं था

क्या सच में जमाना बदल गया

कहते हैं 
जमाना बदल गया
सुनते हैं
जमाना बदल गया
जमाना नहीं
इंसान बदल गया
हमारा जमीर बदल गया
इमान बदल गया
नैतिकता रही बची खुची
उसके भी पैमाने बदल गए
सत्य शाश्वत है
उसकी भी परिभाषा बदल गई
दोस्ती , प्रेम अब वैसे नहीं रहे
रिश्ते भी मतलबी हो गए
अब कोई यू ही बिना कारण मिलता नहीं
मिलने में भी नफा नुकसान देखा जाता है
अब त्योहार पहले जैसे नहीं रहे
दिखावट का आवरण ओढ रखा है
अब हर चीज दौलत से मापी जाती है
प्रतिष्ठा और शोहरत का बोलबाला है
अब वह प्यार नहीं
अब वह अपनापन नहीं
अब वह दया और करुणा नहीं
अब वह भी मशीन है
शरीर इंसान का
मन मशीन का
अब वह पहले जैसा धडकता नहीं है
बडे सोच समझ कर फैसला लेता है
हर चीज का हिसाब रखता है
बहुत बारीकी से गुणा भाग करता है
ध्यान से जोड़ता और घटाता है
कहाँ मुनाफा
कहाँ घाटा
इस चक्कर में अपनों को भूल जाता है
कहते हैं
जमाना बदल गया 
जमाना नहीं जनाब
इंसान बदल गया है

Friday, 12 June 2026

ऐसा तो न था

पहले भी वही लोग
वही जगह 
पर ऐसा तो न था
कोई किसी की ताई
कोई किसी की भौजी
कोई किसी की बेन
कोई किसी की खाला
कोई किसी की आंटी
सब अपने से लगते थे
पूरनपोली
कचौरी
ढोकला
सिवैया
केक
सबके स्वाद भी अपने घर के लगते थे
अब वह बात नहीं रही
अब तो व्यंग के सिवा और कुछ नहीं
नजरिया बदल गया 
अब प्रेम नहीं वैमनस्य ने घर कर लिया है
अब पडोसी नहीं
प्रांतीय और धार्मिक 
अब वह होली और दीवाली
गणेशोत्सव , क्रिसमस और ईद 
की रौनक पहले जैसे नहीं
त्योहार तो वही
पर हम बदल गए हैं
सोच बदल गई है
भाईचारे की भावना गायब हो गई है
चाॅल संस्कृति की जगह फ्लैट संस्कृति ने ले ली है
जहाँ सब अपने अपने घरों में बंद
प्राइवेसी हो गई है
सामुदायिक भावना तो कब की गायब हो गई है
अब लोग        हम   से    मैं 
हो गए हैं
पहले भी वही लोग
वही जगह
पर ऐसा तो न था

Thursday, 11 June 2026

यदि ऐसा होता तो

यदि ऐसा होता तो
यदि वैसा होता तो
होता तब न
हुआ नहीं
हम इसी यदि के चक्कर लगाते रहते हैं
हासिल कुछ नहीं
सिवाय पछताने के
दुखी और निराशा के गर्त में डूबने के
देखा जाय तो
नियति जब खेलती है
तब सब कुछ पलट जाता है
जीती हुई बाजी भी हम हार जाते हैं
एक ही पल में सब कुछ उलट पुलट हो जाता है
सोचा हुआ हो जाता
तब क्या कहना
यदि , लेकिन , परन्तु , फिर भी
यह केवल शब्द नहीं है
बहुत कुछ इनमें ही छिपा है
जीवन का राज
मैंने सोचा था 
बीस साल में सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा
पचास पचपन तक सब जिम्मेदारी से मुक्त
पर वह हो न सका
इस यदि ने ऐसा टांग अडाया
जिंदगी औंधे मुंह आ गिरी
अब न समझ आ रहा है
न सूझ रहा है
यह क्या से क्या हो गया
कहाँ से चले थे
कहाँ पहुँच गए
यदि वैसा हुआ होता तो
परन्तु वैसा हुआ नहीं 
लेकिन ऐसे हो गया 
फिर भी जीना तो है
मरना तो किसी समस्या का समाधान नहीं
हार मानकर चुपचाप बैठ नहीं सकते 
तब ठीक है
फिर से कमर कसकर उठ खडे हो जाओ
यदि वैसा हो गया
तब फिर क्या गम

Wednesday, 10 June 2026

कुछ लोग जो ऐसे होते हैं

कुछ लोग जो ऐसे होते हैं
मिलते है कुछ पल
बरसों दिल में घर कर जाते हैं
वह होते हैं अंजाने
पर लगते हैं जाने पहचाने
जीवन के सफर में कहाँ
कोई ऐसा मिल जाएं
कुछ पल ही सही
मुसीबत में काम आ जाएं
होठों पर एक हल्की सी मुस्कान दे जाएं
उन्हें पता है
हमें पता है
शायद फिर मुलाकात न हो
फिर कभी न मिल सके
तब भी इतने अजीज
जितने अपने परिचित भी नहीं
ये किसी भी मोड पर मिल जाते हैं
यात्रा में माॅल में
बस में ट्रेन में
होटल और लाॅज में
तबादले वाली नौकरी में
देश में विदेश में
अक्सर याद आ जाते हैं
कुछ घटनाएं जेहन में विद्यमान
अरे उस समय ऐसे मदद की थी
अगर नहीं तो क्या होता
ये होते अजनबी है
पर मददगार साबित होते हैं
इनकी एक मदद जिंदगी बदल देती है
उनका तो कुछ नहीं जाता
पर अच्छे इंसान के रूप में धर कर जाते हैं
याद आने पर मन आदर से झुक जाता है
कहते हैं किसी के बिना किसी का काम रूकता नहीं
आप न सही कोई और सही

Tuesday, 9 June 2026

औरत आज भी वहीं खड़ी है

मैं नारी हूँ 
मैं औरत हूँ 
मैं बेटी हूँ 
मैं बहन हूँ 
मैं बहू हूँ 
मैं पत्नी हूँ 
मैं माँ हूँ 
इसीलिए सारे समाज का ठेका मैंने ले रखा है 
उनके इज्जदार होने का कारण मैं हूँ 
यह दीगर बात है मेरा कोई इज्जत- सम्मान नहीं 
हर बात पर दबाना
ताने मारना 
स्वाभिमान को कुचलना 
मन को आहत करना 
फिर कहना कि बहुत मजबूत है 
घर का दारोमदार मुझ पर 
जो कहीं मेरा घर है ही नहीं 
निकलने की और निकालने की धमकी बात- बात में 
घर जो मेरा नहीं 
वह मेरे न रहने पर बिखर जाएंगा 
क्या त्याग का चोला पहना कर रख दिया है 
सब काम करने पर भी सुनना 
करना ही क्या है 
आदर - सम्मान मिल भी गया तो 
वह एहसान है एक तरह 
हम ऐसे नहीं होते तब पता चलता 
हमेशा से यही हुआ है 
होता भी रहेगा 
कहने को शिक्षा - स्वतंत्रता 
पर एक आदर - सम्मान- प्यार के लिए तरसती 
ममता और प्यार लुटाने वाली 
उसी के लिए न जाने क्या-कुछ सहती 
समानता का दिखावा सब ढकोसला 
आत्मनिर्भर या फिर किसी पर निर्भर 
कुछ नहीं पड़ता फर्क 
बदलाव की आंधी तो कुछ ज्यादा ही उड़ा रही है 
न इधर कई न उधर की 
घड़ी के पैंडलुम की तरह डोलती जिंदगी 
कहते हैं जमाना बदल गया 
कुछ नहीं बदला है 
औरत आज भी वहीं कई वहीं खड़ी है 
जहाँ सदियों पहले खड़ी थी 

मत मरो

मत मरो किसी के लिए 
जीओ किसी के लिए 
किसी एक शख्स के लिए 
किसी एक असफलता के लिए 
किसी एक बात के लिए 
अपनी जिंदगी को खत्म करना 
यह तो उचित नहीं 
न जाने कितने अरमानों से तुम्हें जन्म दिया 
तुम्हारी खुशी के लिए अपनी खुशी को तवज्जों नहीं दिया 
तुम्हें आगे बढ़ते देखने के लिए न जाने क्या-कुछ त्यागा 
और तुम बस एक  
        SORRY 
कहकर चले जाते हो उनके संसार से 
उनका क्या दोष
तुम्हें ठेस पहुंची है इसलिए उनसे उनका सर्वस्व यानि तुम छीन लेना 
सोचकर देखना फिर नहीं मरोगे 
ठीक है 
मान लो अपने को मरा , जीना नहीं चाहते 
हासिल क्या होगा 
जिंदा रहे तो किसी के मुख पर तुमको देख मुस्कान होगी 
मत बनो स्वार्थी 
तुम्हारा जीवन केवल तुम्हारा नहीं है 
बड़ा करने में मेहनत लगी है 
कायर मत बनो 
तुम तो मर जाओगे 
जीते जी लोगों को जिंदा लाश कर जाओगे 
रोते छोड़ जाओगे 
उनकी खुशी छीन लोगे 
इतने बड़े पाप का भागीदार मत बनो 
ईश्वर की  कृपा पुण्यों से जीवन मिला है 
उस आत्मा को क्यों भटकाना है
दुख आते हैं 
विश्वास घात और धोखा मिलता है 
उपेक्षा और असफलता भी मिलती है 
तिरस्कार और आलोचना भी झेलनी पड़ती है 
लेकिन इतने कमजोर कि झेल न सको 
किसी को नहीं दिखाना है 
स्वयं को साबित करना है 
परिस्थितियां  बदलती है 
यहाँ कुछ स्थायी  नहीं है 
आज जिस बात पर मरने जा रहे हो 
कल हो सकता है 
अपनी बेवकूफी पर हंसी आए 
मत मरो न किसी को जिंदा जी मारो 
मत जीओ अपने लिए अपनों के लिए तो जीओ 
मर कर रुलाने की अपेक्षा जीओ 
उनके लिए 

दूर होकर पास

तुम तो ऊपर चले गए
उस दुनिया और जहां में
जहाँ से लौटना मुश्किल
तुम तो जाना नहीं चाहते थे
मुझे छोड़कर
पर नियति के आगे तो तुम्हारा बस नहीं
कितना प्रेम था
मुझसे जुदा होना तुम्हें कभी गंवारा नहीं 
आज भी बात वही होगी
इतना तो विश्वास है
तुम ऊपर से हमें देखते होगे
कभी तारे बन
कभी बादल बन
आज यह बादल बरसे है
तब इसकी बूँदो में मुझे तुम्हारा एहसास हुआ है
यह बूंदे जब बरसी
तब हथेलियों में लेकर महसूस किया
लगा तुम्हें और मुझे मिला रही है
रह रहकर मेरे केश उडा रही है
भिगो रही है
मस्ती कर रही है
मेरे गालों को सहला रही है
अब यह बूंदे ही तो है
जो तुमको और मुझको मिला रही है
तुम उस जहां में
मैं इस जहां में
तब भी इस दूरी को पास ला रही है
चलो यही सही
मान लेते हैं
हम दूर होकर भी कितने पास पास हैं

Saturday, 6 June 2026

मेरा लाल

आज तूने मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया
घर से बाहर निकाल दिया
वह घर जो मैंने बडे प्रेम से बनाया था
तुम लोगों को पाला और पोसा था
तुम्हारी शैतानिया को नजरअंदाज करती थी
तुम्हारी अठखेलियो को निहारती थी
तुम्हारी हर इच्छा पूरी करती थी
मनभावन भोजन खिलाती थी
थोड़ी देर न देखने पर बेचैन हो जाती थी
मन में गुस्सा आता था
तुझे देख सब भूल जाती थी
सारा गुस्सा छू मंतर
तुझे मारती या डाटती
उस दिन स्वयं रोती थी
अब ऐसा क्या हो गया
तू इतना बदल गया
रह पाएंगा मेरे बिन
जो मां तेरी जान होती थी
मेरा क्या है
कितनी जान बची है
गुजर ही जाएंगी
सडक किनारे या वृद्धाश्रम में
पर तू क्या चैन से सो पाएंगा
तेरा मन नहीं कचोटेगा
तू जैसा भी है मेरा बेटा है
जिगर का टुकड़ा है
तेरे बारे में बुरा कैसे सोच सकती हूँ
तू कुछ भी करें
तब भी दुआ ही निकलेगी
बददुआ नहीं
माँ हूँ न
तुझे दुखी नहीं देख सकती
ईश्वर तुझे हमेशा सुखी रखे
फलें फूले और आगे बढें
यही बहुत है मेरे लिए

Friday, 5 June 2026

क्या फर्क पड़ता है

जो दिल करता है वह करों
कुछ भी संकोच मत करो
हंसना चाहता है
जी भर कर हंस लो
अकेले में या लोगों के संग
क्या फर्क पडता है
रोना चाहते हो 
जी भर कर रो लो
अकेले में या किसी के सामने
या तकिए के आगोश में
क्या फर्क पड़ता है
गुस्सा आता है आने दो
आएगा तूफान की तरह
फिर शांत हो जाएंगा
कुछ तोड़ फोड़ हो जाएं
मन को सुकून मिल जाएंगा
थोड़ा नुकसान ही सही
दिल की भडास तो निकल जाएंगी
जब किसी को ठेस नहीं पहुंचा
तो क्या फर्क पडता है
जब जवाब देना हो
तब दे दो
दबो नहीं
ज्यादा से ज्यादा क्या होगा
नाराज हो जाएंगे
स्वयं के मन से मलाल तो गायब हो जाएंगा
कोई बोले या न बोले
क्या फर्क पड़ता है
कोई हमारा खर्चा तो नहीं चलाता
जहाँ ना कहना है
वहाँ ना कहो
मन मारकर जबरदस्ती हाॅ नहीं करना है
विरोध करना है विरोध करो
किसी की हर बात में हाॅ में हाॅ नहीं मिलाना है
न दबना है
न सहना है
न गलत को बर्दाश्त करना है
न जी हुजूरी करनी है
अपनी मर्जी से जीना है
कोई रूठे अपनी बला से
क्या फर्क पड़ता है

Thursday, 4 June 2026

मुझे बहुत कुछ अच्छा लगता है

मुझे बहुत कुछ अच्छा लगता है 
पर उस पर अमल करू??
मुझे बच्चें अच्छे लगते हैं 
इसका यह मतलब नहीं कि  बच्चें जनू 
मुझे बगिया और फूल अच्छे लगते हैं 
इसका यह मतलब नहीं कि मैं उनकी देखभाल करू 
उनको खाद - पानी दूं 
मुझे लोगों का सजना - संवरना अच्छा लगता है 
लेकिन मैं खुद सजू - संवरु यह भाता नहीं 
मेरी ईश्वर पर अटूट श्रद्धा है 
पर मैं कोई व्रत  - उपवास,  मनौती , पूजा - पाठ उतना नहीं करती 
मुझे पर्यटन स्थल अच्छे लगते हैं 
पर मैं आराम पसंद व्यक्ति 
भटकना मेरी फितरत नहीं 
मुझे बात करना अच्छा लगता है 
पर हर व्यक्ति से बात नहीं कर सकती 
प्रेम मैं बहुत लोगों से करती हूँ 
पर विश्वास सब पर नहीं 
मुझे बड़ी - बड़ी बातें अच्छी लगती है 
पर मैं उनके जैसे बनूं , यह नहीं हो सकता 
मुझे सर पर पल्लू रखी भारतीय नारी अच्छी लगती है 
पर मुझे अपने सर पर रखना कभी भाया नहीं 
बिछिया , बिंदी , चूड़ी में मेरा दम घुटता है 
मुझे सूर्योदय भाता है 
पर सुबह उठकर टहलना 
किरणों का आस्वाद लेना नहीं 
मुझे पशु - पक्षी भी अच्छे लगते हैं 
पर मैं उनका पालन करू ऐसा नहीं होता 
मुझे पड़ोसी भी अच्छे लगते हैं 
पर किसी की दखलअंदाजी  पसंद नहीं 
मैं सबसे प्रेम से बात करती हूँ 
पर अगर वह नहीं करें तो मैं देखती भी नहीं 
हवा तो अच्छी लगती है 
समुद्र की लहरे भी अच्छी लगती है 
पर मैं उनके साथ उड़ू 
उनमें जाकर डुबकी लगाऊ??
मुझे नृत्य भी अच्छा लगता है 
पर अपने पैर कभी थिरकाएं नहीं 
मुझे गांव भी अच्छा लगता है 
पर वहाँ रहना नहीं 
बहुत सी बातें जो अच्छी लगती है 
वह करना जरूरी तो नहीं 

Wednesday, 3 June 2026

अपना कौन लगता

चांद इतना दूर
फिर भी लगता पास है
वह अपना लगता है
लगता जैसे बतियाता है
अपनी शीतल चांदनी देता है
तारों के खेल दिखाता है
कहते हैं उसमें दाग है
वह तो हममें भी है
कोई भी तो पूर्ण नहीं
कमजोरियाँ और दोष सभी में
इसके साथ भी तो चांद को पूजा जाता है
उससे सुहागिने करवा चौथ के दिन दुआ मांगती है
बच्चों को उसमें मामा दिखाई देता है
अपना प्यारा चंदा मामा

सूरज तो बहुत पास है
फिर भी लगता दूर है
उसका इतना तेज कि
ऑखे भी उठाकर कुछ देर नहीं देख सकते 
पूर्ण प्रकाश से भरपूर
उर्जावान
कोई कमी नहीं
सबको प्रकाश के साथ जीवन भी देता
फिर भी वह करीबी नहीं लगता
मन में शीतलता नहीं आती
डर लगता है

यही बात तो रिश्तों में भी है
कुछ रिश्ते बहुत संपन्न 
बहुत बडे , बहुत नामचीन
बहुत इज्जतदार
पर उनका हमें क्या फायदा
वह कहने के लिए रिश्ते
उससे करीब महसूस किया जाता
कुछ अजनबियों से
कुछ बिना नाम वाले रिश्तों से
जहाँ विश्वास होता है
ये कुछ न कुछ हमारे लिए जरूर करेंगे
कुछ नहीं तो हमारे मन की बात सुनेंगे
हमें समझेंगे
अपनी हैसियत से हमारी तुलना नहीं करेंगे
वह सूर्य भले हो चमकता
पर हमारे किस काम का

Tuesday, 2 June 2026

मां

किन शब्दों में वर्णन करू माँ तुम्हारी
यहाँ तो शब्द ही निशब्द
जहाँ शब्द असमर्थ
वही से तुम
तुम क्या हो
भूखे पेट का पहला कौर
अंधेरे में पहला प्रकाश
वेदना में पहली पुकार
तपते सूरज में पहली आग
सुलाने में तुम्हारी गोद
सर पर हाथ फेरने वाली ममता
हर कुछ तुमसे
तुमसे इतनी अपेक्षा उतनी ईश्वर से भी नहीं
जब सब असमर्थ तब तुम समर्थ
पता है 
वह ना न कहेंगी
हर फरियाद भी तुम्ही से
सारा रोष भी तुम पर 
सारी कुंठा और निराशा भी तुम पर
सारी शिकायत भी तुम्हीं से
पता है
सारा विष स्वयं पी जाओगी
अमृत मुझे दे दोगी
ईश्वर तो नहीं हो तुम
अगर ईश्वर की जगह तुम होती
तब ऐसा भाग्य लिखती
संतान को दुख का साया भी न पडने देती