हमको रोता - बिलखता छोड़कर
न जाने क्या-कुछ सपने देखे थे
सब कुछ खत्म हो गया
हमारे लिए तो वक्त ही ठहर गया
हर वक्त हर पल तुम पर था वारा
तुमको अपनी जान से ज्यादा चाहा था
तुम जान थे हमारी
दिल की धड़कन थे
दिल खुश रहता था तुमको देख - देख कर
हमारी ऑखों के तारें
तुम हमसे दूर तारों की दुनिया में चले गए
हमसे तो जीते - जी हमारी जिंदगी छीन ली
अब किसको दे उलाहना
उस ऊपर वाले को
जिसने हमारी गोद में तुमको डाला था
हमें माता - पिता बनाया था
तुम्हारे जन्म पर खूब जश्न मनाया था
छठी - बरही में अपनों को खिलाया था
सोहर गीत गवाया था
घर गूंज उठा था
तुम्हारी किलकारी से
वंश के दीपक थे
नहीं सोचा था
यह दीपक इस तरह बूझ जाएगा
हमको इस हालत में छोड़ जाएंगा
अपने साथ हमारी सब खुशियां ले जाएंगा
अब क्या करेंगे जीकर
रोना ही है जीवन भर
वक्त ने वह मार मारा है
अब तो संभलना मुश्किल है
क्या करेंगे क्या न करेंगे
कैसे रहेंगे कैसे जीएंगे कैसे सहेजेगे
कहना मुश्किल
अब तो आँख के आंसू भी कभी न सूखेंगे
होठों पर हंसी भी न आएगी
सारी इच्छाएं मर गई
तुम नहीं मरे
हम जीते जी मर गए
अब इससे बड़ा दुख क्या होगा
अपनी ही संतान को कांधा देना
जिस पर कभी हमको जाना था वह हमसे पहले चला गया
किसको दोष दें
ईश्वर को
भाग्य को
समझ नहीं आ रहा
अब तो शरीर बचा है
सांस चल रही है
अंतर्मन मर चुका
चूक कहाँ हुई
सोच रहे हैं
कैसे हुई
कारण को ढूंढ रहे हैं
इससे क्या हासिल
जो होना था वह तो हो गया
हमारा जीवन आधार हमको निराधार कर गया
हम कुछ न कर पाए
बस पत्थर बन
हम विवश देखते रह गए
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