क्या
हां , सही सुना आपने
शहर में हम अपने आप को देखते हैं
उसकी आदत हो जाती है हमें
उसके अनुसार हम बन जाते हैं
शहर सुबह - सुबह उठाता है
तैयार करता है दिन भर के लिए
मेरा शहर कभी सोता ही नहीं है
हमेशा भागता - दौड़ता रहता है
लोग भी इसके साथ चलते रहते हैं
अगर कहीं दूसरे शहर में जाते हैं
तब लगता है
समय ठहर ही गया है
अपने शहर में सांस लेने को फुर्सत नहीं
और दूसरी जगह समय कैसे व्यतीत करें
समझ ही नहीं आता
कुछ दिन के लिए ठीक है
उसके बाद ऊब होने लगती है
वहाँ की शांति भाती नहीं
यहाँ की चिल्ल - पौ ही भाता है
लोकल की रेस
सड़कों पर भीड़
बाजार में ठेलमठेल
नहीं किसी की टोकमटाकी
सब अपने में मग्न
अकेले होकर भी सबके साथ होने का एहसास
इस शहर ने मुझे कर्मठ बनाया है
काम बहुत जरुरी है यह सिखाया है
एडजस्ट करना सिखाया है
सपने देखना और उसको साकार करना सिखाया है
यहाँ की गर्मी हो बेहिसाब डूबती बरसात हो
ठंड में भी गर्म कपड़े की जरूरत न हो
ठेले वाले की पानी पुरी और पाव - भाजी भी भाती है
दरिया को देख कर भी मन प्रसन्न हो जाता है
भले ही उसका पानी नमकीन हो
दरिया जैसा विशाल है मेरा शहर
हर किसी को अपने में समेट लेता है
अजनबी से भी अपनापा जोड़ लेता है
इसने मुझे पंख दिया
मैंने उड़ान भरा
जीवन को व्यवस्थित करने की कोशिश की
कुछ हद तक सफल भी रही
आभार है इसका
बहुत कुछ दिया
जान ही गए होगे
मैं किसकी बात कर रही हूँ
मेरी मुंबई की
वह जान है मेरी
मुंबई देवी की कृपा बनी रहें
मुझ पर और मेरे बच्चों पर
वे कहीं पर भी रहें
उन पर अपना आशीर्वाद बनाए रखना
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