Tuesday, 7 July 2026

मानवता शर्मसार

मानवता  शर्मसार  हो रही है 
तेरह साल की मासूम बच्ची बलात्कार का शिकार
वह भी एक - दो नहीं 
गिनती नहीं एक - दो दर्जन 
क्या किसी के घर भी कोई स्त्री नहीं होगी 
न सही 
मां तो होगी ही 
क्या ख्याल नहीं आया 
मानवता - नैतिकता नहीं जागी 
हैवानियत की हद पार
जानवर से भी गया - बीता इंसान 
हर दिन एक खबर सुर्खियों में 
नित नया कांड 
सब डरे हुए हैं 
बच्चें कहीं भी सुरक्षित नहीं है 
न घर न बाहर न आस - पड़ोस न रिश्तेदार 
न सड़क पर न स्कूल में 
किस तरह की परवरिश हुई है इन हैवानों की 
समाज पर कलंक हैं ये 
इनके लिए तो कानून कोई मायने नहीं रखता 
तब कानून को भी इनकी हिफाजत करने की 
इनकी दलील सुनने की 
अपना पक्ष रखने की 
इजाजत न दिया जाए 
बीच चौराहे पर गोली मारी जाए 
कानून मजबूर है लेकिन 
इसीलिए ये अपराधी हैवान मजबूत हो रहे हैं 
समाज को भी इन्हें बहिष्कृत कर देना चाहिए 
पहले की पंचायती न्याय भी सही था 
लोग डरते थे 
आज डर गायब है 
न घर-परिवार का 
न समाज का 
न सरकार का 
तब क्या किया जाए 

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