न छोड़कर जाना
ऐसे संबंध को क्या कहना
कहना कुछ करना कुछ
कभी नजदीक का एहसास
कभी देखकर अनदेखा
कैसा जाल संबंधों का
लगता है जकड़ लिया है
न उनके साथ न उनसे दूर
संबंध ऐसे तो न हो
उलझा हुआ
जो भी हो मन से हो
जबरदस्ती लादा न गया हो
जिम्मेदारी निभाने की मजबूरी न हो
नींव मजबूत हो
तभी टिक पाएंगे
अन्यथा भरभराकर गिरने में पल भी नहीं
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