Wednesday, 1 June 2016

यह अंजाना पन - यह डर - कब तक

मैं गॉव गई थी पिछले दिनों कुछ समय के लिए
पर पहले और आज में इतना फर्क
पहले वह दो- तीन दिन का सफर बातचीत में कट जाता था  , जाते- जाते अंतरंग बन जाते थे
आज हर कोई अपने मोबाईल में व्यस्त
चेहरे से मुस्कान गायब
बातचीत तो दूर की बात
सहायता का तो सवाल ही नहीं
सामान ऊपर रखना हो या बच्चे को गोदी में छोडकर वाशरूम जाना
आपस में खाना बॉटकर खाना़
चाय और पानी का लेन देन
सब चेहरे को सिकुडा कर बैठे थे.
जमाना बदल गया है पर बदलने वाले कौन
वह आपसी बातचीत और अपनापन कहॉ गया
भारतीय आपस में दो घंटे भी साथ रहे तो एक- दूसरे की पूरी जानकारी और परिवार से परिचित हो जाते हैं
पर आज बच्चे को दूसरे की गोद में देने से डर लगता है
खाना ,खाने में डर लगता है ,पता नहीं जहर मिला हो
पानी भी नहीं पी सकते
कहॉ चली गई वह अपनियत
तमाम हिदायतों के साथ यात्रा करना
वह पहले वाला आंनद गायब हो गया
औपचारिक रह गए है हम

मोदी जी प्रधानमंत्री है शंहशाह नहीं

यह कहना है कॉग्रेस अध्यक्षा सोनिया गॉधी का
बात सही भी है
वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधी है और वे अपने को प्रधान सेवक मानते है
मन से अपना कार्य कर रहे हैं
एक दिन भी छुट्टी नहीं ली है
रात - दिन एक कर दिया है
विदेशों में भी भारत की साख को बढाने का प्रयत्न कर रहे हैं
राजनीति के माहिर खिलाडी है और अपने बलबूते पर चुनाव जीता है
आज उनके कद का कोई भी नेता दिखाई नहीं देता
किसी के कहने पर नहीं चल रहे हैं
कानून अपना काम कर रहा है
किसी को बिना गलत किए कोई सजा नहीं दे सकता
आग बिना तो धुऑ भी नहीं निकलता
इंदिरा गॉधी को भी जेल जाना पडा था
और यही जनता है कि उनको बहुमत देकर सत्ता में फिर वापस लाई थी
जो जैसा करेंगा वैसा भरेंगा - यह कहावत है
जनता अंधी और नासमझ नहीं है.
वह सब जानती है़
अगर बदले की भावना से कोई सरकार कुछ करेंगी तो जनता के दरबार में उसको मुँह की खानी पडेगी
असली शंहशाह तो जनता है
और यह बात हर नेता को मालूम है
मोदी जी काम कर रहे हैं
कहा जा रहा है कि कॉग्रेस की ही योजना है
नाम बदला गया है ,ठीक है देश का विकास तो हो रहा है
आज सफाई कर्मचारी के चेहरे पर अभिमान दिखाई देता है ,क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने झाडू उठाया था
एक चायवाला और एक ठेलेवाला भी गर्वित है
मेहनत की कमाई खा रहा है
बेटियों के प्रति लोगों की भावना बदली है
बैंक में अब मजदूर भी बिना हिचक के जा रहा है
ऐसा नहीं कि कॉग्रेस ने कुछ नहीं किया
यह सब दो सालों में हो गया
पहले भी यह सब था ,पर उसको गति दी है मोदी जी ने
कहावत है कि बाप झोपडी खडा करता है तो बेटा घर और पोता बंगला
गुलामी से निजात पाने और विकास करने में इतने साल अवश्य लगे
अत: आरोप - प्रत्यारोप को छोडकर कार्य किया जाय
इसमें जनता की भी सहभागिता होनी चाहिए
क्योंकि अकेला चना तो भाड भी नहीं झोक सकता
मोदी जनता को भी जागृत कर रहे हैं जो इससे पहले शायद किसी ने नहीं किया था.
अगर कोई सेवक बन कर कार्य कर रहा है तो उसे सराहना चाहिए

एक बार एक चीते और गधे में बहस हो गई। चीता बोला आसमान का रंग नीला और गधा बोला काला। दोनों शेर बादशाह के दरबार में पहुँचे। शेर ने बहस सुन कर चीते की जेल में डालने का हुक्म दिया। चीता गिड़गिड़ाया की मैं सही हूँ और मुझे ही सज़ा क्यों मिल रही है? Now the verdict is classic and involves a lot of learning. शेर बोला की मैं जानता हूँ की तुम सही हो पर तुम्हें सज़ा इसलिए मिल रही है की तुमने गधे से बहस ही क्यों की!!!!

आओ ,जून स्वागत है welcome June

आ गया जून ,आशा का संदेश लेकर
अब तो मानसून आएगा
रिमझिम - रिमझिम फुहारे पडेगी
मन शीतल और आंनदित होगा
कब से तप रहे हैं लोग और इंतजार कर रहे तुम्हारा
गर्मी से परेशान हर कोई
क्या मानव ,क्या जीव- जंतु ,क्या पशु- पक्षी या पेड- पालव या फिर तपती धरती
हर कोई सूर्यदेव की तपन से परेशान
अब वे रास नहीं आ रहे हैं
अब तो इन्द्रदेव की कृपा चाहिए
समय की यही मॉग है
मौसम बदलता है और मन भी बदलता है
आज जिसकी जरूरत है ,कल नहीं होगी
प्रकृति का नियम है
सर्द दिनों में जिस सूर्य की प्रतीक्षा की जाती है
गर्मी में उन्हीं से दूर रहा जाता है
आज बरखा रानी के स्वागत में ऑखे बिछाये लोग बैठे है ,न जाने क्या - क्या कर
कभी विधि- अनुष्ठान तो कभी टोना- टोटका
ये भी आएगे और फिर बरस कर अगले साल तक आने तक चले जाएगे
जब जरूरत होती है तब महत्तव भी भासता है
खैर शिक्षण संस्थान खुलेंगे
बच्चे छुट्टी के बाद फिर से पाठशाला जाएगे
कुछ तो अभी पहला कदम ही रखेंगे
शिक्षा की नींव डाली जाएगी
युवा अपने भविष्य के हिसाब से क्या करना है
उसका चुनाव करेंगे
बच्चों के साथ - साथ
माता - पिता भी व्यस्त
बच्चों का भविष्य जो सुनिश्चत करना है.
सब कुएं ,तलाब ,नदियॉ तुम्हारी राह देख रहे हैं.
क्योंकि सबकी खुशियों की शुरूवात तुमसे होनी है
तुम्हारा स्वागत है जूून  आओ -आओ
और अपने साथ अच्छे दिन भी लाओ