Sunday, 2 August 2026

जवानी हंस रही है

आज हंसना भूल गए 
उसके लिए भी सोचना पड़ता है 
एक समय था जब हंसी अपने आप आ जाती थी 
बिना कारण कहीं भी कभी भी 
किसी से डांट पड़ने पर भी 
स्वयं गिरने पर भी दूसरों के तो अनायास ही 
वाकया है उस समय का 
जब हम यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे 
क्लास छूटते ही बाहर झुंड बना बतियाते थे 
घर जाने की जल्दी नहीं रहती थी 
समय का तो पता ही नहीं चलता था 
एक बार ऐसे ही खड़े थे 
प्रोफेसर भी अपनी - अपनी क्लास से निकलते थे 
कभी-कभार उनको जाने की जगह भी नहीं बचती थी 
सब अपने में  मग्न और मशगूल 
तभी एक सर ने कहा 
क्या फालतू ही - ही करते रहते हैं ये सब
तब दूसरे सर ने उत्तर दिया 
यार छोड़ो 
जवानी हंस रही है 
इतने बरसों बाद भी आज वह वाक्य गूंजता है 
तो मुस्कान अपने आप आ जाती है 
वह उनका कहा 

जवानी हंस रही है 

Dost I love you

मित्रता जन्मजात नहीं होती 
खून का रिश्ता भी नहीं होता 
कुंडली का मिलान भी नहीं किया जाता 
औकात भी नहीं देखी जाती 
जबरदस्ती भी नहीं बना सकते 
उम्र का बंधन नहीं 
जाति और धर्म भी आड़े नहीं 
प्रांत और भाषा भी नहीं 
जब दिल से आवाज आती है 
मन से मन मिलते हैं 
अपने आप हो जाती है 
योजनानुसार नहीं होता 
आप उसके साथ हंस सकते हैं 
रो सकते हैं 
नाच - गान कर सकते हैं 
मनसोक्त घूम सकते हैं 
बिना कारण घंटो बतिया सकते हैं 
सच्चा मित्र जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है 
जिसको मिल गया उसका जीवन संवर गया 
दिल खोल कर रख सकते हैं 
आपको वह समझ सकता है 
आपमें कितने भी दुर्गुण हो तो भी वह कर्ण जैसा साथ नहीं छोड़ता 
आप गरीब भी हो तो वह आपका कृष्ण है जो सम्मान और प्रेम देना नहीं छोड़ता 
अपनी निराशा , दुख , खीज , क्रोध उस पर जाहिर कर सकते हैं 
विश्वास पात्र मित्र जीवन संजीवनि होता है 
जब सब साथ छोड़ दे तब भी वह डटकर खड़ा रहता है 
वह सगा नहीं होता 
रिश्तेदार नहीं होता 
उनसे बढ़कर होता है कभी-कभार 
दिल से दिल का जुडाव है यह
सब बंधन से मुक्त 
कोई पर्दा नहीं 
कोई एहसान नहीं 
न Sorry  न Thank you 
    दोस्त 
I love you 

Saturday, 1 August 2026

मैं सूर्य

मैं सूर्य था 
जग को प्रकाशित करना मेरा कार्य 
अंधेरा दूर करने को प्रतिबद्ध 
कुंती तो विवश थी 
लोकलाज का डर था उसे 
वह कुंवारी माता बनी जिसे समाज स्वीकार नहीं करता 
दो कुल का भार था उस पर
पर मैंने क्या किया 
क्या कर्ण के जन्म का भागीदार मैं नहीं था 
मैं उसे अपमानित होते देखता रहा 
कुंती ही अकेले उसकी जिम्मेदार नहीं थी 
मुझ पर क्यों कोई लांछन नहीं लगा 
सारा अपमान कुंती पर
कोसा उसे गया 
बताती तो कुल्टा कहलाती 
कैसी मां जो बच्चें को नदी में बहा दिया 
वह रोती रही बिलखती रही 
उसकी पीड़ा - मजबूरी को किसी ने समझा 
कर्ण ने भी उसे लताड़ा 
स्वाभाविक भी था 
बच्चा तो दोषी नहीं था 
उसका कोई कुसूर भी न था 
कुंती महलों की महारानी बनी रही 
पांच महारथी में स्नेह बांटती रही 
मैं देवता बना रहा 
पूजन करवाता रहा 
मैं सारे संसार में प्रकाश बांटता रहा 
कर्ण के जीवन का अंधेरा 
महाभारत के युद्ध का कारणों में एक था 
माता - पिता की पहचान के बिना नाजायज संतान 
धर्म को जानते हुए भी अधर्मी दुर्योधन के साथ खड़े रहना 
योग्यता की कद्र नहीं 
पहचान के लिए तरसना 
महाभारत को कौन टाल सकता था 
अन्याय और अधर्म पर खड़ा समाज 
उसे खत्म होना ही था 
द्वारिकाधीश को अवतरित ही होना था 
दोषी तो सब थे 
अकेला दुर्योधन नहीं 
वह तो वह नैया थी जो डूबने की कगार पर थी 
नाविक का अता - पता नहीं 
कोई वचनबद्ध तो कोई धर्म राज तो कोई तन - मन से नेत्रहीन 
धर्म हिचकोले खा रहा था 
दुर्योधन ने डुबो दिया 
अच्छा ही हुआ 
कहीं तो खत्म होना था नई शुरुआत के लिए 


मेरा हमसफर

तेरी शरारतों का अंदाज निराला 
तेरी बातों में गजब का जादू 
किसी के आगे न झुकने वाली 
हर बात में अपनी मनमानी करने वाली 
किसी की छोटा सी बात और मजाक भी नागवार 
वही शख्स तेरी हर बात पर हार मानता 
अपने को सरेंडर कर देता 
तेरा गुस्सा भी प्यारा लगता 
तेरे बिना मेरा मन भी सूना 
तू ही तो मेरी हमसफर 
कब मेरी उंगली छोड़ मेरा हाथ पकड़ने लगी 
मुझे रास्ता पार करवाने लगी 
मेरा बोझ अपने कंधों पर उठाने लगी 
मुझे दुनिया घुमाने लगी 
मुझे रहने का सलीका सिखाने लगी 
मुझे अच्छे कपड़े दिलाने लगी 
मंहगे से मंहगे होटलों में ले जाने लगी 
वह सब दिखाया जो मैंने कल्पना भी न की थी 
अपने बल पर मैं तो यह कभी करती नहीं 
हमसफर जरूरी नहीं जीवन साथी हो 
हमसफर हमारे बच्चें भी तो है 
कभी हमने उनको राह दिखाया 
आज वो हमें राह दिखा रहे हैं 
साथ लेकर चल रहे हैं 
हमने उनको वह सब नहीं दिया 
आज वो दे रहे हैं 
हमने उनकी इच्छा को दबाया 
वो हमारी इच्छा पूरी कर रहे हैं 
ईश्वर मेरे इन हमसफर और हमराही को ऐसा बनाए 
हम उन्हें देख खुश होते रहें 
जो हम न कर पाए 
वो करते रहें 
सफलता का परचम फहराते रहें 
ईश्वर से यही पार्थना 
उनकी राह आसान हो 
उन्नत हो 
प्रगतिशील हो 
खुश और सुखी हो 
इन्हें देख और कोई खुशी नहीं 
इनके चेहरे पर मुस्कान ही मेरी खुशी 
अगर खुदा आकर खुद कहें 
चलो हमारे साथ स्वर्ग 
मैं इन्कार कर दूंगी 
नहीं जाना है यही रहना है 
इनको देख जीना है 
आँसू ठीक है , मिटना ठीक है 
तभी तो 
मन कह उठता है 
                    रहने दो हे देव , मेरा मिटने का अधिकार 
वह जीवन ही क्या जिसमें अपनों की कहानी न हो